पिछला भाग पढ़े:- पापा की परी प्रीती-11
हिंदी चुदाई कहानी का अगला भाग-
प्रीती और भूपिंदर एक-दूसरी की फुद्दी के साथ फुद्दी की चुदाई कर चुकी थी। जिस तरह भूपिंदर ने प्रीती की फुद्दी चोदी थी, मैं और प्रीती उससे हैरान थे। हम दोनों को ही लग रहा था कि भूपिंदर ऐसा कुछ फुद्दी वाला काम पहले भी कर चुकी थी।
प्रीती ने भूपिंदर से पूछ ही लिया “मम्मी एक बात तो बताओ, आपने मेरे ऊपर लेट कर जिस तरह से मेरी फुद्दी चोदी है, इससे तो लगता है आप पहले भी ये सब कर चुकीं हैं – ये आपने कहां से सीखा, क्या कालेज में?”
जब भूपिंदर ने बताया कि वो ये फुद्दी चुदाई शकुंतला के साथ करती थी तो हम हैरान हो गए। प्रीती ने भूपिंदर से पुछा, “मम्मी शकुंतला? जुगनू की मम्मी – कांता की सास?”
भूपिंदर बोली, “हां शकुंतला के साथ।” और फिर भूपिंदर बताने लगी कि ये सब कब और कैसे शुरू हुआ।
भूपिंदर प्रीती से बोली, “प्रीती ये सब शुरू हुआ जब तू पैदा हुई। शकुंतला तब एक जवान लड़की हुआ करती थी, बड़ी ही सुन्दर थी शकुंतला तब – एक-दम स्लिम ट्रिम। तब शायद उसकी नई-नई ही शादी हुई थी। जुगनू तो तब पैदा ही नहीं हुआ था, एक-दम कड़क जिस्म था शकुंतला का।”
भूपिंदर बोल रही थी और मैं और प्रीती सुन रहे थे। “एक दिन मेरी झाई जी – झाई जी मतलब मेरी सास, अवतार की मम्मी, तुम्हारी दादी – उनको सब झाई जी बोलते थे। झाई जी ने शकुंतला को बुलाया, इसी कमरे में और बोली, “शकुंतला बेटा तुझे तो पता ही है भूपिंदर की जचगी – जचगी मतजब डिलीवरी – मतलब बच्चा पैदा हुआ है। उसके चालीस दिन पूरे होने वाले हैं। शकुंतला बेटा तू दो महीने तक एक दिन छोड़ कर उसकी आगे पीछे टांगों छातियों की मालिश कर दिया कर नहीं उसकी छातियों में पीछे और पेट पर चर्बी बैठ जाएगी।”
शकुंतला बोली, “ठीक है झाई जी मैं समझ गयी – कर दिया करूंगी। कब से शुरू करनी है?”
झाई जी बोली, “कल भूपिंदर का चलिया – मतलब बच्चा पैदा हुए चालीस दिन पूरे हो जाने हैं, परसों से ही शुरू कर दे, उसके मैं तुझे अलग से पैसे दे दिया करूंगी।”
शकुंतला बोली, “झाई जी आप ऐसी बातें मत किया करो। पैसे वैसे की बात मत करो झाई जी, मुझे बड़ी ही शर्म आती है, मुझे अच्छा भी नहीं लगता। मैं भी तो आपकी बेटी ही हूं।”
झाई जी ने शकुंतला के सर पर हाथ फेरा बिल्कुल पंजाबी स्टाइल में और बोली, “जीती रह मेरी बेटी, वाहे गुरु जी की मेहर बनी रहे तुझ पर।”
भूपिंदर ने बताया, “बस तीसरे दिन से ही मेरी मालिश शुरू हो गयी। पूरे कपड़े उतार कर नंगी हो कर मैं शकुंतला के आगे लेट जाती और शकुंतला मेरे मम्मों की, पेट की, जांघों की और फुद्दी की मालिश करती। फिर मैं उल्टा हो जाती और शकुंतला मेरी पीठ, कमर और चूतड़ों की मालिश करती।”
भूपिंदर बोल रही थी और हम दोनों सुन रहे थे। “आठ दस दिन तो खाली मालिश ही हुई और कुछ नहीं हुआ। मगर फिर शकुंतला मस्तियों पर उतर आयी। मेरे चूतड़ों के मालिश करते करते थोड़ी से उंगली मेरे चूतड़ों के छेद में भी कर देती थी,या मेरे चूतड़ चाटने लगती। मैं खाली उसकी तरफ देखती और मुस्कुरा देती।
