पिछला भाग पढ़े:- जुड़वाँ दीदियों के साथ जिस्म की चाहत-4
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
रात के करीब दो बजे थे। घर में सब सो रहे थे। तभी दरवाज़े पर हल्की सी दस्तक हुई। मैं अंदर से यही सोच रहा था कि शायद पायल दीदी ही हों। मैंने दरवाज़ा खोला। सामने पायल दीदी खड़ी थी। उन्होंने नाइट गाउन पहन रखा था। उनके चेहरे पर हल्की झिझक थी।
नाइट गाउन का कपड़ा पतला और ढीला था। उसके नीचे उनके स्तनों का आकार साफ़ दिख रहा था। चलते समय कपड़ा हिल रहा था, जिससे उनका उभार और ज़्यादा साफ़ लग रहा था। कपड़ा शरीर से चिपका नहीं था, लेकिन फिर भी उनके शरीर की बनावट छुप नहीं पा रही थी।
मैं कुछ सेकंड तक कुछ बोल नहीं पाया। रात का सन्नाटा और उनका अचानक आना माहौल को थोड़ा भारी बना रहा था।
वह धीरे-धीरे कमरे के अंदर आई। दरवाज़ा बंद करते समय उन्होंने इधर-उधर देखा। उनका चेहरा थोड़ा शर्माया हुआ था। कमरे में आकर उन्होंने धीमी आवाज़ में कहा, “क्या हम जल्दी कर सकते हैं? नेहा दीदी के जागने से पहले।”
मैं उनके पास गया। धीरे से उनका हाथ अपने हाथ में लिया और सावधानी से अपना हाथ उनके सीने पर रखा। उन्होंने कोई विरोध नहीं किया, बस आँखें नीचे कर लीं। मैंने कहा, “ठीक है, हम जल्दी कर लेंगे।”
मैंने बहुत हल्के से दबाव के साथ हाथ आगे बढ़ाया। कपड़े के ऊपर से ही मेरी हथेली को गर्माहट और मुलायमपन महसूस हुआ। मेरी उंगलियाँ एक जगह टिक कर रुक गई, जैसे खुद को संभाल रही हों। हथेली में एक अजीब सी धड़कन महसूस हो रही थी, और सांस अपने आप धीमी हो गई। उन्होंने हल्का सा कंधा सिकोड़ा, जैसे उन्हें एहसास हो रहा हो, पर फिर भी वह वहीं खड़ी रहीं। कमरे में बस हमारी सांसों की आवाज़ थी।
मैं और पास गया। उनके चेहरे के सामने रुक कर मैंने धीरे-धीरे झुक कर उनके होंठों की तरफ बढ़ने की कोशिश की। तभी उन्होंने हल्के से मेरे कंधे पर हाथ रखा और मुझे रोक दिया। उन्होंने आँखों में देखते हुए धीमी आवाज़ में कहा, “गोलू, इससे पहले मुझे कुछ कहना है।”
मैं रुक गया और धीमी आवाज़ में पूछा, “क्या बात है पायल दीदी?”
