पिछला भाग पढ़े:- प्यारी सुहानी भाभी-2
भाभी सेक्स कहानी के पिछले पार्ट पढ़ कर आए, तभी समझ में आएगा।
कभी-कभी मेरे मेस में खाना खराब बनता तो मैं भाभी यहां जा के खा लेता था। देखा जाए तो मैं उनका घर का छोटा लड़का बन गया था। पर मैं सबसे करीब भाभी के हो गया था। हमारा बॉन्डिंग बहुत ही बढ़िया था। हम अब रोज बहुत बाते करते थे। उनके घर जाता तो खाना बनाने में भी हेल्प करता और बातें करता था।
रात में दो-दो घंटे बाते करते थे। भाभी कभी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछती तो कभी मेरी पसंद के बारे में। वो तो कभी मजाक-मजाक में ये भी बोल देती थी कि बस नौकरी पकड़ो मैं तुम्हारी शादी अपनी छोटी बहन से करवा दूंगी। भैया का कोई भाई नहीं था, इसीलिए शायद वो मुझमें अपना छोटा प्यारा देवर देखती थी।
ऐसे ही करीब तीन महीने निकल गए। अब मेरे दूसरे सेमेस्टर का एग्जाम भी नजदीक था। मैंने पूरी पढ़ाई कर ली थी, क्योंकि मैं इतना खुश रहता था सबसे बात करके। कभी कोई दिक्कत नहीं हुई।
ऐसे ही एक बार भैया-भाभी का झगड़ा हो गया। भैया को निकलना था काम पे और शाम का समय था। भाभी ने मुझे फोन करके बुलाया कि जाओ भैया को स्टेशन तक छोड़ के आओ। मैं जब भैया को स्टेशन में उतारा तो भैया मुझे बोलने लगे कि तुम भाभी से बात करना आज बहुत गुस्से में थी। मैंने पूछा क्यों तो वो बोले, “हमारी लड़ाई हो गई थी तो मैं कुछ ज्यादा ही बोल दिया।”
मैं समझ गया मैंने कहा, “आप टेंशन मत लो, मैं संभाल लूंगा।” और मैं आ गया घर।
भाभी: आओ खाना खा के जाना (निराश थी)।
मैं: क्या हुआ भाभी? आप इतने खुश रहने वाली सुंदर लड़की ऐसे उदास रहे, अच्छा नहीं लगता।
भाभी: कुछ नहीं हुआ।
मैं: भैया से लड़ाई हुई?
भाभी: ये किसने कहा तुमसे?
मैं: भैया बोल रहे थे। क्यों हुई लड़ाई?
भाभी: तुम नहीं समझोगे।
मैं: क्यूं नहीं, आप बताओ तो सही।
भाभी (चिड़चिड़े होके): कहा ना नहीं समझोगे। अब चुप से खाना खाओ और जाओ।
पहले मैंने भाभी को ऐसे बोलते कभी नहीं देखा। मैं चुप हो गया और खाना खा के वापस जा रहा था। तो भाभी ने बाइक की चाबी दी और बोली, “बाइक ले जाओ, अभी रात हो गई, जल्दी पहुंचोगे।”
मैं बाइक से रूम आ गया और बेड पे लेट गया। इतने में भैया का फोन आया…
भैया: ईशान कहा हो अभी?
मैं: रूम आ गया भैया, बोलिए कुछ काम था क्या आपको?
भैया: सुहानी मेरा फोन नहीं उठा रही। उसका गुस्सा अभी भी शांत नहीं हुआ?
मैं: हां भैया, मुझे भी सुना दी गुस्से में। आप दोनों लड़ते हो और मैं सुनता हूं।
भैया: अच्छा सुनो ना ईशान, तुम बाइक लेके आए हो ना?
मैं: हां भैया!
