पिछला भाग पढ़े:- बेवा अम्मी की आग शांत की दोनों भाइयों ने-3
मां-बेटा सेक्स कहानी अब आगे से-
अब मेरे दोनों जवान बेटे मेरे नाम पे मुठ मारने को तैयार थे और अगर मैं ज़रा सा इशारा दूं, तो वो मुझे चोदने में भी परहेज़ नहीं करेंगे।
फिर वो झड़ गये और मैं झट से अपने रूम में आ गई। अब मेरी आँखों के सामने नये-नये सपने सजने लगे थे, कि कैसे मैं अपने दोनों बेटों के साथ रातें बिताऊंगी। आज फ्राइडे था और मैंने फ़ैसला कर लिया था कि कल को मैं अपने दोनों बेटों से चुदवा के ही रहूंगी और फिर सारा सन्डे हम पूरी ऐश करेंगे, और मैं अपनी सारी कसर पूरी कर लूँगी।
अगले दिन मैं सब से पहले मैंने अपनी चूत पे उगे हुए बालों को सॉफ किया और अपनी चूत को बिल्कुल चिकनी बना लिया। फिर मैं अपने बेटों के आने का इंतज़ार करने लगी। मेरा इरादा था कि आज मैं उन्हें मुझे चोदने के लिए तैयार कर लूँगी और सारी रात ऐश करूँगी उनके साथ।
वो भी आज तोड़ा जल्दी ही आ गये थे। जब वो आए तो मैं अपने रूम में लेटी हुई थी। दोनों ही मेरे पास आ कर बैठ गये और पूछा कि, “माँ क्या बात है?” तो मैंने कहा कि, “आज तबीयत ठीक नहीं है थोड़ी कमर दर्द कर रही है, और टाँगें भी दुख रही हैं।” मैंने रहीम से कहा कि, “बेटा मेरी कमर दबा दो और राशिद तुम ज़रा टाँगें दबा दो।” तो वो बोले कि, “हम चेंज करके आते हैं।” और वो चेंज करने चले गये।
फिर जब वापिस आए तो दोनों ने लोवर और शर्ट्स पहनी हुई थी। रहीम मेरे पास आ कर मेरी पीठ दबाने लगा और राशिद मेरी टाँगें दबाने लगा। दोनों का स्पर्श पाते ही मेरी चूत किलकारियाँ सी मारने लगी थी, और मैं ये सोच रही थी कि वो अगर आज मेरी चुदाई के लिए मान गये तो मज़े ही मज़े होंगे। फिर राशिद मेरी पीठ दबाने लगा और बीच-बीच में कभी-कभी मेरे चूतड़ भी दबा देता था।
रहीम भी टाँगें दबाते-दबाते कभी-कभी मेरे चूतड़ों के बीच में हाथ लगा देता था। उनके ऐसा करने से मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था। करीब दोपहर का 1 बज चुका था। फिर धीरे-धीरे रहीम और राशिद दोनों ही मेरे चूतड़ों को दबाने लग गये। मैं कुछ भी नहीं बोली और मज़े से लेटे रही। मैं तो चाहती ही थी कि वो आगे बढ़े कि तभी दोनों ने मेरी टाँगों को सहलाना शुरू कर दिया।
मैं एक-दम से सीधी हो गई, तो वो एक-दम से डर गये। तो मैंने हंसते हुए कहा, “क्या हुआ।” तो बोले कि, “कुछ नहीं।” तो मैंने कहा कि, “एक बात कहूं?” वो बोले कहिए। तो मैंने कहा कि, “जो तुम दोनों कर रहे थे, मुझे बहुत मजा आ रहा था। जरा फिर से करो ना।” और अब मैं उनके सामने सीधी लेटी हुई थी।
दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और फिर दोनों ही मेरी टाँगें सहलाने लगे। फिर राशिद ने तो झट से अपना एक हाथ मेरी चूची पे रख दिया और लगा उन्हें मसलने। मैंने नाईटी ही पहनी हुई थी। अब राशिद और रहीम दोनों ही मेरी एक-एक चूची को सहला रहे थे, तो मैंने उनसे कहा, “बेटा ये क्या कर रहे हो? क्या चाहिए तुम दोनों को?” तो दोनों एक साथ बोले, “अम्मी दूध पीना है।”
