पिछला भाग पढ़े:- पापा की परी प्रीती-13
चुदाई की कहानी अब आगे-
जैसी चुदाई प्रीती ने करने को कहा था – रंडी की तरह, कुतिया की तरह, वैसी ही चुदाई मैंने प्रीती की कर दी। प्रीती की गांड चोदते हुए गांड में क्रीम भी नहीं लगाई, और थोड़ा सा थूक लगा कर ही मोटा लंड गांड में डाल दिया। इस सूखी चुदाई से प्रीती को दर्द होने लगा, मगर मैं नहीं रुका।
प्रीती ने जब बार-बार सर मोड़ कर मेरी तरफ देखा तो मुझे लगा प्रीती को सच में ही दर्द हो रहा था। मैंने लंड प्रीती की गांड में से निकाल लिया और प्रीती को सोफे पर बिठा दिया। प्रीती ने मेरा लंड खड़ा देखा प्रीती ने मेरी तरफ देखरे हुए कहा, “पापा आपके लंड का पानी नहीं निकला अब तक? मजा नहीं आया अब तक आपको?”
ये बोल कर प्रीती ने मेरे सीधे खड़े लंड को अपने मम्मों के बीच ले लिया और मम्मी मेरे लंड पर ऊपर-नीचे करने लगी। प्रीती के मांसल मम्मों के बीच ऊपर-नीचे आगे-पीछे ऐसे हो रहा था जैसे कोइ बहुत ही नाजुक फुद्दी धीरे-धीरे मेरे लंड को चोद रही हो। ऐसा मेरे साथ पहली बार हो रहा था। मुझे बहुत ही ज्यादा मस्ती आ गई।
मैंने प्रीती के कंधो पर हाथ रख कर कहा, “प्रीती तू मेरी बहुत ही अच्छी बेटी है। सॉरी बेटा मैंने चुदाई के जोश में पागल हो कर तुझे कुतिया कहा, रंडी कहा। तू तो बहुत ही अच्छी है बेटा।”
मेरा मजा बढ़ता जा रहा था। प्रीती जोर-जोर से मेरे लंड को अपने मम्मों के बीच में पकड़े हुए आगे-पीछे कर रही थी। बिलकुल फुद्दी चोदने जैसा एहसास हो रहा था। मेरा लंड किसी भी वक़्त मलाई छोड़ सकता था।
मजे के मारे मैंने प्रीती का चेहरा अपने हाथों में ले लिया और कुछ भी बोलने लगा, “प्रीती मेरी प्यारी प्रीती, बड़ा मजा देती है तू अपने पापा को। बड़ा मजा आ रहा है प्रीती। बस अब निकलेगा – निकलने वाला है आह प्रीती मेरी जान, मेरी बेटी क्या फुद्दी चुदवाती है तू, क्या मस्त लंड लेती है चूत के अंदर, गांड के अंदर। पूरा का पूरा लंड ले लेती है अपनी टाइट फुद्दी और गांड में। कई बार तो तेरी फुद्दी में लंड डालते हुए ऐसा लगता है जैसी कुंवारी फुद्दी चोद रहे हों।”
मजे से मैं बोलता जा रहा था, “आह मेरी जान प्रीती, एक दिन तेरी फुद्दी का सारा पानी चाट कर, सुखा कर तेरी फुद्दी चोदूंगा। मस्त रगड़ कर जाएगा सूखी फुद्दी में लंड। मेरी जान, तुझे भी मस्त मजा आएगा सूखी फुद्दी में लंड डलवाने का। फुद्दी और गांड तो चुदवाती ही है तू और अब ये अपने मम्मे चुदवा रही है। आह प्रीती निकला आह प्रीती ये निकला आअह प्रीती, निकला मेरी जान आह ये ले निकला मेरी जान”, और मेरे लंड से ढेर सारी गरम सफ़ेद मलाई निकल कर प्रीती के मम्मों पर फ़ैल गयी।
प्रीती कुछ देर और मेरा लंड को अपने मम्मों में पकड़े हुए आगे-पीछे करती रही, और जब प्रीती ने देखा अब मेरा लंड से पूरी मलाई निकल चुकी है और लंड ढीला होने लगा है तो प्रीती ने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ कर अपने मुंह में ले लिया और दुसरे हाथ से मेरे लंड से निकला गाढ़ा पानी अपने मम्मों पर मलने लगी।
जब प्रीती ने मेरे लंड चूस-चूस साफ़ कर दिया और और मुझसे पूछा, “पापा आया मजा?”