शकुंतला जब मेरे मम्मों की मालिश कर रही होती तो मेरे मम्मों के निप्पल मसल देती। जब मेरी फुद्दी की मालिश कर रही होते तो हल्का सा मेरी फुद्दी का दाना रगड़ देती या फिर मेरी फुद्दी का चुम्मा ले लेती।”
“मुझे इन सब में बड़ा मजा आता था। दुबली-पतली कड़क जिस्म वाली शकुंतला जब ये सब करती थी तो हल्का सा हंस भी देती थी। वैसे तो शकुंतला कोइ मालिश वाली नहीं थी – घरेलू लड़की थी, मगर लगभग सारी मालिश वालियां ये करती हैं। जिनकी औरतों की वो मालिश करती हैं, उनको फुद्दी का मजा भी देती हैं। कई औरतें तो इन मालिश वालियों के इस मजे के अलग से पैसे भी देती हैं। ये कोइ नई बात नहीं है।”
“जब शकुंतला इस तरह कि ऊंगलीबाज़ी करती तो मैं बस इतना ही कहती, “शकुंतला बड़ी शरारतें करती है तू।” शकुंतला कुछ बोलती नहीं थे, मगर हल्का सा मुस्कुरा देती थी। आखिर शकुंतला की इन हरकतों से मजा तो मुझे भी आता ही था।
“ऐसे ही शायद दो हफ्ते गुज़र गए। शकुंतला की शरारतें बढ़तीं ही जा रहीं थी और मुझे इस सब में मजा भी आने लगा था। चूतड़ों की मालिश करते-करते शकुंतला अब उंगली चूतड़ों के छेद में पूरी अंदर करने लगी थी। फुद्दी का दाना भी दो दो तीन मिनट तक मसलती रहती। कभी कभी तो मुझे लगता मेरा मजा ही निकलने वाला हैं।”
“ऐसे ही एक दिन जब शकुंतला मेरी आगे पेट की मम्मों की मालिश कर रही थी। मालिश करते करते फुद्दी की मालिश पर आ गयी। शकुंतला फुद्दी की मालिश भी कर रही थी और साथ ही फुद्दी का दाना भी रगड़ रही थी। तभी शकुंतला मेरी फुद्दी थपथपाते हुई बोली, “दीदी इसका मजा लेना है?”
“पहले तो मुझे शकुंतला की बात ही समझ नहीं आयी। मैंने “पूछा क्या शकुंतला?”
“शकुंतला फिर से मेरे फुद्दी थपथपाते हुई बोली, “दीदी इसका मजा लेना है?”
मैने फिर शकुंतला से पूछा, “मजा लेना है क्या मतलब? कैसे मजा लेना है। शकुंतला क्या कह रही है तू?”
“शकुंतला वैसे ही हंसते हुई बोली, “दीदी मैं कह रही हूं, आपने इसका मजा लेना है? अपनी इस नाजुक मुलायम फुद्दी का? इस बार शकुंतला ने अपनी उंगली थोड़ी सी मेरे चूत के छेद के अंदर डाल दी?”
“मैंने हैरानी से पूछा, “इसका मजा? कैसे?”
“शकुंतला बोली, “दीदी पहले आप हां तो बोलो, फिर बताती हूं।”
अब प्रीती क्या बताऊं, उन दिनों तेरे पापा मेरी चुदाई भी बहुत कम करते थे, करते भी थे तो बड़ी ही धीरे-धीरे करते थे जैसे शीशे की बनी हुई है मेरी फुद्दी – जोर से चोदने में कहीं टूट ही ना जाए। रगड़ाई वाली चुदाई तो तेरे पापा करते ही नहीं थे।”
“वैसे प्रीती बेटा बात भी ठीक थी, पुराने लोग कहा करते थे जचगी – यानी बच्चा पैदा होने के बाद शरीर कच्चा होता है। चालीस दिन तो मर्द को औरत के पास जाना भी नहीं चाहिए और रगड़ाई वाली चुदाई भी जचगी के तीन महीने के बाद ही शुरू करनी चाहिए।
“शकुंतला की बातें सुन कर मेरी फुद्दी गीली तो होने लग ही गयी थी। मैंने कह दिया, “ठीक है शकुंतला, कैसे आएगा मजा?”