भैया: मैं अभी तीन दिन तक घर नहीं आऊंगा। तुम आज घर जा सकते हो क्या? और हो सके तो वहीं रुक जाना ना आज रात। मुझे बहुत चिंता हो रही तुम्हारी भाभी की। कही कुछ कर ना ले।
मैं: इतनी सीरियस लड़ाई हो गई क्या? मैं जाता हूं अभी घर, और आप चिंता मत करो, मैं हूं यहां। सब संभाल लूंगा।
भैया: थैंक्स छोटे, तुम नहीं होते तो क्या होता। मुझे बहुत चिंता हो रही थी। अब जाओ और वहीं रुक जाना अभी।
मैं: ठीक है भैया, बाई।
अब मुझे भी टेंशन होने लगी। मैं जल्दी बाइक निकाला और सीधे स्पीड से भाभी के पास चला गया। घर में गया तो बाहर का दरवाजा खुला हुआ था। मेरी सांसे और तेज होने लगी। भाभी ठीक तो होगी ना? अंदर उनके कमरे में गया तो देखा, वो बेड के कॉर्नर के पास बैठी रो रही थी। उन्होंने मुझे तो देखा भी नहीं।
मैं सीधे उनके पास गया और गले से लगा लिया। ये पहली बार था जब मैं ऐसे उनको गले लगाया, और उनको ऐसे छुआ। उनका शरीर पूरा मक्खन के जैसा सॉफ्ट फील हुआ। मैंने उनको जोर से पकड़ लिया। वो मेरी और देखी और जोर-जोर से रोने लगी। मैं कुछ बोलता उससे पहले वो मुझे ओर कस के गले लगा ली। अपना सिर मेरे कंधे में रख के रोने लगी। मैं कुछ नहीं बोला और रोने दिया उनको। शायद इसकी जरूरत थी। फिर जब वो थोड़ा चुप हुई तो मैंने पूछा…
मैं: भाभी चुप हो जाओ, और बताओ तो हुआ क्या? भैया कुछ गलत बोले है तो बताओ?
भाभी (रोते हुए): कोई नहीं करता मुझसे प्यार। सब मुझे अकेले छोड़ के चले जाते है।
मैं: ऐसा नहीं है भाभी, मैं आपसे प्यार करता हूं। भैया आपसे प्यार करते।
भाभी: नहीं सब झूठ। तुम्हारे भैया मुझसे कभी अच्छे से प्यार नहीं किये। तुम भी चले जाते हो। मैं यहां कितनी अकेली रह जाती हूं।
ये बोलते-बोलते मुझे और जोर से पकड़ ली।
मैं: मैं प्रॉमिस करता हूं भाभी, आपको छोड़ के कभी नहीं जाऊंगा।
भाभी: तुम्हारे भैया भी ऐसे ही बोलते है। जब तुम नहीं थे मैं बहुत अकेले होती थी। वो हमेशा काम में चले जाते और दो दिन-तीन दिन में आते है। मैं समझती हूं काम है, पर मेरा क्या, मैं कैसे रहूं अकेले? तुम रहते हो तो तुमसे बात करके मन को हल्का कर लेती हूं।
मैं: मैं हूं यहां, आप मुझसे जितना चाहे बात कर सकती है।
मैं अभी भी उनको जोर से पकड़ हुआ था। वो मेरी और देखी। मेरी आंखों में सीधा देखी।
भाभी: तुम सच बोल रहे ना?
मैं सिर हां में हिला दिया। अब वो चुप हो गई थी। बाहर से कुछ आवाज आई। तभी भाभी को याद आया कि वो मेरी बाहों में थी। वो झट से मुझसे दूर हो गई।
मैं: बाहर दरवाजा खुला है शायद, उसका आवाज होगा।
मैं ये बोल के बाहर चला गया। दरवाजा बंद किया, और किचेन में पानी लाने गया तो देखा वहां खाना जैसा का तैसा रखा हुआ था। मैं पानी लेके गया भाभी के पास, उनको दिया।
मैं: आप खाना भी नहीं खाए हो?
