पिछला भाग पढ़े:- प्यारी सुहानी भाभी-1
दो महीने बीत गए, गोपाल भैया या भाभी से कोई खबर नहीं आई। मैं भी डर के मारे फोन नहीं कर पाया। पर मुझे चिंता हो रही थी कि भाभी कैसी होगी। मेरे 4th सेमेस्टर के एग्जाम भी खतम गए। मैं अब 3rd इयर में चला गया, अब बस दो साल बचे थे इंजीनियरिंग के।
एक दिन जब मैं क्लास से हॉस्टल रूम आया तो देखा भैया का मिस्ड कॉल था। मैं तो डर गया कि अब क्या हो गया है। मैं इधर से कॉल किया भाभी को, पर भैया उठाए और बोले, “तुम आज हमारे घर आओ।”
मैं तो डर गया कि भैया ऐसे बुला क्यों रहे थे। ये सब होने के बाद, कहीं पुलिस वगैरा में पड़वा दे। मैं तो डर के मारे गया ही नहीं। अगले दिन फिर भाभी का कॉल आया और बोली: कि तुम घर आओ, ईशान भैया तुमसे बात करना चाहते है।
फिर मेरे जान में जान आया और मैं उनके घर के लिए निकल गया रूम से। रास्ते में सोचते रहा था कि क्या बोलना होगा भैया को। मेरी फिर से फटने लगी।
घर पहुंचा डरता हुआ, भैया दरवाजा खोले और अंदर आने को बोले। जैसे-जैसे मैं अंदर जा रहा था मेरे दिमाग में फ्लैशबैक आ रहे थे, कि कैसे मैं यहां तक पहुंचा। तो ब्रेकअप के बाद वाली स्टोरी बताता हूं-
रिया के छोड़े जाने के बाद मैं पूरा टूट गया था। फिर खुद को आईने में देखने के बाद डिसाइड किया कि अब मैं जिम जाऊंगा और बॉडी बनाऊंगा।
पहला सेमिस्टर खतम हो गया था। कॉलेज के पास एक जिम में ज्वाइन कर लिया। रोज वहां जाने लगा, पूरे फोकस से जिम करता। वहां के ट्रेनर भी मुझसे इंप्रेस हो गए थे। दो-तीन महीने में ही मेरी अच्छी बॉडी बन गई थी, 10 किलो वजन भी बढ़ गया था। 60 से 70 किलो का हो गया। मेरे शरीर में कट्स भी दिखने लगे थे। 6 पैक्स, बड़े बाइसेप्स, छाती भी चौड़ी हो गई।
मेरी बॉडी ऑलमोस्ट परफेक्ट हो गई थी। खाने में अब सिर्फ हेल्दी खाता था। बाहर का कुछ भी नहीं, चीनी भी खाना छोड़ दिया। जिम करने से चेहरे में भी निखार आ गया था। थोड़ा और गोरा हो गया था।
होली की छुट्टी हो गई एक सप्ताह के लिए। मैं जब घर गया तो, सब चौंक गए मुझे देख के, मां बोलने लगी बहुत सुंदर हो गया। पड़ोस की लड़कियां भी घूर-घूर के देखने लगी। पड़ोस की एक लड़की आके बोल भी दी “भैया आप बहुत अच्छे लग रहे हो।”
ये सब सुन के बहुत अच्छा लगा, कि चलो अब जिम जाने के फायदा तो हुआ। छुट्टी खतम होने के बाद वापस कॉलेज चला गया।
जिम फिर से चालू करा। एक दिन जिम करते-करते मसल्स में क्रैंप आ गया, जिम ट्रेनर भैया से पूछा तो बोलते अब थोड़ा स्पोर्ट्स भी खेलो, थोड़ा दौड़ो ताकि बॉडी और फ्री हो। और कुछ कैजुअल एक्सरसाइज भी बोले करने के लिये। ये कैजुअल एक्सरसाइज सेक्स स्टैमिना बढ़ाने के लिए होता है, मैंने जब पूछा तो बोले इससे कमर दर्द नहीं होगा और ओवरऑल हेल्थ अच्छी होगी।
तो अब मैं चार दिन जिम करता और तीन दिन वहीं लोकल ग्राउंड में खेलने जाता। वहां आस-पास के बहुत लोग आते थे खेलने और दौड़ने। ऐसा ही रूटीन चलते रहा एक महीने तक। फिर..
