हम मिले और बातें की और बीच पर घूमे। ज्यादा लोग नहीं थे। वो बहुत दूर थे, तो हम छुपते-छुपाते झाड़ियों में चले गए। थोड़ी अंदर एक खुली जगह दिखी, वहाँ हम रुके। उसने मुझे हग कर लिया और किस्स करने लगा। मैं भी उसे किस्स करने लगा। मैं कब से यह सब करना चाहता था, और मैं बस सब कुछ भूल के उसे किस्स करने लगा और उसमें खो गया।
5 से 6 मिनट किसिंग के बाद उसने मुझे नीचे बिठाया घुटनों के बल और अपनी पैंट उतारने लगा। फिर अपना बड़ा मोटा लंड बाहर निकाल लिया। मैं समझ गया मुझे क्या करना था और मैं अपना पहला लंड हाथ में लेकर उसे चूसने लगा। मैंने बहुत पोर्न देखे थे पहले, तो मैं हमेशा सोचता था कि जब मुझे लंड मिलेगा तो कैसे चूसूंगा।वो सब सीखा हुआ मैं अब करने लगा और लंड चूसने लगा।
उसे बहुत मजा आ रहा था और आँखें बंद करके हल्की-हल्की सिसकारियां लेने लगा। ऐसे ही मैं थोड़ी देर उसका लंड चूसने लगा। कभी लंड का टोपा लॉलीपॉप की तरह इस्तेमाल करता। कभी पूरा लेकर चूसता और कभी उसके अंडकोष चूसता। उसके बाद वो अपना लंड मेरे मुँह से बाहर निकाल के मेरे साथ नीचे बैठ गया रेत पे।
फिर उसने मेरी पैंट का बटन खोला, तो पैंट को नीचे गिरा और मेरी गांड में उंगली डालने लगा। मुझे थोड़ा दर्द हुआ तो मेरे मुँह से “आह” निकल गई। मेरी बहुत टाइट गांड थी। उसने मुझसे पूछा कितनी बार सेक्स किया है? मैंने कहा आज पहली बार है तो वो खुश सा हो गया। उसके चेहरे पर एक खुशी आ गई।
फिर उसने अपनी उंगली पर थूक लगा कर गांड में आराम से डाली। अब थोड़ा कम पेन हुआ। बाद में एक और, फिर 3 उंगलियां डाल के उंगली से गांड मारने लगा और मुझे किस्स करने लगा। मुझे सेक्स में कोई एक्सपीरियंस नहीं था, पर उसे बहुत था, ऐसा मुझे लगा। क्योंकि मुझे किस्स और रोमांस इतना किया कि 3 उंगली डालने पर भी दर्द पर ज्यादा ध्यान नहीं गया।
बाद में उसने मुझे घोड़ी बनाया और बहुत सारा थूक मेरी गांड पे और अपने लंड पर लगाया। फिर अपनी उंगलियां अंदर-बाहर करने लगा। कभी वो इस बीच में अपना लंड भी थोड़ा डालता और फिर उंगलियां। ऐसे करते-करते उसने अपना पूरा लंड मेरी गांड में डाल दिया। वो मुझे बाहों में भर के पीछे से मेरी गांड मार रहा था और मुझे गले, गाल और होठों पे किस्स करता रहता।
मैं मानो सातवें आसमान पे था। बीच की ठंडी हवा मेरी बॉडी और चेहरे पे और उसका गर्म लंड मेरी गांड के अंदर-बाहर हो रहा था। ऐसा लगा कि वो ऐसे ही मेरी गांड मारता रहे। ऐसे ही 5 से 6 मिनट उसने मेरी गांड मारी। फिर मुझे घोड़ी बना के झुका दिया और अपना पूरा जोर लगा के गांड मारने लगा। मैं अपने हाथ में बीच की रेत को कस के पकड़े हुए उसकी ठुकाई के मजे ले रहा था। और लास्ट में उसने अपना गर्म-गर्म समंदर के पानी जैसा नमकीन पानी मेरी गांड में छोड़ दिया। फिर हमने लंबा किस्स किया और कपड़े पहन के चलने लगे।
जैसे ही हम झाड़ियों से बाहर जाने लगे, अचानक से पीछे से आवाज आई, “ऐ, रुको तुम दोनों।” हमने पीछे देखा वहाँ 2 आदमी बैठे थे। मैं तो इतना डर गया कि भागने ही वाला था कि वो दोनों लोग ने कहा, “भागने की कोशिश मत करना, वरना लोग जमा कर लेंगे।” मैं रुक गया डर के। उन दोनों आदमियों ने हम दोनों को पास बुलाया। अब उनके नाम तो नहीं पता तो चलो एक को आदमी 1 और दूसरे को आदमी 2 कहते हैं।
आदमी 1: क्या कर रहे थे वहाँ?