उन्होंने एक पल सोचा, फिर बोली, “पहले तुम कुर्सी पर बैठो।” मैंने बिना कुछ कहे कुर्सी खींची और बैठ गया। वह मेरे सामने आकर खड़ी हो गई। कमरे की रोशनी में उनका चेहरा शांत था, और उनकी आँखें मुझ पर टिकी हुई थी।
वह बोलना शुरू हुई। उनकी आवाज़ में गंभीरता थी। उन्होंने कहा, “गोलू, मुझे पता है कि हम खून के रिश्ते से नहीं जुड़े हैं, लेकिन फिर भी मैंने तुम्हें बचपन से अपने छोटे भाई की तरह ही देखा है। और अब तुम मेरे साथ सोना चाहते हो, फिर भी मैं तुम्हारे साथ सब कुछ करने के लिए तैयार हूं। लेकिन मेरी एक शर्त है।
मैंने बिना नज़र हटाए उनसे कहा, “आपकी शर्त क्या है, पायल दीदी? मैं आपके साथ सोना चाहता हूँ, और इसके लिए जो भी कहना हो, जो भी करना हो, मैं तैयार हूँ।”
यह सुन कर वह धीरे-धीरे मेरे और पास आई। फिर वह मेरे सामने आकर बैठ गई। उन्होंने अपना हाथ मेरे घुटनों पर रखा। उनका स्पर्श हल्का था, लेकिन साफ महसूस हो रहा था। उन्होंने शांत आवाज़ में कहा, “तुम्हें एंट्रेंस एग्ज़ाम क्रैक करना होगा। अगर तुम यह कर लेते हो, तभी मैं तुम्हारे साथ सेक्स करूंगी।”
यह कहते हुए उनके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई। वह मुझे देखते हुए मुस्कुरा रही थी। मैं बस उनका चेहरा देखता रह गया। नाइट गाउन के नीचे उनकी छाती साफ उभर रही थी। कपड़े के अंदर उनकी छाती भरी हुई और नरम लग रही थी। कपड़ा थोड़ा तना हुआ था, और उसकी सिलवटों के बीच से उभार साफ दिख रहा था। नाइट गाउन पर उनके निप्पल हल्के से दबे हुए नज़र आ रहे थे। मैं कुछ कह नहीं पाया, बस चुपचाप उन्हें देखता रहा।
कुछ सेकंड की खामोशी के बाद मैंने कहा, “ठीक है, मैं यह करूँगा। लेकिन एक बात पूछनी है, पायल दीदी।”
मैंने उनकी आँखों में देखते हुए आगे कहा, “अगर मैं एग्ज़ाम क्रैक कर लूँ और फिर आप कह दें कि हम सिर्फ भाई बहन जैसे ही हैं, तो मैं कैसे भरोसा करूँ? मुझे यह जानना है कि आप अपने कहे पर कायम रहेंगी।”
मेरी बात सुन कर वह कुछ पल चुप रही। फिर उन्होंने हल्का सा सिर झुकाया और शांत आवाज़ में बोली, “तो बताओ, गोलू… तुम्हारा भरोसा जीतने के लिए मुझे क्या करना चाहिए?”
उनकी यह बात सुन कर मैंने बिना नज़र हटाए, थोड़ी हिचक के बाद साफ-साफ कहा, “मैं आपको बिना कपड़ों के देखना चाहता हूँ।”
यह सुन कर वह हल्के से मुस्कुराई। मेरी तरफ देखते हुए वह खड़ी हो गई। खड़े होते समय नाइट गाउन का कपड़ा उनके शरीर से और साफ दिखने लगा। उन्होंने दोनों हाथों से नाइट गाउन के आगे के बटन पकड़े। उंगलियाँ थोड़ी कांप रही थी, लेकिन चेहरे पर हल्की सी मुस्कान बनी हुई थी।
उन्होंने ऊपर से नीचे की तरफ एक-एक कर बटन खोलना शुरू किया। हर बटन खुलने के साथ कपड़ा थोड़ा ढीला होता गया। जैसे-जैसे नाइट गाउन खुल रहा था, अंदर की गुलाबी ब्रा साफ दिखने लगी। ब्रा साधारण थी, लेकिन फिट ठीक था। ब्रा के अंदर उनकी छाती भरी हुई लग रही थी, कपड़े के अंदर दबाव साफ दिख रहा था।
नाइट गाउन पूरी तरह खुलने पर वह सामने खड़ी थी। उन्होंने गुलाबी ब्रा और गुलाबी पैंटी पहन रखी थी। ब्रा उनके शरीर से ठीक से सटी हुई थी, जिससे उनका आकार साफ नज़र आ रहा था। रोशनी में ब्रा का रंग और कपड़ा दोनों साफ दिख रहे थे।
