पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-7
हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-
सुबह-सुबह मम्मी मंदिर गयी हुई थी। मैं और दिव्या डाइनिंग टेबल पर बैठे थे। दिव्या बीती रात मेरी और मम्मी की चुदाई देख चुकी थी और मुझसे अपनी फुद्दी भी चुसवा चुकी थी। दिव्या ने मुझे साफ़-साफ़ ही बोल दिया था कि अब वो मुझसे चुदाई करवाना चाहती थी।
थोड़ी ही देर बाद मम्मी मंदिर से वापस आ गयी। मम्मी के पीछे-पीछे दिव्या और काम वाली भी आ गयी। आते ही मम्मी किचन में चली गयी और नाश्ता बनाने में कामवाली का हाथ बंटाने लगी।
दिव्या ने ये देखा तो बोली, “मम्मी क्या बात है। बड़ी जल्दी-जल्दी काम कर रही हो। कहीं जाना है क्या?”
मम्मी बोली, “हां दिव्या, ममता के घर जाना है।”
ममता लेडीज टेलर थी और मम्मी की पुरानी जानकार थी। मम्मी, दिव्या और माधवी के कपड़े ममता ही सिलती थी। ममता लेडीज सूटों का कपड़ा भी रखती थी। मम्मी बोली, “एक सूट ठीक करना दिया है और कुछ नए भी सिलवाने हैं। जाने की तैयारी भी करनी है। ममता से बात हुई थी। वो बोल रही थी दोपहर का खाना उसी के घर खाऊं। तुम लोग खाना खा लेना मैं पांच साढ़े पांच बजे तक आऊंगी।”
दिव्या ने मेरी तरफ देखा और अपनी फुद्दी को छू कर अपनी जुबान अपने होठों पर फेर दी – मतलब “फुद्दी चूसने को तैयार रहना।”
दिव्या मेरी और मम्मी की चुदाई देख कर मस्त हुई पड़ी थी। नाश्ता करके ग्यारह बजे मम्मी चली गयी। एक घंटे के बाद बारह बजे काम वाली दोपहर का और रात का खाना बना कर चली गयी। कामवाली एक बार ही आती थी और सारा काम करके ही जाती थी। दिव्या नीचे गयी और दरवाजा बंद करके कपड़े बदल कर आ गयी। दिव्या ने लम्बी मैक्सी डाली हुई थी। लग रहा था आज दिव्या फुल मजे लेने के मूड में थी।मगर इसमें उसकी भी क्या गलती थी। उसकी उम्र कोइ भी लड़की अगर चुदाई होती हुई देख ले तो उसकी भी यही हालत होती।
दिव्या आते ही बोली, “लो धीरज में तो हो गई तैयार। मम्मी पांच साढ़े पांच बोल कर गयी है मगर छह बजे से पहले नहीं आने वाली। अभी बारह ही बजे हैं। आज बहुत टाइम है हमारे पास। कम से कम चार-पांच घंटे तो हैं ही हमारे पास। अब तो चुदाई का मजा दे ही दो।”
मेरा लंड दिव्या की बातें सुन कर खड़ा हो गया। मैंने सोचा, “यार धीरज, ये हो क्या रहा है। बैठे बिठाए कुंवारी लड़की अपनी सील बंद फुद्दी को प्लेट में सज कर चुदाई के लिए परोस रही थी।”
अनायास ही मैंने पूछ लिया, “दिव्या, प्रिकॉशन – मतलब कोइ गोली वाली है तुम्हारे पास, या कंडोम लाऊं मार्किट से?”
दिव्या हंसते हुए बोली, “धीरज कौन से सदी में जी रहे हो बेटा?”
जैसे ही दिव्या ने बोला, “कौन से सदी में जी रहे हो बेटा’, तो मुझे लगा मैं तो अपनी छोटी बहन के सामने तो में फुद्दू ही था।
दिव्या ही आगे बोली, “धीरज इस उम्र में मम्मियां ही अपनी बेटियों को गोली भी ला कर देती हैं और कंडोम भी – ना जाने कब और किन हालातों में जवान बेटी चुद जाए। अगर इस तरह अचानक से बेटी की चुदाई हो जाए – तो बाद में कौन भुगतेगा नतीजे?”
