पिछला भाग पढ़े:- जुड़वाँ दीदियों के साथ जिस्म की चाहत-5
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
नेहा दीदी मेरे सामने घुटनों पर बैठी हुई थी, पूरी तरह से नंगी। उन्होंने एक पल मेरे चेहरे को मुस्कुरा कर देखा और अगले ही पल अपने होंठ मेरे सख्त लंड पर रख दिए। उन्होंने जोर से उसे चूमना शुरू किया। पहले तो वह धीरे-धीरे चूमती रहीं, ताकि मेरा लंड पूरी तरह सख्त हो जाए। मुझे उनके होंठों की नरमी साफ़ महसूस हो रही थी।
फिर उन्होंने अपनी जीभ से हल्की-हल्की हरकतें शुरू की, जैसे हर स्पर्श से मेरी सांसें और तेज़ होती जा रही हो। उनका सिर बहुत धीरे हिलने लगा – आगे, फिर पीछे, एक लय में। हर बार जब उनके होंठ नीचे जाते, मेरी उंगलियाँ अपने आप उनकी ज़ुल्फ़ों में फँस जाती।
शॉवर अब भी चालू था। ऊपर से गिरता गर्म पानी बिना रुके हमारे बदन पर बह रहा था। पानी की धारें कंधों से फिसल कर सीने, पेट और पैरों तक जाती, जैसे पूरे शरीर को एक साथ ढक रही हों। बाथरूम भाप से भरा था, शीशे धुंधले हो चुके थे, और हर तरफ पानी की लगातार आवाज़ थी। हम दोनों नंगे थे, और पानी हमारी त्वचा को नरम बना रहा था, हर स्पर्श को और साफ़ महसूस कराने जैसा।
मैंने नेहा दीदी के चेहरे की तरफ़ देखा। पानी की बूंदें उनकी पलकों पर ठहर कर फिर गालों से नीचे गिर रही थी। उनकी आँखें आधी बंद थी, जैसे वह उसी पल में पूरी तरह डूबी हो। कभी उनकी भौंहें हल्की-सी सिकुड़ती, तो कभी होंठों के किनारों पर एक धीमी-सी मुस्कान उभर आती।
मेरा ध्यान उनके स्तनों पर चला गया। शॉवर का पानी ऊपर से गिरते हुए उनके स्तनों पर फैल रहा था। पानी की धारें गोलाई को छूती हुई नीचे की ओर बहती, और हर बूंद के साथ उनकी त्वचा पर हल्की चमक आ जाती।
मेरे होंठ अपने आप हिले और मैंने धीमी आवाज़ में कहा, “तुम बहुत खूबसूरत हो, नेहा दीदी।”
अगले ही पल उनका चेहरा हल्का-सा लाल पड़ गया। उन्होंने धीरे से, लगभग चेतावनी देते हुए कहा, “ऐसे मत बोलो, गोलू… नहीं तो मैं रुक जाऊँगी।”
मैंने तुरंत कहा, “मत रुको, नेहा दीदी।” मेरे शब्द सुनते ही उन्होंने एक पल के लिए मुझे देखा, फिर हल्की-सी सांस ली। शॉवर की आवाज़ के बीच वह फिर से नीचे झुकी और मेरे और करीब आ गई।
फिर उन्होंने मेरे लंड को दोनों हाथों से थामा और अपने होंठों को एक बार फिर मेरे लंड पर रख दिया। यह एक नरम, शांत सा एहसास था। उनके होंठ गर्म थे, और शॉवर का पानी उन पर फिसलता हुआ नीचे की ओर बह रहा था। जैसे ही उनके होंठ मेरे लंड पर टिके, मेरे भीतर एक हल्की सी कंपकंपी दौड़ गई।
पहले नेहा दीदी मेरे लंड को होंठों से सिर्फ चूमती रही। उपर से लेकर नीचे तक हर जगह यहां तक मेरे टेस्टीकल को भी उन्होंने अपने मुलायम होंठों से चूमा। उनके होंठों का छूना हर बार मेरे अंदर गर्मी बढ़ा रहा था। जब मेरा लंड पूरी तरह से सख्त हो गया, इतना सख्त कि मुझे लगा कहीं फट ना जाए, उस पल उन्होंने अपने होंठों को हल्के से खोल कर उसे अपने मुंह के अंदर आने दिया। पहले तो मुझे उनके मुंह का गीला छूना महसूस हुआ।