नीचे उनकी पैंटी भी गुलाबी थी। पैंटी शरीर से ठीक से लगी हुई थी। उसके ऊपर से उनके शरीर का निचला उभार साफ दिख रहा था, सब कुछ कपड़े के अंदर ढका हुआ था। वह अपनी टाँगें हल्की सी पास रखे खड़ी थी। उनका चेहरा शर्म और मुस्कान के बीच अटका हुआ था।
फिर उन्होंने नज़र झुकाई और हल्की सी हँसी के साथ बोली, “गोलू… एक सेकंड के लिए अपनी आँखें बंद कर सकते हो? मुझे थोड़ी शर्म लग रही है।”
मैंने बिना बहस किए कहा, “ठीक है, पायल दीदी।” और अपनी आँखें बंद कर लीं।
आँखें बंद होने के बाद भी कमरे की हर हलचल महसूस हो रही थी। पास से कपड़े की हल्की आवाज़ आई, जैसे कोई धीरे-धीरे कुछ ठीक कर रहा हो। उनकी नज़दीकी साफ महसूस हो रही थी। हवा में उनकी खुशबू थी, और मेरी सांस अपने आप तेज़ हो गई। मैं कुछ देख नहीं रहा था, लेकिन हर पल यह एहसास हो रहा था कि वह मेरे सामने खड़ी हैं और कुछ बदल रहा है। कमरे की खामोशी और भी गहरी हो गई।
थोड़ी देर बाद उन्होंने कहा। “अब अपनी आंखें खोल सकते हो।”
मैंने अपनी आंखों को धीरे से खोला और एक पल के लिए मानो मेरी सांसें बंद सी हो गई। ज़िंदगी में पहली बार पायल दीदी मेरे सामने पूरी तरह नंगी खड़ी थी। बचपन से लेकर आज तक मैं उन्हें इसी तरह देखने की कल्पना करता रहा था, लेकिन हक़ीक़त सामने होगी, यह कभी सोचा नहीं था। मेरी नज़र सबसे पहले उनके खुले स्तनों पर टिक गई। वे ना ज़्यादा बड़े थे, ना छोटे — बिल्कुल संतुलित, हल्के से नीचे की ओर झुके हुए, और इतने कोमल कि देखने भर से ही लगता था जैसे छूते ही हथेलियों में पिघल जाएंगे।
उन्होंने हल्की सी झिझक के साथ अपने पैर आपस में पास ला लिए, जैसे अपने नाज़ुक हिस्से को ढकने की कोशिश कर रही हों। लेकिन उनका यह प्रयास अधूरा सा ही रहा। जांघों के बीच की वह कोमल जगह पूरी तरह छुप नहीं पाई थी। रोशनी में उसकी साफ़ झलक दिख रही थी। वहाँ के हल्के होंठ गुलाबी पंखुड़ियों की तरह थोड़े से खुले हुए थे, ना पूरी तरह छिपे, ना पूरी तरह बेपरदा। उनके चारों ओर हल्के, मुलायम बालों का घेरा था, जो उस नाज़ुक हिस्से को और भी ज़्यादा आकर्षक बना रहा था।
मैं कुछ पल तक बस उन्हें देखता ही रह गया। मेरी नज़रें जैसे अपनी जगह से हट ही नहीं पा रही थी। उन्होंने मेरी हालत देख ली थी। उनके होंठों पर हल्की सी मुस्कान आई, जिसमें शर्म भी थी और एक अजीब सा भरोसा भी।
उन्होंने धीरे से कहा, “अब तो देख लिया… अब तुम्हें यक़ीन हो गया?”
मैंने गला साफ किया और धीमी आवाज़ में कहा, “हाँ, पायल दीदी… अब मुझे भरोसा है।”
वह एक क़दम मेरे और क़रीब आई। इतनी पास कि मैं उनकी गर्म सांस अपने चेहरे पर महसूस कर पा रहा था। उन्होंने अपना हाथ मेरे सिर पर रखा और हल्के से बालों में उंगलियाँ फिराई। वह स्पर्श बहुत साधारण था, लेकिन उस पल मेरे पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई।
कुछ सेकंड की खामोशी के बाद मैंने हिम्मत जुटाई। मेरी आवाज़ थोड़ी काँप रही थी, लेकिन शब्द साफ़ थे। मैंने उनकी आँखों में देखते हुए कहा, “पायल दीदी… क्या मैं आपको छू सकता हूँ?”
