सेक्स कहानी के मुख्य पात्र-
1. रवि: महेश का सबसे अच्छा दोस्त।
2. लावण्या (मुख्य किरदार): एक कामकाजी लड़की, आत्मनिर्भर, फिगर 36-30-38।
3. महेश: लावण्या का भाई।
लावण्या राम नगर में बैंक में नौकरी करती थी। उसका फिगर 36-30-38 था, जिसे देख कर कोई भी पानी-पानी हो जाए। वो अपने भाई महेश और उसके बेस्ट फ्रेंड रवि के साथ बहुत ही घुल-मिल गई थी। रवि की पत्नी अंजलि भी होती थी, और ये सब लोग एक-दूसरे को एक परिवार की तरह मानते थे। लावण्या की अक्सर रवि और उसकी वाइफ अंजलि से बातें होती रहती थी।
एक दिन रवि ने गलती से अपनी वाइफ अंजलि को भेजने की जगह अपने लंड की फोटो लावण्या को भेज दी। जब तक उसे एहसास हुआ कि उसने इमेज गलत जगह भेज दी है, तब तक लावण्या ने वो फोटो देख ली थी। रवि ने तुरंत वो इमेज डिलीट कर दी और लावण्या को कॉल करके सॉरी बोला।
लावण्या ने शांति से कहा, “इट्स ओके।” रवि को लगा कि मामला यहीं खत्म हो गया है, लेकिन लावण्या के दिल में वो फोटो घर कर गई थी। उसके फोन की लाइब्रेरी में भी वो फोटो सुरक्षित थी।
लावण्या महेश के साथ बचपन से थी, उसने कई बार अनजाने में अपने भाई महेश का लंड देखा था। लेकिन रवि का वो खड़ा लंड देख कर उसके अंदर अजीब सी फीलिंग्स आने लगी थी।
कुछ दिनों बाद, महेश और रवि एक ट्रिप के लिए निकले। उनका पहला स्टे लावण्या के फ्लैट पर था, जो राम नगर में था। पहले दिन वो लोग घूमने निकले। शाम को लावण्या ऑफिस से वापस आ गई। अगला दिन रविवार था, तो उन्होंने मिल कर बाहर डिनर किया और खूब बातचीत की। रात को लावण्या अलग रूम में चली गई और महेश व रवि अलग रूम में सोने चले गए। फ्लैट में रूम तो दो थे, लेकिन वॉशरूम सिर्फ एक था, जो बाहर की साइड कॉमन था।
आधी रात को रवि को टॉयलेट लगी। वो उठ कर वॉशरूम की तरफ गया। लावण्या वहां अकेली रहती थी तो उसने दरवाजा बंद नहीं किया होता था। उसने उस दिन भी वही आदत के चलते दरवाजा खुला छोड़ दिया। रवि बिना ठहरे सीधे अंदर चला गया।
जैसे ही रवि अंदर पहुँचा, उसकी नज़र लावण्या पर पड़ी। लावण्या अपनी चूत की पानी निकाल रही थी। उसी पल लावण्या और रवि की नज़रें मिली। लावण्या चीखने ही वाली थी कि रवि ने झटके से उसके मुँह पर अपना हाथ रख दिया और पूरे वॉशरूम में खामोशी छा गई। सिर्फ लावण्या की चूत से निकलते हुए ‘सॅर सॅर’ की आवाज़ सुनाई दे रही थी।
इस नज़ारे को देख कर रवि अपना होश खो बैठा। वो खामोशी के माहौल में लावण्या के पास झुका और उसके होठों पर जोरदार लिप किस्स कर दी। लावण्या ने शुरू में कुछ देर रेजिस्टेंस किया, लेकिन
जैसे ही लावण्या ने विरोध करना छोड़ दिया, रवि ने उसे और कस कर अपनी बाँहों में भर लिया।