वो सिर हिला के मना कर दी। फिर मैं किचेन गया और खाना गरम करके लाया उनके बेडरूम ही। घर के बारे बता दूं, ये दो कमरों वाला घर है एक किचेन और एक बाथरूम है। रूम बड़े-बड़े है। एक में गेस्ट रूम बना रखा है और एक अपना मास्टर बेडरूम है।
तो खाना ले गया मैं और उनको दिया। कुछ अपने हाथों से भी खिलाया।
मैं: अच्छा भैया डांट दिए थे क्या?
भाभी: और नहीं तो क्या! बोले, “तुम्हे तो बस अपनी पड़ी है, काम वगैरा छोड़ के बैठ जाता हूं तुम्हारे साथ।”
मैं: गलत भी नहीं बोले (मजाक में)!
भाभी: अब तुम भी (अपना हाथ मुझे थप्पड़ मारने के लिए लाई, मैं साइड होके बच गया। मजाक वाला थप्पड़ था)।
मैं: देखना भैया अगर दोबारा परेशान करे, बस एक फोन कर देना। उनकी बत्ती गुल कर दूंगा।
भाभी: हां मेरे पहलवान। तुम लेकिन सचमुच पहलवान हो मैंने देखा। तुम्हारी बॉडी एक-दम मजबूत है, लड़कियां तो मरती होगी तुमपे (स्माइल के साथ)।
मैं: क्या भाभी आप भी। मैं तो आपकी बहन से ही शादी करूंगा।
भाभी: अच्छा!
थोड़ी देर बाद-
भाभी: तुम वापस क्यों आए?
मैं: वो भैया ने कहा, और बोले जब तक मैं ना आऊं तुम भाभी के साथ रहोगे।
भाभी: चलो एक काम तो अच्छा किया तुम्हारे भैया ने। अब रात भर बातें करेंगे।
वो अब खाना खा के किचेन में बर्तन धोने लगी। मैं वही खड़ा होगे उनको देखने लगा।
भाभी: क्या है, इतना क्यूँ घूर रहे हो?
मैं: कुछ नहीं। आप सचमुच बहुत सुंदर हो।
भाभी (स्माइल की): हट पागल! ऐसा कौन बोलता है?
ऐसे ही हसी-मज़ाक चलती रही। हम फिर भाभी के बेडरूम गए और बातें करने लगे। बात करते-करते पता ही नहीं चल कब 12 बज गए। मैंने देखा भाभी सो गई थी। सोते हुए उनका शरीर क्या लग रहा था। भाभी के उभरे हुए दूध, गोरा बदन, प्यारी आंखे, प्यारा चेहरा, बड़ी फुरसत से बनाया गया है इनको। मैंने फिर उनको सोने दिया और गेस्ट रूम में जाके सो गया।
अगली सुबह…
भाभी: उठो बाबू 9 बज गए (ये पहली बार था जब भाभी मुझे बाबू बोल रही थी। बिहार में ये कॉमन होता है अपने से छोटे को बाबू बोलना।)।
मैं: पहले क्यों नहीं उठाई, कॉलेज भी जाना था? अब तो लेट हो गया।
भाभी: तुम सोते हुए इतने प्यारे लग रहे थे मन नहीं किया उठाने का।
मैं: क्या भाभी आप भी! उठा देते ना कम से कम दौड़ लेता।
भाभी: कितना एक्सरसाइज करोगे? तुम ऑलरेडी बहुत अच्छे दिखते हो। मैं लड़की होती तो तुम्हें कब का पटा लेती।
मैं: क्या?