मेरे यह कहते ही उन्होंने अपना हाथ मेरे बालों से हटा लिया। एक पल के लिए कमरे में सन्नाटा गहरा गया। उन्होंने नज़रें झुका लीं, फिर मेरी तरफ़ देखा।
बहुत शांत, लेकिन बिल्कुल साफ़ लहजे में उन्होंने कहा, “गोलू, सुनो… जब तुम एग्ज़ाम क्रैक कर लोगे, तब तुम मुझे छू भी सकते हो, यहाँ तक कि… मुझे चोद भी कह सकते हो। लेकिन अभी नहीं।”
यह कहते ही वह पीछे हटी। कमरे की हवा जैसे अचानक हल्की हो गई। पायल दीदी ने फर्श पर रखे अपने कपड़े उठाए और बिना किसी जल्दी के उन्हें पहनना शुरू किया। पहले उन्होंने ब्रा पहनी, फिर पैंटी, और उसके ऊपर नाइट गाउन। हर हरकत में वही शांति थी, जैसे अभी-अभी जो हुआ, वह एक गहरी समझ का हिस्सा हो।
कपड़े ठीक करते हुए वह मेरे पास आई। उन्होंने दोनों हाथों से मेरे चेहरे को थाम लिया और बहुत हल्के से मेरे माथे पर एक चुंबन दिया।
मेरी आँखों में देखते हुए उन्होंने धीमी, लगभग फुसफुसाती आवाज़ में कहा, “आज की बात यहीं खत्म। और हाँ… नेहा दीदी को इस बारे में कुछ भी नहीं पता चलना चाहिए।”
मैंने बिना किसी हिचक के सिर हिलाया और धीमे से कहा, “हाँ, पायल दीदी।”
वह एक पल के लिए रुकी, जैसे कुछ और कहना चाहती हो, फिर हल्के कदमों से दरवाज़े की तरफ बढ़ गई। दरवाज़ा खोलते समय उन्होंने एक बार पीछे मुड़ कर मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में वही शांत मुस्कान थी। बिना कोई आवाज़ किए वह बाहर निकलीं और दरवाज़ा धीरे से बंद कर दिया।
मैं वहीं खड़ा रहा। कमरे में उनकी खुशबू अब भी तैर रही थी। कुछ देर बाद कदमों की हल्की आहट दूर होती चली गई। पायल दीदी अपने कमरे में वापस जा चुकी थी।
उस दिन के बाद से पायल दीदी और नेहा दीदी के साथ उस कमरे में रहने का एक अलग ही मजा आने लगा। क्योंकि दोनों ने मुझसे शर्माना कम कर दिया।
जब भी हमें थोड़ी देर के लिए अकेले रहने का मौका मिल जाता, कमरे का माहौल अपने आप बदल जाता। पायल दीदी का अंदाज़ बेझिझक हो गया था। वह जान-बूझ कर छोटे कपड़े पहन लेती। कभी शॉर्ट्स, तो कभी हल्की-सी लंबी क्लीवेज वाला टॉप। मैं देखता रहता, और वह यह सब महसूस करते हुए भी नजरें चुराने की कोशिश नहीं करतीं। उल्टा, एक हल्की-सी मुस्कान के साथ मेरी तरफ देख लेती, जैसे चुप-चाप कह रही हो कि यह सब ठीक है।
नेहा दीदी का तरीका थोड़ा अलग था। कम बोलना, ज़्यादा महसूस कराना। जैसे ही उन्हें अकेले रहने का मौका मिलता, वह धीरे-धीरे मेरे क़रीब आ जाती। बात किसी बहाने से शुरू होती। कभी पानी पूछना, कभी मोबाइल चार्जर और फिर बात करते-करते दूरी अपने आप कम हो जाती।
वह बहुत पास खड़ी हो जाती, इतनी कि उनकी मौजूदगी साफ़ महसूस हो। मेरी तरफ झुककर कुछ कहती, और उनकी आवाज़ हल्की-सी हो जाती।
कभी-कभी वह मेरे कंधे के पास से निकलतीं, जान-बूझकर इतना क़रीब कि सांसों का फासला भी मायने रखने लगे।
