पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-3
हिंदी सेक्स कहानी अब आगे-
गांड में उंगली और फिर नंगी फुद्दी – मम्मी को इस हालत में देख कर मेरा लंड बेकाबू होने लगा था। मुझे अब फुद्दी चोदनी थी – फुद्दी में लंड डालना था, चाहे वो फुद्दी किसी की भी हो।
मैंने सोचा, “देखते हैं क्या होता है” और मैंने अपनी उंगली मम्मी की फुद्दी में डाल दी। मम्मी की फुद्दी चिकने पानी से भरी पड़ी थी। फ़ैली हुई टांगों के कारण मम्मी की चुदी हुई फुद्दी वैसे ही थोड़ी सी खुल गयी थी। जैसे ही मेरी उंगली मम्मी की फुद्दी के छेद पर पहुँची, मैंने जरा सी उंगली आगे की मेरी उंगली फिसल कर मम्मी की फुद्दी के अंदर चली गयी।
अब मैंने ही मम्मी की सलवार खींची और मम्मी के घुटनों तक नीचे कर दी। मम्मी की पूरी नंगी फुद्दी और मेरी उंगली मम्मी की फुद्दी में – मम्मी का अपनी फुद्दी को ना ढकना और साथ ही मुझे भी कुछ ना कहना। मेरे दिमाग में एक-दम मम्मी की बात आ गयी। मम्मी कह रही थी इस दर्द का इलाज डाक्टर के पास नहीं, उसका क्या मतलब था? और मम्मी का इस तरह नंगा होना, मैं सोचने लगा कहीं मम्मी मुझसे चुदाई करवाने के चक्कर में तो नहीं?
जैसे ही मैंने उंगली चार-पांच बार फुद्दी के अंदर-बाहर की मम्मी की, मम्मी अपनी कुर्ती उतार दी और साथ ही अपनी सलवार भी। मम्मी अपने मम्मों के निप्पल मसलने लगी।
अब मम्मी पूरी नंगी थी। अब शक की कोइ गुंजाइश ही नहीं थी कि मम्मी का इरादा क्या था। अब फैसला मुझसे करना था कि अब मुझे क्या करना है। मम्मी अपनी कुर्ती और सलवार उतार ही चुकी थी। मम्मी – मेरे सामने बिस्तर पर बिलकुल नंगी लेटी हुई थी, और मम्मी की आखें बंद थी। मम्मी लम्बे-लम्बे सांस ले रही थी।
मैं मम्मी के नंगे जिस्म की तरफ देख रहा था। मम्मी का नंगा जिस्म देख कर मेरा लंड मेरा लंड अब सख्त हो चुका था। मैं उठा और मम्मी के मम्मे मुंह में लेकर चूसने लगा। मम्मी ने मेरा सर अपने मम्मों ओर दबा दिया। मेरा मुंह मम्मी के मम्मों पर था और मेरी उंगली मम्मी की फुद्दी में।
अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था। मैंने अपना पायजामा उतारा और आनन-फानन में मम्मी के चूतड़ों के नीचे तकिया लगाया और एक ही झटके से लंड पूरा मम्मी की फुद्दी में डाल दिया। मम्मी ने बस इतना ही कहा, “आह धीरज।”
मैंने इसके बाद देरी नहीं की और मम्मी की चुदाई चालू कर दी। जल्दी ही मम्मी हूं हूं आह आह की आवाज के साथ अपने चूतड़ घुमाने लगी। मैं समझ गया मम्मी को मजा आने वाला था। मैं भी अपनी मम्मी की फुद्दी जोर-जोर से चोदने लगा।
तभी मम्मी ने जोर से चूतड़ घुमाये और मेरा लंड मुंह में से निकाल कर जोर से बोली, “धीरज मजा गया मुझे, फुद्दी पानी छोड़ गयी मेरी, आह धीरज।” और यह बोल कर मम्मी ढीली हो गयी। मैं मम्मी के ऊपर से उतरा और उनके पास ही लेट गया। मम्मी की आंखें बंद थी, वो अभी भी मजे में थी।
फिर जब मम्मी ने आंखें खोल कर मेरी तरफ देखा और बोली, “मजा आ गया, तेरा लंड तो बहुत बड़ा है धीरज।”
मम्मी की बात अनसुनी करके मैंने मम्मी से पूछा, “मम्मी ये क्या हो गया? आपने मुझे ये सब क्यों करवाया?
इतना कुछ होने के बाद मम्मी अब मेरे साथ खुलने लगी थी। मम्मी बोली, “धीरज बेटा, मैं भी क्या करती डेढ़ साल हो गया है तेरी मम्मी की इस फुद्दी की एक बार भी ढंग से चुदाई नहीं हुई है।
मैंने पूछा, “मम्मी डेढ़ साल? ऐसा क्या हुआ मम्मी? और पापा?
मम्मी ने मेरा खड़ा लंड पकड़ लिया और बोली, “बेटा क्या बताऊं, तेरे पापा का लंड खड़ा तो होता है, ढीला ही रहता है, फुद्दी में भी जाता है मगर सख्त नहीं होता। तेरे पापा चोदते भी हैं मुझे, फुद्दी में लंड का गर्म-गर्म पानी भी गिरता है, मगर धीरज जब तक फुद्दी में रगड़े ना लगें, तो चुदाई किस काम की? चुदाई का मजा ही नहीं आता?”
“तेरे ऊपर लेटे अनमने से ढीले वाले लंड की साथ मुझे चोद रहे होते है, मगर मुझे मस्ती ही नहीं आती। मेरी फुद्दी गीली ही नहीं होती, मेरे चूतड़ घूमते झटकते ही नहीं।”
“बीस मिनट आधा घंटा चुदाई के बाद उनका लंड पानी छोड़ देता है – मेरी फुद्दी भी पानी छोड़ देती है। मगर धीरज बेटा असली मजे के लिए फुद्दी की रगड़ाई होना जरूरी होता है, और रगड़ाई तभी होती है, जब लंड सख्त हो – जैसे उनका लंड पहले हुआ करता था – लकड़ी की तरह सख्त – जैसे तेरा लंड अभी है।”
“धीरज तेरे तो लंड को तो पकड़ कर ही मजा आ गया। एक बार और अच्छे से मेरी फुद्दी में डाल कर मस्त चुदाई कर दे बेटा, बहुत मन कर रहा है।”
अच्छे से, मतलब मैं अपना लंड मम्मी से चुसवाऊँ, मम्मी की फुद्दी चूसूं और फिर चुदाई करूं।
नंगी फुद्दी देख कर मस्ती में तो मैं था ही। मैंने मम्मी की फुद्दी पर हाथ फेरते हुए कहा, “मगर मम्मी आप पापा को किसी डाक्टर के पास जाने के लिए क्यों नहीं बोलती? आज कल तो हर मर्ज का इलाज है।”
मंम्मी ने जवाब दिया, “धीरज बेटा मैंने एक दो बार उनसे कहा भी के किसी डाक्टर को दिखा लें। मगर ये समस्या ऐसी है कि मर्द डाक्टर के पास जाने से भी शरमाते हैं। अब मैं भी इस बारे में उनसे कुछ नहीं कहती यही सोच कर कि कहीं वो डिप्रेशन में ही ना आ जाएं।”
मम्मी बोल रही थी, “धीरज बेटा, तेरे पापा की उम्र इतनी भी नहीं कि उनका लंड सख्त ही ना हो और फुद्दी के रगड़ाई ही ना कर पाएं। डेढ़ साल पहले तक मस्त चोदते रहे हैं मुझे। पर अब प्रॉब्लम हो ही गयी है, अब इसका क्या हल है। मेरी उम्र भी तो इतनी नही कि मेरी फुद्दी गर्म ही ना हो, लंड की रगड़ाई ही ना मांगे। अब तुम ही बताओ धीरज बेटा मैं क्या करूं?”
