पिछला भाग पढ़े:- खूबसूरत कुंवारी बहन के जिस्म से खेला-5
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे से-
वो रोने लगी। मैंने उसे कहा कि, “जा जाकर अपना मुंह धोकर आ। फालतू रोने की जरूरत नहीं है।” और वो उठ के बाथरूम चली गयी। जब वो बाथरूम गयी, तब मैंने अपने बैग से वियाग्रा -100 ले ली, और क्यूंकि मैं इसे प्यार से चोदने वाला था, लेकिन ये गलत रास्ते निकल गयी थी, तो उसे ये चुदाई याद रहनी चाइये। इसलिए मैंने इसे रफ चुदाई बना दी, ताकि मैं इसे सही रास्ते पे ला सकूं।
और ये मेरी रंडी बन कर रहेगी तो मेरी सारी बातें मानेगी। इसीलिए मैंने वो सेक्स पावर की गोली खाई। अब मैं इस पर बिल्कुल रहम नहीं करूंगा, और रंडी की तरह चोदूंगा।
वो 5 मिनट बाद वापिस आई। मैंने उससे कहा कि जाकर मेरे लिए पानी लेकर आये। वो पानी लेने गयी। वह पानी लेकर जब वापस आई, तो मैंने पानी पिया और उसको बेड पर पटक दिया। फिर उससे वापस अपना लौड़ा चुसवाने लगा। वो मेरा लौड़ा चूस रही थी। दवा की वजह से मेरा लौड़ा जल्दी खड़ा हो गया। अब मैंने दोनों टांगों को अलग किया और उसकी चूत पर लौड़ा टिका कर बैठ गया। फिर मैंने उससे पूछा, “क्या तू पहले भी चुद चुकी है?”
तो उसने मुझे मना कर दिया कि, “नहीं भईया, आपकी कसम, मैंने किसी से भी चुदाई नहीं करवाई। मैं अभी तक सील पैक हूं। मेरी सील किसी ने नहीं तोड़ी।”
यह सुन कर मैं बहुत खुश हुआ। लेकिन मुझे लगा कि मेरी बहन इतना कुछ जानती थी, तो शायद ये मुझसे झूठ बोल रही हो।
मैंने अभी तक इसकी चूत में उंगली नहीं दी थी। तो मैंने इसकी चूत में उंगली देकर देखी। वो बहुत टाइट थी और मेरी उंगली अंदर नहीं जा रही थी।
इससे मुझे लगा कि शायद मेरी बहन सच बोल रही थी। मैं बहुत खुश हुआ कि मेरी प्यारी छोटी मासूम बहन की चूत की सील आज मेरे मोटे लौड़े से टूटेगी। मैं इसे कलि से फूल बना दूंगा। मेरी बहन गलत नहीं थी। पर फिर भी मैंने मेरी बहन को यह नहीं बताया कि तू गलत नहीं है। अगर मैं ऐसा करता, तो वह मुझ पर चढ़ जाती। लेकिन मैंने उसकी इस गलतफहमी को बनाए रखा कि वो बहुत गलत काम कर रही थी। इसलिए वह मेरी सारी बात मान रही थी।
मैं अपना 7 इंच का मोटा लौड़ा मेरी बहन की चूत के ऊपर रगड़ने लगा। अब मेरी बहन थोड़ी कांप पर रही थी और उसने कांपते हुए मुझसे कहा कि, “भईया आपका लौड़ा बहुत मोटा है। मेरी चूत में नहीं जाएगा। मुझे बहुत दर्द होगा प्लीज भईया, मुझे बहुत दर्द होगा भईया प्लीज।”
यह सब सुन कर मेरे लंड का जोश और बढ़ गया और मैंने अपना बहुत सारा थूक अपने लौड़े और मेरी बहन की चूत के ऊपर लगा दिया। अब मैंने अपना 7 इंच का लंड अपनी बहन की गुलाबी मुलायम गद्देदार चूत के लाल छेद पर रखा। फिर पूरे जोर से अंदर करने लगा। मेरी बहन झटपटाने लगी।
वो इधर-उधर हाथ पैर मार कर कहने लगी कि, “भईया बहुत दर्द हो रहा है, मुझे बहुत जोर का दर्द हो रहा है भईया। प्लीज, मैं आज के बाद मेरे दोस्तों से नहीं मिलूंगी। उनसे अपने बोबे भी नहीं दबवाउंगी। उनसे चूत नहीं चटवाउंगी भईया, प्लीज मुझे माफ कर दो।”
