अगर मैं अपनी बड़ी बहन की खूबसूरती के बारे में बताने लग जाऊँ, तो सच में मेरे पास सही शब्द ही नहीं बचते। उनके खुबसूरत बदन को देख कर कोई भी एक नज़र में ही पागल हो जाए, इतना कमाल का असर था उसमें।
काजल दीदी की खूबसूरती का क्या ही कहना… उनकी कमर इतनी नाज़ुक लगती थी जैसे हाथ लगते ही मुड़ जाएगी। चलती थी तो कमर का हल्का सा लहराना किसी को भी बेबस कर देने के लिए काफ़ी था।
उनके स्तनों का उभार उनके हर कपड़े में साफ़ दिख जाता था ना ज़्यादा बड़ा, ना छोटा, बस इतना कि नज़र खुद ब खुद वहीं टिक जाती। लगता था कपड़ा भी उनसे लिपट कर खुद को खुशनसीब समझता हो।
उनकी गोल, भरी हुई कूल्हों की चाल… वो तो पूरे गली का ट्रैफिक रोकने की ताक़त रखती थी। हर कदम के साथ हल्का सा उछाल जैसे जान-बूझ कर किसी की धड़कनें तेज़ कर देता हो।
और उनकी नाभि… जब भी वो सलवार कमीज़ में दुपट्टा थोड़ा सरक जाता, उनकी साफ़, गहरी, बिल्कुल खुबसूरत नाभि एक पल के लिए दिखती। ऐसा लगता जैसे पूरी दुनिया थम गई हो।
लेकिन सबसे ज़रूरी बात… हम खून के रिश्ते वाले नहीं थे। जब मैं 20 साल का था, पापा का मम्मी से तलाक़ हो चुका था और उन्होंने दूसरी शादी की। मैंने उस समय पापा के साथ रहने का फैसला किया था।
मैंने उनकी दूसरी शादी अरेंज नहीं की थी, बस एक दिन वो अपनी नई पत्नी और उनकी बेटी के साथ घर लौटे… और उसी पल मैंने पहली बार काजल दीदी को देखा था।
वो पहली नज़र… जैसे किसी ने दिल पर सीधा हाथ रख दिया हो। उनकी आँखों में एक मासूम सी चमक थी और चाल में एक ऐसा नशा… जिसे समझने में मुझे बस एक सेकंड लगा, मेरी नज़रें उनसे हट ही नहीं सकती थी।
उस दिन मुझे बाद में पता चला कि काजल दीदी भी अपनी माँ की शादी में भी शामिल नहीं हुई थी। वो सीधा पापा के साथ घर आई थी। और जब मैंने उन्हें पहली बार देखा… सच कहूँ तो मेरा दिल एक पल के लिए रुक ही गया।
वो छोटे से पिंक रंग के टाइट टी-शर्ट में थी, जो उनके बदन से ऐसे चिपकी थी जैसे खास उन्हीं के लिए बनी हो। उसके नीचे नीली हॉट शॉर्ट्स… इतनी छोटी कि उनकी मुलायम जाँघों की शुरुआत साफ़ दिख रही थी।
और सबसे ज़्यादा जो चीज़ ने मुझे पागल कर दिया था… उनकी नाभि। टी-शर्ट इतनी क्रॉप थी कि उनका पूरा पेट खुला हुआ था — साफ़, चिकना, हल्की सी चमक लिए हुए। उनकी नाभि बिल्कुल गहरी और आकर्षक थी। लेकिन उससे भी ऊपर… उसमें किया हुआ बेली पियरसिंग।
एक छोटा सा सिल्वर स्टड उनकी नाभि में चमक रहा था, जो उनकी साँसों के साथ हल्का-हल्का हिलता… और मेरी नज़रें अपने आप खिंच जाती थी।
वो पियरसिंग उनके पूरे लुक को और भी ज़्यादा कामुक बना रही थी, जैसे किसी ने जान-बूझ कर उन्हें देखने वालों के दिल की धड़कनें बढ़ाने के लिए ये सब चुना हो।
