पिछला भाग पढ़े:- जुड़वाँ दीदियों के साथ जिस्म की चाहत-7
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
कुछ दिनों बाद नेहा दीदी और पायल दीदी का जन्मदिन था और मुझे उन दोनों के लिए कुछ खास करना था। पहले जब हम तीनों आम भाई-बहन की तरह रहते थे, उस समय मैं कोई छोटी-मोटी चीजें देकर उनको खुश करता था। लेकिन अब हालात अलग थे। पायल दीदी को मैंने पूरी तरह नंगी देखा था और नेहा दीदी ने तो मेरा लंड अपने मुंह में लिया था। अब हमारे बीच सिर्फ भाई-बहन का रिश्ता नहीं था, बल्कि उससे आगे का नाता बन चुका था और उसी के लिए मुझे उन दोनों के लिए कुछ ऐसा करना था जो मैंने कभी नहीं किया था।
काफी सोचने के बाद मैंने हम तीनों के लिए शहर से थोड़ा दूर एक फाइव स्टार होटल में तीन कमरे बुक किए। इतने दिनों तक उसी छोटे से अपार्टमेंट में रह कर हम तीनों बुरी तरह से थक चुके थे। हम तीनों को किसी नई जगह की ज़रूरत थी।
जब मैंने उन्हें बताया कि यह बुकिंग पूरे चार दिनों की है, तो दोनों की आंखों में चमक आ गई। खुशी से वे एक साथ मेरी तरफ लपकीं और मुझे कस कर गले लगा लिया। उस पल उनकी खुशी मेरे सीने से लग कर महसूस हो रही थी, जैसे मेरी एक छोटी सी योजना ने उनके चेहरे पर सुकून और उत्साह दोनों भर दिए हो।
अगले दिन हम तीनों शाम ढलते-ढलते होटल पहुँच गए। सामने फैला हुआ वह बड़ा सा होटल दूर से ही किसी सपने जैसा लग रहा था। अंदर घुसते ही ठंडी हवा, हल्की खुशबू और सलीके से सजे हॉल ने थकान को जैसे पल भर में उतार दिया। स्विमिंग पूल की झलक एक तरफ से दिखाई दे रही थी, जहां पानी की सतह पर रोशनी थिरक रही थी।
स्टाफ हमें हमारे कमरों तक ले गया। तीनों कमरे पास पास ही थे, जिससे एक अजीब सी तसल्ली महसूस हुई। बैग कमरे में रखवा कर मैं अंदर आया, कपड़े बदले और बिस्तर पर लेट गया। बिस्तर इतना नरम था कि लगा अभी आंखें बंद करूं और नींद मुझे अपनी बाहों में लेले। मैं उसी सुकून में डूबने ही वाला था कि अचानक दरवाज़े पर हल्की सी दस्तक हुई।
मैं उठा और दरवाज़ा खोला तो सामने नेहा दीदी और पायल दीदी खड़ी थी। दोनों बिना कुछ कहे अंदर आ गई और सीधे आकर बिस्तर पर बैठ गई। मैंने हल्की सी मुस्कान के साथ पूछा, “क्या हुआ?”