उसे लग रहा था कि मैं उसे इन गलतियों की सजा दे रहा था। मैं तो खुद उसे आज अपनी रंडी बना कर चोद रहा था। मैं उसे कैसे बताता कि मेरी खुद की नियत मेरी छोटी बहन के ऊपर खराब हो गई
थी।
अब मैं उसकी चूत के छेद पर अपना लंड रखा और एक जोरदार झटका मारा। इससे मेरा लंड 2 इंच अंदर चला गया। उसकी दोनों टांगें मेरे कंधों पर थी, इसलिए वह ज्यादा हिल-डुल नहीं पाई और जोर से चिल्लाने लगी, “अरे बाप रे, मर गई।” और वह रोने लगी और रोती-रोती कह रही थी कि, “भईया दर्द हो रहा है आह।”
लेकिन मैंने उससे कहां कि, “अपने दोस्तों के साथ जब मजा करती है, तब नहीं दिखता। अब बहन की लौड़ी मेरे साथ चुदने में नाटक कर रही है। रंडी कहीं की, साली चुदक्क्ड़ रांड।”
इतना कह कर मैंने उसके दोनों हाथों को पकड़ लिया और एक जोर का झटका मारा। इससे मेरा बाकी बचा हुआ 5 इच का लौड़ा मेरी बहन की गुलाबी लाल चूत को चीरता हुआ पूरा 7 इंच अंदर घुस गया।
मेरी बहन की बहुत जोरों से चीख निकल गयी आअह्ह्ह्ह हहहहह। वो जोर-जोर से रोने लगी। उसकी आँखों से लगातार आंसू निकल रहे थे। उसकी आँखें उसके दर्द की दास्तां बता रही थी। उसका दर्द ये देख कर मुझे तरस आ गया।
इसलिए मैं थोड़ी देर रुक गया और ऐसे ही उस पर गिर गया। फिर उसे किस्स करने लगा। 2 मिनट बाद जब उसका दर्द थोड़ा कम हुआ, तो वो किस्स में ध्यान लगाने लगी।
तभी मैंने अपनी कमर के झटके धीरे-धीरे मारने शुरु किये, जिससे उसका दर्द अब मजे में बदल गया। उसकी दर्द की चीखें अब मादक सिसकारियों में बदल गयी। मैंने अब अपनी स्पीड बढ़ा दी, और पूरे कमरे में बस जोर-जोर से टप टप टप टप टप टप की आवाजे गूंज रही थी। जिससे मेरी बहन को अब दर्द होने लगा और वो फिर से जोर-जोर से चिलाने लगी, “आआहह्ह्ह्ह भईईईयाआ धीईईरररेएएए…
आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्हह। हहह ईहहह ओओह्हह्। आह भाई आह्ह ओह रूको ना, आआआ भईया आआ आअह्ह आह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह। धीरे ना भईया, प्लीज़ मेरी चूत अंदर से छिल गई भैया प्लीज़ ना धीरे।
उसकी चूत की सील टूट गयी थी और खून बाहर आ रहा था। लेकिन उसे अभी तो दर्द में कुछ नहीं पता था। मैं उसकी चूत की जोरदार धक्का-पेल चुदाई कर रहा था।
कभी उसके बोबे पे चांटे मारता, तो कभी उसकी गर्दन पे दांतो से काटता। उसके बोबे (बूब्स) पे अलग-अलग बहुत सारे दातों से काटने के निशान बन गये थे। उसकी गर्दन पे भी मैंने अपने दांतो से काट काट के निशान बना दिये। उसके कंधे पे हाथों पर और गालों पर भी बहुत सारे मैंने लव बाईटस बना दिये थे। वो भी अपनी छोटी बहन पर।
यहां बहन और भाई की नाजायज़ चुदाई हो रही थी और कमरे में सिर्फ बहन की मादक आवाजे निकल रही थी।
इसके आगे की कहानी अगले पार्ट में। अगर आपको ये कहानी अच्छी लगी तो मुझे [email protected] पे मैसेज करे।
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