कुछ ही पलों में उनकी लय बदलने लगी। जो हरकतें अभी तक ठहरी हुई थी, उनमें अचानक तेज़ी आ गई। उनका सिर पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ी से आगे-पीछे होने लगा, जैसे उन्होंने एक साफ़ रफ्तार पकड़ ली हो।
अब मुझे अपने लंड के चारों तरफ़ उनके मुँह की गर्माहट साफ़ महसूस होने लगी। यह कोई तेज़ झटका नहीं था, बस एक लगातार, सुकून देने वाली गर्मी थी जो धीरे-धीरे पूरे शरीर तक फैल रही थी। सांस अपने आप भारी होने लगी और ध्यान उसी एहसास पर टिक गया।
उनका मुँह मुलायम लगा, जैसे हर हरकत में संभाल और ध्यान हो। होंठों की पकड़ हल्की सी बदली, कभी थोड़ी ढीली, कभी ज़रा कसती हुई, और उसी के साथ मेरे भीतर की सिहरन बढ़ती चली गई। भाप के बीच उनकी आँखें आधी बंद थी, माथे पर हल्की सिकुड़न थी, और गालों में थोड़ा तनाव दिख रहा था।
मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अपने दोनों हाथों से उनके बालों को पकड़ कर अपनी कमर को हिलाना शुरू किया। मेरा पूरा लंड उनके गले तक जाता हुआ मुझे महसूस हो रहा था, उन्होंने मुझे पीछे की तरफ धकेलने की कोशिश की, लेकिन मैंने अपनी कमर की रफ्तार नहीं रोकी। उनका गीला मुंह मेरे लंड के चारों तरफ महसूस हो रहा था। जब भी मैं जोर से उनके मुंह के अंदर अपना लंड धकेलता नेहा दीदी खांसते हुए उसे बाहर निकालने की कोशिश करती।
उस पल मैंने अपनी कमर की रफ्तार और तेज़ कर दी। पानी लगातार बहता रहा और हर धक्का के साथ मेरे जिस्म के अंदर तनाव बढ़ता गया। अब नेहा दीदी ने लड़ना छोड़ दिया था, उनका गला खुला सा लग रहा था और उनका मुँह मेरे लंड पर पहले से भी ज़्यादा गरम महसूस हो रहा था।
उनकी उँगलियाँ मेरे जाँघों को पकड़ चुकी थी, जैसे वह खुद को संभाल रही हों। उनके गले से आती घुटी हुई आवाज़ें शॉवर की तेज़ आवाज़ के बीच भी साफ़ सुनाई दे रही थी। मैं अंदर तक जा रहा था और हर बार जब मैं बाहर आता, तो उनके होंठ मेरे लंड के सिर को थोड़ी देर तक थामे रखते, जैसे वह मुझे छोड़ना नहीं चाहती हों।
मुझे महसूस होने लगा था कि मैं ज्यादा देर तक खुद को रोक नहीं पाऊँगा। हर धक्का पहले से भारी और गहरा था, और मेरे बदन में गर्मी जमा होती जा रही थी। नेहा दीदी की आँखें अब तक खुल चुकी थी और वह ऊपर देख कर मुझे देख रही थी—जैसे वह समझ गई हों कि अब मैं फटने ही वाला था।
मैंने दांत भींच कर फुसफुसाया, “नेहा… मैं…”
उन्होंने बिना रुकते सिर हिलाया, जैसे कह रही हों, सब छोड़ दो मेरे अंदर।
बस उसी पल मेरे अंदर की आखिरी दीवार टूट गई। मेरी कमर खुद ब खुद आगे धकेली और मैं जोर से उनके मुँह के अंदर फट गया। गर्म, गाढ़ा रस लहरों में उनके गले के अंदर उतरता गया। उनकी आँखें हल्की-सी फैल गई लेकिन उन्होंने एक सेकंड भी नहीं छोड़ा। उन्होंने सब निगल लिया, एक बूंद भी बाहर नहीं छोड़ी। फिर उन्होंने धीरे से अपना सिर पीछे किया, साँसें भारी थी, पानी चेहरे पर गिरता रहा।
उन्होंने ऊपर देखा, गाल लाल, आँखें चमकती हुई, और मुस्कुरा कर बोली, “अब खुश?”
