पिछला भाग पढ़े:- जुड़वाँ दीदियों के साथ जिस्म की चाहत-6
पायल दीदी ने बहुत धीमी आवाज़ में मेरे कान के पास फुसफुसाया “गोलू… क्या मैं तुझे किस्स कर सकती हूँ?”
मैंने भी उतनी ही धीमी आवाज़ में कहा “हाँ पायल दीदी… करो।”
फिर उसने अपने दोनों हाथ मेरी गर्दन के पीछे डाल दिए। उसके हाथ सीधे मेरी स्किन पर लग रहे थे। मैंने भी अपना हाथ उसकी खुली पीठ पर रखा और उसे करीब खींच लिया। वह मेरे बिल्कुल सामने थी। उसकी सांस तेज़ होने लगी और उसका सीना मेरे सीने से लग गया था। पहली बार मुझे साफ़ महसूस हुआ कि उसका दिल धड़क रहा था और वो भी तेज़।
इसके बाद उसने अपने होंठ बहुत धीरे से मेरे होंठों पर रख दिए। पहले हल्का सा स्पर्श हुआ, एक सेकंड के लिए जैसे वह चेक कर रही हो कि सब ठीक है। फिर उसने दबाव थोड़ा बढ़ाया। हमारे होंठ आपस में टच हो रहे थे और एक-दूसरे को पकड़ रहे थे।
कुछ सेकंड तक हम बस होंठों को छूते रहे, बिना हिले, बिना खोले। फिर उसकी साँस और तेज हुई और उसने अपने होंठ थोड़ा खोले। मैंने भी वैसा ही किया। अब किस्स ढीला नहीं रहा, दोनों तरफ से मूवमेंट शुरू हो गई थी। हमने धीरे-धीरे अपने होंठ एक दूसरे के बीच खिसकाने शुरू किए। मेरे होंठ उसके होंठों के ऊपर से नीचे जा रहे थे, और उसके मेरे ऊपर से नीचे।
कुछ ही पल में हमारी जीभें भी बाहर आई। पहले हल्का स्पर्श हुआ, बस एक सेकंड। फिर उसने झिझक छोड़ी और जीभ मेरे मुँह में आई। मैंने भी जवाब दिया। अब किस धीमा नहीं रहा था। हम दोनों की जीभें एक-दूसरे को धक्का दे रही थी — कभी आगे, कभी पीछे।
जैसे-जैसे मुँह खुलता गया, हमारी लार बढ़ती गई। पहले बस हल्का गीलापन महसूस हुआ। फिर लार एक-दूसरे के मुँह में जाने लगी। एक चक्कर उसके मुँह से मेरे मुँह में — फिर मेरे से उसके मुँह में। हम दोनों बिना रुके एक-दूसरे को चूम रहे थे और हमारा मुँह पूरी तरह खुले होने लगा। कुछ सेकंड बाद महसूस हुआ कि होंठों के बीच से लार नीचे की तरफ फिसल रही है। पहले एक पतली लाइन नीचे लिप से निकलकर ठुड्डी तक। फिर हमारी जीभें और अंदर गयी तो लार ज्यादा होने लगी। वह हमारे मुँह के कोनों से बाहर निकल कर नीचे टपक गई।
हम दोनों इतने डूब चुके थे कि कुछ भी याद नहीं था। ना पार्टी, ना कमरे में बैठे लोग, ना कोई हँसी मज़ाक और ना ही यह ड्रामा कि हम वहाँ एक रोल निभाने आए थे। उस पल दुनिया बस हमारी साँसों के बीच सिमट गई थी। उसके होंठ हर सेकंड और मुलायम लग रहे थे, जैसे गर्मी से पिघलते जा रहे हों। जितना ज़्यादा वो मुझे दबाती, उतना ही मीठा एहसास आता। ऐसा लग रहा था जैसे उसके होंठों का हर मूवमेंट सीधे मेरे भीतर उतर रहा हो।
और तभी अचानक किसी ने थोड़ा तेज़ बोलकर कहा, “ओके… बस! यह काफी है पायल!”