भाभी: कुछ नहीं अब बस उठो (और हंसते हुए चली गयी)।
मैं उठा और फ्रेश होके नाश्ता किया। फिर भाभी अपना डेली का काम करने लगी, वहीं साफ-सफाई। अब दोपहर हो गया। मैं बोर हो रहा था तो भाभी को कहा चलो कोई फिल्म देखते है। वो मान गई। हम भाभी के बेड में बैठ के टीवी देखने लगे। बैठे नहीं लेटे थे। ये एक रोमांटिक फिल्म थी। कुछ किसिंग सीन भी थे मैं तो शर्मा गया, भाभी के तरफ देखा भी नहीं। मूवी खतम हुई, अब शाम हो गया था। डिनर का तैयारी करने लगे। भाभी ने चिकन लाने को बोला क्योंकि मुझे बहुत पसंद था। अब किचेन में भाभी खाना बना रही थी।
मैं: आपको पता है मुझे चिकन बहुत पसंद है। खास करके मम्मी और आपके हाथ का बना हुआ। आप सच में बहुत अच्छा खाना बनाते हो।
भाभी: अच्छा जी, इतने तारीफ कर रहे, जरूर तुम्हें कुछ चाहिए।
मैं: नहीं भाभी कुछ नहीं चाहिए, आप ही बहुत हो।
मैं: पर एक बात कहना था।
भाभी: बोलो क्या बोलना है?
मैं: कल आप चलोगे मेरे साथ घूमने? मैं फ्री हूं, आपको भी अच्छा लगेगा।
थोड़ी देर सोचने के बाद वो बोली।
भाभी: ठीक है चलूंगी, पर मेरा एक बात मानना होगा।
मैं: क्या?
भाभी: आज तुम्हें मेरे कमरे में ही सोना होगा। कल तुम भाग गए थे मेरे सोने के बाद। मुझे अकेले रहना पसंद नहीं है, समझे।
मैं: ठीक है।
फिर खाना खा के बेडरूम में आ गए। भाभी एक साइड मैं एक साइड बेड में लेट के बाते करने लगे। इतने में भाभी पानी पीने किचेन गई तो मैं भी सोचा थोड़ा हल्का हो जाऊं।
मैं बाथरूम में सुसु करने गया, जैसे ही अंदर गया वह देखा भाभी की पैंटी और ब्रा पड़ी हुई थी। ये देख के अचानक मुझे कुछ फील होने लगा। मेरा लंड खड़ा हो गया बड़ा सा 7 इंच का।
पर मैं बाथरूम का दरवाजा लगाना भूल गया था। अचानक भाभी अंदर आई उनका नज़र सबसे पहले मेरे लंड में पड़ी, मैं ये देख अपना लंड छुपाने लगा। वो झट से बाहर चली गई। मुझे तो अब बहुत शरम आ रही थी। भाभी को अब फेस कैसे करूंगा?
मैं बाहर आके सबसे पहले सॉरी बोला। पर भाभी कहने लगी सॉरी मुझे अंदर नहीं आना चाहिए था। फिर वो बाथरूम चली गई और बहुत लेट से निकली। मैं तब तक बेड पे लेटा हुआ था। वो बाहर आई।
भाभी: सॉरी ईशान मुझे नॉक करके आना चाहिए था।
मैं: कोई बात नहीं भाभी।
इतने में वो स्माइल कर दी और बेड में आके बगल में लेट गई।
भाभी: तुम सच में बहुत बड़े हो गए हो। कोई भी लड़की तुम्हारे साथ खुश रहेगी।
मैं: भाभी आप कुछ भी बोलते हो।
ऐसे ही हम बात करते-करते रात के 2 बजा दिए। हमें अब नींद आ रही थी। मैं सोने लगा इतने में भाभी मेरे और पास आ गई और एक हाथ मेरे गाल में रख के सहलाने लगी।
फिर मेरे बाल ऊपर करके माथे में किस्स की। फिर गुड नाइट बोल के सोने लगी। अचानक मुझे क्या फील हुआ मैं भाभी को कमर से पकड़ के अपने पास सटा लिया। वो पूरा मेरे से चिपका गई थी सिर से पांव तक। उनके हॉट मेरे हॉट के पास थे 1 इंच भी दूर नहीं थी।