और फिर दिव्या बोली, “और धीरज मम्मी अभी चवालीस की ही है। इस उम्र में भी तो औरत प्रेगनेंट हो जाती है अगर चोदने वाला तुम्हारे जैसा जवान लड़का हो। तुम क्या समझते हो मम्मी ने तुमसे चुदाई करवा ली कोइ कसर छोड़ी होगी? अगर चुदाई करवाते हुए मामी ने तुम्हारे लंड पर कंडोम नहीं चढ़वाया तो पक्का ही मम्मी ने कोइ गोली खाई होगी। तुम बेफिक्र हो कर मेरी चुदाई करो, गोली है मेरे पास।”
जिस रह दिव्या बातें कर रही थी, दिव्या की बातों से मुझे भी मस्ती आ गयी। मेरा लंड भी कुंवारी फुद्दी में जाने के लिए मचलने लगा। आखिर को तो मैंने भी जिंदगी की पहली कुंवारी फुद्दी चोदनी थी सील बंद फुद्दी।
जब मैंने दिव्या को चोदने से पहले दिव्या से प्रोटेक्शन की बात की तो दिव्या ने तो मेरा मजाक ही उड़ा दिया। दिव्या बोली, “धीरज इस उम्र में मम्मियां ही अपनी बेटियों को गोली भी ला कर देती हैं और कंडोम भी – ना जाने कब और किन हालातों में जवान बेटी चुद जाए। अगर इस तरह अचानक से बेटी की चुदाई हो जाए – तो बाद में कौन भुगतेगा नतीजे?”
मैं सुन रहा था और सोच रहा था, “कि यार औरतें भी कमाल ही होती हैं – चाहे सहेलियां हों, बहने हों या मां-बेटियां, हम साले मर्द तो इन लड़कियों औरतों के सामने अभी पैदा ही नहीं हुए।”
लेकिन असली बम तो अब फटने वाला था।
दिव्या बोली, “और धीरज एक बात बताओ, तुम मां-बेटे की चुदाई हो ही चुकी है, है ना? तुमने क्या सोचा, मम्मी हमें इतना कुछ बोल कर गयी है – मैं इतने बजे आऊंगी, उतने बजे आऊंगी। धीरज मम्मी को चवालीस की उम्र में भी फुद्दी में लंड डलवाने की – चुदाई करवाने की ठरक है, तो मैं तो फिर बीस की हूं। असली चुदाई करवाने की उम्र तो मेरी है, ना कि मम्मी की। मेरी उम्र की बहुत सी लड़कियां एक दो नहीं, चार-चार लंड फुद्दी में ले चुकी होती हैं। अब तुम ही बताओ, मैं ही कौन सी अलग हूं? फुद्दी तो मेरे आगे भी लगी ही हुई है, फुद्दी ने लंड डलवाने का मजा मुझे भी तो आएगा ही?”