मजा तो मुझे आया ही था, वो भी अजीब सा। मैंने कह दिया, “बहुत मजा आया प्रीती, मगर तुझे गांड चुदाई के वक़्त दर्द हुआ, ये मुझे कुछ अच्छा नहीं लगा। दिखा जरा अपनी गांड का छेद देखूं। प्रीती वहीं सोफे पर हे उलटे हो कर लेट गयी और पीछे हाथ करके चूतड़ चौड़े कर दिये। प्रीती के गांड का छेद थोड़ा सा फूला हुआ था, मगर जरा गांड जरा सी भी छिली नहीं हुई थी बिलकुल ठीक थी।
मैंने प्रीती के चूतड़ों पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा, “प्रीती तेरी गांड बिलकुल ठीक ठाक है, बस जरा सी फूली हुई है। कुछ और दिक्कत नही लग रही”, ये कह कर मैं प्रीती के गांड का छेद अपनी जुबान से चाटने लगा।
प्रीटी बोली, “पापा अब मेरी दर्द को भूल जाओ आप, और पापा इतनी तो गांड फूलेगी ही, मोटे लंड से इतनी रगड़ाई भी तो हई है – वो भी सूखी गांड की।
कुछ देर प्रीती के गांड चाटने के बाद मैं बोला, “चलूं प्रीती व्हिस्की की वजह से सर भारी सा है, चुदाई की भी थकान है, जा कर गर्म पानी से शावर – नहाता हूं, तभी बढ़िया नींद आएगी।”
प्रीती बोली, “पापा नहाना तो मैंने भी है आपके लंड की मलाई से मेरे मम्मे चिप-चिप कर रहे हैं, फुद्दी भी मजे के पानी से भरी पड़ी है। आप यहीं क्यों नहीं नहा लेते मेरे साथ ही। वहां मम्मी सो रही होगी, उनको भी डिस्टर्बेंस हो जाएगी।”
मैंने सोचा बात तो ठीक है। मैंने कहा, “ठीक है प्रीती, मै लाउंज से अपने और तुम्हारे कपड़े लेकर आता हूं।”
ये बोल कर मैं बाहर निकल गया और वापस आया तो प्रीती अभी भी वहीं खड़ी थी। हम दोनों बाथरूम में चले गए। प्रीती टॉयलेट सीट पर बैठ गयी मगर पेशाब नहीं किया। उधर मुझे भी जोर का पेशाब आया हुआ था। चार पेग व्हिस्की के और इतनी देर चुदाई हुई थी, मूता मैंने एक बार भी नहीं था। मैं बार-बार अपने लंड को पकड़ रहा था। प्रीती बोली, “क्या बात है पापा, जोर का पेशाब आया है?”
मैंने कहा, “आया तो है, तुम पहले पेशाब कर लो फिर मैं करता हूं।”
प्रीती बोली, “पापा मैं तो आपकी वेट कर रही हूं। आपके चक्कर में मैंने पेशाब रोका हुआ है। चलो पापा करो पेशाब मेरे मम्मों पर, मेरी फुद्दी पर और करो इनकी धुलाई।”
मैंने सोचा प्रीती के ऊपर पेशाब? मैं अभी सोच ही रहा था कि प्रीती बोली, “सोच क्या रहे हो पापा, चलो शुरू करो।” यह बोल कर प्रीटी ने मेरा लंड पकड़ा और अपने मम्मों के ऊपर लगा दिया। प्रीती बोली, “चलो पापा हो जाओ शुरू, डालो अपना गर्म-गर्म मूत मेरे मम्मों पर।”
मैं कुछ रुका और फिर मैंने लंड ढीला छोड़ दिया। मेरे लंड से पेशाब निकला और प्रीटी के मम्मों पर बहने लगा। प्रीती मम्मों पर हाथ फेरती हुई बोली, “आअह पापा मजा आ गया। क्या गर्म-गर्म हो रहा है मम्मों का।” तभी प्रीती ने भी अपनी फुद्दी ढीली छोड़ दी और सुर्र सुर्र सुर्र सुर्र की आवाज के साथ पेशाब करने लगी”
मेरे लंड से पेशाब निकल रहा था और सीधा प्रीती कि मम्मों पर गिर रहा था। प्रीती ने नीचे हाथ करके अपनी फुद्दी की फांकें चौड़ी कर दी। प्रीती के गुलाबी फुद्दी सामने थी। प्रीती बोली ,”पापा थोड़ा गर्म पानी का स्नान इसको भी करवा दो, इसे भी नहाना है।” ये बोलते हुए प्रीती हंस दी।
मैंने उंगली और अंगूठे से लंड पकड़ा और मूत की मोटी धार प्रीती की फुद्दी पर डाल दी। प्रीति आह पापा आह पापा बोलने के साथ-साथ अपनी फुद्दी थपथपा रही थी।
इन मूतने के काम से फारिग हो कर शावर में चले गए और गरम पानी चालू कर दिया। प्रीती पूरी मस्ती में थी। कम से कम दस बार प्रीती ने मेरा लंड चूमा, और मेरे गांड में उंगली डाली। मैं भी कभी प्रीती के मम्मे चूस रहा था कभी प्रीती की गांड में उंगली कर रहा था। हम दोनों एक-दूसरे को बाहों में ले कर चुम्मा-चाटी कर रहे थे और हंस रहे थे।
बढ़िया से नहा कर हम बाहर निकले और मैं कपड़े पहन कर अपने कमरे में चलने के लिए तैयार हो गया। मैं चलने ही वाला था के प्रीती बोली, पापा आज की कुतिया वाली चुदाई का थैंक यूं – मस्त चोदा आपने। पापा, गांड थोड़ा सा दुःख तो रही है, मगर गांड चुदवाने का मजा भी आ गया।”
मैं मुस्कुराते हुए अपने कमरे में चला गया। भूपिंदर गहरी नींद में थी। मैं भूपिंदर के पास लेट गया और भूपिंदर के ऊपर हाथ रख दिया जल्दी ही मुझे नींद आ गयी। पता नहीं कितना सोया मैं। आठ बजे सुबह उठा तो भूपिंदर नहीं थे। मैं बाथरूम में चला गया और नहा धो कर बाहर आया। कांता और भूपिंदर किचन में थे। मेरी आवाज सुन कर भूपिंदर ने मुझे देखा और हंसती हुई बोली, “जाग गए?”
