पिछला भाग पढ़े:- मां की सुहागरात दूसरे की शादी में-2
हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-
बेड पर गिरने के बाद, होठों को चूसने के बाद मैंने अपनी मां के पूरे कपड़े निकाल दिए। एक छोटा सा कपड़ा तक नहीं था उनके ऊपर सिवाय मेरे। मैंने झट से बेड के नीचे घुटनों पर बैठ कर मम्मी की टांगों को पकड़ा। फिर उनको खींचा खुद की तरफ और लपेट लिया अपनी गर्दन के ऊपर। उसके बाद अपने मुंह को उनकी चूत में घुसा दिया जो पहले से ही गीली हो गई थी। फिर मैं जोर-जोर से चाटने लगा।
मम्मी तो पूरी पागल हो गई थी। अपने पैरों से मेरे सिर पर दबाव बना कर अपनी चूत में घुसा रही थी और बेड से उछल-उछल कर आहें भर रही थी। मम्मी बेडशीट को एक-दम टाइट पकड़ रखी थी और उछल रही थी। वो आह आह कर रही थी।
करीब 10 मिनट चूत चाटने और चूसने के बाद ही मम्मी ने पूरा रस मेरे मुंह में निकाल दिया। मेरी मम्मी को लंड चूसना अच्छा नहीं लगता था, तो उसके बाद मम्मी ने मुझे बेड पर लेटा दिया, और अपने बाल खोलते हुए लंड को अपनी चूत में सेट करते हुए बैठ गई मेरे लंड पर। मैं मम्मी को कमर से पकड़ा और मम्मी कूदना शुरू कर दी।
मैं: आह आह जोर से खुद मेरी ज्योति रानी आह। आज हमारी ही सुहागरात है।
और नीचे से मैं भी धक्के मार रहा था। हर बार जब वो कूदती, तो उनके दूध जोर से हिलते और साथ ही मंगलसूत्र और ज्यादा जोर से उछलता, मैं एक हाथ से दूध सहला रहा था और एक से कमर में थप्पड़ लगा रहा था। इसी पोस में चोदते हुए मम्मी पूरी झुक गई और चुदाई करते हुए किस्स कर रहे थे। साथ में मैं उनके दूध भी चूस रहा था।
तभी वहां पर रिलेटिव आ रहे थे मम्मी को बुलाने कि शादी में कुछ काम था। ऐसी कोई रसम थी जिसमें भाभी की जरूरत होती है, तो वो मम्मी को बुलाने के लिए कमरे की तरफ आ रहे थे भाभी आवाज देते हुए। उनकी आवाज सुन कर मम्मी मेरे लंड पर रुक गई। लेकिन मैंने नीचे से झटके थोड़ा तेज कर दिए, जिससे मम्मी की आवाजें और आहे दोनों निकल रही थी।
वो फिर झट से मेरे लंड से उठ कर दरवाजे के पास चली गई। उन्होंने थोड़ा सा दरवाजा खोला जिससे बस बात ही हो सके। मुझे भी थोड़ी शरारत सूझी और मैं मम्मी के पीछे गया और उनकी कमर को अपनी तरफ खींच कर उनकी चूत में दो उंगली डाल के जोर से अंदर-बाहर करने लगा। इससे मम्मी की हल्की सी चीख निकल गई।
तो भैया बोले: क्या हुआ भाभी जी, ठीक तो है ना आप?
मम्मी बोली: कुछ वो थोड़ा पैर मुड़ गया था। मैं आती हूं थोड़ी देर में।
फिर उन्होंने दरवाज़ा बंद कर दिया और पीछे घूम कर मुझे दीवार से चिपका दिया।
वो बोली: सबर तो कर लेता, अभी पकड़े जाते।
मैं मम्मी को उल्टा करके, मम्मी को दीवार से चिपका कर खड़ा करके, लंड वापस चूत में डाल के वहीं चोदने लगा। मैं बता नहीं सकता ऐसे में लंड कितनी गहराई में जा रहा था। जितना अंदर लंड जाता, मम्मी उतनी ही दीवार में घुसते हुए ऊपर जाती। वो बोली ऐसे ही चुदाई करते हुए।
हमको 15 मिनट हो चुके थे, तो मम्मी बोली: बेड में चलते हैं।
फिर वापस हम बेड में आ गए चुदाई करते हुए। बेड में लिटा के उनके पैरों के अंगूठे को चूसता हुआ अपने लंड को एक ही झटके में पूरा चूत की गहराई में उतार दिया। इससे उनकी चीख निकल गई, लेकिन चुदाई और जोरों से होने लगी। मम्मी की सिसकियां और तेज होने लगी और उनकी चूत का पानी निकलने वाला था।
वो बोले जा रही थी: बेटा रुकना नहीं। और तेज। तेरी रानी का पानी निकलने वाला है। वाह बेटा।
और ऐसे ही उनका पानी निकल गया। मैं लंड से चोदता रहा और मेरा भी निकलने वाला था। हमको 45 मिनट से भी ज्यादा हो गये थे। मेरा पानी भी उनके अंदर ही निकल गया, और मैं उनके ऊपर ही लेट गया।
5 मिनट बाद मम्मी उठने लगी। बाहर जाने के लिए और अपनी साड़ी पहनने को उठा कर शीशे के आगे खड़ी हो गई। मेरा लंड जो अभी भी आधा खड़ा था, मैं भी उठ कर उनके पास गया। फिर साड़ी को पकड़ कर खींचा तो मम्मी वापस मेरे पास आ गई। अब मैं पीछे से खड़े-खड़े उनके दूध दबाने लगा और लंड को उनकी कमर पर घिसने लगा। मैंने उनकी एक टांग को उठा कर कुर्सी पर रखा और आधे खड़े लंड को वापस उनकी चूत में डाल के चुदाई करने लगा।
मम्मी: बेटा जाने दे, फिर से कोई बुलाने आ जाएगा।
मैं: आज मेरी सुहागरात हैं, तो कैसे जाने दूं?
