पिछला भाग पढ़े:- पापा की परी प्रीती-12
हिंदी चुदाई कहानी का अगला पार्ट-
चुदाई के बाद भूपिंदर सोने जा चुकी थी, मगर मैं और प्रीती वहीं लाउंज में ही बैठे थे। मुझे लग रहा था प्रीती अभी और चुदाई करवाना चाहती थी।
जब मैंने प्रीती से पूछा कि प्रीती क्या एक बार और चुदाई करवानी है? जवाब में प्रीती ने जो मुझसे कहा वो हैरान करने वाला था। “पापा आज ऐसे चोदो मुझे, जैसे कोइ किसी रंडी क चोदता है। बस समझ लो मैं एक कालगर्ल – एक रंडी ही हूं और आप पैसे देकर एक रात के लिए मुझे चोदने के लिए लाये हो, और अपने पूरे पैसे मुझे चोद-चोद कर वसूलोगे – मेरी फुद्दी चोद-चोद कर, गांड चोद-चोद कर। पापा एक बार तो तोड़ दो मेरा जिस्म, जकड़ कर, चोद-चोद कर, भूल जाओ मैं आपकी बेटी हूं। एक बार ऐसे बेदर्द हो कर चुदाई करो मेरी, जैसे आपने चोद-चोद कर मेरी फुद्दी फाड़ ही देनी हो, चीखें निकाल दो मेरी। ऐसी चुदाई करो पापा जैसे आपने दस साल से चूत नहीं देखी, और आज ये चूत मिली है तो पता नहीं फिर कब मिलेगी।”
“पापा आप समझ रहे हो ना कि मुझे आपसे एक बार आपसे इस तरह की ताबड़तोड़ चुदाई करवानी है।”
प्रीती का बोलना जारी था, “पापा आपने कभी किसी बड़ी साइज़ के ताकतवर लेब्राडोर या जर्मन शेफर्ड कुत्ते को एक नाजुक सी छोटी कुतिया को चोदते हुए देखा है? कुत्ते का ग्यारह बारह इंच का लंड जब कुतिया की छोटी सी चूत में जा कर जब सख्त हो जाता है तो कुतिया दर्द से चिल्लाती है, बिलबिलाती है मगर वो कुत्ता अपनी अगली टांगों में कुतिया को ऐसे जकड़ लेता है कि कुतिया हिल भी नहीं पाती, बस दर्द से चीखती रहती है पीछे मुड़-मुड़ कर कूँ कूँ करती हुई कुत्ते को देखती रहती है कि कब ये अपना लंड मेरी चूत में से निकालेगा। और पापा कुत्ता लंड कुतिया की फुद्दी में से नहीं नहीं निकलता और ना ही कुतिया को हिलने ही देता है।”
“और पापा जब एक बार कुत्ते का लंड कुतिया की फुद्दी में फूल गया, उसके बाद तो ना कुत्ता ही अपना लंड कुतिया की चूत में निकाल पाता है और ना ही कुतिया के पास कोइ चारा रहता है सिवाए इसके कि वो भी दर्द भी सहे और दर्द के साथ-साथ उस कुत्ते के बारह इंच लम्बे लंड के मजे भी ले, और उसके बाद तो जब तक कुत्ते के लंड का सारा पानी निकाल नहीं जाता लंड ढीला नहीं पड़ता, और लंड कुतिया के फुद्दी में से बाहर ही नहीं निकलता।”
मैं सोच रहा था ये क्या हो गया है इस लड़की को आज? ये कैसी दीवानगी है चुदाई के लिए?
मैंने पूछ ही लिया, “क्या हो गया प्रीती ऐसी चुदाई करवानी है?”
प्रीती ही बोली, “हां पापा बस एक बार – आप का लंड है ही इतना मस्त है और खड़ा को कर इतना सख्त हो जाता है कि जब फुद्दी में जाता है तो मजा ही आ जाता है। पता नहीं क्यों मेरा हो मन हो रहा है एक बार आपसे ऐसी चुदाई करवाने का, एक बार गांड फड़वाने का।”
मुझे बिशनी की चुदाई याद आ गयी जब चुदाई कि बाद उसने मुझे बोला था, “सरदार जी आज क्या हो गया था। मेरा पूरा जिस्म तोड़ दिया आपने। ऐसा तो कभी नहीं हुआ?”