आवाज़ ने हमें झटका सा दिया। मैंने थोड़ा पीछे हट कर देखा तो उसकी एक दोस्त मुस्कुराते हुए खड़ी थी। उसने बाकी सब की तरफ देखते हुए कहा “हम मान गए… वह तुम्हारा बॉयफ्रेंड है।”
हम दोनों ने थोड़ी दूरी बनाई। किस्स रुक चुका था लेकिन उसके असर से साँसें अभी भी काँप रही थी। होंठ लार से पूरी तरह गीले थे। मैंने अपने अंगूठे से अपने होंठ साफ किए और हल्का सा गला साफ किया। पायल दीदी ने भी उँगलियों से अपने होंठ पोंछे, फिर ठुड्डी पर से लार हटाई।
जब मैंने उसका चेहरा देखा तो पूरा लाल था। सिर्फ होंठ नहीं, पूरा चेहरा कान तक गर्म और लाल। जैसे उसकी साँसें उसे अंदर से भस्म कर रही हों। वह नीचे देखने लगी, जैसे किसी ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया हो।
मैं थोड़ा झुक कर उसके कान के पास गया और धीरे से फुसफुसाया, “तुम ठीक हो पायल दीदी?”
उसने धीरे से सिर उठाया, मेरी तरफ देखा और बहुत हल्की आवाज़ में वापस फुसफुसाई, “मैं ठीक हूँ गोलू… थैंक यू।”
रात के तक़रीबन दो बजे आखिरकार पार्टी खत्म हो गई। तब तक सब लोग मान चुके थे कि मैं पायल दीदी का बॉयफ्रेंड हूं। पायल दीदी भी कुछ ऐसी चीजें करती रही जिससे किसी को भी हमारे ऊपर शक ना हो। जैसे जब हम दोनों एक-दूसरे को पकड़ कर नाच रहे थे, उन्होंने मेरा हाथ अपने पिछवाड़े पर रखा और मुझे दबाने के लिए कहा।
कभी-कभार गलती से मेरा हाथ उनके स्तनों को लगता और मैं पीछे हटने की कोशिश करता, लेकिन पायल दीदी फिर मेरा हाथ पकड़ कर अपने स्तनों पर रखती। उनकी इन तरह कि शरारतों की वजह सब ठीक रहा। रात की वजह से हमें कोई टैक्सी नहीं मिल रही थी, इसलिए दीदी के एक दोस्त ने हम दोनों को लिफ्ट दी और हमें रूम के पास छोड़ा।
मैंने पायल दीदी को संभाल कर गाड़ी से उतारा। उनकी चाल पूरी तरह बिगड़ चुकी थी, कदम डगमगाते, सांस भारी, आंखें आधी खुली आधी बंद। ऐसा लग रहा था जैसे वो नींद और नशे के बीच तैर रही हो। मैंने उनका हाथ अपने कंधे पर रखा और सीढ़ियाँ चढ़ना शुरू किया। उनका पूरा शरीर मेरे ऊपर ढलक गया था। वो खुद से एक कदम भी नहीं चला पा रही थी।
दूसरी मंज़िल तक पहुँचते पहुँचते उन्होंने फुसफुसा कर कहा, “मुझे मत छोड़ना…” और फिर पूरी तरह ढीली होकर मेरी छाती से टिक गई। उनकी खुशबू, परफ्यूम, शराब, और रात भर की गर्मी, मेरे गले तक भर गई।
मैं रूम के सामने आकर रुका और हाथ बढ़ा कर बेल दबा दी। अंदर कुछ सेकंड तक शांति रही, फिर क्लिक की आवाज़ के साथ दरवाज़ा खुला। सामने नेहा दीदी थी। रात की टी-शर्ट पहने, मगर उनकी निगाह एक झटके में सब समझ गई।
उन्होंने भौंहें सिकोड़ कर हमें ऊपर से नीचे तक देखा और पूछा, “सब ठीक है ना?”