नेहा दीदी ने सहज सी आवाज़ में कहा, “हम बस तुम्हें थैंक यू कहने आए हैं।” यह कहते हुए उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथों में ले लिया। उनकी उंगलियों का स्पर्श कुछ अलग सा सुकून दे रहा था।
पायल दीदी ने मेरी तरफ देखा और हल्की सी मुस्कान दे दी। उनके हाथ में मोबाइल था, जैसे वे कुछ देख या लिख रही हों, लेकिन उनकी नजरें बार-बार मेरी तरफ उठ जाती थी।
हम तीनों बिस्तर पर साथ-साथ बैठ गए। कमरे में हल्की रोशनी थी और बाहर से आती शाम की ठंडी हवा परदे हिला रही थी। छोटी-छोटी बातों से शुरू हो कर हमारी बात-चीत धीरे-धीरे लंबी होने लगी, और उस पल में एक अजीब सी नज़दीकी अपने आप पनपती चली गई।
लगभग आधे घंटे बाद पायल दीदी ने अचानक कहा, “मुझे वॉशरूम जाना है।”
यह कह कर वह उठी और कमरे के भीतर बने वॉशरूम की तरफ चली गई। उनके जाते ही कमरे में एक हल्की सी खामोशी फैल गई। अब बिस्तर पर सिर्फ मैं और नेहा दीदी बैठे थे। उन्होंने मेरी तरफ देखा, जैसे कुछ कहना चाहती हो। फिर हल्की मुस्कान के साथ बोली, “गोलू, इस सब के लिए थैंक यू… हमें सच में पढ़ाई से थोड़ा ब्रेक चाहिए था।”
मैंने हल्के से कहा, “थैंक यू मत कहो…”
और अपनी बात पूरी करने ही वाला था कि नेहा दीदी थोड़ा और पास आ गई। अगले ही पल उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। उनके होंठ नरम थे और हल्के से दबे हुए। मैं कुछ सेकंड तक शांत रहा, फिर अपने होंठ उनके होंठों के साथ मिला दिए। हमारी सांसें पास-पास थी। उन्होंने सिर थोड़ा तिरछा किया और मैं भी अपने आप वैसा ही हो गया। होंठ अलग-अलग होते और फिर मिल जाते।
बीच-बीच में उनकी जीभ हल्के से मेरे होंठों को छूती और मैं भी वैसा ही जवाब देता। यह सब बिना किसी जल्दबाज़ी के, बस महसूस करते हुए हो रहा था। मेरे हाथ अपने आप उनकी पीठ पर चले गए और उनके कंधों के पास ठहर गए। उन्होंने भी मेरा हाथ पकड़ कर थोड़ा पास खींच लिया।
तभी अचानक वॉशरूम की तरफ से हल्की सी आवाज़ आई। दरवाज़े की कुंडी हिलने की आवाज़ साफ सुनाई दी। नेहा दीदी एक-दम चौंक गई। उन्होंने तुरंत किस तोड़ दी और हल्के से पीछे हट गई।
उन्होंने मेरी तरफ झुक कर बहुत धीमी आवाज़ में फुसफुसाया, “शुक्रिया गोलू इस सब के लिए।”
अगले दिन सुबह मैं जल्दी से तैयार होकर होटल से बाहर शहर की तरफ बढ़ा क्योंकि मुझे पायल दीदी और नेहा दीदी के लिए कुछ गिफ्ट लेना था। होटल में रुम बुक करवाने के बाद मेरे पास ज्यादा पैसे नहीं बचे थे। इसलिए मैंने सोचा की दोनों के लिए सिर्फ कुछ कपड़े खरीद लूं। जिससे पैसों को कमी भी महसूस नहीं होगी और वह दोनों भी खुश हो जाएंगी।
कपड़ों की दुकान पर पहुँचते ही मैं थोड़ा कन्फ्यूज़ हो गया। समझ नहीं आ रहा था कि दोनों के लिए किस तरह के कपड़े लूँ। सबसे पहले मैंने पायल दीदी के लिए कुर्ती और जींस चुनी। वह ज़्यादातर सादे और आरामदायक कपड़े पहनती हैं, इसलिए मुझे लगा यही उनके लिए सही रहेगा। जब मैंने वो कपड़े हाथ में लिए, तो मन में बस इतना ही ख्याल आया कि गिफ्ट देख कर वह खुश होंगी, शायद प्यार से गाल पर एक हल्की सी किस्स कर दे और मेरे लिए वही काफी था।
इसके बाद बारी नेहा दीदी की आई। उनके लिए कुछ ढूँढना आसान नहीं था। मैं कम से कम एक घंटा अलग-अलग रैक खंगालता रहा, लेकिन कुछ भी ऐसा नहीं मिला जो उन्हें पूरी तरह सूट करे। तभी मेरी नज़र एक नीली बिकिनी पर पड़ी। मुझे पता था कि वह अक्सर स्विमिंग नहीं करती। फिर भी उस पल मुझे लगा कि यह उनके लिए एक अलग और बोल्ड गिफ्ट हो सकता है। मेरे दिमाग में एक फैंटेसी सी बन गई, कि कभी किसी खास पल में वह इसे पहनना पसंद करेंगी। यही सोच कर मैंने आखिरकार वही चुन ली।
दोपहर को जब मैं होटल वापस पहुँचा, तो थकान साफ महसूस हो रही थी। कमरे में आते ही मैंने शॉपिंग के बैग बेड पर रख दिए और सीधे बाथरूम की ओर चला गया। नहाते वक्त गर्म पानी शरीर पर गिर रहा था और दिन भर की भाग-दौड़ धीरे-धीरे उतरने लगी। तभी मुझे हल्की सी आहट सुनाई दी, जैसे कोई कमरे में आया हो। मैं अभी समझ ही रहा था कि तभी बाहर से पायल दीदी की आवाज़ आई, “गोलू… क्या तुम नहा रहे हो?”