एक दिन दौड़ते समय देखा कि एक बहुत सुंदर लड़की साइड में बैठी हुई थी और अपने पैर दबा रही। मैं ऐसे ही दौड़ते रहा। दो-तीन राउंड लगा दिए ग्राउंड के, पर अब भी वो लड़की साइड में बैठी हुई थी। मैं उनके पास गया और पूछा-
मैं: आपको कोई हेल्प चाहिए?
लड़की: पता नहीं, दौड़ते वक्त शायद पैर मुड़ गया। अब चल नहीं पा रही बहुत दर्द भी कर रहा।
मैं: आप घर से किसी को बुला लो, ऐसे में चल के नहीं जा पाओगी।
लड़की: मैंने अपने हसबैंड को कॉल किया। वो अभी दूसरे टाऊन में है और बोले कि शाम तक नहीं आ पाएंगे। इसलिए मैंने उनको नहीं बताया पैर के बारे में ताकि वो आराम से आए, और मेरी चिंता ना करे।
मैं: तो आप अभी घर कैसे जाएंगी?
लड़की: पता नहीं अभी शायद थोड़ी देर में ठीक हो जाए तो चली जाऊंगी।
मैं: ये जल्दी ठीक नहीं होने वाला (मुझे बुरा भी लग रहा था)।
मैं: अच्छा चलिए मैं अभी आपको घर तक छोड़ देता हूं।
लड़की: नहीं-नहीं आपको कहीं जाना होगा। मैं ऐसे आपको तंग नहीं कर सकती।
मैं: अरे कोई बात नहीं। वैसे भी आज मेरा क्लास नहीं है तो मैं फ्री ही हूं।
लड़की: अच्छा आप यह कॉलेज में पढ़ते है?
मैं: हां, मेरा नाम ईशान है।
लड़की: और मेरा नाम सुहानी है (दोस्तों यही है सुहानी भाभी।)
फिर मैं भाभी को उनके घर ले गया, (एक हाथ कंधे में रखा और एक पैर में चलवा के किसी तरह घर ले गया)। ज्यादा दूर नहीं था, बस यहीं 400 मीटर्स होगा।
मैंने उनको घर में बैठाया, ये एक सरकारी घर था। मैंने पूछा आपके हसबैंड क्या करते है।
भाभी: वो रेलवे में जॉब करते है। पायलट है।
मैं (मैं तो सुन के चौक गया): आप तो बहुत अमीर निकले।
भाभी: अरे नहीं, ऐसा भी नहीं है। बस पांच साल ही हुए है उनको जॉब करते हुए।
मैंने उनके पैर में गरम पट्टी बांध दिया फिर बोला-
मैं: अच्छा मैं चलता हूं।
भाभी: अच्छा ठीक है, और धन्यवाद मेरी हेल्प करने के लिए।
मैं: अरे कोई नहीं, इतना भी बड़ा काम नहीं किया। वैसे कल तक आपका पैर ठीक हो जायेगा, और आप फिर से कल दौड़ सकती है।
वो स्माइल कर दी। फिर मैं वहां से चल दिया। क्या ही बताऊं भाभी के बारे में दूध जैसे गोरी और शरीर पूरा भरा पूरा। साइज परफेक्ट, आगे-पीछे सब। मैं रूम आया, आज छुट्टी थी तो बस नहाया, थोड़ी मूवीज देखी। फिर रात में अचानक रिया की याद आ गई, मैं इमोशनल हो गया। और ऐसे ही उसके फोटो देखते-देखते सो गया।
अगले दिन फिर से दौड़ने गया। आज रविवार था, तो सोचा थोड़ा ज्यादा दौड़ा जाए। मैं दौड़ ही रहा था कि फिर से भाभी को देखा, वो आ रही थी। टी-शर्ट और पैजामा में थी उनके साथ एक और आदमी था। हाइट में छोटा 5’5″ का होगा शायद, भाभी तो 5’2″ के आस-पास होगी। भाभी डायरेक्ट मेरे पास आई और बोली-
भाभी: गुड मॉर्निंग ईशान!
मैं: गुड मॉर्निंग भाभी (इससे पहले कभी उनको भाभी नहीं बोला था, अचानक मुंह से निकल गया।)।
भाभी: आज भी दौड़ रहे?