मुझे लगा अब कोइ चारा नहीं। अगर प्रीती का मन है तो उसे एक बार ऐसे चोदना ही पड़ेगा। प्रीती मेरे सामने नंगी बैठी थी। प्रीती का गोरा चिट्टा गुलाबी जिस्म देख कर मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था। आँखों की आगे प्रीती की गुलाबी गीली फुद्दी घूम रही थी।
मैंने अपना गिलास खाली किया और व्हिस्की से पूरा गिलास भर दिया और बिना पानी, सोडा मिलाये मैंने पूरा गिलास खाली कर दिया, खड़े हो कर अपने कपड़े उतारे और प्रीती से बोला, “चल मादरचोद चुदक्कड़ प्रीती आजा, तेरे जिस्म की, तेरी फुद्दी की, तेरी गांड की अकड़ निकालूं आज। आजा चल चोदूं तुझे कुतिया की तरह।”
प्रीती भी पूरी बेशर्म हो चुकी थी। वो बोली, “आजा? कहां आजा? चुदाई किसने करनी है, आपने या मैंने। अगर चोदना है तो अपनी गोद में उठाओ उस दिन की तरह और ले जाओ जहां लेजाना है, और चोदो ले जा कर।”
मुझे लगा प्रीती जिन के नशे में पक्का ही नशे में टुन्न हो चुकी है, मगर मुझे अभी भी वैसा नशा नहीं हुआ था।
मैं प्रीती को गोद में उठाने उसके पास गया। जैसे ही मैं उसके पास पहुंचा, उसने मेरा लंड पकड़ कर मुंह में लिया और चूसने लगी। थोड़ा चूसने के बाद प्रीती खड़ी हुई और, “बोली, चलो पापा ले चलो वहां जहां ले कर जाना कर चोदना है चोदो।”
मैंने प्रीति को गोद में उठाया और उसी के कमरे में – गेस्टरूम में ले गया और उसे बिस्तर पर लिटा दिया। बाकी का काम प्रीती ने खुद ही कर दिया। प्रीती ने एक तकिया लिया और अपने चूतड़ों के नीचे लगा कर टांगे उठा कर चौड़ी कर दी और टांगों के साइड से हाथ डाल कर अपनी फुद्दी की फांकें खोल दी। प्रीती की ग़ुलाबी फुद्दी मेरे सामने थी। कोई और दिन होता तो प्रीती की ग़ुलाबी फुद्दी चूस लेता।
फुद्दी की फांकें चौड़ी करने के बाद प्रीती बोली, “आ जाओ पापा, ये लो ये रही आपके बेटी की फुद्दी। जो करना है करो।”
जिस तरह से प्रीती चुदाई करवाने के लिए मरी जा रही थी, मैंने लंड प्रीती की खुली हुई फुद्दी के छेद पर रक्खा और एक ही झटके में लंड अंदर डाल दिया।
प्रीती ने एक मिनट नहीं लगाया और नीचे से हाथ निकाल मुझे कस कर पकड़ लिया और टांगें मेरी कमर पर रख कर मुझे कैंची की तरह अपनी टांगों में जकड़ लिया। मैंने भी बाहें प्रीती के पीछे करके प्रीती को चोदना शुरू कर दिया। मैं उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह की आवाजों के साथ प्रीती की फुद्दी में जोर-जोर के धक्के लगा रहा था, और प्रीती आअह आअह आअह आअह करती हुई चूतड़ घुमा रही थी।
प्रीती की फुद्दी ने एक बार पानी छोड़ा, दूसरी बार पानी छोड़ा, और जब तीसरी बार पानी छोड़ा तो प्रीती ने हल्की सी आखें खोली और बोली, “पापा आप कहां तक पहुंचे, मुझे तो तीन बार मजा आ भी गया।”
मैं उसी तरह धक्के लगाते हुए बोला, “मैं कहीं नहीं पहुंचा मेरी जान, अभी तो मैंने तुझे नाजुक सी छोटी कुतिया बना कर चोदना है।”
ये कह कर मैंने लंड प्रीती की फुद्दी में से बाहर निकाला और बोला, “चल हो जा उल्टी, बन जा कुतिया। चोदूं तुझे उस बड़े ”लेब्राडोर, जर्मन शेफर्ड” कुत्ते की तरह।”