मैंने थोड़ा हाँफते हुए कहा, “हाँ, सब ठीक है। बस… इन्होने आज ज़्यादा पी ली है।”
नेहा दीदी ने बिना कुछ बोले एक कदम पीछे किया और दरवाज़ा पूरी तरह खोल दिया। वह रास्ता छोड़ कर खड़ी हो गई। मैंने पायल दीदी को थामे-थामे कमरे में एंट्री ली और सीधे बेडरूम की तरफ बढ़ा। बेड दिखते ही पायल दीदी लगभग मेरे हाथों से फिसल गई। मैंने उन्हें संभाल कर धीरे से गद्दे पर लिटाया।
नेहा दीदी दरवाज़े के पास खड़ी सब देखती रहीं। मैंने एक पल के लिए उन्हें देखा, उनकी आँखों में सवाल था, लेकिन आवाज़ में खामोशी। मैं हल्का मुस्कुराया और धीरे से बोला, “गुड नाइट दीदी,” ताकि वो जान जाएँ सब सँभल गया है।
वो बस सिर हिला कर बोली, “गुड नाइट।” उनके स्वर में राहत थी। मैं अपने कमरे में जाकर सोने की कोशिश करता रहा लेकिन नींद मेरे आंखों से कोसों दूर थी। जब भी मैं आंखें बंद करने की कोशिश करता मुझे अपने होंठों पर पायल दीदी के होंठों का एहसास होता। उनका मुलायम पिछवाड़ा मेरे हाथों के नीचे महसूस होकर मैं पागल हो रहा था। उन बातों को सोच कर मेरा लंड बार-बार सख्त हो रहा था। कुछ दिनों पहले ही मैंने पायल दीदी को पूरी तरह नंगी देखा था, फिर भी उनको इस तरह छूना कुछ अलग ही लगा।
सुबह करीब पाँच बजे मैं आखिर हार मान कर उठ गया। पूरा दिमाग बस रात वाली घटना में अटका हुआ था। कमरे में पड़ी ठंडी हवा भी मेरे अंदर जल रही गर्मी को कम नहीं कर पा रही थी। मैं बिस्तर से उठा और चुप-चाप दरवाज़े की ओर बढ़ गया।
मैं अपने कदम संभालते हुए दीदी के कमरे की तरफ बढ़ा। जैसे ही मैंने हैंडल दबाया, दरवाज़ा बिना आवाज़ के खुल गया। ये पहली बार नहीं था। नेहा दीदी ज्यादातर दरवाज़ा बंद करना भूल जाती थी।
कमरे की हल्की पीली रोशनी में मैंने देखा, पायल दीदी और नेहा दीदी दोनों बिस्तर पर साथ सो रही थी। एक-दूसरे से सट कर, बिना किसी चिंता के, गहरी नींद में डूबी हुई।
मैं दरवाज़े के पास खड़ा रहा, फिर हल्की आवाज़ से फर्श पर अपने पैर घसीट कर आहट दी, इतनी कि अगर कोई आधा जागा भी हो तो करवट बदले। लेकिन कमरे में कोई हरकत नहीं हुई। दोनों वैसे ही पड़ी रहीं। ना नेहा दीदी ने पलकें झपकाई, ना पायल दीदी ने सांस की रफ्तार बदली। इससे साफ था, मैं जितनी देर चाहूँ, उतनी देर यहाँ रह सकता था… उनकी गहरी नींद ने मुझे और भी बेख़ौफ़ बना दिया।
मैं आगे बढ़ कर पायल दीदी के बिल्कुल पास खड़ा हो गया। उनके मुलायम होंठ रात के समय भी हल्का चमक रहे थे। मैंने उंगली आगे बढ़ा कर उनके होंठों को छूआ लेकिन उन्होंने कोई भी हरकत नहीं की। शराब की वजह से वह पूरी तरह नींद में खो चूकी थी। मैंने नेहा दीदी कि तरफ देखा तो पाया की वह भी गहरी नींद में है।
मेरा दिल तेज़ी से धड़क रहा था, जैसे किसी ने सीने के भीतर ढोल बजा दिया हो। कुछ पल मैंने खुद को रोकने की कोशिश की लेकिन चाहत बेकाबू थी। हिम्मत जुटाते हुए मैंने धीरे से अपनी पैंट और अंडरवियर उतार दिए। ठंडे कमरे की हवा मेरे नंगे बदन को छूती हुई बह रही थी। मेरा लंड पहले से ही तन कर सीधा खड़ा था, धड़कता हुआ, हर साँस के साथ और भी सख़्त होता जा रहा था।
मैं धीरे-धीरे पायल दीदी के चेहरे के और करीब झुक गया। उनका चेहरा इतना शांत था मानो समय थम गया हो। मैंने अपने हाथ से उनके बालों को थोड़ा हटाया और धीरे से अपना लंड उनके गाल के पास ले आया। पहली स्पर्श में ही मेरे भीतर बिजली दौड़ गई। मैंने धीरे से अपने लंड को उनके चेहरे से छुआ — पहले गाल से, फिर उनकी नरम ठुड्डी तक। मेरी साँस तेज हो चली थी, और मेरा लंड पायल दीदी की त्वचा से लग कर हल्का-हल्का फिसल रहा था।
वह अब भी नहीं हिली। उनका चेहरा और मेरा धड़कता लंड एक-दूसरे को छूते हुए जैसे मेरी चाहत को और बढ़ा रहे थे। मैं और नीचे झुका और बहुत धीरे-से अपने लंड को उनके बंद होंठों पर ले आया। मैंने उनके मुलायम होंठों पर अपना लंड टिकाया और हल्के-हल्के रगड़ा। मेरे भीतर सनसनी दौड़ गई। मैं रुक नहीं सका, मैंने उनके होंठों पर अपना लंड दबाते हुए उसे थोड़ा-सा आगे बढ़ाने की कोशिश की, जैसे मैं उसे अंदर करना चाहता हूँ।
लेकिन उनके होंठ मजबूती से बंद थे। कोई खुलने का मौका नहीं। मैंने फिर कोशिश की थोड़ा धक्का देकर लेकिन सिर्फ इतना हुआ कि मेरा लंड उनके होंठों के साथ-साथ उनकी दाँतों की हल्की, ठंडी रुकावट से टकराया। मैंने अपनी साँस रोकी और कुछ सेकेंड वहीं रुका रहा। फिर धीरे से मैं चेहरे से हट कर उनके गले की ओर बढ़ा। उनकी गर्दन का मुलायम हिस्सा मेरी त्वचा को छूते ही मेरे पूरे बदन में गर्मी फैल गई। मैंने अपना लंड उनकी गर्दन से होते हुए कॉलरबोन तक रगड़ा।
उसी पल पायल दीदी के बगल में लेटी नेहा दीदी ने नींद में करवट ली और हल्की आवाज़ में बुदबुदाई। मैं चौक गया और तुरंत पीछे हट गया, लेकिन नेहा दीदी नींद से जागी नहीं। वह फिर एक बार करवट बदल कर सो गई और उसी समय मेरी नज़र उनके मुंह पर पड़ी। वह अपना मुंह खोल कर सो रही थी। वह कोई बड़ा छेद नहीं था लेकिन उनके दांतों के बीच छोटी-सी जगह नज़र आ रही थी।
मैं धीरे-धीरे घुटनों के बल सरकते हुए उनके सिर के पास पहुँचा। दिल इतनी तेज धड़क रहा था कि मुझे लगा आस-पास की खामोशी टूट जाएगी। नेहा दीदी का मुंह आधा खुला था और मैं खुद को रोक नहीं सका। मैंने धीरे-धीरे अपने लंड का सिरा उनके होंठों पर टच कराया, बस इतना कि वह गीली गर्म हवा मेरे लंड को छू सके।
जैसे ही उनका होंठ मेरे लंड से छुआ, मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई। मैंने थोड़ा और आगे धकेला – धीरे, बहुत धीरे। उनके होंठ अब मेरे आधे लंड को पकड़ चुके थे। वह पूरी तरह सोई हुई थी, लेकिन उनका मुंह मेरे लिए खुला था।
मैंने हौले-हौले अपनी कमर को हिलाना शुरु किया। मेरा आधा लंड उनके मुंह के अंदर चला जाता और फिर बाहर आता। उसमें कोई कसावट नहीं थी, फिर भी मैं नेहा दीदी के मुंह का गीलापन अपने लंड के नोक पर महसूस कर सकता था। इससे मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही थी। धीरे-धीरे मैं और करीब गया, मेरे हाथ काँप रहे थे मगर मैं रुक नहीं रहा था। उनकी साँसों की गरम लय मेरे लंड पर पड़ती और मुझे पागल कर देती। मैं आगे झुक कर नेहा दीदी के गाल को अपने अंगूठे से हल्का सा सहलाया। वह ज़रा सी हिली, मगर नींद गहरी थी।
अब मेरा लंड लगभग पूरा उनके मुंह में जा रहा था, हर बार धकेलने पर मेरे अंदर गर्मी की लहर उठती। मैं जितना अंदर जाता, उनका जबड़ा उतना खुलता। उनके होंठों के किनारे मेरी त्वचा को पकड़ लेते और मेरी सिसकियाँ गले तक अटक जाती।
मैं उसी तरह आहिस्ता आगे बढ़ कर खुद को पूरी तरह खुश करना चाहता था, लेकिन जब मेरा पूरा लंड जोर से सख्त हो गया, मैं खुद को रोक ना सका और एक जोरदार धक्का दे बैठा। मेरा पूरा लंड अचानक नेहा दीदी के पुरे मुंह के अंदर ज़ोर से गया और वह खांसते हुए जाग गई और मैं घबरा कर पीछे हट गया। उनकी आँखों में गुस्सा और हैरानी दोनों थे।
“गोलू! ये क्या कर रहे थे तुम?” उन्होंने कहा।
जैसे ही उन्होंने जोर से इतना कहा मैंने घबराकर जोडा, “नेहा दीदी चिल्लाओ मत वरना पायल दीदी जाग जाएगी।”
नेहा दीदी ने तेजी से अपना हाथ मेरे मुंह पर रख दिया ताकि आवाज़ बाहर ना जाए। वो गुस्से में फुसफुसाई, “तू पागल हो गया है क्या? अभी अगर पायल उठ गई तो?”
मैंने बस सिर नीचे कर लिया, साँस तेज़-तेज़ चल रही थी। मेरा लंड अब भी पूरी तरह खड़ा था। कुछ पल उसी तरह बीत गए। नेहा दीदी कभी मेरे चेहरे को देखती तो कभी मेरे लंड की तरफ देखती। इन सब के बीच पायल दीदी अब भी अपनी जगह पर सो रही थी। अगर कुछ मिनटों पहले नेहा दीदी जाग गई होती तो मैं बहुत मुश्किल में पड़ जाता, लेकिन फिर भी नेहा दीदी की आंखों में गुस्सा देख कर मैं अपनी हरकत पर शर्मिंदा था।
तकरीबन दो मिनट बाद उन्होंने मेरे लंड की तरफ इशारा करते हुए पूछा, “और कितनी देर यह इसी तरह खड़ा रहेगा? मुझे अजीब लग रहा है।”
मैंने फुसफुसाहट के साथ जवाब दिया, “मुझे नहीं पता दीदी, शायद जब तक मैं झड़ नहीं जाता।”
नेहा दीदी ने हल्की सांस ली, जैसे खुद को संभाल रही हों। फिर धीरे से बोली, “ठीक है…तुम इसे मेरे मुंह के अंदर डाल सकते हो। लेकिन पायल दीदी के जागने से पहले जल्दी करना।”
इसके बाद नेहा दीदी आराम से तकिए पर लेट गई और उन्होंने अपनी आंखें बंद कर ली। मैं वहीं बैठे इंतजार करता रहा। पहले कुछ सेकंड नेहा दीदी के चेहरे पर हल्की हिचक नजर आई लेकिन उसके तुरंत बाद उन्होंने हौले से अपना पूरा मुंह खोल लिया और इंतजार करती रही कि कब मैं अपना लंड उनके अंदर डालूं।
मैंने खुद को आगे झुकाया और धीरे-धीरे लंड उनके मुंह की तरफ ले गया। जैसे ही लंड का सिर उनकी गर्म नरम होंठों को छुआ, उन्होंने खुद ही थोड़ा गर्दन उठा कर उसे पूरा मुंह के अंदर ले लिया। उनकी जीभ तुरंत नीचे के हिस्से से लिपटी हुई महसूस हुई।
मैंने होंठ दबा कर अपनी आवाज़ रोकी, मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही बात थी, पायल दीदी जाग ना जाएं। नेहा दीदी की सांसें गर्म थी, उनका मुंह कस कर मेरे लंड को पकड़ रहा था। वो धीरे-धीरे अंदर-बाहर कर रही थी, बिल्कुल शोर के बिना। हर बार जब मैं आगे धक्का देता, उनका चेहरा थोड़ा पीछे जाता। उनकी पलकों के नीचे आंखें बंद थी लेकिन उनकी भौहें हल्की सिकुड़ रही थी, जैसे वो खुद अपनी ही कामना को रोक रही हो।
उसी दौरान उन्होंने धीरे से दाँतों के बीच से फुसफुसाया, “जल्दी कर ना… पायल उठ गई तो फँस जाएंगे।”
मैंने रफ्तार बढ़ाई। अब मैं थोड़ा आगे घुसता और वो गले तक ले लेती। उसकी लार लंड पर फैल रही थी, गर्म और फिसलन भरी। उसने एक हाथ से मेरे जांघ को पकड़ा जैसे वो खुद मुझे और धकेल रही हो।
मैंने कमर और तेज हिलानी शुरू की। अब हर धक्का पहले से गहरा और जोरदार था, लेकिन मैं अपनी सांसें रोक कर सब शांत रखने की कोशिश कर रहा था। नेहा दीदी का गला हर बार थोड़ा दबता, और वो हल्का खांसने जैसी आवाज गले में ही दबा देती, ताकि कोई सुन ना ले।