मैं: हां।
उनके साथ आया लड़का: तुम्हीं थे जो कल हेल्प किए थे?
मैं: हां।
लड़का: अच्छा किया धन्यवाद (उनके चेहरे में स्माइल था)।
मैं: अरे नहीं भैया, इसकी जरूरत नहीं। कोई भी यही करता। (मैं उनसे बहुत इंप्रेस हुआ वो बहुत अच्छे से बात कर रहे थे)
लड़का: मेरा नाम गोपाल है।
मैं: मैं ईशान।
भैया: हां, कल बताई सुहानी।
मैं: चलिए फिर दौड़ते है।
भैया: अरे नहीं, तुम्हीं दौड़ो, मैं नहीं दौड़ता।
मैं: अच्छा ठीक है भैया। मेरे कुछ राउंड बचे है, मैं दौड़ के आता हूं।
फिर मैं दौड़ने चला गया और वो दोनों बस ग्राउंड के राउंड मर रहे थे पैदल। मैं और पांच राउंड मार के वही पेड़ के नीचे बैठ गया। थोड़ी देर में वो दोनों भी पेड़ के पास बैठ गए। अप्रेल का महीना था तो 7 बजते ही धूप हो गई थी।
मैं तो हाफ रहा था। भाभी मुझे पानी पीने के लिए दी। अभी थोड़ा जान में जान आया। फिर भैया मेरे पढ़ाई से लेकर सब पूछने लगे। मैंने सब बता दिया, वो भी इंप्रेस हो गए मेरी रैंक सुन कर। और पहले सेमेस्टर में रिया के वजह से खराब गया नहीं तो इसमें भी टॉप करता।
भैया: अच्छा चलो जी हमारे घर आराम से फ्रेश होके फिर चले जाना। तुमने कल हेल्प करी हमारी और हमने कुछ किया भी नहीं तुम्हारे लिए।
मैं: नहीं भैया ठीक है, इसकी कोई जरूरत नहीं।
भैया: अरे ऐसे कैसे हम बिहारियों का मदद करोगे तो हम जीवन भर तुम्हारा हेल्प करेंगे।
उसी समय मुझे पता चला कि ये दोनों बिहार से थे। तभी भाभी इतनी गोरी थी।
भाभी: तुम हमे भैया-भाभी बोलते हो और हमारी बात भी नहीं मानते। ये कैसी बात हुई?
मैं: अच्छा ठीक है मैं चलता हूं।
फिर हम तीनों बात करते-करते घर गए। मैंने अपने बारे में सब कुछ बताया। कहां से हूं, कहां घर है सब। वो भी अपने बारे सब बताए कि कहां से है।
वो बिहार से थे। भैया की रेलवे जॉब के कारण वो यहां आए है। उनका ट्रांसफर होते रहता था। और वो पायलट काम के कारण दो दिन तो कभी तीन दिन तक बाहर ही रहते थे। इस टाइम में भाभी अकेले घर में रहती थी।
मैंने पूछा भाभी से “आपको डर नहीं लगता?” वो बोली, “अब तो आदत हो गई है।”
फिर हमने बहुत बात की और पता ही नहीं चल कब 12 बज गए। भरी दोपहरी हो गई, और धूप भी बहुत था। भैया बोले “अब शाम में जाना, बहुत धूप है।” मैं मान गया क्योंकि लू भी चल रही थी, जो बिल्कुल भी अच्छा नहीं है।
पूरा एक दिन उनके साथ बिताने के बाद ऐसा लगने लगा कि वो अपने भैया-भाभी थे। बहुत ही अच्छा बॉन्ड हो गया कम समय में। अब ऐसे ही आना-जाना लगे रहता था। कभी सुबह तो कभी शाम। और जब भी भाभी कुछ अच्छा बनाती खाने के लिये तो मुझे पक्का बुलाती थी। कभी-कभी तो मेरे लिए ही सिर्फ चिकन बनाती थी क्योंकि मुझे पसंद था।
मैं दोनों का दोस्त जैसा हो गया था। भैया जब नहीं रहते और भाभी को कोई चीज की जरूरत होती तो वो मुझे तुरंत फोन करती थी।
भैया भी अब मुझपे भरोसा करने लगे थे।
आगे की स्टोरी अब अगले पार्ट में।
अगला भाग पढ़े:- प्यारी सुहानी भाभी-3