एक दिन ऐसा भी आया जब कॉलेज की लंबी लेक्चर्स से थका हुआ मैं घर लौटा। कमरे में सन्नाटा था। लगा कि कोई भी नहीं है। सिर भारी था, इसलिए सीधे बाथरूम की तरफ चला गया। अंदर से पानी की हल्की-सी आवाज़ आ रही थी, जैसे शॉवर चल रहा हो। मुझे लगा शायद नल खुला रह गया है।
मैंने धीरे से दरवाज़ा धकेला तो वह बंद नहीं था। दरवाज़ा खुलते ही मेरी नज़र सामने गई और उसी पल मेरी सांस अटक-सी गई। अंदर नेहा दीदी नहा रही थी। एक सेकंड के लिए समय थम गया। उन्हें भी आहट हुई और हमारी नज़रें मिल गई।
मैं घबरा गया। तुरंत नज़रें झुकाई और पीछे हटने ही वाला था कि उन्होंने शांत आवाज़ में बस इतना कहा, “रुको…।”
मैं वहीं रुक गया। ना आगे बढ़ सका, ना पीछे हट पाया। पानी की धार उनके कंधों से फिसलती हुई नीचे जा रही थी। गीले बाल उनकी गर्दन से चिपके थे और चेहरे पर एक अलग-सी शांति थी, जैसे उन्हें मेरी मौजूदगी का अहसास हो चुका हो, फिर भी वह घबराई नहीं थी। भाप से भरा बाथरूम हल्का धुंधला था, और उसी धुंध में उनकी परछाई और भी नरम लग रही थी।
शॉवर के नीचे खड़ी नेहा दीदी के शरीर पर गिरती पानी की बूँदें उनकी खुबसूरती को और उभार रही थी। उनके स्तन पानी की लहरों के साथ हल्के-से हिल रहे थे, जैसे हर बूँद उनके स्पर्श को महसूस कर रही हो। भाप और पानी के बीच उनका रूप साफ़ तो नहीं था, पर उतना धुंधला भी नहीं कि नज़र हटाई जा सके।
नीचे की ओर, पानी की धार उनके पेट से फिसलती हुई उनके नाज़ुक हिस्से तक जा रही थी। भाप के कारण सब कुछ एक नरम-सी परछाई में ढला हुआ था, पर उस परछाई में भी उनकी खुबसूरती झलक रही थी। उन्होंने अपने हाथों से बस यूँ ही पानी को बहने दिया, जैसे इस पल को स्वीकार कर रही हो।
फिर उन्होंने हल्की-सी मुस्कान के साथ मेरी तरफ देखा। उस मुस्कान में झिझक नहीं, बल्कि अपनापन था। उन्होंने धीमे, स्वर में कहा, “शरमाओ मत, गोलू… अंदर आ जाओ,” और दरवाज़े की ओर नज़र डालते हुए बोली, “और दरवाज़ा लॉक कर देना।”
मैंने एक गहरी साँस ली। कदम भारी लग रहे थे, फिर भी मैं अंदर चला गया। दरवाज़ा बंद करते हुए हल्की-सी क्लिक की आवाज़ आई और मैंने लॉक घुमा दिया। उस छोटी-सी आवाज़ के साथ ही बाथरूम और भी शांत हो गया, जैसे बाहरी दुनिया से हमारा रिश्ता कट गया हो।
उन्होंने शॉवर से थोड़ा हट कर मेरी तरफ कदम बढ़ाए। भाप के बीच उनकी मौजूदगी और भी करीब महसूस होने लगी। एक पल को उन्होंने मेरी आँखों में देखा, फिर बिना कुछ कहे मेरे पास आकर मुझे बाहों में ले लिया।
उनका गीला शरीर मेरे सीने से लगा तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए। उनके स्तन मेरे सीने से हल्के-से दबे, पानी की ठंडक और उनकी गर्म साँसों का अहसास एक साथ मिल गया।
कुछ पल ऐसे ही बीत गए। फिर उन्होंने मेरी पीठ पर हल्का-सा हाथ रखा और मुस्कराते हुए धीरे से बोलीं, “पायल दीदी बाज़ार गई हैं।” उनकी आवाज़ में शरारत की हल्की-सी झलक थी। उन्होंने मेरी ओर देखते हुए आगे जोड़ा, “उनके आने से पहले… क्या तुम मेरे साथ कुछ करना चाहते हो?”