उसी पल मैंने समझ लिया था… मेरी ज़िंदगी में कुछ बहुत अलग शुरू होने वाला है।
धीरे-धीरे वक्त बीतने लगा। पहली बार 20 साल की उम्र में मैं किसी बहन जैसी लड़की के साथ रहने वाला था… लेकिन रिश्ते में हम खून से जुड़े नहीं थे, इसलिए समझ नहीं पाता था कि उनके सामने कैसे बर्ताव करूँ।
हम दोनों एक-दूसरे से बात तो करते थे, लेकिन बस ज़रूरत की बातें। घर में रहते हुए भी जैसे एक दूरी सी थी — जो अनजाने में ही बढ़ती जा रही थी।
लेकिन इसी दूरी के बीच… कुछ चीज़ें हर दिन मुझे और ज्यादा बेचैन करने लगी। कभी-कभी मैं नहाने के लिए जाता और उसी समय वो बाथरूम से बाहर आती — बाल भीगे हुए, बदन पर सिर्फ एक तौलिया लिपटा हुआ… पानी की बूंदें कंधों से नीचे फिसलती हुई।
उनका वो भीगा हुआ बदन… तौलिया उनके शरीर को जितना ढक रहा था, उससे कहीं ज्यादा दिखा रहा था। मैं बस एक सेकंड के लिए रुक जाता… दिल की धड़कन अपने आप तेज़ हो जाती।
घर की सफाई करते वक्त वो अक्सर एक ढीली टी-शर्ट पहन लेती थी। जब वो झुक कर चीज़ें उठाती, उनकी खुली गहरी क्लीवेज साफ़ दिख जाती। मेरी नज़रें खुद ब खुद फिसल कर वहीं टिक जाती, और मैं खुद को रोक भी नहीं पाता था।
कई बार जब मैं अपने कपड़े धोने रखता, तो उनके ब्रा और पैंटी वहीं पास में सूखते मिलते। हल्की सी खुशबू, नर्म कपड़ा… बस उन्हें देखते ही दिल अजीब सा महसूस करने लगता था।
धीरे धीरे मुझे महसूस होने लगा था… कि उनके साथ रहते रहते मेरे अंदर कुछ और ही पनप रहा है — कुछ ऐसा जिसे मैं खुद भी रोक नहीं पा रहा था।
एक दिन…मैं अपने कमरे में बैठा फिल्म देख रहा था। दरवाज़ा आधा खुला हुआ था और मैं अपने में ही खोया था। तभी बिना खटखटाए काजल दीदी अंदर आ गई।
वो उस दिन नीले रंग की लंबी कुर्ती और उसी रंग की फिट जीन्स पहने थी।
जैसे ही वो कमरे की हल्की रोशनी में आई… मेरी नज़र सबसे पहले उनकी कुर्ती के अंदर उभरते उनके स्तनों पर गई।
कुर्ती की मुलायम कपड़ा उनके सीने पर ऐसे टिक रहा था जैसे उनके आकार को खुद बना कर दिखाना चाहता हो।
उनके स्तन भरपूर थे, गोल और एक-दम सधे हुए। कुर्ती के नीचे से उनकी ब्रा की हल्की आउटलाइन दिख रही थी, इतनी हल्की कि उसे देख कर दिल और दिमाग दोनों काँप जाएँ। जब वो थोड़ी आगे बढ़ी, उनके सीने की हल्की-सी लय कुर्ती के कपड़े को भी अपने साथ हिला रही थी… जैसे हर सांस के साथ उनका उभार और साफ़ होता जा रहा हो।
वो मेरे पलंग के बिलकुल पास आकर बैठ गई। जितना वो पास आई, उतना ही मेरे अंदर एक ग़ज़ब की घबराहट और अजीब-सी गर्माहट उठने लगी।
मैंने धीरे से पूछा, “क्या हुआ दीदी?”
वो मेरे पास बैठते हुए थोड़ी झिझक के साथ बोली, “मुझे… तुम्हारी मदद चाहिए।”
मैंने फिल्म रोक कर उनकी तरफ देखा, “किस चीज़ में?”