मैंने इधर-उधर देखा तो प्रीती दिखाई नहीं दी। मैंने भूपिंदर से पूछा, “भूपिंदर प्रीती नहीं दिखाई दे रही, उठी नहीं अभी?
भूपिंदर हंसते हुए बोली, “नहीं, रात देर से सोई होगी। चलो तुम लाउंज में बैठो, मैं चाय लाती हूं।”
मैं लाउंज में चला गया और पेपर पढ़ने लगा। थोड़ी देर में भूपिंदर चाय की ट्रे लेकर आ गयी। केतली और तीन कप्पों के साथ, और साथ में इंग्लैंड के बने डाइजेस्टिव बिस्कुट। भूपिंदर ने केतली में से कपों में चाय डाली और एक कप मेरे हाथ में पकड़ा दिया।
चाय की चुस्कियां लेते हुए भूपिंदर बोली, “अवतार रात को क्या हुआ? हुई चुदाई?”
मैंने कहा, “हुई और बहुत ही मस्त हुई। रात दो बजे सोया मैं। प्रीती भी उतने बजे ही सोयी होगी।”
भूपिंदर हंसते हुए बोली, “चलो सुनाओ क्या-क्या हुआ? पर एक बात तो है, बड़ा दम है तुम बाप-बेटी में। पहले शाम से ही चुदाई शुरू हो गयी थी, फिर रात को और? अवतार लंड खड़ा हो गया था तुम्हारा?”
मैंने भी हंसते हुए कहा, “भूपिंदर तुमने बेटी नहीं जादूगरनी पैदा की है। लंड कैसे खड़ा करना है ये वो अच्छे तरह जानती है।”
भूपिंदर वैसे ही हंसते हुए बोली, “अच्छा? चलो वो तो जादूगरनी है जवान भी है, और तुम? साले तुम ही कौन से कम हो – पक्के चूतिये हो तुम। कभी चुदाई से थकते भी हो तुम? मैं तो सोच रही थी इस बार तो चलो प्रीती यहां थी, मगर जब प्रीती यहां नहीं होती और मैं कनाडा गई होती हूं तब तुम क्या करते हो? क्या फ़ार्म में जा कर मुर्गियां चोदते हो? लगता है अब कनाडा जाना बंद ही करना पड़ेगा। बताओ क्या-क्या हुआ रात? मैं सुन कर ही मजा ले लेती हूं।”
मैंने शुक्र मनाया कि भूपिंदर को बिशनी का ध्यान नहीं आया नहीं तो क्लेश हो जाना था। मैंने पूरी की पूरी कथा ही सुना दी – बस कुछ नहीं बताया तो वो थी कुतिया और रंडी वाली बात। वो मुझे भी अच्छी नहीं लगी थी। बाकी सब मैंने वैसे का वैसे ही बता दिया, यहां तक की पेशाब वाली बात भी और इक्ट्ठे नहाने वाली बात के साथ-साथ गांड का छेद फूलने वाली बात भी।”
भूपिंदर बस इतना ही बोली, “कमाल है।”
तभी प्रीति भी आ गयी।
प्रीती नहा धो कर आयी थी। पहना तो गाऊन ही हुआ था, लेकिन गाऊन भारी कपड़े का था। आर-पार दिखाई नही दे रहा था। मगर जिस तरह से चलते हुए प्रीती के मम्मे हिल रहे थे ये जरूर लग कहा था कि प्रीती ने नीचे ब्रा नहीं पहनी हुई थी। मैंने सोचा अगर प्रीती ने ब्रा नहीं पहनी तो फिर नीचे पैंटी भी नहीं पहनी होगी। एक पल के लिए प्रीती की गुलाबी फुद्दी मेरी आँखों के आगे घूम गयी और मेरे लंड ने थोड़ी सी हरकत कर दी।
बालों को पीछे जूड़े की तरह बांधते हुए प्रीती बोली, “गुड मॉर्निंग मम्मी, गुड मॉर्निंग पापा” और भूपिंदर के पास ही बैठ गई।
भूपिंदर ने चाय कप में डाली और कप प्रीती की हाथ में देती हुए बोली,”लगता है रात बढ़िया निकली मेरी बेटी की।”