उनकी आवाज़ सुनते ही मेरा ध्यान पूरी तरह बाथरूम के दरवाज़े पर चला गया।
मैंने थोड़ी ऊँची आवाज़ में कहा, “हाँ दीदी, बस थोड़ी देर।”
कुछ पल बीते ही थे कि फिर से उनकी आवाज़ आई, “गोलू, ये जो ड्रेस तुम बेड पर छोड़ गए हो, मुझे बहुत पसंद आई। क्या मैं इसे ट्राय कर सकती हूँ?” यह सुनते ही मैं घबरा गया और तुरंत बोल पड़ा, “दीदी, आपने बैग क्यों खोल दिए? वो तो आपके बर्थडे का गिफ्ट था, मैं उसी दिन देना चाहता था।”
बाहर से उनकी हँसती हुई आवाज़ आई, जिसमें हल्की सी शरारत भी थी, “सॉरी गोलू, खुद को रोक नहीं पाई। गिफ्ट बहुत प्यारा है।” फिर उन्होंने सवाल किया, “लेकिन एक बात समझ नहीं आई। तुमने नेहा दीदी के लिए यही क्यों नहीं लिया?”
यह सुनते ही मेरा चेहरा अपने आप लाल पड़ गया। कुछ सेकंड की चुप्पी के बाद मैंने बस इतना कहा, “वो… नेहा दीदी ने कहा था कि उन्हें अपने बर्थडे पर कुछ अलग चाहिए।”
थोड़ी देर बाद मैंने नहाना पूरा किया, शरीर से पानी पोंछा और कमर के चारों ओर तौलिया लपेट कर बाथरूम से बाहर आया। जैसे ही मैं कमरे में पहुँचा, एक पल के लिए साँस रुक सी गई। पायल दीदी सामने खड़ी थी, नीले रंग की वही बिकिनी पहने हुए। वह आईने के सामने खड़ी होकर स्ट्रैप्स को ठीक कर रही थी।
बिकिनी उनके शरीर पर कस कर बैठी हुई थी। ऊपर का हिस्सा उनके कंधों और भरावदार, बड़े स्तनों को मुश्किल से संभाल पा रहा था। हर हल्की सी हरकत पर ऐसा लग रहा था मानो उनके स्तन कपड़े की सीमा से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हों; स्ट्रैप्स पर हल्का सा दबाव साफ़ दिख रहा था। नीले कपड़े के किनारे उनकी त्वचा को कस कर थामे हुए थे, फिर भी उनके उभार इतनी साफ़ रेखा खींच रहे थे कि नज़रें वहीं ठहर जाएँ।
नीचे की तरफ़ मेरी नज़र अपने आप चली गई। बिकिनी का निचला हिस्सा उनकी कमर पर ठीक से बैठा था और जांघों के बीच हल्का सा कसाव साफ़ दिख रहा था। उस कपड़े के नीचे उनका नाज़ुक हिस्सा बस एक सॉफ्ट सा शेप बना रहा था। ना कुछ खुला, ना ज़्यादा छुपा। हर हल्की मूवमेंट पर कपड़ा थोड़ा सा खिंचता, फिर अपनी जगह लौट आता, जैसे सब कुछ कंट्रोल में हो लेकिन पूरी तरह ढका भी ना हो।
उसी पल उन्होंने आईने से नज़र हटा कर मेरी तरफ देखा। चेहरे पर साफ़ एक्साइटमेंट था। वह हल्की सी घूमी, जैसे अपना लुक दिखा रही हों, और मुस्कुराते हुए बोली, “तो गोलू… बताओ, मैं कैसी लग रही हूँ?”