मैं हाँफते हुए दीवार से टिक गया और सिर्फ इतना कह पाया, “नेहा दीदी… तुम कमाल हो…”
उन्होंने शरारती लहजे में कहा, “अभी तो बस शुरुआत है।”
शाम होते होते माहौल बिल्कुल बदल गया था। मैं, पायल दीदी और नेहा दीदी साथ बैठ कर खाना खा रहे थे। प्लेटें सामने थी, सब कुछ आम दिख रहा था… लेकिन हमारे बीच हवा में एक अजीब सी गर्मी तैर रही थी।
मैं चाहे जितनी कोशिश करता, नेहा दीदी की आँखों में सीधे नहीं देख पा रहा था। जैसे ही मेरी नज़र उनकी तरफ उठती, खुद ब खुद सिर झुक जाता। और मज़ेदार बात यह कि वह भी बिल्कुल वैसा ही कर रही थी।
कभी मौका पड़ता और हमारी आँखें मिल जाती, तो नेहा दीदी तुरंत नजरें हटा लेती जैसे पकड़ी गई हो। लेकिन उनकी गालों का रंग उन्हें धोखा दे देता। धीरे-धीरे उनका चेहरा गुलाबी होता जा रहा था, और उनकी गर्दन तक लालिमा उतर आई थी। पायल दीदी खुश होकर कुछ ना कुछ पूछ रही थी, बात कर रही थी, लेकिन असली कहानी सिर्फ हमारी नज़रों के बीच चल रही थी।
उस रात के बाद की सुबह अलग थी। मैं उठ कर दाँत ब्रश करने गया। रविवार था, इसलिए पायल दीदी अभी भी गहरी नींद में थी।
मैंने जैसे ही बाथरूम का दरवाज़ा खोला, पानी की हल्की आवाज़ के साथ मुझे वही दिखी, नेहा दीदी।
वह नल पर झुक कर अपना चेहरा धो रही थी। उनके बदन पर सिर्फ फिट क्रॉप टॉप और ढीला शॉर्ट्स था।
वह क्रॉप टॉप इतना फिट था कि जैसे उनकी छाती को दोनों तरफ से पकड़ कर उभार रहा हो। कपड़ा उनके स्तनों के आकार को साफ़ दिखा रहा था, गोल, भरे हुए, ऊपर की ओर उठे… जैसे अंदर कोई गर्म सांस हलचल कर रही हो।
जब वह चेहरा धोकर सीधी हुई, पानी की बूंदें उनकी गर्दन से होते हुए टॉप के अंदर गायब हो गई। उसी लम्हें कपड़ा और ज्यादा उनके स्तनों से चिपक गया। मेरी नज़र अपने आप वही टिक गई। और शायद उन्हें महसूस भी हुआ, क्योंकि उन्होंने जल्दी से अपने बाल पीछे किए… और मेरी तरफ देखा।
एक सेकंड के लिए हमारी आँखें मिली, फिर दोनों ने नजरें झुका ली। कुछ पल बाद मेरी नजरें अपने आप उनके छाती की तरफ चली गई और मैं उनकी उस खुबसूरती को देखने लगा। सुबह के माहौल में नेहा दीदी कुछ ज्यादा ही अच्छी लग रही थी।
“सुबह-सुबह क्या देख रहा है ऐसे?” उन्होंने धीरे से पूछा। मैंने आँखें नीचे कर ली, लेकिन मुस्कराहट रोक नहीं पाया। “कुछ नहीं… बस आप बहुत अच्छी लग रही हो।”
वह एक कदम करीब आई। “अच्छी लग रही हूँ? सिर्फ देखने के लिए?”