“मम्मी ने भी सोचा होगा, जवान बेटी है, लंड तो उसकी फुद्दी भी मांगती ही होगी। इधर-उधर का लंड ढूंढती फिरे, इससे अच्छा है घर की बात घर में ही रहे। एक बार मोटा लंड फुद्दी में चला गया तो कम से कम चुदवाने की ठरक – फुद्दी में लंड लेने का क्रेज़ तो कम हो जाएगा। तुम्हारे मोटे लंड से एक बार चुदाई हो जाए तो एक तो आगे की लिए मेरी चुदाई का रास्ता भी साफ़ हो जाएगा और दूसरे मोटे लंड की चुदाई से मेरी फुद्दी की तसल्ली भी हो जाएगी। और वो जल्दी लंड नहीं मांगेगी। और अगर मांगेगी भी तो तुम कौन सा फौज में जा रहे हो – एक फोन ही तो घुमाना है और तुम यहां। फिर चढ़ो मां-बेटी दोनों की ऊपर”, ये बोल कर दिव्या हंस दी।
“तुम कौन सा फौज में जा रहे हो – एक फोन ही तो घुमाना है और तुम यहां… फिर चढ़ो , मां बेटी दोनों की ऊपर।” दिव्या की इस बात पर तो मेरी भी हंसी छूट गई।
फिर दिव्या बोली, “और धीरज एक बात और बता दूं। अगर मम्मी ने मेरी और तुम्हारी चुदाई करवाने की सोच ही ली है तो देख लेना जब मम्मी पापा तीर्थ यात्रा पर जायेंगे तो मम्मी माधवी को भी यहां बुलवा लेगी तुमसे चुदवाने के लिए। मम्मी को मालूम है मौसी – माधवी की मम्मी – के बस में ये सब बातें इतनी बारीकी से सोचना नहीं है – वो इतनी चुस्त चालाक नहीं है – सीधी सादी घरेलू औरत है वो।”
दिव्या के बातें सुन-सुन कर मैं हैरान था और सोच रहा था, “मम्मी और दिव्या इतना सोचती थी और मैं महान गांडू? एक नंबर का चूतिया ही था मैं इन मां-बेटी के सामने।”
दिव्या बोली, “चलो अब धीरज, मेरी फुद्दी में से पानी बाहर टपकने लगा है। अब चलो वो असली काम करें जिसके लिए हमारी समझदार मम्मी हमें अकेला छोड़ कर गयी है। चलो तोड़ो अपनी कुंवारी बहन की फुद्दी की सील और मजा लो टाइट फुद्दी चोदने का।”
अब तो मेरी झिझक खत्म हो चुकी थी। मैंने भी कहा, “चलो दिव्या तुम्हें आज जन्नत की सैर करवाता हूं, ऐसा मजा दूंगा कि ज़िंदगी भर आज कि चुदाई याद रहेगी तुम्हें।” और हम दोनों मेरे वाले कमरे में आ गए।
अंदर आते ही दिव्या ने अपनी मैक्सी उतार दी और मैंने अपना कुरता पायजामा। पहली बार मैंने एक बीस साल कि जवान लड़की का नंगा जिस्म देखा था।
तराशा हुआ जिस्म। छोटी मगर तनी हुई चूचियां और चूचियों के ऊपर छोटे-छोटे निप्पल – मुश्किल से दिखाई दे रहे थे। पतली कमर और नीचे रेशमी मुलायम झांटों वाली फुद्दी – इतनी छोटी फुद्दी कि एक बार तो मेरे दिमाग में आया, “इस फुद्दी में मेरा गधे के लंड जैसा लंड चला भी जाएगा?”
फिर मुझे ध्यान आया कि अब तक कोइ भी ऐसी लड़की नहीं हुई, जो बड़े से बड़े लंड अपनी फुद्दी में ना ले पायी हो। यही कुदरत का नियम है और हमारी दिव्या कोइ अलग लड़की नहीं है।
दिव्या के उभरे हुए गोल-गोल चूतड़ ऐसे कि देखते ही गांड चोदने का मन करने लग जाए। कुल मिला कर बिना कपड़ों के दिव्या मुझे गजब की सुन्दर और सेक्सी लग रह थी।
अब हालत ये थी कि अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था। मैंने ने दिव्या से पूछा, “दिव्या अब? लंड चूसना है, फुद्दी चुसवानी है या सीधी चुदाई ही करवानी है।”
दिव्या बोली, “धीरज जल्दी क्या है, पांच घंटे हैं हमारे पास, और आज तो चुदाई के अलावा हमारे पास और कोइ काम भी नहीं है। पहले अपना लंड चुसवाओ, फिर मेरी फुद्दी चूसो और फिर डालो अपना लंड मेरी फुद्दी में – तोड़ो मेरी फुद्दी कि सील और चोदना शुरू कर दो अपनी बहन को।”
मैंने दिव्या को वहीं बेड पर बिठा दिया और लंड उसके मुंह के आगे कर दिया। दिव्या ने लंड मुंह में लिया और अपनी जुबान लंड के टोपे पर फिराने लगी। लंड तो पहले ही सख्त था अब दिव्या कि जुबान लगते ही फटने को हो गया।
लंड की सख्ती को दिव्या ने भी महसूस किया। दिव्या बोली, “धीरज ये लंड खड़ा हो कर तो बहुत सख्त हो जाता है, लकड़ी की तरह। चलो अब एक बार मेरी फुद्दी और चूसो और डालो लंड फुद्दी में तुम्हारा लंड देख कर अब रहा नहीं जा रहा।” ये कह कर दिव्या फिर पीछे की तरफ लेट गयी और अपनी टांगें खोल दी।
मैं नीचे बैठ गया और दिव्या कि टाइट फुद्दी देखने लगा। जैसे ही मैंने दिव्या कि फुद्दी की फांकें खोली, दिव्या कि फुद्दी से पानी सच ही बाहर टपकने लगा था। मैंने दिव्या के टांगें थोड़ी और चौड़ी की और हाथों से फुद्दी खोल कर अपनी जुबान दिव्या कि फुद्दी में डाल दी और उसकी फुद्दी का दाना चूसने लगा। दो मिनट कि चुसाई के बाद ही दिव्या को मजा आने लगा। दिव्या “आह धीरज आह धीरज” बोलने लगी और साथ ही दिव्या के चूतड़ हिलने लगे।
मैं समझ गया दिव्या कि दिव्या कि फुद्दी अब लंड मांग रही है। पहली-पहली चुदाई में ऐसा ही होता है।
गीली, पानी से भरी पड़ी दिव्या की फुद्दी मेरे सामने थी। लंड तो मैं ऐसे भी दिव्या की फुद्दी में डाल सकता था, मगर मैं पहली बार दिव्या को दिव्या के ऊपर लेट कर उसे बाहों में लेकर उसे चोदना चाहता था, जैसे पति-पत्नी अक्सर पहली रात की चुदाई में करते हैं।
मैंने एक बार दिव्या के चूतड़ खोल कर उसके चूतड़ों का छेद चाटा। दिव्या की फुद्दी तो मस्त थी ही, चूतड़ों का छेद भी मस्त था। छोटा सा छेद गुलाबी रंगत लिए हुए था। ऐसा लग रहा था जैसे किसी लड़की ने अपने गोरे माथे पर गुलाबी बिंदी लगाई हुए हो। मैंने सोचा दिव्या कि फुद्दी कि सील तो आज तोड़नी ही है, किसी दिन दिव्या कि गांड भी जरूर चोदूंगा।
मैं खड़ा हो हो गया और दिव्या से बोला, “चलो दिव्या लेट जाओ बिस्तर पर।”
दिव्या की फुद्दी गरम थी। दिव्या फुद्दी पर हाथ फेरते हुए बोली, “क्यों बिस्तर पर क्यों, धीरज ऐसे क्यों नहीं, ऐसे ही चोद लो। लंड तो ऐसे भी पूरा अंदर बैठ जाएगा। वो चुदाई की फिल्मों में ज्यादातर ऐसी ही चुदाई करते हैं।”
मैंने कहा, “दिव्या, उन चुदाई की फिल्मों के बात छोड़ो। ये तरीका भी ठीक है, मगर तुम्हारी पहली चुदाई है, मस्त होनी चाहिए। चलो बिस्तर पर लेटो, हस्बैंड वाइफ की पहली रात कि चुदाई कि तरह तुम्हें चोदूंगा – मस्त मजा आएगा तुम्हें।
दिव्या उठी और बिस्तर पर लेट गयी। मैंने दिव्या के चूतड़ों के नीचे तकिया रखा, दिव्या की टांगें उठा कर फैला दी। मुझे दिव्या के तने हुए मम्मे बहुत मस्त कर रहे थे। मैंने दिव्या के ऊपर झुक कर दिव्या के मम्मे चूसन लग गया। दिव्या एक बार बोली, “आह धीरज”, और उसने मेरा सर अपने मम्मों पर दबा दिया।
मेरे मुंह में दिव्या के मम्मे का निप्पल था, इसके साथ ही मैंने हाथ नीचे करके, दिव्या की फुद्दी में उंगली ऊपर-नीचे करनी शुरू कर दी।
दिव्या मस्ती में बोली, “बस धीरज, अब अंदर डालो यार अंदर, रहा नहीं जा रहा।”
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