प्रीती मुस्कुराते हुए बोली, “हां मम्मी बढ़िया ही नहीं बहुत बढ़िया निकली – बाकी तो आपने पापा से पूछ ही लिया होगा आप भी कौन से कम हो।”
भूपिंदर बोली, “प्रीती बताया तो है अवतार ने, तुम दोनों ने तो बहुत कुछ किया रात को। मैं तो हैरान हूं, क्या-क्या कर लेते हो तुम दोनों आपस में।”
प्रीती बोली, “मम्मी एक बात बताऊं, जब चुदाई करवाओ दो सब भूल जाना चाहिए, तभी मजा आता है चुदाई का। मैं तो कहती हूं जो-जो रात को मैंने और पापा ने किया है, एक बार आप भी करके देखो। अभी तो आपने मेरी गांड नहीं देखी, चोद-चोद कर फुला दी मेरी गांड पापा ने। कांता चली जाए तब दिखाती हूं आपको।”
तभी कांता आ गयी, अपनी चुन्नी के पल्लू के साथ हाथ पोंछती-पोंछती और भूपिंदर से बोली, “बीजी बैंगन का भरता बना दिया है दोपहर के लिए। रात को क्या बनाना है?”
भूपिंदर मुझ से बोली, “बोलो अवतार क्या खाना है रात को?”
मैंने कहा, “मटन बना लेना कांता। तरी – ग्रेवी थोड़ी पतली रखना साथ में चावल बना लेना।”
कांता बोली, “ठीक है जी, मैं तैयारी करके जाती हूं, “मटन फिर शाम को आ कर बना लूंगी।”
कांता ये बोल कर चली गई।
भूपिंदर प्रीती से बोली, “प्रीती कितनी गांड चुदवा ली जो बोल रही हो फूल गयी है।”
प्रीती बोली, “मम्मी बात कितनी चुदवाने की नहीं। पापा का लंड देखा है? अगर सूखी गांड में डालेंगे बिना क्रीम लगाए तो क्या होगा? गांड तो फूलेगी ही। एक बार सूखी चुदवा कर तो देखो, तभी पता चलेगा।”
भूपिंदर बोली, “आज ही चुदवाती हूं।”
भूपिंदर और प्रीती की बातें सुन-सुन कर मेरा लंड खड़ा होने लग गया था। मैंने कहा, “तुम लोगों की बातें सुन-सुन कर तो मेरा लंड खड़ा भी होने लग गया है। लगता है प्रीती से एक बार थोड़ा सा चुसवाना पड़ेगा।”
तभी कांता आ गयी, बोली, “बीजी मटन के लिए मसाला भून लिया है, मटन शाम को बना दूंगी। अब चलती हूं।”
कांता जाने के लिए मुड़ी तो मैंने कहा, “कांता बाहर जुगनू होगा, उसे बोलना मैंने आज फार्म पर नहीं जाना, वो चला जाए और जो सामान लाना है ले आये। दोपहर बाद फिर सेक्टर सत्रह चलेंगे।”
कांता बोली, “जी ठीक है”, और ये बोल कर वो चली गयी।
कांटा के जाते ही प्रीती ने दरवाजा बंद किया और गाऊन ऊपर कर के चूतड़ उठा कर लेट गयी और चूतड़ फैला कर भूपिंदर से बोली, “लो मम्मी देखो आ कर मेरी गांड का हाल।”
भूपिंदर उठी और प्रीती के चूतड़ थोड़े और फैला कर गांड का छेद देखा और बोली, “प्रीती ज्यादा फूली तो नहीं हुई, मगर चूतड़ों के छेद की साइडों सी लाल जरूर है।”
मैं भी उठ कर प्रीती के पीछे चला गया। प्रीती के चूतड़ों का छेद किनारों से लाल हो गया था मगर अब गांड फूली नहीं। प्रीती के चूतड़ देख कर मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया। मैंने पायजामा उतार दिया और बोला, “प्रीती की गांड देख कर तो लंड गांड में डालने का मन होने लगा है।”
प्रीती बोली, “डाल लो पापा मैं तो लेटी ही हुई हूं।”
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