प्रीती बेड के किनारे पर उल्टी लेट गयी और अपने चूतड़ उठा दिए। प्रीती की चूत का छेद बिलकुल मेरी लंड के सामने था, मगर गांड का छेद लंड से ऊपर था। गांड चोदने के लिए उसे सोफे पर ले जाना पड़ना था।
मैंने लंड प्रीती की चूत के छेद पर रख कर थोड़ा सा टिकाया और प्रीति की कमर पकड़ कर एक ही बार में पूरा लंड चूत में डाल कर प्रीती की चुदाई चालू कर दी। मेरे लंड की धक्के इतने ज़बरदस्त थे कि हर धक्के की साथ प्रीती आगे की तरफ खिसकती थी और मैं प्रीती को कमर से पकड़ कर वापस पीछे करता था।
कुतिया की चुदाई करते हुए कुत्ता भी ऐसा ही करता है। अपनी अगली टांगों से कुतिया को ऐसा जकड़ लेता है कि कुतिया चाहे भी तो आगे जा ही नहीं सकती। प्रीती बार-बार सर पीछे कर के मेरी तरफ देख रही थी मगर कुछ बोल नहीं रही थी।
क्या प्रीती मुझे रुकने के लिए बोल रही थी। मगर ऐसा कैसे हो सकता है? प्रीती तो चुदाई करवाने के लिए मरी जा रही थी। तो फिर? क्या प्रीती गांड में लंड डालने के लिए कह रही थी? शायद यही बात थी। प्रीती गांड में लंड लेना चाहती थी।
मैंने प्रीती की चूत में से लंड निकाला और प्रीती के चूतड़ों पर एक धप्पड़ लगाते हुए बोला, “चल मेरी चुदक्कड़ रंडी, चल अब सोफे पर उल्टी लेट जा चूतड़ ऊपर उठा कर कुतिया की तरह। अब तेरी गांड में लंड डालूंगा, गांड फाड़ूंगा तेरी। तू भी आज की चुदाई याद रखेगी।”
इससे पहले कि प्रीती कुछ बोलती मैंने प्रीती को बांह पकड़ कर उठाया और सोफे पर उल्टा घुटनों के बल लिटा दिया। मैंने प्रीती के चूतड़ ऊपर उठा कर चूतड़ों का छेद अपने लंड के बिल्कुल सामने किया और थूक लगा कर लंड छेद में अंदर धकेलना शुरू कर दिया।
प्रीती सर घुमा कर बोली, “पापा क्रीम तो लगा लो, कैसे जाएगा आपका ये मोटा लंड गांड के अंदर।”
मैंने कहा, “जाएगा मेरी जान ये लंड जाएगा भी और आज तेरी गांड भी फाड़ेगा। देखती रह जाएगा। कुत्ता ही कौन से क्रीम लगाता है जो उसका बारह इस लम्बा लंड छोटी सी कुतिया की फुद्दी में चला जाता और फूलने के बाद तो बाहर ही नहीं निकलता? और फिर वैसे भी तो पैसे के लिए चुदवाने के लिए आयी रंडी को तो ऐसे ही चोदा जाता है, बिना क्रीम के।”
ये कह कर मैंने लंड अंदर डालना चालू कर दिया। बिना क्रीम के लंड के अंदर डालने में दिक्कत तो हो रही थी, लेकिन मैं आज प्रीती कि गांड रगड़-रगड़ कर चोदना चाहता था।
मैंने थोड़ थूक गांड के छेद पर लगाया और थोड़ा जोर लगा कर लंड अंदर धकेला। लंड थोड़ा और अंदर चला गया। जब कोशिश करते-करते लंड आधा अंदर चला गया तो मैंने लंड बाहर निकला। ढेर सारा थूक प्रीती कि गांड पर लगाया और लंड गांड के छेद पर एक ही बार में पूरा का पूरा अंदर बिठा दिया।
प्रीती चिल्लाई, “ओह पापा क्रीम क्यों नहीं लगाई? बड़ा दर्द हुआ है। फाड़ोगे क्या मेरी गांड पापा?”
मैंने भी वैसे ही कहा, “हाँ फाड़ूंगा – अब बोल।”
मेरा लम्बा मोटा लंड प्रीटी की गांड में था और मैं प्रीती की गांड में बेतहाशा लम्बे लम्बे धक्के लगा रहा था और प्रीती को हिलने भी नहीं दे रहा था। जैसे ही प्रीती ने कहा, “बड़ा दर्द हो रहा है, फाड़ोगे क्या मेरी गांड पापा?”