तो अजय जो मेरे साथ आया हुआ था, उसने कहा।
अजय: बस पेशाब करने आए थे झाड़ियों में।
आदमी 1: पेशाब करने आए थे, अच्छा! साले हमने देखा तू कैसे उसकी गांड मार रहा था।
आदमी 2: हमें एक टाइम तो लगा कि कोई लड़का-लड़की की चूत पेल रहा है। पर फिर पता चला साला यहाँ हो लड़का लड़के की ले रहा है।
उसमें से आदमी 1 गुस्सैल और आदमी 2 मजाकिया टाइप लग रहा था। तो गुस्सैल आदमी 1 ने रूडली कहा-
आदमी 1: साले यह जगह क्या इस सब के लिए है क्या? क्या करते हो तुम, कहाँ से हो?
मैं: कॉलेज में पढ़ता हूं।
आदमी 1(गुस्से में): साले पढ़ने के बहाने यह करता है। घर में पता है? चल कहाँ रहता है बता। चल वहाँ जाकर कहता हूं कि क्या कर रहा था यहाँ।
मैं: प्लीज ऐसा मत करो। अब कभी ऐसा नहीं करेंगे, मैं वादा करता हूं।
अजय: जाने दो भाई प्लीज।
पर वो आदमी और गुस्सा करने लगा और बोला-
आदमी 1: साले लंड ही चाहिए ना, चल मैं देता हूं।
उसने अपना लंड निकाला और मुझे झुका के मेरे मुँह में लंड दे दिया।
आदमी 1: चल चूस सही से वरना सब को यहीं बुला लूंगा
मैं डर के लंड चूसने लगा। बाकी दोनों वहीं खड़े देख रहे थे। कुछ देर लंड चुसाने के बाद वो नीचे आया और मेरी पैंट उतार के मुझे घोड़ी बना के गांड में लंड एक ही बार में पूरा पेल दिया। मेरी कुछ देर पहले अजय ने गांड मारी थी, और उसके वीर्य की वजह से गांड चिकनी थी, तो लंड घुस गया। पर फिर भी थोड़ा दर्द हुआ। पर मैंने सहन कर लिया और वो मेरी गांड मारने लगा जोर-जोर से।
अजय अपना मुँह दूसरी तरफ करके खड़ा रहा और दूसरा आदमी 2 स्माइली फेस के साथ देखता रहा मेरी चुदाई को। कुछ देर के बाद मुझे भी मजा आने लगा और मैं अपनी गांड मरवाता रहा। 5 से 6 मिनट बाद वो मेरी गांड में झड़ गया और अपने कपड़े पहनने लगा। मैं भी अपने कपड़े पहन रहा था और आदमी 2 खड़ा-खड़ा स्माइल करके देख रहा था। उसने कहा-
आदमी 2: अरे कपड़े कहाँ पहन रहा है। यहाँ खड़े सब ने तेरी मारी। अब मैं कैसे रह जाऊँ, चल घोड़ी बना रह।
उसका लंड पहले से टाइट खड़ा था मेरी ठुकाई 2 बार देख कर और उसने अपनी पैंट उतारी। फिर सीधा मेरी गांड में लंड डाल दिया और मुझे चोदने लगा। गुस्सैल आदमी 1 दूसरे आदमी 2 जोकि मेरी गांड मार रहा था उससे बोला-
आदमी 1: मैं झाड़ियों के बाहर खड़ा हूं। तेरा हो जाए तो आ जाना।
और अजय भी वहाँ से चला गया। झाड़ियों के बाहर वो आदमी 1 मेरी मारता रहा और मुझे भी मजा आ रहा था। मैं भी उछल-उछल के उसका लंड ले रहा था। यह देख कर वो बोला कि, “लगता है बहुत बड़ी रांड है तू। तीसरा लंड ले रहा है और अभी भी मन नहीं भरा।” और आखिर में वो भी मेरी गांड में झड़ गया। कपड़े पहन के हम बाहर जाने लगे। उसका साथ वाला आदमी 1 और अजय बाहर ही थे। वो दोनों आगे निकल गए जल्दी और मैं और अजय दूसरे रास्ते चल दिए।
अजय: अच्छा हुआ कि तेरी गांड मार के मामला रफा-दफा कर लिया दोनों ने। वरना तो बहुत बेइज्जती होती। सब को पता चलता तो? और मेरी तो शादी भी नहीं होती कभी।
मैं कुछ नहीं बोला। बुरा भी लग रहा था और अच्छा भी, क्योंकि 1 नहीं 3 लंड मिले आज, सब ने मजे से चोदा। और आगे से सेफ जगह पर ही सेक्स करूंगा। वरना इससे भी बुरा हो सकता था।
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