मैंने हिचकिचाते हुए उनकी ओर देखा और धीमे से कहा, “हां… नेहा दीदी…।” मेरे शब्द अधूरे रह गए।
वह मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गई। उन्होंने मेरी पैंट खोली, फिर अंडरवियर नीचे किया। पहली बार उनकी नज़र मेरे खुले लंड पर पड़ी। उनकी आँखों में हल्की चमक और थोड़ी झिझक थी।
उन्होंने बिना कुछ कहे अपना हाथ आगे बढ़ाया और मेरे लंड को पकड़ लिया। उनकी उँगलियाँ कस कर नहीं, बल्कि जान-बूझ कर धीमे से थी। स्पर्श होते ही मेरा शरीर सिहर गया। उन्होंने लंड को ऊपर-नीचे हल्का-सा हिलाया, जैसे उसकी गर्मी और सख़्ती को परख रही हों।
उन्होंने ऊपर देखा और धीमे से बोली, “घबराओ मत।” फिर उनका हाथ फिर से चलने लगा। पानी की बूंदें अब भी उनके स्तन और पेट से फिसल रही थी, और मेरा ध्यान पूरी तरह उसी हाथ और उस स्पर्श पर टिक गया।
उन्होंने धीरे-धीरे मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया। उनके हाथ गीले होने की वजह से फिसलन भरे थे और हर हरकत के साथ मेरा लंड और सख़्त होता जा रहा था। जब उन्हें लगा कि मैं पूरी तरह तैयार हूँ, तो उन्होंने अचानक हाथ रोक लिया।
मैंने सवाल भरी नज़र से उनकी तरफ देखा। उन्होंने होंठों पर हल्की मुस्कान लाकर कहा, “इतनी जल्दी नहीं…” और फिर मेरे लंड को हल्के से दबाया। उस दबाव से मेरे मुँह से हल्की-सी आवाज़ निकल गई।
वह थोड़ा और पास आई। उनके स्तन मेरे लंड के क़रीब आ गए थे। उन्होंने जान-बूझ कर अपना शरीर आगे झुकाया, जिससे उनके स्तन मेरी जांघों से छू गए। मेरा शरीर अपने आप तना हुआ था।
उन्होंने मेरी तरफ देखते हुए धीमे से पूछा, “ठीक लग रहा है?”
मैंने सिर हिला दिया। शब्द निकल नहीं पा रहे थे। तभी उन्होंने अपना चेहरा मेरे लंड के और पास लाया। उनकी गर्म साँस मेरे लंड पर पड़ी, जिससे मेरी रीढ़ में सिहरन दौड़ गई। वह कुछ सेकंड रुकी, जैसे मेरे रिएक्शन को देख रही हो।
फिर उन्होंने आँखों में आँखें डाल कर बहुत धीमी आवाज़ में कहा, “क्या मैं इसे अपने मुँह में ले सकती हूँ?”
मैंने सिर्फ इतना कहा। ” हां, नेहा दीदी। ”
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