उसने लावण्या के होठों को चूसना शुरू कर दिया, जिससे लावण्या की सांसें तेज़ होने लगी। उसकी चूत अभी भी गीली थी और पानी छोड़ रही थी। रवि ने अपना एक हाथ लावण्या की टांगों के बीच ले जाकर उसकी चूत पर रखा। जैसे ही उसने महसूस किया कि वो कितनी गर्म और तर थी, उसका लंड उसकी पैंट के अंदर ही फड़फड़ाने लगा।
रवि ने धीरे-धीरे लावण्या की टॉप उतारनी शुरू कर दी। अब वो सिर्फ ब्रा में थी। उसके 36″ साइज़ के स्तन उसकी ब्रा के बाहर निकलने को बेचैन थे। रवि ने जल्दी से उसकी ब्रा भी खींच दी। लावण्या के गोरे-गोरे और भरे हुए स्तन सामने आ गए। रवि झटके से उन पर टूट पड़ा और उन्हें जोर-जोर से दबाने लगा। वो उसके निप्पल्स को अपने दाँतों से काटने लगा, जिससे लावण्या के मुँह से नरम आवाज़ें निकलने लगीं, “आह… भैया…रवि भैया… धीरे करो… भैया।”
लेकिन रवि को अब रुकना नहीं था। वो उसकी चूचियों को चूसता रहा और अपना दूसरा हाथ उसकी चूत पर ही रखे हुए था। वो उसकी चूत की फांकों को सहला रहा था। फिर उसने धीरे से अपनी एक उंगली लावण्या की चूत में डाल दी। लावण्या ने अपनी टांगें और चौड़ी कर दी ताकि रवि आसानी से अंदर-बाहर कर सके। वाशरूम में ‘फच फच’ की आवाज़ गूंजने लगी।
रवि ने लावण्या को बेसिन के पास खड़ा कर दिया और उसकी एक टांग बेसिन पर रख दी। अब वो लावण्या की चूत को साफ़ देख रहा था। वो उसकी चूत के रस को चाटने लगा। लावण्या को बहुत मज़ा आ रहा था। वो रवि के सिर को अपनी चूत पर दबाने लगी। रवि ने अपनी जीभ उसकी चूत के अंदर घुसा दी और तेज़ी से हिलाने लगा।
लावण्या पागल होने लगी थी। उसकी सांसें फूल रही थी और वो ज़ोर-ज़ोर से सिसकारियाँ ले रही थी। उसका शरीर थर्रा रहा था। रवि उठा और अपनी लोअर उतार दी। उसका 7 इंच का लंड सामने आया। लावण्या ने उसे देख कर अपना हाथ आगे बढ़ाया और उसे पकड़ लिया। वो उसको आहिस्ता-आहिस्ता सहलाने लगी। रवि ने उसके बाल पकड़े और अपना लंड उसके मुँह में दे दिया। लावण्या ने उसे चूसना शुरू कर दिया। वो एक अच्छी चूसक थी। उसका थूक रवि के लंड पर लुब्रिकेंट की तरह काम कर रहा था।
रवि ने लावण्या का सिर पकड़ा और अपनी कमर आगे-पीछे करने लगा। वो उसके गले तक अपना लंड डाल रहा था। रवि लावण्या के गले तक अपना लंड घुसा रहा था और लावण्या उसे चूसने में मग्न थी। तभी अचानक वॉशरूम की लाइट टिमटिमाने लगी और फिर बंद हो गई। दोनों एक पल के लिए रुक गए। रवि ने सोचा कि शायद फ्यूज उड़ गया है। उसने लावण्या को कहा, “मैं जाकर देखता हूँ, तुम यहीं रुको।”
रवि अंडरवियर में ही बाहर निकला। बाहर आकर उसने देखा कि महेश भी वहीं खड़ा था। महेश को लाइट जाने से जागना पड़ा था। जैसे ही रवि बाहर आया, महेश ने उसके खड़े हुए लंड को देख लिया। महेश ने मुस्कुराते हुए पूछा, “भाई, क्या मज़ाक है? अंदर क्या चल रहा है?”
