काजल दीदी और मेरा प्यार-1

अगर मैं अपनी बड़ी बहन की खूबसूरती के बारे में बताने लग जाऊँ, तो सच में मेरे पास सही शब्द ही नहीं बचते। उनके खुबसूरत बदन को देख कर कोई भी एक नज़र में ही पागल हो जाए, इतना कमाल का असर था उसमें।

काजल दीदी की खूबसूरती का क्या ही कहना… उनकी कमर इतनी नाज़ुक लगती थी जैसे हाथ लगते ही मुड़ जाएगी। चलती थी तो कमर का हल्का सा लहराना किसी को भी बेबस कर देने के लिए काफ़ी था।

उनके स्तनों का उभार उनके हर कपड़े में साफ़ दिख जाता था ना ज़्यादा बड़ा, ना छोटा, बस इतना कि नज़र खुद ब खुद वहीं टिक जाती। लगता था कपड़ा भी उनसे लिपट कर खुद को खुशनसीब समझता हो।

उनकी गोल, भरी हुई कूल्हों की चाल… वो तो पूरे गली का ट्रैफिक रोकने की ताक़त रखती थी। हर कदम के साथ हल्का सा उछाल जैसे जान-बूझ कर किसी की धड़कनें तेज़ कर देता हो।

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