पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-6
हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-
दिव्या ने मेरी और मम्मी की चुदाई देख ली थी और अब दिव्या मुझ से चुदाई करवाना चाहती थी। दिव्या ने साफ़ ही बोल दिया, “धीरज लंड डालोगे इसमें तो मजा आ जाएगा तुम्हें, लंड रगड़ कर जाएगा अंदर। ऐसी कुंवारी फुद्दी चोदने लिए तो मर्द तरसते हैं और चुदाई के लिए लाखों खर्च करने तक भी तैयार हो जाते हैं। में तो अपनी कुंवारी फुद्दी तुम्हें प्लेट में सजा कर दे रही हूं। बोलो चोदोगे?”
मेरी घिग्गी तो बंधी ही हुई थी। मेरे मुंह से तो पहले ही आवाज नहीं निकल रही थी, मैंने हकलाते हुए पूछा, “मगर दिव्या तुम्हारी फुद्दी, और मैं? ये कैसे दिव्या, ये क्या कह रही हो?”
दिव्या वैसे ही बोली, “क्यों धीरज मेरी फुद्दी में क्या है? जब अपनी मम्मी की फुद्दी तुम चोद रहे हो, तो फिर मेरी – अपनी बहन की फुद्दी क्यों नहीं चोद सकते? पहले मम्मी और अब बहन। और फिर धीरज मम्मी की फुद्दी में तो तुम्हारा लंड फिसल कर चला गया होगा। मेरी फुद्दी में लंड डालने के लिए तो तुम्हें थोड़ी बहुत मेहनत भी करने पड़ेगी – रगड़ कर जाएगा लंड फुद्दी में। चुदाई का असली मजा मिलेगा तुम्हें मुझे चोदने में। मैंने अब तक चुदाई नहीं करवाई, मगर इतना तो मुझे पता ही है कि कुंवारी फुद्दी में लंड कैसे जाता है, और चुदी हुई फुद्दी में कैसे जाता है।”
दिव्या की इस बात का मेरे पास कोई जवाब नहीं था। दिव्या की बात तो ठीक ही थी। अपनी मम्मी की फुद्दी तो में चोद ही रहा था, और वो भी अच्छी खासी चुदी हुई फुद्दी, तो फिर कुंवारी फुद्दी चोदने में इतना क्या सोचना?”
लेकिन में अब भी चुप ही था। तभी दिव्या उठी और उठ कर मेरे पास आ गयी। दिव्या बोली, “धीरज, अब यार ज्यादा सोचो मत। तुम्हारी और मम्मी की चुदाई का “लाइव शो” देख कर मेरी फुद्दी ठंडी ही नहीं हो रही। अब इसे लंड चाहिए, और हर हाल में चाहिए, आज ही, अभी के अभी।”
मेरे सामने खड़े हो कर मेरी गालों को हाथों में लेकर दिव्या बोली, “चलो मेरे भाई, जरा अपना लंड दिखाओ। अब तक पोर्न फिल्मों – चुदाई की फिल्मों को छोड़ कर किसी मर्द का लंड नहीं देखा। मैं भी तो देखूं, ऐसा भी क्या है तेरे लंड में कि मम्मी इतनी चीख-चीख कर चुदाई करवा रही थी। आज तुम्हारा लंड जरूर देखूंगी।”
में हैरान परेशान सा बैठा था कि ये आज हो क्या रहा था। मुझे हिलता ना देख कर दिव्या बोली, “लगता है मुझे ही कुछ करना पड़ेगा।” ये बोल कर दिव्या ने मेरे पायजामे का नाड़ा पकड़ा और खोलने लगी।
दिव्या की बातों से मेरा लंड हरकत तो करने ही लगा था। मुझे लगा कि अब कोइ चारा नहीं। दिव्या उसकी और मम्मी की चुदाई देख चुकी है, चुदाई के दौरान हुई मेरी और मम्मी की “ऐसी ऐसी बातें” सुन चुकी है – यहाँ तक की दिव्या उससे से भी कई सारी लंड, फुद्दी जैसी बातें बोल चुकी थी। मैं समझ गया कि अब कुछ नहीं हो सकता। मेरे सामने दिव्या की बात मानने के अलावा कोइ रास्ता नहीं था।
कोइ और चारा ना देख में खड़ा हुआ और बोला, “मैं करता हूं दिव्या, और मैंने अपने पायजामे का नाड़ा खोल दिया। पायजामा नीचे ढलक गया। मेरा का आधा खड़ा हुआ छह इंच का लंड दिव्या बड़े ही ध्यान से देख रही थी। तभी दिव्या ने अपने छोटे से नरम हाथ में मेरा लंड पकड़ लिया।
दिव्या की नाजुक नाजुक उंगलियों ने जैसे ही मेरा लंड को छुआ, दिव्या की सील बंद कुंवारी फुद्दी मेरी आंखों की आगे घूम गयी। दिव्या की फुद्दी का ध्यान आते ही मेरा लंड दिव्या के हाथ में एक-दम ही खड़ा हो गया।
दिव्या लंड को ध्यान से देखते हुए बोली, “ओह माय गॉड, इतना बड़ा लंड? इतना बड़ा लंड भी होता है? और धीरज कितना मोटा कितना सख्त और गर्म है ये?”