रवि ने शर्माते हुए कहा, “यार, गलती से लावण्या के साथ… वो मिल गई।” महेश ये सुन कर हैरान नहीं हुआ। उसने कहा, “चलो, मुझे भी चखने दो।”
महेश वॉशरूम की तरफ बढ़ा। उसके दिमाग में भी बचपन की वो यादें थीं जब उसने लावण्या को नंगा देखा था, और आज वो मौका था जब वो अपनी बहन के साथ गलत काम कर सकता था। वो सीधा वॉशरूम में घुस गया।
अंदर अंधेरे में लावण्या खड़ी थी। महेश ने उसे पकड़ लिया और उसके होठों पर जोरदार किस्स कर दी। लावण्या शुरू में थोड़ा डर गई थी, लेकिन जैसे ही उसने महसूस किया कि ये महेश था, उसका डर उत्साह में बदल गया। वो भी महेश का साथ देने लगी।
रवि भी वापस अंदर आ गया। अब वहाँ तीनों थे – महेश, रवि और लावण्या। रवि ने दरवाज़ा बंद कर दिया और चारों तरफ अंधेरा छा गया, सिवाय चाँद की रोशनी के जो खिड़की से आ रही थी। वॉशरूम में फिर से सिसकारियों की आवाज़ें गूंजने लगीं।
महेश ने लावण्या को पानी भरी बाल्टी के पास खड़ा कर दिया। वो उसकी चूचियों को दबा रहा था और चूस रहा था। लावण्या के मुँह से ‘आह… आह… आह…’ की आवाज़ें निकल रही थी। रवि पीछे खड़ा होकर लावण्या की गांड को सहला रहा था। वो उसकी गांड के छेद के चारों ओर अपनी उंगली फेर रहा था। लावण्या अब दोनों के साथ-साथ चुदने को तैयार थी।
महेश ने लावण्या को घुटनों के बल बिठा दिया। उसके सामने अब महेश का लंड था। महेश ने अपना लंड लावण्या के मुँह में दे दिया। लावण्या ने महेश का लंड चूसना शुरू कर दिया। पीछे से रवि ने लावण्या की चूत में अपना लंड लगा दिया और एक ज़ोरदार धक्का मारा।
लावण्या के मुँह से महेश का लंड बाहर निकल गया और वो ज़ोर से चीखी, “आह! धीरे करो रवि भैया! फट जाएगी!”
रवि ने कहा, “शांत हो जा रांड, आज तो तेरी चूत की हर इच्छा पूरी होनी है।” इसके बाद रवि ने एक और तेज़ झटका मारा और अपना पूरा लंड लावण्या की चूत में घुसा दिया। लावण्या की चीख महेश के लंड को मुँह में दबाने की वजह से दब गई।
अब दोनों दोस्तों ने लावण्या की चुदाई शुरू कर दी। महेश उसके मुंह को चोद रहा था और रवि उसकी चूत को। लावण्या का पूरा बदन थर्रा रहा था। वो दोनों लंडों का मज़ा ले रही थी। वॉशरूम में ‘थप थप’ और ‘फच फच’ की आवाज़ें गूंज रही थीं।
थोड़ी देर बाद, महेश ने लावण्या का सिर पकड़ा और अपनी स्पीड बढ़ा दी। वो जल्द ही झड़ने वाला था। उसने कहा, “साली, मैं झड़ने वाला हूँ।” इतना कह कर महेश ने लावण्या के मुँह में ही अपना माल निकाल दिया। लावण्या ने उसके वीर्य को निगल लिया। महेश पीछे हट गया और लावण्या को सांस लेने का मौका मिला।
अब रवि ने लावण्या को उठाया और वॉशरूम की दीवार के सहारे खड़ा कर दिया। उसने लावण्या की एक टांग उठाई और अपना लंड फिर से उसकी चूत पर सेट किया। वो तेज़ी से धक्के मारने लगा। लावण्या उसका साथ दे रही थी। वो अपनी कमर उछाल-उछाल कर उसका लंड अपनी बुर में ले रही थी।
महेश वहाँ बैठा हुआ यह सब देख रहा था। उसका लंड फिर से खड़ा हो गया था। उसने लावण्या से कहा, “बहन, तेरी गांड भी तो बहुत मस्त है। आज उसे भी नहीं छोड़ूँगा।”
यह सुनकर लावण्या ने कहा, “आप लोग प्लीज, मेरी गांड मत मारो, बहुत दर्द होगा।”
रवि हंसा और बोला, “आज तो सब मरवाएगी बहन, तुझे कोई चीज़ बचाने नहीं देंगे।”
दोस्तों, इसके आगे की कहानी अगले पार्ट में।
अगला भाग पढ़े:- बरेली के भाइयों की रांड-2