“बिना कोइ जवाब दिए शकुंतला उठी और कमरे का दरवाजा अंदर से बंद किया और अपने कपड़े उतर दिए। मैं तो मालिश करवाने के चक्कर में नंगी ही थी। पतले शरीर वाली शकुंतला के छोटे-छोटे मम्मे बिल्कुल तने हुऐ थे, चूत के आस पास हल्के भूरे बाल थे – रेशम जैसी झांटें।”
“शकुंतला मेरे पास आयी और तकिया उठा कर बोली, “दीदी धीरे-धीरे अपने चूतड़ उठाओ।” जैसे ही मैंने चूतड़ उठाये शकुंतला ने मेरे चूतड़ों के नीचे तकिया रख दिया। और मेरी टांगें चौड़ी करके मेरी फुद्दी चाटने लगी। मुझे सच में ही बड़ा मजा आ रहा था। फुद्दी तो मेरी अवतार भी चूसते चाटते थे लेकिन जिस तरह शकुंतला बड़े ही धीरे-धीरे मेरी फुद्दी चूस-चाट रही थी, मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था।”
“मैंने सोचा शकुंतला ने ऐसे ही मेरी फुद्दी चूस-चूस कर मुझे मजा देना होगा। जैसे ही मजे के मारे मैंने जरा से चूतड़ घुमाये, शकुंतला उठी और अपनी फुद्दी मेरी फुद्दी के ऊपर रख कर मेरे ऊपर लेट लेट गयी।”
“शकुंतला ने मुझे बाहों में ले लिया और मेरे होंठ चूसने लगी। तभी शकुंतला ने अपनी फुद्दी मेरी फुद्दी के ऊपर रगड़नी शुरू कर दी। बीच बीच में शकुंतला मेरी फुद्दी पर हल्के-हल्के धक्के भी लगा देती थी जैसे मेरी चुदाई कर रही हो। जल्दी ही मुझे मजा आने वाला हो गया। मैंने शकुंतला के होठों से अपने होठ अलग किये और शकुंतला से कहा, “शकुंतला जरा जोर-जोर से रगड़, मुझे मजा आने वाला है।”
“शकुंतला ने जोर-जोर से अपनी फुद्दी मेरी फुद्दी पर रगड़नी शुरू कर दी। जल्दी ही मुझे मजा आ गया। बड़ा अलग सा ही मजा था। बस जब तक मेरी मालिश चली ये सिलसिला भी चलता रहा। मालिश के दो महीने से ऊपर हो चुके थे। मुझे अब बहुत अच्छा महसूस भी होने लगा था। अब तो अवतार का पूरा लंड लेने का और जोरदार चुदाई करवाने का भी मन होने लगा था।”
“जब भूपिंदर ने कहा, “अब तो अवतार का पूरा लंड लेने का और जोरदार चुदाई करवाने का भी मन होने लगा था, तो प्रीती मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा दी।”
भूपिंदर बोली, “एक दिन जब शकुंतला मेरी मालिश कर के मेरे ऊपर लेट अपनी फुद्दी से मेरी फुद्दी चोद रही थी तो मैंने कहा, “शकुंतला, एक दिन मुझे भी तुम्हारी फुद्दी चोदनी है, तुम्हारे ऊपर लेट कर, जैसे तुम मेरी फुद्दी चोद रही हो मेरे ऊपर लेट कर।”
समझदार शकुंतला बोली, “दीदी आप भी चोद लेना मुझे, पर पहले भैया के साथ अपनी चुदाई ‘पहले की तरह’ शुरू हो जाने दो। अभी आपकी कमर को ज्यादा झटके नहीं लगने चाहिये।”
“सच बताऊं अवतार मैं शकुंतला की समझदारी वाली बातों से हैरान ही थी। तीन महीने के बाद जब मेरी और तुम्हारी”, भूपिंदर ने मेरी तरफ इशारा करते हुए कहा, “मेरी और तुम्हारी चुदाई पहले ही की तरह चालू हो गयी, तब मैंने एक दिन शकुंतला की फुद्दी चोदी। शकुंतला तो नीचे लेटी फुद्दी भी मस्त चुदवाती थी, चूतड़ घुमा-घुमा कर, झटका-झटका कर।”
“मालिश बंद होने बाद और अवतार के साथ मेरी चुदाई पहले के ही तरह शुरू होने के बाद मेरा और शकुंतला का फुद्दियां चोदने का सिलसिला खत्म सा हो गया, मगर पूरी तरह रुका भी नहीं। चार-छह महीने के बाद जब घर पर कोइ नहीं होता था तो मेरे और शकुंतला के बीच फुद्दी से फुद्दी की ये चुदाई हो ही जाती थी।”
“जब प्रीती चार साल की हो गई, और शकुंतला के भी बेटा पैदा हो गया – जुगनू – तब जा कर मेरी और शकुंतला की ये फुद्दी चुदाई बंद हुई।”
ये कह कर भूपिंदर तो चुप हो गयी मगर प्रीती बोली, “वाह मम्मी आप तो बड़ी छुपी रुस्तम निकली।”
फिर प्रीती ने हंसते हुए भूपिंदर की चूत को छुआ और बोली, “मम्मी अब मझे समझ आया मैं चुदाई की इतनी शौक़ीन कैसे हूं, आखिर बेटी किसकी हूं।” फिर प्रीती ने मेरी तरफ देखते हुए कहा, “क्यों पापा ठीक है ना।”
अब मैं क्या जवाब देता, मगर मेरे दिमाग़ में ये बात आयी अगर शकुंतला ने भूपिंदर का इतना ध्यान रखा है तो हमें भी शकुंतला की कुछ मदद करनी चाहिए।
उस वक़्त ही मेरे दिमाग में आया, कब तक जुगनू ऐसे ही ड्राइवरी करता रहेगा। ये सब बता कर, जिन का अपना गिलास खाली करके भूपिंदर बोली, “अवतार मैं चलती हूं, मैं थक गयी हूं और मुझे नींद भी आ रही है।”
कमाल तो तब हुआ जब भूपिंदर ने प्रीती से पूछ ही लिया, “प्रीती बेटा तुमने नहीं जाना अभी या एक बार और पापा का मोटा लंड लेना है अपनी फुद्दी में – एक और चुदाई करवानी है अपने पापा से?”