मम्मी की एक चुदाई करने के बाद मेरा मन फिर से मम्मी को चोदने का होने लगा। मम्मी के फुद्दी में उंगली डालते हुए मैंने कहा, “ठीक है मम्मी जो आप कहेंगी मैं करूंगा।”
ये कह कर मैंने अपनी मम्मी को बाहों में ले लिया और मम्मी के होंठ चूसने लगा। थोड़ी ही देर में मम्मी ने मुझे अपने से अलग किया और बोली, “धीरज बेटा तूने मेरी तो चिंता ही खत्म कर दी।” इतना कह कर मम्मी उठी और मेरे खड़े सख्त लंड पर बैठ गई और लंड पर ऊपर नीचे होने लगी। जिस तरह से मम्मी मेरे लंड पर जोर-जोर से ऊपर नीचे होते हुए मेरा लंड अपनी फुद्दी में ले रही थी, उससे पता ही लग रहा था कि मम्मी की सालों से ढंग से चूत नहीं चुदवाई थी।
ऊपर-नीचे होते हुए मम्मी के मम्मे भी ऊपर-नीचे हो रहे थे। हम मां-बेटे में माहौल अब मस्ती वाला हो चुका था। मैंने अपने हाथों से अपनी मम्मी के मम्मे पकड़ लिए और मम्मों के निप्पल मसलने लगा। मम्मी अब ऊपर नीचे होती हुए “आअह धीरज उह धीरज” बोलने लगी।
मम्मी की फुद्दी कभी भी पानी छोड़ सकती थी। तभी मम्मी ने हाथ नीचे किया और उंगली से अपनी चूत का दाना रगने लगी। अगले पांच मिनट में मम्मी को मजा आ गया। मम्मी ने एक सिसकारी ली, “आअह धीरज, मजा आ गया बेटा, पानी छोड़ गयी तेरी मम्मी की फुद्दी एक बार और, मेरा बेटा।”
मम्मी मजे में मेरे लंड के ऊपर ही बैठी हुई थी। दो मिनट के बाद जब मजे की मस्ती उतरी तो मम्मी को महसूस हुआ कि मेरा लंड तो अभी भी खड़ा ही है। अपनी फुद्दी में मेरा खड़ा लंड महसूस करके मम्मी ने पूछा, “धीरज क्या हुआ बेटा, अभी भी नहीं निकला तेरे लंड का मक्खन?”
मैंने कहा, “मम्मी मेरा लंड जल्दी नहीं झड़ता। एक-एक डेढ़-डेढ़ घंटा चुदाई कर सकता है ये।”
मम्मी ने बस इतना ही बोली, “कमाल है? चल बेटा एक बार चुसवा अपना लंड और अच्छे से, तसल्ली से चुदाई कर दे।”
ये कह कर मम्मी बोली, “बेटा मैं बाथरूम हो कर आती हूं, मुझे पेशाब लग रहा है। ये कह कर मम्मी बाथरूम चली गयी और खड़े लंड के साथ मैं उठ कर सोफे पर बैठ गया।
मम्मी बाथरूम से आई और सीधे मेरे सामने नीचे बैठ कर मेरा का लंड मुंह में ले कर चूसने लगी। मेरा लंड थोड़ा चूसने के बाद, मम्मी उठी और बोली, “चल धीरज जरा मेरी फुद्दी चूस।”
मैं जैसे ही उठा, मम्मी ने मुझे बाहों में ले लिया और मेरे के मुंह के साथ अपना मुंह लगा दिया और ऊँ ऊँ करने लगी। मैं समझ गया मम्मी क्या चाहती थी। मैंने अपनी जुबान अपनी मम्मी के मुंह में डाल दी।
थोड़ी देर के बाद मेरी जुबान मम्मी ने छोड़ दी। मेरा मुंह अपने आप ही खुल गया। अब मम्मी की जुबान मेरे मुंह में थी और मैं मम्मी की जुबान चूस रहा था। कुछ देर ये सिलसिला ऐसे ही चलता रहा, और फिर मम्मी बोली, “चल धीरज, अब जरा फुद्दी चूस और फिर कर दे चुदाई।”
मैं भी बोला, “ठीक है मम्मी, लेटो आपकी फुद्दी चूसूं फिर अच्छे से चुदाई करूं आपकी। ऐसी चुदाई जिसे आप भी याद रखेंगी।”
मम्मी बेड के किनारे पर चूतड़ों के नीचे तकिया लगा कर लेट गयी। तकिये के कारण मम्मी की फुद्दी ऊपर उठ गयी। जब मम्मी ने टांगें उठा कर चौड़ी की, तो मम्मी की फुद्दी हल्की सी खुल गयी। फुद्दी के अंदर का गुलाबी नजारा मस्त कर रहा था। मैंने सोचा कि आखिर को मम्मी ने चौबीस साल लंड भी तो लिया था फुद्दी में और फिर दो-दो बच्चे भी तो निकाले हैं इसमें से।