उनकी नाक बार बार मेरे निचले पेट से टकरा रही थी। मैं महसूस कर सकता था कि वो खुद अपना मुंह और खोलने की कोशिश कर रही हैं ताकि मैं पूरा अंदर जा सकूँ। उनका हाथ अब मेरी जांघ से हट कर मेरे लंड के नीचे पहुंच गया था, वो धीरे-धीरे बॉल्स को पकड़ कर दबा रही थी जैसे मुझे और जल्दी फिनिश करवाना चाहती हों।
मैं अब काबू खो रहा था। सांस टूट रही थी। मैंने उनके बाल पकड़ लिए और धक्के छोटे लेकिन बहुत तेज कर दिए। मेरा पूरा वजन आगे चला गया था और मैं बस फूटने वाला था।
तभी नेहा दीदी ने आँखे खोले, हल्की झुंझलाहट के साथ फुसफुसाई “और कितना टाइम लेगा? जल्दी खत्म कर… मेरा गला थक रहा है।”
मैंने दाँत भींच कर कहा, “बस… बस…हो गया दीदी…”
मैंने आखिरी दो धक्के मारे। मेरा पूरा शरीर तना, और मैंने जोर से उनके मुंह के अंदर झड़ना शुरू कर दिया। गर्म-गर्म सफेद पानी की धारा सीधी उनके गले में गिर रही थी। उन्होंने झटके से सांस रोकी लेकिन मुंह बंद नहीं किया। मैंने रुक कर देखा, वो हर बूंद निगल रही थी, गले को टाइट करके। उनकी आंखें बंद थी, और चेहरा थोड़ा पीछे खिंचा हुआ।
जब आखिरी बूंद निकली, उन्होंने धीरे से मेरा लंड मुंह से बाहर निकाला, होंठ चिपका कर साफ किया और बहुत धीमे फुसफुसाई, “अब चुप-चाप सो जा… और आज रात इस कमरे में मत आना।”
नेहा दीदी ने तेजी से हाथ झटकते हुए मुझे इशारा दिया कि अब बहुत हो गया। मैंने चुप-चाप खुद को संभाला और धीरे से कमरे से बाहर निकल गया। पायल दीदी अब भी उसी करवट में गहरी नींद में थी। मेरे कदम फर्श पर पड़ते हुए भी मुझे बहुत भारी लग रहे थे।
जैसे ही मैं अपने कमरे में पहुंचा, दरवाज़ा बंद करके पलंग पर गिर गया। मेरा सीना अब भी ऊपर-नीचे हो रहा था। पसीना गर्दन से बहता हुआ मेरी टी-शर्ट तक पहुँच गया था। कमरे में अंधेरा था, लेकिन मेरा दिमाग जैसे जल रहा था। अभी जो हुआ था, वो सच में हुआ या सपना जैसा था मैं खुद समझ नहीं पा रहा था।
मैं लगभग पकड़ा ही गया था। अगर पायल दीदी हिल भी जाती तो सब खत्म हो जाता। दिल धड़कने की आवाज़ खुद को सुनाई दे रही थी। लेकिन फिर मैं मुस्कुराया क्योंकि आखिर में सब अच्छा हुआ। मेरे दिमाग में बस वही चलता रहा- नेहा दीदी का गर्म मुंह…उनके गले तक जाता हुआ मेरा लंड…और वो दम दबा कर आवाज़ रोकते हुए चूसना। फिर अचानक दिमाग फिसल कर दूसरी तरफ चला गया।
मैंने याद किया कैसे कुछ मिनट पहले मेरा लंड पायल दीदी के होंठों को छूकर गया था। बस एक सेकंड। लेकिन मैंने महसूस किया था। वो मुलायम, गरम, नरम होंठ।
मैं पलंग पर लेटा लेटा बस सोचता रहा, “काश… कभी पायल दीदी खुद भी मेरा लंड मुंह में ले।”
ख्वाहिशें जैसे खुद बा खुद दिमाग में बनती जा रही थी। आज बस छुआ था… कल शायद होंठ खुलेंगे… कभी शायद वो खुद आगे बढ़ कर लेले। यह सोचते-सोचते मेरा शरीर ढीला पड़ गया। थकान और सुख दोनों ने मिल कर आँखें भारी कर दी।
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