बात पिछले दिसम्बर की है, जब मैं और मम्मी ठंड के दिनों में धान की फसल काटने खेत में जा रहे थे। तब बहुत कोहरा सा हुआ पड़ा था। ज़्यादा दूर तक देखना मुश्किल था। हम दोनों खेत में धान काटने लगे। उस दिन आसमान में बदल थे और नीचे पूरा कोहरा सा। ठंड अधिक थी तो हम गर्म कपड़े पहन कर आये थे। मम्मी अपनी चादर ओढ़ी हुई थी। तभी एक कुत्ता-कुतिया हमारे खेत के पास आये और चुदाई करने लगे। मैं धान काटने में व्यस्त था। लेकिन माँ बड़े गौर से उनकी चुदाई देख रही थी।
जब मेरा ध्यान मम्मी पर गया तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि मेरी मम्मी जानवरों की चुदाई देख कर उत्तेजित हो रही है। माँ कई बार मेरे सामने मूतने बैठ जाती थी, और मैंने भी कई बार अपना लंड माँ को टच कराया है। लेकिन माँ तब ऐसा रियेक्ट करती है कि वह बहुत संस्कारी है और उसे कोई लंड नहीं चाहिए।
आज मुझे ये अच्छा मौका मिला था माँ को अपना बनाने का। मैं उनके पीछे गया और उन्हें अपनी बहो में भर लिया। तभी मम्मी हड़बड़ा के मुझसे छूटने की कोशिश की लेकिन छुट ना पायी। मम्मी शर्म से लज्जाते हुए बोली, “छोड़ ना बेटा, क्या कर रहा है? कोई देख लेगा।”
उफ्फ्फ माँ के मुंह से ऐसा जवाब सुन कर मुझे लगा कि लोहा गरम था। मम्मी अभी भी उनकी चुदाई देख रही थी जो ख़त्म हो चुकी थी और दोनों एक-दूसरे से चिपक चुके थे। कोहरा इतना था की कोई और लोग दिख ही नहीं रहे थे, लेकिन डर था कि कोई आ ना जाये। मम्मी भी शायद इन्हीं बातों से घबरा रही थी।
मम्मी: बेटा, तू समझता क्यों नहीं है। जो तू चाह रहा है, वो मैं नहीं कर सकती। हम दोनों माँ-बेटा हैं। और माँ बेटे में ऐसा रिश्ता नहीं बन सकता।
मैं: मम्मी, आपको कई बार मैंने तड़पते देखा है और आप भी यही चाहती है। बस आप डरती हो समाज से। बस मुझे एक बात का जवाब दो। उसके बाद मैं कुछ नहीं पूछूंगा।
मैं बिल्कुल मम्मी के साथ चिपक गया ताकि ठंडी हमें कम लगे। और उनका हाथ आपने हाथों में लेकर सहलाया।
मैं: मम्मी, सच-सच बताना। क्या आप जान-बूझ के मेरे सामने पेशाब करने नहीं बैठती है?
मम्मी मेरी बात सुन के मुझसे नज़र चुराने लगी।
मैं: मम्मी, सच-सच बताओ। क्या आप को जब कोई मर्द घूरता है, तो आपको अंदर कुछ होता है कि नहीं?
मम्मी मेरी किसी बात का कोई जवाब नहीं दे रही थी। मगर उनकी खामोशी चीख के साथ कह रही थी कि मैं जो बोल रहा हूं वह सब सच था।
मैं: मम्मी, पापा तो अब बाहर ही रहते हैं। और हो सकता है वो बाहर भी ये सब करते हो। और आप यहाँ उनके बिना अकेली होती हो। और अगर मैं आपको प्यार करना चाहता हूं। तो इसमें ग़लत क्या है?
मम्मी: बेटा, हमारा रिश्ता माँ-बेटे का है। और यही सबसे बड़ा सच है।
मैं: मम्मी, अगर आप बाहर किसी से रिश्ता बनाती हो। तो वो भी आपको यहीं सुख देगा जो मैं दे रहा हूं। बस फ़र्क इतना सा है कि मैं आपका बेटा हूँ। और मेरे साथ आपको कोई खतरा भी नहीं है। समाज का बिल्कुल खतरा नहीं होगा, घर की बात घर में रहेगी। और रही बात माँ बेटे होने की, तो आपके मन में भी वही चलता है जो मेरे मन में चलता है।
मेरे मुँह से ऐसे खुले शब्द सुन कर मम्मी मुझे देखने लगी।
मैं: मम्मी, मैं आपको बहुत प्यार करता हूँ। और हमेशा करता रहूंगा। बस आपकी ये बेरुखी मुझे पागल कर देती है। मैं आपको वो सारी ख़ुशी देना चाहता हूँ। जो आप इन जानवरों को देख तड़प रही हो।
मम्मी: बेटा, तू जानता है तू क्या कह रहा है? अगर हमारी इस बात की खबर किसी को लग गई तो हमारे साथ क्या होगा? वो छोड़ अगर तेरे पापा को पता चल गया तो वो तो हम दोनों को जान से मार देंगे।
मैं: मम्मी, दुनिया की नज़र में हम माँ-बेटे ही रहेंगे। मगर घर की चार दीवारी में मैं आपको बहुत प्यार करूंगा। वही प्यार जिसके लिए आप हमेशा पापा का इंतजार करते हो। और वो हमेशा बाहर ही रहते हैं।
मम्मी: बेटा, मुझे ये सब ठीक नहीं लग रहा है। मुझे अंदर से बड़ा अजीब लग रहा है।
मम्मी की बात पूरी होती ही मैंने उनके होठों को चूम लिया। और उनके रस भरे होठों को चूसने लगा। कुछ देर मम्मी वैसे ही रही। फिर उन्होने मेरे सीने पर हाथ रख कर। मुझे पीछे कर दिया।
मम्मी: ये तू क्या कर रहा है बेटा? तू मेरे साथ…
मैं: मम्मी, मैं तो वही कर रहा हूँ। जो मेरा दिल कह रहा है। और आप मानो या ना मानो, आपका दिल भी यही कह रहा है। आप खुद अपने दिल की धड़कन सुन लो। जो तेज हो गई है।
मैंने मम्मी का हाथ उनके सीने पर रख दिया। और उनका दिल धक-धक कर रहा था। मम्मी मेरी तरफ बड़ी ही अजीब निगाहों से देखने लगी।
मैं: देखा मम्मी आपका दिल कैसे धक-धक कर रहा है। कम से कम अब तो सच बोलो। क्या सच है आपको अभी मजा नहीं आया, जब मेरे होठों ने आपके शरीर के एक अंग को चूमा?
मेरी बात सुन के मम्मी ने अपना सर नीचे कर लिया। फिर मैंने उनका सर पकड़ के ऊपर किया। मगर मम्मी अभी भी नीचे ही देख रही थी।
मैं: बताओ ना मम्मी, या फिर चलो आज इतनी ठंड में भी हम धान काटते है। आज तो कोहरा इतना है कि ज्यादातर लोग रजाई में लुगाई के साथ गर्म हो रहे होंगे, लेकिन आपको क्या?
जैसा ही मैं उठने लगा। तभी मम्मी ने मेरा हाथ पकड़ लिया। मैंने जैसे ही मम्मी की तरफ देखा। वो मुझे ही देख रही थी।
इसके आगे क्या हुआ, आपको कहानी के अगले पार्ट में पता चलेगा।