भाभी की सांसे तेज हो गई थी। मैं उन्हें और जोर से पकड़ रहा था। इतने में वो पलट गई और पीठ मेरे तरफ कर दी। क्या गोरी पीठ थी। मैं फिर भी उनको पकड़ा रहा कमर से। मेरे एक हाथ भाभी के पेट (नाभी) के पास था। दूसरा को वो तकिए की तरह अपना सर उसमें रखी हुई थी। हम ऐसे ही सो गए।
अगले दिन फिर से मैं लेट उठा 11 बजे। आज भी भाभी नहीं उठाई। मैं जब सो कर उठा तो देखा भाभी नहा के तैयार हो रही थी। बहुत ही खूबसूरत ड्रेस पहन के तैयार थी। मैं उने देखते ही रह गया। इतनी सुंदर लग रही थी।
फिर मैं भी जल्दी से तैयार हो गया। हम दोनों बाहर घूमे मस्ती किए। भाभी को मूवी दिखाया, मॉल में घुमाया, अच्छे रेस्टोरेंट में खाना खिलाया। जहां भी जाता लड़के उन्हें घूर-घूर के देखते थे। इसलिए मैं उनका हाथ हर जगह पकड़ के चल रहा था। फिल्म देखते वक्त तो वो मुझसे पूरा चिपक गई थी।
हमें घूमते-फिरते रात के 10 बज गए थे। अब वापस आ रहे थे बाइक में। भाभी मुझसे पूरा चिपक के बैठी थी, जैसे हम कोई कपल है। मुझे भाभी के बड़े-बड़े बूब्स फील हो रहे थे।
भाभी: आज मुझे बहुत मजा आया।
मैं: मुझे भी। आप हो ही इतनी अच्छी और सुंदर।
भाभी: चुप करो (उनके आंख से आसूं आने लगे)।
मैं बाइक रोक दिया।
मैं: क्या हुआ भाभी?
भाभी: पागल, मैं आज बहुत खुश हूं। ये खुशी के आसूं है। इतने दिनों बाद आज फिर बाहर घूमी, और मजा किया सिर्फ तुम्हारी बदौलत।
मैं बस सुन रहा था। सामने एक आइसक्रीम की दुकान खुली थी मैं ले आया। हम अब कहते खाते बात कर रहे थे।
फिर ये सब खा के वापस आ गए। रात के 11 बज गए थे और मैं बहुत थक गया था। भाभी बाथरूम गई मैं बेड पे लेटा तो कब नींद आई पता ही नहीं चला। रात में चार बजे थोड़ी आंख खुली तो देखा भाभी नाइटी पहनी हुई मेरे से चिपके हुए सो रही है।
उनके बूब्स मेरे से सटे हुए थे। अंदर वो ब्रा नहीं पहनी थी साफ पता चल रह था। नाइटी इतना पतला था कि निप्पल भी दिख रहा था। मेरे तो लंड खड़ा हो गया था। मैं अब उनका पूरा शरीर छूने लगा।
जब मेरे हाथ उनके गांड में गया तो पता चला पैंटी भी नहीं पहनी थी। अब मुझे और जोश आ रहा था। मैं उठा और नाइटी थोड़ा ऊपर करके उनका गांड देखने लगा। मस्त फूला हुआ गोरा गांड देखने में इतना सुंदर लग रहा था। इतने में भाभी थोड़ा पलटी आधे नींद में वो बोली, “क्या कर रहे, सो जाओ।” उनको शायद पता नहीं चला मैं क्या कर रहा था।
वो फिर मुझे अपने तरफ खींच के सुला दी। गाल और गर्दन में किस्स करके आई लव यू ईशान बोल दी। शायद नींद में थी। फिर मेरी चेस्ट में अपना सर रख के सो गई। मेरे हाथ अभी भी उनके गांड में था।
अब आगे अगले पार्ट में।