मैंने सिर उठाया, उनकी आँखों में देखते हुए कहा, “नहीं दीदी… मन कर रहा है छूने का।”
उनका चेहरा हल्का-सा लाल हुआ, लेकिन इस बार उन्होंने नज़रें नहीं हटाई। “छू लेता… अगर हम अकेले होते।”
मैं कुछ कह पाता उससे पहले वह और करीब आ गई। हम दोनों के बीच बस एक सांस की दूरी रह गई थी। फिर बिना कुछ बोले उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। कोई लंबा, धीमा पल नहीं, बस एक सेकंड।
उन्होंने फुसफुसा कर कहा, “बस… अभी इतना ही।”
और फिर बाथरूम का दरवाज़ा खोल कर बाहर चली गई। मैं वहीं खड़ा रह गया, ब्रश हाथ में, दिल तेजी से धड़कता हुआ, और होंठों पर उनका निशान ताज़ा पड़ा हुआ।
सुबह बाथरूम में किस्स होने के बाद मुझे पूरा भरोसा था कि आज कुछ पागल होने वाला है। मैं सोच रहा था कि मौका मिलेगा और मैं नेहा दीदी के और करीब आ पाऊँगा।
लेकिन जैसे ही पायल दीदी उठी, पूरा दिन नॉर्मल हो गया। हम तीनों साथ बैठे रहे। कुछ घंटे पढ़ाई हुई। फोन पर म्यूज़िक चलता रहा। दो–तीन मूवी भी देखी।
मैं कोशिश करता रहा कि नेहा दीदी के पास बैठ सकूँ, लेकिन पायल दीदी हर वक्त बीच में रहती थी। ना कोई मौका मिला, ना अकेला पल। फिर भी दिन पूरा बेकार नहीं था। रविवार होने की वजह से दोनों ने छोटे कपड़े पहने थे। नेहा दीदी का टॉप ढीला था और पायल दीदी की ड्रेस भी छोटी थी।
जब वो बैठती, झुकती या उठती, तो उनकी लम्बी क्लीवेज साफ़ दिख जाती थी। छाती भी कभी–कभी कपड़ों से बाहर तक उभर आती थी। मैं दिन भर चुप-चाप देखता रहा। कुछ कर नहीं पाया, लेकिन इतना देख लेना उस समय मेरे लिए काफी था।
शाम होते होते अचानक माहौल पलट गया। पायल दीदी पार्टी के लिए तैयार होने लगी। यह उनके दोस्तों के घर कपल पार्टी थी, जहाँ लगभग सब अपने पार्टनर के साथ जाने वाले थे। पायल अकेली थी, इसलिए वह घबराने लगी कि वहाँ अकेले जाने पर दोस्त उन पर हँसेंगे।
धीरे-धीरे उनका उत्साह कम होता गया और बेचैनी बढ़ने लगी। उन्होंने मुझ पर दबाव डालना शुरू कर दिया कि मैं उनके साथ चलूँ और पूरी रात उनके बॉयफ्रेंड की तरह बन कर रहूँ, ताकि उनका मज़ाक ना बने। पहले वह इसे हल्का रख रही थी, पर जैसे-जैसे शाम बढ़ती गई, उनकी चिंता साफ़ दिखाई देने लगी।
नेहा दीदी शुरुआत में इसे मज़ाक की तरह देख रही थी और मुस्कुरा रही थी। लेकिन जब पायल दीदी का चेहरा बुझने लगा और उनकी आँखें भर आई, तब माहौल गंभीर हो गया। अब सिर्फ पार्टी की बात नहीं रही थी, बल्कि पायल दीदी की इज़्ज़त और उनका मन भी जुड़ गया था।
आखिर में ऐसा लगने लगा कि मुझे ही साथ जाना पड़ेगा। धीरे-धीरे दोनों इस बात पर टिक गई कि अगर मैं नहीं गया तो पायल दीदी की शाम खराब हो जाएगी। पायल दीदी परेशान थी और नेहा दीदी ने भी तय कर लिया कि मैं ही इस पल को संभाल सकता हूँ।
आखिरकार मैंने मान लिया। अब पार्टी में जाना तय था, पूरा दिन इंतज़ार में बीत गया था और अब शाम मेरी उम्मीदों के उलट दिशा में जा रही थी।
करीब सात बजे हम तैयार होकर निकलने वाले थे। मैं ब्लैक सूट पहन चुका था और अपने कमरे से बाहर आया। बाहर पायल दीदी खड़ी थी। उन्होंने नीले रंग की छोटी ड्रेस पहनी हुई थी, जो घुटनों से ऊपर खत्म हो रही थी। उनके पैर पूरे खुले थे, साफ सुथरे, पूरी तरह शेव किए हुए, सफेद चमकदार त्वचा वाले। एक हाथ में पर्स पकड़ा हुआ था और बाल खुले हुए थे।
ड्रेस का पीछे का हिस्सा पूरी तरह खुला था, उनकी पूरी पीठ दिखाई दे रही थी। सामने की तरफ से ड्रेस गहरी कटी हुई थी, जिससे उनकी लंबी क्लीवेज पूरी तरह दिख रही थी। उन्होंने ब्रा नहीं पहनी थी, इसलिए उनकी छाती ड्रेस के अंदर सीधे दिखाई दे रही थी। स्तन ढीले लगने के बजाय साइड से भारी और उभरे हुए दिख रहे थे, जैसे कपड़ा उन्हें बस पकड़ कर रोक रहा हो। हर सांस के साथ उनका सीना हल्का ऊपर नीचे हो रहा था और ड्रेस की कट के कारण उनकी छाती का आकार साफ समझ में आ रहा था।
उन्हें देख कर साफ समझ आया कि वह अकेली वहाँ जाने से क्यों परेशान थी और क्यों उनके लिए मेरे साथ जाना ज़रूरी था। मैं तैयार था और अब हमें पार्टी के लिए निकलना था।
हम दोनों लिविंग रूम की तरफ बढ़े तो नेहा दीदी भी वहाँ आ गई। उन्होंने पहले पायल दीदी को पकड़ कर कस कर गले लगाया, जैसे वह खुश हों कि पायल दीदी अब अकेली नहीं जा रही। पायल दीदी हँसी और थोड़ा रिलैक्स हो गई। फिर नेहा दीदी मेरी तरफ आई और बिना कुछ बोले मुझे भी गले लगा लिया। उनका शरीर मेरे से चिपका और एक सेकंड के लिए वही साँस रुकने वाली फीलिंग वापस आ गई।
नेहा दीदी ने फुसफुसा कर कहा “पायल के साथ वैसा कुछ मत करना… जैसा मेरे साथ करता है।”
मैंने भी उतनी ही धीमी आवाज़ में कहा, “वो सब सिर्फ तुम्हारे साथ ही होगा नेहा दीदी।”
उन्होंने मुझे छोड़ा और पीछे हट गई। अब बस निकलना था।
हम दोनों एक कैब में बैठे और शहर के बाहर की तरफ निकल गए। रास्ता लंबा था और कैब की खिड़कियों से बाहर बस खाली सड़कें दिख रही थी। अंदर मैं और पायल चुप थे। कभी-कभी वह मोबाइल चेक कर लेती, मैं बाहर देखता रहा। माहौल थोड़ा अजीब था, क्योंकि मैं उसी सुबह नेहा दीदी को किस्स कर चुका था और अब मुझे दूसरे के बॉयफ्रेंड की तरह चलना था।
करीब आधे घंटे बाद कैब एक बड़े घर के बाहर रुकी। घर शहर से थोड़ा बाहर था, साफ दिख रहा था कि पैसे वाले लोग रहते हैं। लाइटें जल रही थी, बाहर दो तीन कारें खड़ी थी और दरवाज़ा आधा खुला था।
जैसे ही अंदर पहुंचे, हल्की आवाज़ में इंग्लिश म्यूज़िक चल रहा था। बहुत तेज़ नहीं, बस इतना कि माहौल बना रहे। हॉल में लड़के-लड़कियाँ घूम रहे थे, कुछ डांस कर रहे थे और कुछ आपस में बात कर रहे थे।