उन्होंने गहरी साँस ली, फिर हल्की शर्म के साथ बोली, “मैं अपना बेली-पियर्सिंग सेट बदलना चाहती हूँ। ये नया वाला देखो… कितना सुंदर है। लेकिन… मैं इसे खुद नहीं पहन पा रही।”
उन्होंने जेब से एक छोटा-सा चमकदार नया बेली-पियर्सिंग सेट निकाला। हल्की नीली रोशनी में वो और भी ज़्यादा चमक रहा था।
वो बोली, “माँ घर पर नहीं है… और ये चीज़ मैं खुद ठीक से कर नहीं पा रही। क्या तुम… मेरी मदद कर दोगे।”
मैं थोड़ा असहज होकर बोला, “दीदी… ये करना थोड़ा अजीब नहीं लगेगा? मतलब… मैं करूँ ये?”
उन्होंने बिना सोचे तुरंत जवाब दिया, “अरे इसमें क्या अजीब है? तुम मेरे छोटे भाई हो।”
उनकी आवाज़ में इतना सहज भरोसा था कि मैं कुछ पल चुप रह गया। मैंने धीरे से कहा, “ठीक है… अगर आपको लगता है तो… मैं कर दूँगा।”
उन्होंने मेरी ओर देखते हुए हल्की मुस्कान दी,वो मुस्कान जिसमें शरारत भी थी और भरोसा भी। फिर बिना कुछ कहे उन्होंने धीरे-धीरे अपनी नीली कुर्ती पकड़ी… और उसे एक ही साँस में ऊपर खींच कर उतार दिया।
मैं हैरान होकर बैठा रह गया। पहली बार मैं उन्हें सिर्फ ब्रा में देख रहा था। हल्की गुलाबी रंग की, मुलायम और उनके गोल स्तनों को मजबूती से थामे हुए। गुलाबी ब्रा के कप्स के अंदर से उनके स्तनों की गोलाई और भी खूबसूरती से उभर रही थी। उनके स्तन इतने भरे हुए थे कि ब्रा का चिकना कपड़ा भी उनके आकार को पूरी तरह छुपा नहीं पा रहा था।
वो पलंग पर लेट गई, बाल पीछे सरकाए, और हल्के काँपते पेट पर हाथ रखा। “अब… बदल दो ना,” उन्होंने बहुत धीमी, लगभग फुसफुसाती आवाज़ में कहा।
मैं उनके पास जाकर बैठा। मेरा हाथ जब पहली बार उनकी नंगी कमर को छुआ, मेरी उंगलियाँ खुद ही सिहर उठी। उनकी गर्म त्वचा मेरी हथेलियों में जैसे पिघल रही थी।
मैंने पहले उनका पुराना बेली-पियर्सिंग सेट पकड़ा। जब मैं उसे निकालने के लिए उनकी नाभि के पास झुका, वो हल्का-सा काँप गई। उनका पेट धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हो रहा था, साँसें थोड़ी तेज़ थी।
मैंने पूछा, “दर्द तो नहीं हो रहा?”