वैसे तो मैंने इतने ध्यान से कोइ फुद्दी देखी भी नहीं थी। मम्मी की गुलाबी फुद्दी का नजारा देख कर मेरा लंड फुंफकारे मारने लगा। जो कॉल गर्ल्स होटलों में चोदी भी थी, या महेंद्र के घर में जो काम वालियां चोदी भी थी, उसमें उनकी फुद्दी देखने का टाइम ही नहीं मिलता था। यहां तो मेरी अपनी मम्मी की फुद्दी मेरे सामने थी – जितनी चाहो देखो, जितनी चाहो चूसो, जितनी चाहो चोदो।
मैंने मम्मी की फुद्दी की फांकें और भी खोल दी। अब तो अच्छे से फुद्दी दिखाई दे रहे थी। फुद्दी का छेद हल्का सा खुला हुआ था। मैंने जुबान मम्मी की फुद्दी के छेद में डाल दी और जुबान से चूसने चाटने लगा। मम्मी की फुद्दी नमकीन पानी से भरी पड़ी थी। मैं फुद्दी चूसता-चाटता जा रहा था और मम्मी की फुद्दी पानी छोड़ती जा रही थी। मैंने सोचा मम्मी तो बोल रही थी अब जब पापा मम्मी की फुद्दी में लंड डालते हैं, तब उनकी फुद्दी गीली ही नहीं होती।
तभी मम्मी बोली, “बेटा अब आजा नहीं तो फिर मेरी फुद्दी का पानी ऐसे ही निकल जाएगा। आजा बेटा फुद्दी में अपना ये मोटा लम्बा लंड डाल कर मस्त रगड़ाई कर आज अपनी मम्मी की।
मैंने फुद्दी से मुंह निकाल लिया, मगर जिस तरीके से मम्मी लेटी हुई थी – टांगें ऊपर करके, मम्मी के चूतड़ों के छेद का नजारा भी मुझे पागल कर रहा था। मैंने एक बार चूतड़ों के गुलाबी छेद को जुबान से चाटा और खड़ा हो कर बोला, “मम्मी आपकी गांड भी चोदनी है।”
मम्मी बोली, “धीरज जो चाहे चोद फुद्दी चोद, गांड चोद, मुंह में डाल, जो करना है कर। अब मैं सात दिन समझ ले तेरी रंडी तेरी रखैल हूं और तू मुझे पैसे देकर चोदने की लिए ही लाया है।”
मैं हैरान था कि मम्मी ये कैसी बातें कर रही थी, वो भी मुझसे। अपनी मम्मी के मुंह से ऐसी बातें सुन कर मुझसे से रहा नहीं गया और मम्मी को उठा कर बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और बिना देरी किये मम्मी की फुद्दी में लंड डाल कर जोरदार चुदाई चालू कर दी।
मम्मी ने मुझे टांगों में जकड़ लिया। लंड के लिए तरसी हुई मम्मी की फुद्दी मेरे लम्बे मोटे लंड से दस मिनट की चुदाई भी नहीं झेल पायी और मम्मी की फुद्दी पानी छोड़ गयी। मम्मी जोर से चिल्लाई, “क्या रगड़ता है धीरज तू, क्या चोदता है, आज तो मजा ही आ गया। बड़े देर के बाद ऐसा मजा आया है।”
इतना बोल कर भी मम्मी ने मेरी कमर से अपनी टांगें नहीं हटाई। मतलब मम्मी अभी और चुदाई करवाना चाहती थी। मेरा लंड तो खड़ा ही था। अपनी मम्मी की चुदाई में मुझे मजा भी बहुत आ रहा था। आखिर फुद्दी तो फुद्दी ही होती है चाहे किसी की भी हो। यहां तो हालत ये बने हुए थे कि फुद्दी तो सामने थी ही, चोदने की भी कोइ जल्दी थी और ना ही कोइ खटका ही था।
मस्ती से जितनी देर चाहो चुदाई करते रहो जैसे मर्जी चुदाई करते रहो – जब तक लंड ही मलाई ना छोड़ दे। और बड़ी बात मम्मी तो गांड चुदवाने के लिए भी तैयार ही थी। फुद्दी और गांड – दोनों सामने थे।
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