और दिव्या ने इतना कहते ही मेरा का लंड को मुंह में ले लिया। दिव्या की मुंह में लेते ही मेरा लंड एक-दम और भी सख्त हो गया।
दिव्या ने लंड मुंह में से निकाला और बोली, “धीरज मेरी फुद्दी में डालोगे अभी? सच में धीरज, बहुत मन कर रहा है फुद्दी में डलवाने का। मेरी फुद्दी तो गीली भी हो चुकी है।”
मैंने दिव्या से कहा, “फुद्दी में, अभी? लेकिन अभी कैसे होगा दिव्या? दिव्या सीधी सादी फुद्दी चोदने में भी आधा पौना घंटा लगता है – मतलब बिना लंड चूसे, बिना फुद्दी चूसे सीधा लंड फुद्दी में डालने से चुदाई का क्या मजा आएगा, और फिर मम्मी के आने का खटका? ऐसी चुदाई में मजा नहीं आएगा दिव्या – मैं अपने मजे की नहीं तुम्हारे मजे की बात कर रहा हूं। तुमने पहली बार फुद्दी में लंड लेना है, पहली बार चुदाई करवानी है। तुम्हें तो पूरा मजा आना चाहिए। वो मजा तभी आएगा दिव्या, जब बिना किसी डर के बिना जल्दबाजी के चुदाई हो। दिव्या अगर तुमने मुझसे चुदाई करवानी ही है तो मैं वादा करता हूं, तुम्हारी मस्त चुदाई कर दूंगा। ऐसी चुदाई जिससे तुम्हारी और तुम्हारी फुद्दी की पूरी तसल्ली हो जाएगी। चुदाई का मजा आ जाएगा तुम्हे।”
दिव्या बोली, “लेकिन धीरज, अभी मैं क्या करूं? मेरी फुद्दी तो गरम हुई पड़ी है, मजा चाहिए इसे – अभी, इसी वक़्त।”
अपनी छोटी बहन दिव्या को इस तरह की बातें करते देख मुझे शर्म सी भी आ रही थी। मगर जिस तरह अपनी नाजुक नाजुक उँगलियों में दिव्या ने मेरा लंड पकड़ा था, मुंह में लिया था, अब तो मैं भी दिव्या की कुंवारी फुद्दी चोदने का मजा लेना चाह रहा था।
मैंने कहा, “चल दिव्या, अभी तो मैं तेरी फुद्दी चूस कर तुझे मजा दे देता हूं – चुदाई जब भी मौक़ा मिला तब कर दूंगा। चल सलवार उतार और लेट जा इस डाइनिंग टेबल पर।”
दिव्या सलवार का नाड़ा खोल रही थी, कि मैंने दिव्या से पूछा, “दिव्या नीचे दरवाजे की कुंडी लगी हुई है या नहीं, ऐसा ना हो, मेरा मुंह तेरी फुद्दी में हो और मम्मी आ जाए।”
दिव्या बोली, “धीरज, दरवाजा अंदर से मैं बंद करके आयी हूं, बस तुम अब देर मत करो।”
दिव्या ने सलवार उतारी और उछल कर डाइनिंग टेबल पर टांगें उठा कर लेट गयी। मैं खड़ा था और दिव्या की फुद्दी बिल्कुल मेरे लंड के सामने थी। एक बार तो मेरा का मन किया, डाल ही दूं दिव्या की कुंवारी फुद्दी में लंड, ले ही लूं दिव्या की कुंवारी फुद्दी चोदने का मजा। मगर फिर मैंने सोचा, जब दिव्या ने चुदाई करवाने के लिए तैयार ही थी, तो फिर तसल्ली से ही चुदाई करने चाहिए। पूरा मजा लेना चाहिए टाइट, सील बंद फुद्दी में लंड डालने का।