मम्मी: ओह बेटा, मेरी भी तो असली सुहागरात आज ही हुई हैं। मेरा भी मन नहीं है तेरे लंड को बाहर निकालने का। तेरा 8 इंच वाला लंड कितने अंदर तक जा रहा है बता नहीं सकती। दर्द और मजा क्या होता है, आज तेरे साथ पता चल रहा
है।
और उनकी सिसकियां वापस चालू हुई और हमारी चुदाई वापस जोरों पर शुरू हो गई। 30 मिनट बाद मेरा पानी और मम्मी का पानी एक साथ निकल गया। और फिर मम्मी ने मुझे धक्का देके बेड पर गिरा दिया। वो खुद बाहर चली गई तैयार होके।
मुझे बोली: अब सुबह आती हूं, जब बारात के ढोल बजेंगे तब हम तुम दोनों साथ में वापस करेंगे।
फिर थोड़ी देर मैं बिस्तर पर लेटा रहा, अपने सोए लंड के साथ। लेकिन तभी 15 मिन में ही मम्मी वापस अंदर आ गई और गेट लॉक करी। उसको देखते ही मेरा लंड वापस उसको सलामी देने लगा और मम्मी जो साड़ी पहनी थी, आते ही नंगी होके मेरे पास आ गई।
वो बोली: टाइम तो देख, सुबह होने वाली है। और बाहर सारा काम हो गया है।
बाहर ढोल बजने चालू हो गए और अंदर हम वापस चुदाई में लग गए। इस बार मम्मी मेरा लंड पकड़ कर उसको चूसने लगी। इससे मेरे लंड में जो हल्का दर्द था, चुदाई से वापस आराम और कड़क और बड़ा होने लगा। फिर मैं मम्मी के मुंह को चोदने लगा। 5 मिनट बाद मम्मी वापस मेरे लंड पर बैठ कर कूदने लगी और मैं नीचे से झटके देने लगा।
ऐसी चुदाई कही नहीं हुई होगी। बाहर ढोल-ताशे बज रहे थे और हम दोनों की चुदाई अन्दर कमरे में जोरों पर हो रही थी। अगर कोई हमारे कमरे के पास होता भी, तो उसे पता चल जाता, क्योंकि हमारी चुदाई की सिसकियां कमरे के बाहर तक जा रही।
लंड डाले डाले मैं मम्मी को अपने नीचे ले आया और टांगों को उठा कर निप्पल चूसते हुए चूत चोदने लगा। इस चुदाई में हमको बहुत टाइम लगा, क्योंकि 2 बार मेरा निकल गया था और मम्मी का 4 से 5 बार पानी निकल चुका था। 1:30 घंटे होने को थे।
मम्मी बोलने लगी: बेटा 2 बार निकल गया है मेरा। अब दर्द और जलन होने लगी है। अपने पानी से ठंडा कर दे, नहीं तो आज लगता बाहर ही निकल पाऊंगी कमरे से। और आज शाम की ही ट्रेन है।
उनकी बातें सुन कर लगा मुझे, जब बेटा अपनी मां की चूत में दर्द और जलन दे सकता है, इससे ज्यादा गर्व की क्या बात है। उसके लिए और मैंने थोड़ी स्पीड बढ़ाई और मम्मी की सिसकियां भी बढ़ी। फिर 15 झटके मारने के बाद मेरा पानी वापस उनकी चूत की गहराई में चला गया, और मैं लंड अंदर ही डाले-डाले लेट गया। फि हम दोनों सो गए वहीं पर।
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