उन्होंने आँखें बंद रखते हुए धीमे से सिर हिलाया, “नहीं… बस थोड़ी गुदगुदी हो रही है…”
उनकी आवाज़ इतनी मुलायम थी कि मेरा दिल भी उसी लय में धड़कने लगा। मैंने धीरे-धीरे उनका पुराना सेट निकाल दिया और नया चमकदार पियर्सिंग उठाया।
जब मेरी उँगलियाँ उनकी नाभि के और पास गई, वो हल्का-सा पीछे सिमट कर साँस रोककर मुस्कुरा दी। उनकी आँखें आधी खुली थी, उनमें एक अजीब-सी गर्म चमक थी।
मैं नया पियर्सिंग लगा रहा था, और मेरा हाथ अनजाने में उनके पेट के और हिस्सों को भी छू जा रहा था। उनकी त्वचा इतनी मुलायम थी कि मैं खुद को कुछ पल रोक ही नहीं पा रहा था।
वो मेरी तरफ देख कर फुसफुसाई, “तुम्हारा स्पर्श… बहुत हल्का है… अच्छा लगता है।”
उनकी ये बात सुन कर मेरी उँगलियाँ और भी ज़्यादा सावधानी से, लेकिन गहराई से उनकी त्वचा को छूने लगी।
पियर्सिंग लगने के बाद मैंने उनकी तरफ देखा। वो पलंग पर आधी लेटी हुई थी, गुलाबी ब्रा में भरे हुए स्तनों की धीमी ऊपर-नीचे चलती लय, हल्की खुली होंठ, और आँखों में वो नर्मी… जिससे समझ आ रहा था कि इस पल में वो सब कुछ महसूस कर रही हैं।
कुछ पल बाद वो उठीं, अपनी गुलाबी ब्रा ठीक की और बिना कुछ कहे फिर से अपनी नीली कुर्ती पहन ली। वो जैसे आई थी, वैसे ही चुप-चाप बाहर चली गई… मगर उस दिन जो हुआ, वो मेरे दिमाग से उतर ही नहीं पा रहा था। पहली बार मैंने उन्हें इतना खुल कर देखा था… पहली बार मैंने उनकी त्वचा, उनकी साँसों, उनके स्तनों की गर्माहट को इतने पास से महसूस किया था।
मैं पूरे शाम उसी ख्याल में खोया रहा, वो पल, वो स्पर्श, उनकी आँखों की चमक… सब कुछ मेरे सीने में किसी आग की तरह धधकता रहा। मुझे लगा आज की किस्मत बस यहीं तक थी… लेकिन रात ने मेरे लिए कुछ और ही संभाल कर रखा था।
रात को मैं नहाने गया। पानी मेरी पीठ पर गिर रहा था, पर दिमाग में बस वही पल घूम रहा था। तभी बाथरूम के दरवाज़े पर हल्की दस्तक हुई।
मैंने तौलिया कमर पर बाँधा और दरवाज़ा खोला… सामने वही थी—काजल दीदी।
मैं हकला गया, “दीदी… आप? इस समय?”
उन्होंने होंठ दबा कर हल्की शर्मीली नज़र से मेरी ओर देखा, फिर धीरे-धीरे बाथरूम में कदम रखती चली आई। दरवाज़ा मेरे हाथ से खुद-ब-खुद बंद हो गया।
मैंने घबराकर पूछा, “दीदी… क्या कर रही हो आप?”
उन्होंने अपना चेहरा थोड़ा नीचे किया, आवाज़ हल्की काँप रही थी, “सुबह जब तुमने मेरा बेली-पियर्सिंग ठीक किया था… तुमसे एक बात पूछनी थी…” वो नजरें उठा कर धीरे से बोली “और मैं… वो पूछना भूल गई थी…”
वो धीरे-धीरे मेरी तरफ और पास आई, फिर हल्की शर्माते हुए बोली “मेरी फ्रेंड्स… हमेशा कहती रहती हैं कि मेरे बूब्स फ्लैट है। मज़ाक उड़ाती हैं…”
उन्होंने धीमे से अपने होंठ काटे, फिर मेरी आँखों में सीधे देखते हुए फुसफुसाई “तुम… क्या सोचते हो? मेरे बूब्स… सच में इतने फ्लैट है?”