मैं कुर्सी पर बैठ गया और दिव्या के फुद्दी को देखने लगा। दिव्या की फुद्दी सच में ही चुदी हुई नहीं थी। फुद्दी कि फांकें एक-दम आपस में जुड़ी हुई थी – बस एक लाइन सी दिखाई दे रही थी – मम्मी की फुद्दी की तरह हल्की खुली हुई नहीं थी। फुद्दी के ऊपर हल्की भूरे रंग कि नरम मुलायन झांटें थी। दिव्या कि दूधिया सफ़ेद सफ़ेद जाँघे, और जांघों के बीच कुंवारी फुद्दी – फुद्दी क्या थी सिर्फ एक लाइन सी थी – अनछुई, कुंवारी। मुझे तो फुद्दी देखने में ही बहुत मस्ती आ रही थी।
मैंने दिव्या कि फुद्दी कि फाकें खोली और जुबान से दिव्या कि फुद्दी चूसने-चाटने लगा। दिव्या मेरी ये चुसाई पांच मिनट भी नहीं झेल पायी और मेरा सर अपने फुद्दी पर दबाते हुई बोली, “ओह धीरज ये क्या हुआ यार, मझे तो मजा भी आने वाला है।”
फिर चूतड़ घुमाते हुए दिव्या बोली, “ओह धीरज निकल गया – ओह गॉड, ऐसा मजा?” और जल्दी ही दिव्या ढीली हो गयी।
मैंने अपना मुंह दिव्या की गीली फुद्दी में से निकाला और खड़ा हो कर दिव्या को भी खड़ा कर दिया। दिव्या ने सलवार पहन ली और सलवार पहनते पहनते बोली, “धीरज ये तो बड़ा मजा आता है, ये फुद्दी चुसाई तो मैं और माधवी भी आपस में करती हैं, मगर ऐसा मजा कभी नहीं आया। आज तो मजा ही अलग सा आया है। जब तुम मेरी फुद्दी चूस रहे थे, तो मेरी आंखों की आगे तुम्हारा लंड घूम रहा था – शायद इसलिए भी ज्यादा मजा आया है।”
मैंने कहा दिव्या, “लड़की-लड़की की फुद्दी चुसाई और लड़की-लड़के की फुद्दी चुसाई में फर्क तो होता ही है।”
दिव्या की फुद्दी चूसने बाद अब मेरी शर्म अब खत्म हो चुकी थी। मैंने अपना सख्त हुआ पड़ा लंड पकड़ कर कहा, “दिव्या जब इसे अपनी फुद्दी में डलवा कर चुदाई करवाओगी, तब पता चलेगा चुदाई का असली मजा क्या होता है। फुद्दी के असली मजे का पता तो तब चलेगा।”
दिव्या मेरे के सामने कुर्सी पर बैठ गयी और कुछ सोचने लगी। फिर दिव्या बोली, “धीरज अभी अप्रैल चल रहा है। मई जून में तुम्हारा तीसरा साल पूरा होने वाला है। तब तुम्हारी लम्बी छुट्टियां होंगी। उन्हीं दिनों मम्मी-पापा किसी ग्रुप के साथ तीर्थ पर जाने का प्रोग्राम बना रहे हैं। दस-बारह दिनों का प्रोग्राम है। तुम तो यहां ही होंगे।
मैं रोहिणी से माधवी को भी बुला लूंगी। उसकी फुद्दी भी अब तक मेरी फुद्दी की तरह कुंवारी है। किसी लड़के का लंड नहीं गया उसमें भी। अब तक फुद्दी की सील नहीं टूटी। दस-बारह दिन तुम हम दोनों की खूब चुदाई करना। खुद भी मजे लेना, और हमें भी मजे देना।”
ये बोल कर दिव्या उठी और बोली, “चलूं नीचे दरवाजा खोलूं मम्मी के आने का टाइम होने वाला है।” और फिर दिव्या बोली, “और हां धीरज, मम्मी आज भी पक्का चुदाई करवाएगी तुमसे। आज कमरे का दरवाजा खुला रखना। पूरी चुदाई देखूंगी तुम्हारी और मम्मी की – “लाइव शो।”