पायल दीदी की दोस्त ने आते ही उन्हें पहचान लिया और दोनों ने एक-दूसरे को कस कर गले लगाया। फिर पायल दीदी ने मुस्कुराते हुए मुझे सब के बीच अपने साथ खड़ा किया और सीधे कह दिया कि मैं उसका बॉयफ्रेंड हूँ।
कुछ लोग हँसे, कुछ ने हाथ मिलाया और माहौल हल्का हो गया। टेबल पर बीयर, ड्रिंक्स, और दो चार चिप्स के पैकेट भी पड़े थे। मैं और पायल दीदी ने एक-एक बीयर उठाई और कमरे के किनारे सोफे पर बैठ गए। बाकी लोग डांस कर रहे थे और हँस रहे थे, और हम दोनों बस चुप-चाप बैठे सब देखते रहे।
करीब एक घंटे बाद, जब सब ने थोड़ा बहुत पी लिया, तो कमरे का माहौल बदलने लगा। म्यूज़िक पहले धीमा हुआ और फिर बंद कर दिया गया। लड़कियाँ फर्श पर बैठ गई और लड़के उनके पास जाकर जगह बना कर बैठ गए। लगभग दस लड़कियाँ और दस लड़के थे, हर लड़का अपनी गर्लफ्रेंड या पार्टनर के पास बैठा था।
चर्चा धीरे-धीरे दोस्ती से प्यार की तरफ मुड़ी। हर कपल अपनी कहानी बताने लगा, कहाँ मिले, कैसे बात हुई, पहले किस्स कब हुआ। फिर बात और आगे बढ़ी।
कपल थोड़ा खुल कर बताने लगे कि उनके बीच क्या-क्या हुआ। पहले यह सब मज़ाक में था, लेकिन धीरे-धीरे लड़कियाँ अपने अनुभव बताने लगी, किस तरह पहली बार हुआ, किसने पहल की, कैसा लगा और पूरा माहौल हँसी में फट पड़ता था।
गॉसिप धीरे-धीरे सीरियस और खुली होती गई। अब साफ लग रहा था कि सब अपनी सेक्स लाइफ के बारे में बात करने पर उतर आए थे।
एक के बाद एक लड़की ने अपनी बात बताई, किसने कब शुरू किया, कहाँ किया, कैसा था और जब सब की बारी हो चुकी, तो मज़ाक मज़ाक में सबकी नज़रों का रुख पायल दीदी की तरफ हो गया। अब सब जानना चाहते थे कि पायल दीदी ने अपने बॉयफ्रेंड यानी मुझसे, क्या-क्या किया है और किस तरह हम दोनों ने सेक्स किया था।
पायल दीदी पहले टालने लगी। वह हँस कर बात मोड़ने की कोशिश कर रही थी। लेकिन उसका फायदा नहीं हुआ। धीरे-धीरे उसकी दोस्तों ने चिढ़ाना शुरू कर दिया कि मैं शायद असली बॉयफ्रेंड हूँ ही नहीं, क्योंकि अगर होता तो उसके साथ सेक्स जरूर हुआ होता।
किसी ने मज़ाक में कहा कि हमने कुछ नहीं किया होगा, किसी और ने बोला कि पायल बस नाम का बॉयफ्रेंड लाई है। पायल दीदी का चेहरा बदलने लगा। पहले हल्की हँसी थी, फिर थोड़ा गुस्सा दिखा। आखिर में उसने थोड़ा तेज आवाज़ में पूछा कि उसे क्या करना चाहिए साबित करने के लिए।
तभी एक लड़की ने चिढ़ाते हुए कहा, “साबित करना है तो सब के सामने इसे किस्स कर दे।”
पायल दीदी ने सीधा जवाब दिया कि ठीक है। वह उठी, घूम कर मेरी तरफ मुड़ी और मेरे करीब आ गई। यह पहली बार था जब मुझे लगा कि वह पूरी तरह से हमारी असली रिलेशनशिप भूल गई हों। बिना किसी झिझक के वह मेरे इतने पास आ गई थी कि उनके होंठ बस कुछ इंच दूर थे, जैसे इस बार वह सच में किसी और वजह से नहीं, सिर्फ सामने वालों को दिखाने के लिए मुझे किस्स करने वाली हो।
अगला भाग पढ़े:- जुड़वाँ दीदियों के साथ जिस्म की चाहत-7