फिर मैंने प्रीती की गांड में और भी जोर के धक्के लगते हुए कहा, “फ़िक्र ना कर मेरी रंडी, ये मेरी बेटी की गांड है फटने वाली नहीं।” और इतना कह कर मैंने प्रीती कि गांड जोरदार तरीके से चोदनी शुरू कर दी।
जैसे बड़े कुत्ते की टांगों में जकड़ी छोटी सी मजबूर कुतिया दर्द के मारे मुड़-मुड़ कर पीछे देखते है और कूँ कूँ ऊँ ऊँ चिल्लाती है मगर कुछ कर नहीं पाती – यही हाल मेरे मोटे लंड से सूखी गांड चुदाई में प्रीती का भी हो रहा था। प्रीती हिल तो पा नहीं रही थी, और बार-बार पीछे देखते हुए बोलती जा रही थी बस पापा दर्द हो रहा है, सच में दर्द हो रहा है।”
मुझे तो जैसे कुछ सुनाई ही नहीं दे रहा था। मेरे कान में प्रीती की वही बातें घूम रही थी – “पापा ऐसे चुदाई करो मेरी एक बार, बस समझ लो मैं एक कालगर्ल – एक रंडी हूं और आप पैसे देकर एक रात के लिए मुझे चोदने के लिए लाये हो, और पूरे पैसे वसूलेंगे, मेरी फुद्दी चोद-चोद कर, गांड चोद-चोद कर। पापा एक बार तो तोड़ दो मेरा जिस्म जकड़ कर चोद-चोद कर।”
तभी प्रीती ने बड़ी ही मजबूर नज़र से मुझे देखा। प्रीती की आंखों में आंसू थे। प्रीती बस इतना ही बोली, “बस पापा, प्लीज़ बस करो।”
मेरी नज़र प्रीती के चेहरे पर पड़ी तो मुझे लगा कि प्रीती को सच में ही दर्द हो रहा था। प्रीती की गांड चुदाई रोक दी, मगर लंड अभी भी गांड के अंदर ही था। मैंने प्रीती की बाहें छोड़ दें और प्रीती से पूछा, “प्रीती क्या सच में ही दुःख रहा है?”
प्रीती बोली, “हां पापा सच में चूतड़ों में बहुत दर्द हो रहा है।”
मैंने कहा, “प्रीती अगर दर्द हो रहा था तो तुमने मुझे बताया क्यों नहीं। मझे कहा क्यों नहीं गांड चुदाई बंद करने के लिए।”
प्रीती बोली, “पापा मैं तो कितनी देर से कह रही हूं बस करो पापा बड़ा दर्द हो रहा है, मगर आप ना सुन रहे थे, ना रुक ही रहे थे।”
मैं बोला, “सॉरी मेरी बेटी प्रीती, सॉरी, मैं तो समझा था जैसे एक बड़े कुत्ते की टांगों में जकड़ी कुतिया करती है – पीछे देखती रहती है मगर ऊपर कुत्ता चुदाई बंद नहीं करता – ऐसे ही तुम भी कर रही हो।”
और फिर वो जो तुमने कहा था, “पापा ऐसे चुदाई करो मेरी एक बार। बस समझ लो मैं एक कालगर्ल – एक रंडी हूं और आप पैसे दे कर एक रात के लिए मुझे चोदने के लिए लाये हो, और पूरे पैसे वसूलेंगे, मेरी फुद्दी चोद-चोद कर। पापा एक बार तो तोड़ दो मेरा जिस्म जकड़ कर चोद चोद कर।”
मैंने लंड प्रीती की गांड में से निकाल लिया और प्रीती को उठा कर बेड की साइड पर ही बिठा कर प्रीती को बाहों में ले लिया और बोला, सॉरी बेबी, मैं तो तुम्हारी सिर्फ वैसी चुदाई करने की कोशिश कर रहा था जैसी चुदाई तुमने कहा था।”
प्रीती ने मेरे चूतड़ पकड़ लिए, “कोइ बात नहीं पापा, आपकी कोइ ग़लती नहीं, मैंने ही कहा थे मुझे आज रात इस तरह एक कुतिया की तरह, एक रंडी के तरह चोदने के लिए।”
फिर प्रीती को जैसे कुछ ध्यान आया। प्रीती बोली, “पापा आपके लंड का पानी नहीं निकला अब तक? मजा नहीं आया अब तक आपको?”
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