अब तो मुझे भी दिव्या के बातें सुन-सुन कर मस्ती आने लगी थी। मैंने कहा, “दरवाजे को छोड़ो दिव्या, खिड़की डाइनिंग हाल की तरफ वाली खिड़की खुली रखूंगा, वो बंद ही रहती है, उसकी तरफ किसी का ध्यान भी नहीं जाता। वो है भी बेड की साइड की तरफ। बढ़िया से सब दिखाई देगा। कोशिश करूंगा आज की चुदाई में लाइट भी जलती रहे। अगर चुदाई देखने का मजा लेना ही है तो फिर पूरी तरह से लो। मगर दिव्या, अगर तुम्हारी फुद्दी गरम हो गयी तो फिर क्या करोगी?”
दिव्या बोली, “अगर-मगर क्या धीरज, सामने चुदाई होती देख कर फुद्दी तो गर्म होगी ही होगी। मैं और माधवी जब कम्प्यूटर पर पोर्न – चुदाई की फिल्में देखती हैं, हमारी फुद्दीयां तो तब भी गर्म हो जाती हैं, ये तो चुदाई फिर सामने हो रही होगी।”
मैंने कहा, “तो फिर क्या करोगी? उंगली से काम चलाओगी?”
दिव्या बोली, “नहीं धीरज, उसके लिए मेरे पास एक पतला सा रबड़ का लंड है बढ़िया मजा देता है। माधवी भी ऐसे ही एक लंड से काम चलाती है। इन्हें हम चूत में भी डालती है और गांड में भी।”
मैं हैरान था कि ये आज कल की लड़कियां क्या-क्या करती हैं।
मैंने कहा, “तो दिव्या उस रबड़ के लंड से फुद्दी की सील नहीं टूटती?”
दिव्या बोली, “अरे धीरज सील का मतलाब ये थोड़े ही होता है कि फुद्दी के छेद पर कोइ ढक्कन लगा होता है, कोइ कुंडी ताला लगा होता है। लड़कियां उंगली भी तो डालती ही हैं फुद्दी में। फुद्दी की सील का मतलब होता है कि फुद्दी का छेद – जहां से फुद्दी शुरू होती है – कुंवारी, बिना चुदी हुई फुद्दी का छेद वहां से बहुत छोटा होता है और फुद्दी के छेद के आस-पास पतली सी झिल्ली होते है। जब सख्त मोटा लंड पहली पहली बार फुद्दी में जाता है तो फुद्दी का छेद वहां से एक-दम से खुल जाता है और ये पतली झिल्ली टूट जाती है, जिससे उससे उसमें दर्द भी होता है और कई बार खून भी निकलता है।”
“जिस रबड़ के लंड नहीं मैं बात कर रही हूं इतना मोटा नहीं है कि वो झिल्ली ही तोड़ दे। उंगली से जरा सा ही मोटा है, मगर लम्बा छह इंच का है, फुद्दी के अंदर तक चला जाता है। हमारी फुद्दियों की सील तो अब तुम्हारा ये हाथी की सूंड जैसा लंड ही तोड़ेगा – छुट्टियों में। ये बोल कर दिव्या जाने के लिए मुड़ी, और हँसते हुए नीचे जाने लगी।
तभी जैसे दिव्या को कुछ याद आ गया। दिव्या मेरे पास आयी और मेरे होंठों को चूमते हुए बोली, मेरा प्यारा भाई, मम्मी का प्यारा बेटा। क्या मस्त लौड़ा है धीरज तेरा, मेरी आँखों के आगे से हट ही नहीं रहा।
[email protected]