प्रीती भी बोली, “पता नहीं मम्मी, लेकिन मैं अभी बैठूंगी, जिन का एक पेग और लूंगी।”
और इतना कह प्रीती ने मेरी तरफ देख कर आंख दबा दी, मतलब मुझे भी बैठने के लिए कह रही थी प्रीती। इतनी बार चुदाई करके मैं थका हुआ तो था लेकिन प्रीती के बात सुन कर मेरे लंड ने एक बार और हरकत कर दी और मेरी आंखों के आगे प्रीती की गुलाबी चूत और नरम, नाजुक चूतड़ और चूतड़ों का हल्का भूरा गुलाबी छेद घूम गया।
भूपिंदर मेरी तरफ मुस्कुरा कर देखती हुई बोली, “अवतार फिर तो तुमने भी बैठना ही होगा।” और फिर चलते-चलते भूपिंदर बोली, “ये प्रीती तो जवान है अवतार, मगर तुम भी कुछ कम नहीं हो भोसड़ी वाले – पक्के मादरचोद हो तुम। चलो बैठे ही हो तो फिर कल रात का भी बढ़िया सी प्रोग्राम बना लेना – आज जैसा ही।”
भूपिंदर की ये बात सुन कर मैं और प्रीती एक-दूसरे की तरफ देख मुस्कुराये और मैंने सोचा, “वाह री मेरी सरदारनी भूपिंदर – तेरा भी जवाब नहीं।”
फिर हमारी तरफ देखती हुई भूपिंदर बोली, “गुड नाईट अवतार, गुड नाईट स्वीटी।” और भूपिंदर चली गयी।
लाउंज में अब मैं और प्रीती ही रह गए। हम दोनों चुप-चाप अपने-अपने गिलासों में से शराब के घूंट भर रहे थे। अचानक से प्रीति उठी और अपना गाऊन उतार दिया। अब नंगी प्रीटी मेरे सामने बैठी जिन के घूंट भर रही थी। मैं हैरान था कि यार ये क्या हो रहा था?
मैंने प्रीती से पूछा, “प्रीती क्या बात है, गाऊन क्यों उतार दिया? एक बार और लंड लेने का मन है क्या?”
प्रीती बोली, “पापा है तो सही, अगर आप थके हुए नहीं हैं और आपका ये हाथी की सूंड जैसा लंड एक बार और खड़ा हो सकता है तो।”
मैंने प्रीती से कहा, “प्रीती मेरे लंड की बात मत करो, तुम्हारे ये खड़े मम्मे, देख कर और तुम्हारी गुलाबी टाइट फुद्दी के ख्याल भर से ही इसमें दम आ जाता है। तुम्हारी फुद्दी की अंदर जाने के लिए तो ये हमेशा तैयार है।”
प्रीती चुप-चाप मेरी तरफ देखती रही। ये एक तरह से चुदाई की लिए हां ही थी।
मैंने ही कहा, “प्रीती एक एक पेग और लगा लें, अगर चुदाई का प्रोग्राम है तो मजा आ जाएगा चुदाई का।”
प्रीती बस इतना ही बोली बोली, “ठीक है पापा।” इतना बोल कर प्रीती अपनी चूत में उंगली करने लगी।
नंगी प्रीती को देख कर मेरा लंड भी हरकत करने लग ही गया था। गिलास में से हल्के घूंट भरता हुआ मैं बोला, “प्रीती बेटा अब बोलो क्या करना है?”
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