तो मैंने कहा, “तो फिर देख क्या रहे हो? पी लो। क्या अम्मी कभी अपने बेटो को दुदू पीने से माना करती है भला?” मैं तो मस्त हो रही थी। पूरे मूड में थी। दोनों ने ही मुझे उठा कर मेरी नाईटी उतार दी, और फिर ब्रा भी उतार दी। फिर दोनों ही एक एक बूब्स को चूसने लगे। मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था। मैं मस्त होने लगी थी। मेरी चूत में हलचल होने लगी थी।
फिर मैंने उनसे कहा, “अपने-अपने कपड़े उतार दो।” तो दोनों ने ही अपने-अपने कपड़े उतार दिए, और सिर्फ़ अंडरवियर में ही रह गये। फिर से वो मेरे बूब्स चखने लगे और इस बार उन्होंने मेरी पेंटी भी नीचे कर दी और दोनों ही मेरी चूत को भी सहलाने लगे।
उनके लंड उनके अंडरवियर में फनफना रहे थे। मैंने दोनों के अंडरवियर के बीच में ही दोनों के लंडों को पकड़ लिया और सहलाने लगी। फिर उनके लंडों को पकड़ते ही मुझे लगा जैसे मैंने कोई गरम रॉड पकड़ी हो। दोनों के लंड रोड की तरह गर्म थे। फिर मैंने उनके अंडरवियर उतार दिए। अब हम तीनों बिल्कुल नंगे थे।
रहीम बोला कि, “अम्मी मुझे आपकी चूत चाटनी है।” तो राशिद बोला कि, “मुझे अपना लंड चुसवाना है।” तो मैंने कहा कि, “जो दिल करता है करो। मैंने तुम्हें कब मना किया है?” फिर रहीम मेरी टाँगों के बीच में आ गया और मेरी चूत को चाटने लगा। उधर राशिद ने अपना लंड मेरे मुंह में घुसा दिया। रहीम मेरी चूत को ज़ुबान अन्दर डाल-डाल के चाट रहा था और कभी मेरी चूत को भी चूसने लगता था।
अब मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था। मैं सिसकने लगी थी। राशिद का लंड मुंह में होने की वजह से मेरे मुंह से गून-गून की आवाज़ें आ रही थी। राशिद ने मेरे मुंह से अपना लंड निकल लिया तो मैं दोनों के लंडों को सहलाने लगी। और कह रही थी, “आ हाईईइ, मेरे बेटो अहह खूब चूसो अपनी अम्मी को आ उफफफ्फ़ अहह क्या गजब है अहह अहह हाई उफफफफफफ्फ़ बुझा दो आज मेरी आग हाईईईईईईईईई हाईईईईईई ह अफ ओह और ज़ोर से अहह रहीम बेटा बहुत मज़ा आ रहा है आ हाईईईईई ओह उफफफफफफ।”
और वो दोनों बस लगातार लगे हुए थे मेरी चूत और बूब्स को चाटने। फिर रहीम मेरी चूची को दबाने लगा और राशिद मेरी टाँगों के बीच पहुँच गया और मेरी चूत को चूमता हुआ बोला, “अम्मी क्या हम तीनों भाई यहीं से निकले हैं?” तो मैंने कहा कि, “हाँ तुम तीनो यहीं से निकले हो।”
बस फिर क्या था। वो मेरी चूत में अपनी ज़ुबान पूरी घुसा के अंदर-बाहर करने लगा। मैं मस्ती की चरम सीमा पे पहुँच गई और बोली, “आ हाईईइ उफफफफ्फ़ आ हां राशिद बेटा बहुत मज़ा आ रहा है। अहह ओफफफफफ और ज़ोर से बेटा।”
तो वो दोनों बोले, “अम्मी असली मज़ा तो अभी आएगा जब हम दोनों आपको चोदेंगे।”
तो मैंने कहा कि, “सच में बेटा अहह अहह उफफफफ्फ़ और ज़ोर से आ पी जाओ अपनी अम्मी का दूध, इसी से ताक़त मिलेगी अहह।” तो वो बोले कि, “अम्मी आपके दूध की ताक़त ही तो दिखानी है।”
दोस्तों आज की कहानी यहीं तक। आगे की कहानी अगले पार्ट में।
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