पिछला भाग पढ़े:- बेवा अम्मी की चूत की प्यास बुझाई
हेलो मेरे प्यारे दोस्तों, मैं एक बार फिर हाजिर हूं आप सब के लिए अपनी सेक्सी कामुक स्टोरी लेके। आशा करता हूं कि आप सब को मेरी पिछली कहानी पसंद आई होगी। आज मैं आप सब को बताने वाला हूं कि कैसे अम्मी ने मुझे अपनी और मेरे दोनों भाइयों की चुदाई के बारे मैं बताया। अब कहानी में पढ़े।
दोस्तों आज मेरा जन्मदिन था और अम्मी ने मेरा जन्मदिन बहुत ही ख़ास बना दिया। हम लोग पहले शॉपिंग के लिए गये। फिर उन्होंने मुझे तोहफे में एक बुके गिफ्ट दी जिसे पाके मैं खुश हो गया। फिर रात में रेस्टोरेंट में अम्मी और मेरे दोस्तों ने केक कट किया और सेलिब्रेट किया। हमनें बिरियानी भी खाई, फिर रात को हम लोग घर वापस आ गये।
फ्रेश होके हम दोनों हॉल में बैठे और आज के पूरे दिन के बारे में बातें करने लगे। तभी मैंने अम्मी को कहा, “अम्मी अभी रात के 8 बजे और अभी भी मेरा जन्मदिन ख़तम होने में 4 घंटे बाकी हैं। क्यूँ ना हम दोनों मज़े करे?”
अम्मी समझ गयी कि मैं चुदाई के बारे में बात कर रहा था।
अम्मी ने बोला: जैसे बर्थडे बॉय की आज्ञा।
मैं उठा और एक जैसलमेर जिन की बोतल, 2 ग्लास, बर्फ और खाने के लिए चिप्स ले आया। फिर मैंने 2 पेग बनाये और एक अम्मी को दिया। फिर हम दोनों साथ मैं चियर्स करके पीने लगे। थोड़ी देर 2 पेग पीने के बाद हम दोनों पर नशा छाने लगा तभी अम्मी मुझे बोली, “मैं तुम तीनों को पाके बहुत खुश हूं। तुम तीनों मेरा कितना ध्यान रखते हो, आइ लव यू मेरे बच्चों।” तभी मैं अम्मी को बोला-
मैं: आइ लव यू 2 अम्मी। हम सब आपको बहुत प्यार करतें है। आपने भी हम सब का कितना ख़याल रखा है।
तभी मैं अम्मी से उस दिन हुई चुदाई के बारे में बातें करने लगा। अम्मी ने भी खुश हो कर मुझे एक जोरदार किस्स किया। फिर मैंने अम्मी से पूछा, “अम्मी आपने उस दिन बताया नहीं कि कैसे रहीम भाईजान और रशीद भाईजान ने आपकी प्यास बुझाई, आज तो वो कहानी सुना दो।”
अम्मी: लगता है मेरे प्यारे बेटे अफ़ज़ल की सुई उसी बात पर अटक गयी है?
मैं: हां अम्मी, मुझे वो कहानी सुननी है प्लीज़।
अम्मी भी हल्के नशे में होने के कारण और मेरी और उनकी चुदाई के बारे में सोच कर गरम हो गयी थी। तो उन्होंने मुझे वो कहानी सुना दी। अब आगे आप सब वो कहानी खुद ही अम्मी के मुख से सुनें और कहानी का आनंद ले।
मेरा नाम फ़हमीदा है, और मेरी उम्र इस वक्त 40 के करीब है। मैं एक बहुत ही सुंदर, और सेक्सी लेडी हूं। मेरा फिगर है 38-32-34, मेरा रंग सॉफ है और दिखने में 40 की नहीं 28-30 की लगती हूं। कोई भी मुझे देख कर ये नहीं कह सकता कि मेरी उम्र 40 होगी। मैं एक स्कूल टीचर हूं, और स्कूल में सभी टीचर मुझे देख कर और मेरी कमर को मटकती देख कर आहें भरते हैं।
खैर अब मैं आप लोगों को अपनी फैमिली के बारे मैं बताती हूं। मेरे पति हैदर जो अब इस दुनिया में नही हैं और मेरे तीन बेटे हैं। बड़े वाले रहीम की उम्र 26 है, मंझले बेटे रशीद की उम्र 24 और सबसे छोटे बेटे की उम्र 20 है। तीनों ही बहुत सुंदर है और ऊंचाई 6 फीट के करीब है। और तीनों ही पढ़ाई में बहुत तेज है। मैं अपने परिवार के साथ बहुत खुश हूं।
हम मुर्शिदाबाद में रहते हैं, और वहीं के एक स्कूल मैं गणित की टीचर हूं। मेरे दो बेटे कॉलेज में पढ़ते हैं। मेरा छोटा बेटा होस्टल में रहता है और वहीं अपनी पढ़ाई करता है, और घर पे एक-दो दिन के लिए ही आता है।
मेरे पति को गुज़रे हुए 10 साल हो गये और अब मुझे सेक्स की भूख सताने लगी थी। मैं रोज रात उनको याद करके अपनी चूत मैं उंगली करके सोती थी। कभी-कभी मेरा मन करता था कि किसी मर्द से अपनी प्यास बुझा लूँ। लेकिन मैं अपने आप को एक पवित्र औरत समझती थी, इसलिए कभी भी मैंने किसी और के बारे मैं सोचा भी नहीं था और ना ही दूसरी शादी की। दिन में तो काम के चलते वक्त कट जाता, लेकिन रात बहुत ही लम्बी और तन्हाई सी लगती।