मैंने उन्हें पाँव की उँगलियों से लेकर माथे तक देखा। वो नीली बिकिनी, उनका कॉन्फिडेंस, और कमरे की रोशनी में उनका पूरा लुक। मन में एक पल को सच बोलने का ख़याल आया कि ये बिकिनी नेहा दीदी के लिए ली थी, उनके लिए नहीं… लेकिन हिम्मत नहीं हुई। शब्द गले में अटक गए।
मैंने नज़रें उनसे मिलाई, हल्की सी साँस ली और बस इतना कहा, “आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं, पायल दीदी।”
अगले ही पल वह बिल्कुल पास आ गई और बिना कुछ कहे मुझे कस कर गले लगा लिया। उनका शरीर मेरे सीने से लग गया। उनके स्तनों का नरम दबाव मेरी छाती पर साफ़ महसूस हो रहा था, इतना पास कि साँसें आपस में टकरा जाएँ। वह मुझे थामे रहीं, जैसे पकड़ ढीली करना ही ना चाहती हों। मैं एक पल को हिल भी नहीं पाया। उनकी बाँहों की गर्मी, उनकी नज़दीकी, और वह एहसास, सब कुछ एक साथ था। उन्होंने सिर हल्का सा मेरी छाती की ओर झुका लिया, और गले लगाने की पकड़ और मजबूत हो गई।
थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे हल्का सा अलग किया। आँखें झुकी हुई थी, आवाज़ में हिचक और शर्म मिली हुई थी। बहुत धीमे से उन्होंने कहा, “गोलू… तुम्हारा लंड मेरे पेट में चुभ रहा है।” कहते हुए उनके होंठ काँपे, और चेहरे पर एक शरमाई सी मुस्कान फैल गई।
मैं झेंप गया। मैंने तुरंत नज़रें हटा ली और तौलिये को संभालते हुए एक क़दम पीछे हुआ। दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। “सॉरी, पायल दीदी,” मैं कहना ही चाहता था कि वह हल्की सी मुस्कान के साथ बीच में बोल पड़ी।
“सॉरी मत बोलो, गोलू,” उनकी आवाज़ नरम थी, समझदारी से भरी हुई। “शायद तुमने मुझे इस तरह देखा… इसलिए ऐसा हो गया। मैं समझ सकती हूँ।”
तौलिया मेरी कमर के चारों तरफ लिपटा था और मैंने अंदर से अंडरवियर भी नहीं पहना था, इसलिए मेरा लंड सीधा तौलिए के कपड़े से सट कर तन कर खड़ा था। दीदी दूसरी तरफ देखने की कोशिश करती और फिर आँखों के कोने से मेरी तरफ देख लेतीं। उनका चेहरा शर्म की वजह से थोड़ा सा लाल पड़ गया था। मैंने अपने दोनों हाथ सामने लाकर लंड को छिपाने की कोशिश की, मगर पायल दीदी को उस बिकिनी में देखने के बाद से अपने अंदर उठती आग को नज़र-अंदाज़ करना मुश्किल हो रहा था। मुझे लग रहा था कि अभी ढीला पड़ जाएगा, मगर उसकी सख़्ती कम होने का नाम ही नहीं ले रही थी।
“गोलू यह बहुत सख्त हो गया है।” उन्होंने शर्मा कर कहां।
“हां दीदी मैं भी नहीं जानता कैसे यह हो गया।” मैंने जवाब दिया।
कुछ पल की चुप्पी छा गई। कमरे में बस हमारी साँसों की आवाज़ थी। पायल दीदी ने हल्का सा गला साफ़ किया और मेरी तरफ़ एक नज़र डाली, फिर तुरंत नज़रें झुका ली। उनकी उँगलियाँ आपस में उलझी हुई थी, जैसे शब्द ढूँढ रही हों। वह एक पल चुप रहीं। फिर उन्होंने धीरे से कहा, आवाज़ में झिझक और हल्की सी चिंता घुली हुई थी, “तो फिर… कुछ ऐसा करो कि ये ढीला हो जाए।”
मैंने गहरी साँस ली। दिल की धड़कन कानों में गूँज रही थी। थोड़ी हिचक और बहुत धीमी आवाज़ में मैंने कहा, “दीदी… इसके लिए मुझे मास्टरबेशन करना पड़ेगा। क्या आप थोड़ी देर के लिए कमरे से बाहर चली जाएँगी, ताकि मैं… ये कर सकूँ?” कहते कहते मेरी आवाज़ और भी हल्की हो गई, और नज़रें अपने आप नीचे झुक गई।
उन्होंने धीरे से कहा, “गोलू… तुमने मुझे इतना खूबसूरत तोहफ़ा दिया है। तो मैंने सोचा, मैं भी तुम्हारे लिए कुछ करूँ।”
उनकी नज़र में अपनापन था, आवाज़ में भरोसा। “अगर मेरी वजह से तुम्हें इतनी बेचैनी हो रही है, तो मैं तुम्हें शांत होने में मदद कर सकती हूँ।”
मैं कुछ समझ पाता, उससे पहले ही वह फिर एक क़दम आगे बढ़ी। उनके हाथ मेरी कमर तक आए, और एक ही झटके में तौलिया ढीला होकर नीचे गिर गया। पल भर के लिए समय जैसे थम सा गया। पायल दीदी ने पहली बार मुझे इस हाल में देखा। मेरा लंड पूरी तरह से सख़्त खड़ा था। पायल दीदी ने एक बार मेरे लंड की तरफ देखा और फिर मेरा चेहरा देख कर मुस्कुरा गई, मानो वह सच-मुच उस हालत में मुझे संभालना चाहती थी।
उन्होंने अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर मेरे लंड के चारों तरफ अपनी उँगलियों से पकड़ा। अपने लंड पर पहली बार पायल दीदी के मुलायम हाथों की छुअन महसूस होते ही मेरे पूरे बदन में बिजली सी दौड़ गई। यह पहली बार था जब वह मेरे किसी निजी हिस्से को छू रही थी। कुछ दिनों पहले मैंने उन्हें नंगी देखा था, लेकिन आज उनके सामने खुद नंगा खड़ा होना मुझे शर्मिंदा कर रहा था।
पायल दीदी ने हल्की सी मुस्कान के साथ मेरी तरफ देखा, वही मुस्कान जिसमें झिझक भी थी और अपनापन भी। फिर नर्म आवाज़ में बोली, “अगर तुम्हें ठीक ना लगे… तो मैं रुक सकती हूँ।”
मैंने उनकी आँखों में देखा। दिल की धड़कन तेज़ थी, लेकिन मन साफ़। बिना हड़बड़ाए मैंने कहा, “नहीं, पायल दीदी… मत रुकिए।”
मेरी बात सुन कर वह हल्का मुस्कुराई और फिर जोर से अपनी उंगलियों मेरे लंड के चारों तरफ दबा बैठी। अगली ही पल उन्होंने अपने हाथ हिलाने शुरू कर दिए – आगे-पीछे। मेरी कमर अपने आप आगे की तरफ बढ़ जाती जब भी दीदी हौले से अपना हाथ पीछे तक ले जाकर आगे कि तरफ बढ़ाती। जिस पायल दीदी को मैं बचपन से चाहता था, आज वही पायल दीदी अपने नाज़ुक हाथों से मेरा लंड हिला रही थी और यही बात मुझे ज्यादा मज़ा दे रही थी।
जब भी पायल दीदी के हाथ मेरे लंड के ऊपर फिसलते, मेरा पूरा बदन सिहर उठता। उनकी उंगलियाँ जैसे मेरे अंदर जमा रस को निचोड़-निचोड़ कर ऊपर की तरफ धकेल रही हों। उनके मुलायम हाथों का स्पर्श मेरे पूरे लंड में आग लगा रहा था; उसकी नसें फूल कर सख़्त हो चुकी थी और सिरा भीतर से जलने सा गरम लगने लगा था।
उसी एहसास में मैंने अपने हाथों से उनके सिर के पिछले हिस्से को पकड़ा और उनका मुँह मेरे लंड के पास खींचा। हालांकि जैसे ही उनके होंठ पास पहुँचे, दीदी ने अचानक मेरा लंड हिलाना रोक दिया और आँखों के कोने से मेरी तरफ देखा।
“गोलू, तुम क्या कर रहे हो?” उन्होंने शांत आवाज़ में पूछा।
मैंने हिम्मत करके कहा, “दीदी, क्या आप यह अपने मुँह से कर सकती हो?”
उन्होंने एक पल को मेरे चेहरे की तरफ देखा, मानो मैंने कुछ ग़लत कह दिया हो। फिर हल्की सी मुस्कान के साथ बोली, “तुम जब तक एंट्रेस एग्ज़ाम पास नहीं कर लेते, तब तक नहीं, गोलू। उसके बाद तुम मेरे साथ सब कुछ कर सकते हो।”
इतना कह कर दीदी ने फिर एक बार मेरा लंड अपने हाथों में पकड़ा और पहले से ज़्यादा ज़ोर से हिलाने लगी। इस बार उनकी कलाई तेज़ी से चल रही थी और उनकी हथेली मक्खन सी फिसलन भरी लग रही थी। हर झटके के साथ मेरे पेट के अंदर एक अजीब सी गर्मी जमा होने लगी, जैसे कुछ उबल-उबल कर ऊपर चढ़ रहा हो। साँसें भारी हो गई, छाती तेज़ी से उठने गिरने लगी और पैरों में हल्का सा कंपन दौड़ गया। उनके हाथ एक ही रफ़्तार में बिना रुके चल रहे थे और उसी रफ़्तार ने मेरे अंदर की सारी रोक तोड़ दी।
मेरे लंड के सिरे पर अजीब सी गुदगुदी और फिर जलन सी महसूस हुई। नसें खुद बा खुद सिकुड़ने लगी और भीतर जमा गर्मी ने बाहर निकलने का रास्ता ढूँढ लिया।
“दीदी… मैं आ रहा हूँ,” मैंने हकलाते हुए कहा।
“ठीक है, गोलू,” उन्होंने और ज़ोर से झटके देते हुए कहा।
अगले ही पल जैसे अंदर कुछ फट सा गया। सफ़ेद पानी की गर्म धार झटके के साथ बाहर फूट पड़ी। वह गर्माहट इतनी तेज़ थी कि पूरे बदन में एक लहर सी दौड़ गई। पहली धार दीदी की हथेलियों के बीच भर गई, दूसरी और तीसरी धार उनके हाथों से फिसलकर नीचे गिरने लगी। कुछ बूँदें उनके पैरों पर टपकीं और फर्श की तरफ बह गई। लगातार निकलती गर्म धार के साथ मेरा शरीर ढीला पड़ने लगा, साँसें टूट टूट कर आने लगी और सिर हल्का सा घूम गया।
दीदी ने आख़िरी बूंद तक मेरा लंड थामे रखा, मानो वह उस गर्मी को पूरी तरह महसूस करना चाहती हों। उनकी हथेलियाँ उस सफ़ेद पानी से भीगी हुई थी और कुछ छींटे उनके बिकिनी पर भी चिपक गए, लेकिन उन्होंने कुछ कहा नहीं। उन्होंने बस मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा दिया — ऐसी मुस्कान, जिसमें यह साफ़ झलक रहा था कि मेरा यूँ बिखर जाना उन्हें भी भीतर से खुश कर गया है।