मैंने उनकी नज़रों में देखते हुए धीरे से जवाब दिया, आवाज़ में जितनी हिम्मत ला सका “कहना… बहुत मुश्किल है। क्योंकि… मैंने उन्हें तुम्हारी ब्रा के अंदर से देखा है।”
मेरी बात सुन कर काजल दीदी कुछ सेकंड चुप रही। उन्होंने अपनी आँखें थोड़ी नीचे की, जैसे मेरे शब्द सीधे उनके दिल को छू गए हो। उनकी साँसें हल्की तेज़ थी, और उनका चेहरा शर्म और उम्मीद के बीच कहीं अटका हुआ लग रहा था।
वो कुछ पल सोचती रहीं… फिर धीरे-धीरे मेरी ओर एक कदम और बढ़ाया। उनकी आवाज़ बहुत धीमी थी “अगर… अगर तुमने ब्रा के अंदर से देखा है… तो…” उन्होंने होंठ दबाए, चेहरा और भी लाल हो गया।
“…तो मैं तुम्हें खुले दिखा भी सकती हूँ।”
मैं एक-दम से सन्न रह गया। उन्होंने हल्की हिचकिचाहट और शरमाहट के साथ कहा “बस… पहले अपनी आँखें बंद करो… मुझे थोड़ी शर्म लगती है…”
मेरे गले में जैसे शब्द अटक गए, लेकिन मैंने धीरे से सिर हिला कर आँखें बंद कर ली।
बाथरूम की भाप में उनकी हलचल साफ़ सुनाई दे रही थी, कपड़े की सरसराहट… कुर्ती के खुलने की आवाज़… ब्रा के हुक का दबा हुआ क्लिक… और हल्की-सी साँस जो उन्होंने छोड़ी थी, जैसे किसी बड़े फैसले से पहले ली जाती है।
मैंने आँखें नहीं खोली, लेकिन महसूस कर पा रहा था कि वो मेरे सामने धीरे-धीरे अपने कपड़े उतार रही थी।
कुछ सेकंड बाद उनकी मुलायम, काँपती हुई आवाज़ सुनाई दी “ठीक है… अब आँखें खोलो…”
मैंने धीरे से अपनी आँखें खोली और सामने काजल दीदी को बिल्कुल नंगी खड़ा देखा। बाथरूम की गर्म भाप में उनका पूरा शरीर हल्की नमी से चमक रहा था। उनके गीले बाल कंधों पर चिपके थे, और उनके चेहरे पर शर्म और हिचक साफ़ नज़र आ रही थी।
लेकिन मेरी नज़र सबसे पहले उनके स्तनों पर ही जाकर रुक गई।
उनके स्तन बिल्कुल भी फ्लैट नहीं थे, बल्कि भरे हुए, गोल और इतने आकर्षक कि पहली ही नज़र में मेरा दिल बहुत तेज़ धड़कने लगा। उनकी गोरी, थोड़ी भाप से गर्म हुई त्वचा पर हल्की चमक थी, जिससे उनके स्तनों का शेप और भी साफ़ दिख रहा था।
उनका ऊपर का हिस्सा पूरी तरह स्मूथ और गोल था, नीचे की तरफ हल्का नैचुरल झुकाव, जो उन्हें और भी सुंदर बना रहा था। जब वो धीरे-धीरे साँस लेती थी, उनके स्तन हल्के-हल्के ऊपर उठते थे, और हर बार उनमें एक नरम-सी हलचल दिखती थी। उसे देख कर मेरे पूरे शरीर में सिहरन दौड़ जाती थी।
उनके निप्पल छोटे और साफ़ गुलाबी थे, जो भाप और शर्म की वजह से थोड़ा खड़े हुए थे। जब वो थोड़ा-सा हिलती थी, उनके स्तनों में एक बहुत ही हल्का, लेकिन साफ़ दिखने वाला कंपन आता था, जैसे उनका पूरा सीना धीरे-धीरे सांस ले रहा हो।
उन्होंने अपने हाथों को थोड़ा आगे लाकर सीने को ढकने की कोशिश की लेकिन उनके स्तन इतने भरे हुए थे कि ढकने के बाद भी लगभग पूरा शेप साफ़ दिख रहा था।
वो मेरी तरफ देखते हुए, हल्की काँपती आवाज़ में बोली, “अब बताओ… क्या ये सच में फ्लैट लगते हैं?”
मैंने बिना सोचे कहा “नहीं… प्लीज़ इन्हें मत ढको।”
उन्होंने मेरी बात सुन कर धीरे से अपने हाथ पीछे कर लिए, और उनके स्तन बिना किसी रुकावट के पूरी तरह सामने आ गए, हल्के चमकते हुए।
मैंने एक कदम आगे बढ़ कर धीमी आवाज़ में कहा, “ये… परफेक्ट हैं।”
काजल दीदी ने धीरे से अपनी नीचे की होंठ काटी, फिर मेरी आँखों में देखते हुए बेहद मुलायम आवाज़ में बोली, “अगर… अगर तुम्हारा मन हो तो… तुम इन्हें छू भी सकते हो।”
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