यू ही दिन गुज़र रहे थे। मेरे दोनों बेटे सुबह 6 बजे जिम चले जाते थे और मैं घर पे नाश्ता वगैरह तैयार करती थी। वो करीब 7 बजे वापिस आ जाते थे। उनके लिए मैं नाश्ता पहले ही तैयार कर लेती थी। फिर वो नहा कर नाश्ता कर लेते थे और मैं 8 बजे स्कूल के लए निकल जाती थी और वो दोनों कॉलेज के लिए।
मैं करीब 2 बजे वापिस आ जाती थी और वो भी करीब 2 या 3 बजे वापिस आ जाते थे। फिर हम लोग अपने-अपने रूम में रेस्ट करते और शाम को एक साथ खाना खाते थे। कोई 9 बजे तक हम एक साथ ही टीवी देखते थे, और उसके बाद हम अपने-अपने रूम मैं जिसका जितने टाइम तक दिल करता टीवी देखता और सो जाता। यहीं हम सब की डेली की रूटीन थी। दिन हर रोज सेम ही थी।
मेरा मन बहुत ही बेचैन रहता था। मेरे दोनों बेटे मेरे बेडरूम के साथ एक स्टडी रूम था और उसके साथ दो बेडरूम थे उसमें सोते थे। दोनों के रूम के साथ सेंटर में एक ही बाथरूम था जो दोनों रूम से अटैच था। कभी-कभी जब बेटे घूमने गये होते थे, तो मैं स्टडी रूम मैं बैठ कर कंप्यूटर पे चैटिंग वगेरह कर लेती थी। वो भी मुझे मेरी एक फ्रेंड ने सिखाया था।
यू ही दिन निकल रहे थे। मेरे पति को गये हुए 10 साल हो गये थे। मैं रात को कभी अपने रूम से बाहर नही निकलती थी। उस दिन मैं कोई 9 बजे सो गई थी और करीब 12:30 बजे के करीब मेरी आँख खुल गई। मुझे लगा जैसे मैंने कोई आहट सुनी हो लेकिन रूम में कोई नहीं था।
मैं बाथरूम गई और फिर पानी पीने के लिए टेबल के पास गई तो देखा कि आज मैं अपने लिए पानी रखना ही भूल गई थी। सो मैं पानी पीने के लिए अपने रूम से बाहर निकली और रसोई मैं से पानी लिया और वापिस आपने रूम की तरफ आ गई। लेकिन जैसे ही मैं स्टडी रूम के पास पहुँची तो एक दम से रुक गई कि स्टडी रूम की लाइट जल रही थी।
मैं हैरान रह गई क्यूंकि स्टडी रूम की लाइट तो आज मैंने खुद ही बंद की थी, फिर ये जल कैसे रही थी? मैं जैसे ही दरवाजे के पास पहुँची, मुझे अंदर से कुछ आवाज़ें आती हुई सुनाई दी। मैं हैरान रह गई कि अंदर से आह्ह्ह उहहहह क्यूंकि आवाज़ें आ रही थी।
मैं दरवाजा खोलने ही वाली थी कि तभी मेरे मन में ना जाने क्या आया कि मैंने दरवाजे पे ना ही कोई दस्तक दी, और ना ही दरवाजा खोला, बस होल पे आँख लगा दी। फिर जैसे ही मैंने अंदर का नज़ारा देखा, तो मेरे तो होश उड़ गये।
मैंने देखा कि अंदर मेरे दोनों बेटे बैठे हुए थे, और कंप्यूटर पर एक सेक्सी मूवी देख रहे थे। दोनों ने अपनी अपनी पेंट उतारी हुई थी और दोनों ही अंडरवियर पहने घुटनों के बल ज़मीन पे बैठे हुए थे, और दोनों ने अपने-अपने लंड निकाल के हाथ में पकड़े हुए थे। वो लंड सहला रहे थे। दोनों के लंड करीब 7 इंच लंबे और 3 से 3.5 इंच मोटे होंगे।
मैंने देखा कि वो मूवी देख रहे थे और मंझला बेटा राशिद जो कि रहीम से 2 साल छोटा था, कह रहा था, “भाईजान ये मूवी आप कहां से लेकर आए हो? बहुत मजेदार है।” और ये कहते-कहते वो दोनों अपने लंडो को आगे-पीछे कर रहे थे, मुठ मार रहे थे।
मैं बाहर खड़ी उन दोनों के लंडो को निहार रही थी जो कि तने खड़े थे। मेरे मन मैं ये विचार आया कि अभी मेरे बच्चे जवान हो गये थे। मैं अभी ये सब सोच ही रही थी कि तभी दोनों के लंडो ने पिचकारी मार दी और दोनों फ्री हो गये। फिर राशिद बोला, “भाईजान, अब चल के सो जाते हैं। बाकी मूवी कल देखेंगे।”
तो रहीम बोला कि ठीक है भाई। उन्होंने कंप्यूटर बंद कर दिया और मैं झट से वहां से अपने रूम मैं आ गई।
इसके आगे क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा।