पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-11
पारिवारिक चुदाई की कहानी अब आगे-
मेरी और दिव्या की चुदाई की कहानी सुन कर मम्मी के फुद्दी गरम हो चुकी थी। दिव्या और मेरी चुदाई की कहानी सुनते-सुनते मम्मी ने सलवार के अंदर हाथ डाल कर अपनी फुद्दी चुदाई के लिए फिर से तैयार कर ली थी। और अब मम्मी को भी चुदाई चाहिए थी। दिव्या चुदाई की थकान के कारण गहरी नींद में सोयी हुई थी। मैं और मम्मी अंदर चले गए। चालीस-पैंतालीस मिनट हमारी मस्त चुदाई हुई। चुदाई के बाद हम बाहर आ गए।
मैं और मम्मी डाइनिंग टेबल पर बैठे थे। मैंने मम्मी से पूछा, “मम्मी एक बताओ। पहली रात आपने भी तो मस्त चुदाई करवाई होगी पापा से। सील भी तुड़वाई होगी। आपकी फुद्दी मैं से भी खून निकला होगा।”
मम्मी ने हंसते हुए कहा, “सब हुआ था बेटा, सब हुआ था। फुद्दी की सील भी टूटी थी। खून भी निकला था, और सुहागरात वाले दिन तो मजा भी तेरे पापा ने चार-पांच बार दिया था, जैसे तूने दिव्या को दिया है। तेरे पापा का लंड भी कड़क था। चुदाई भी तेरे पापा मस्त करते थे। बेटा शादी के पहले दो साल तो ऐसी ही चुदाई होती रही – हर रोज़। महीने में सिर्फ महावारी वाले तीन-चार दिन ही छूटते थे। उन चार दिनों में भी कई बार भी तेरे पापा का लंड खड़ा हो जाता था, और मैं मुंह में लेकर चूस कर तेरे पापा की मलाई निकाल देती थी।”
”बस इतना हुआ कि गांड चुदाई बहुत कम हुई, ना कभी तेरे पापा ने ही गांड चोदने के बात की, और ना ही मैंने कभी गांड चोदने के लिए तेरे पापा को कहा।। लेकिन बेटा धीरज, अब तेरे मोटे लंड से गांड जरूर चुदवाऊंगी।
फिर मैंने दिव्या की टाइट फुद्दी की चुदाई को याद करते हुए कहा, “मम्मी एक बात तो है। सील बंद कुंवारी फुद्दी को चोदने का तो मजा ही अलग है।”
मुझे लग ही रहा था मम्मी बड़ी ही खुश लग रही थी – बेटी की पहली चुदाई हुई थी इस लिए, या फिर उनकी खुद की मस्त चुदाई हुई थी इसलिए।
मम्मी खुल कर हंसी और मस्ती में बोली, “धीरज तुम सब मर्द एक ही तरह के चूतिये ही होते हो। अच्छा एक बात बता, अब तक कितनी फुद्दीयां चोदी है तूने?”
मैं कहा, “मम्मी दिव्या को और आपको छोड़ कर सात-आठ लड़कियां चोदी हैं मम्मी। उनमें सब की सब चुदी हुई थी। मम्मी चुदी हुई तो आप भी हो, मगर मम्मी मुझे आपको चोद कर ज्यादा मजा आया है, दिव्या को चोदने से भी ज्यादा। वो ठीक है कि दिव्या कुंवारी है, फुद्दी टाइट है मगर चुदाई आप ही मस्त करवाती हो।”
मम्मी बोली, ”एक बात और बताऊं धीरज। चुदाई का असली मजा लड़की को आता है लड़के को नहीं। लड़के के लिए मुट्ठ मार कर लंड की मलाई निकालना और लड़की की चूत चोदना – इनमे कोई ख़ास फर्क नहीं होता। सिवाए इसके की लड़का-लड़की को चोद रहा होता है, तो लड़की का नंगा जिस्म, उसके मम्मे और उसकी फुद्दी का नजारा लड़के को ज्यादा मस्त करते हैं। इसीलिए लड़के जब मुट्ठ भी मारते हैं तो उनकी आँखों के आगे किसी ना किसी लड़की का नंगा जिस्म घूम रहा होता है। वो फिर चाहे वो किसी पड़ोसन का हो, किसी और लड़की का, या फिर अपनी मम्मी या बहन का ही हो।”
अब मम्मी बहुत ज्ञान की बातें बता रही थी।
मम्मी बोली, “अच्छा धीरज चलो एक बात बताओ। जब तुम मुट्ठ मारते हो तो क्या करते हो, क्या होता है? लंड को हाथ में पकड़ कर आगे-पीछे करते हो यही ना? इससे क्या होता है? लंड की ऊपर की चमड़ी आगे-पीछे होती है। अब तुम्हारा दिमाग जो देख नहीं सकता, दिमाग समझता है कि तुम्हारा लंड फुद्दी के अंदर है और तुम फुद्दी चोद रहे हो। बस यहीं से कुदरत का काम शुरू हो जाता है। और कुछ देर बाद कुदरती नियम के अनुसार है तुम्हारा लंड पानी छोड़ देता है और इसके साथ ही तुम्हें मजा आ जाता है। जो काम तुमने हाथ से किया यही काम तुम्हारा लंड फुद्दी में भी करेगा – लंड के ऊपर की चमड़ी को आगे-पीछे करना।”
मम्मी फिर आगे बोले, “हां धीरज जब लड़के गांड चोदते हैं, तब उनके लंड के ऊपर रगड़े ज्यादा लगते हैं और उन्हें ज्यादा मजा आता है। गांड चुदाई में भी लड़की को मजा फुद्दी में ही आता है फुद्दी में उंगली करके। गांड में लंड डलवाना तो बस एक ठरक सी होती है।”
मम्मी बोल रही थी और मैं सुन रहा था, “और धीरज फुद्दी की सील फटना। पहली चुदाई की रात को फुद्दी की सील तोड़ना। सात इंच, आठ इंच, नौ इंच लम्बा लंड, ये सब दिमाग़ी फितूर होते है। लड़की फुद्दी में कोइ सील वील नहीं होती। हां ये होता है कि जहां से फुद्दी का छेद शुरू होती है वहां से फुद्दी टाइट जरूर होती है और छेद के आस-पास एक पतली सी झिल्ली लगी होती है। मगर आज कल तो साइकिल चलाने या खेल-कूद करने से ये झिल्ली वैसे ही ढीली हो जाती है।”
“अगर ऐसा नहीं हुआ हो तो जब पहली चुदाई में लंड अंदर जाता है तो फुद्दी की झिल्ली हल्की छिल जाती है और खून निकलता है। वो भी तब, अगर लंड मोटा हुआ, तुम्हारे लंड जैसा – और मर्द साले अपनी-अपनी छाती ठोकते हैं कि देखो जी हमने लड़की की फुद्दी सील तोड़ दी।”
ये बोल कर मम्मी हंसने लग गयी। मामी की ज्ञान भरी बातें चालू थी।
मम्मी आगे बोली, “और जहां तक लम्बे लंड का सवाल है, उसका भी कोइ बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। धीरज, असल में लड़की की फुद्दी का शुरू का ‘लगभग चार इंच गहराई तक का हिस्सा ही ऐसा होता है जहा रगड़ाई होने से लड़की को चुदाई के दौरान मजा आता है। उसके आगे फुद्दी में कोइ संवेदना नहीं होती – मतलब चार-पांच इंच से आगे का हिस्सा सुन्न सा ही होती है।”
“असल में तो पांच इंच लम्बा लंड भी लड़की को चुदाई का उतना ही मजा देता है जितना आठ इंच दस इंच लम्बा। हां लंड की मोटाई और सख्ती जरूर बढ़िया होनी चाहिए, जिससे फुद्दी में बढ़िया से रगड़े लगें, जो अब तेरे पापा के लंड से नहीं लगते। यही रगड़े लड़की को चुदाई का मजा देते हैं। उसके बाद तो जब लड़की की फुद्दी पानी छोड़ती है तो पूरा मजा आ जाता है और, बस हो गयी चुदाई।।”
“धीरज असल में होता क्या है, जब लड़का-लड़की की चुदाई कर रहा होता है, तो चुदाई के धक्कों में वो लंड को आधा इंच या ज्यादा हुआ तो एक इंच ही अंदर बाहर करेगा। इससे ज्यादा वो अंदर-बाहर करना भी चाहे तो एक-दो बार से ज्यादा नहीं कर पाता। अब लड़की की फुद्दी का तो चार से पांच का ही हिस्सा संवेदनशील होता है। अब अगर लंड पांच इंच लम्बा है, और चुदाई के धक्के के दौरान लड़का उसे एक इंच बाहर निकालता है, तो लंड फुद्दी के साढ़े तीन इंच या चार इंच ही अंदर रहता है। फुद्दी के बाकी के आधे या एक इंच पर उस वक़्त रगड़ा नहीं लग रहा होता।”
“मगर सोचो अगर लंड छह इंच, या सात इंच या उससे भी लम्बा है तो लड़का जितने मर्जी लम्बे-लम्बे धक्के लगाए – एक इंच लंड बाहर निकले, दो इंच निकाले लड़की की फुद्दी का, पांच का संवेदशील हिस्से पर हमेशा लंड का रगड़ा लगता ही रहता है। बस यही फर्क है लम्बे और छोटे लंड का।”
“असल में चुदाई के दौरान मर्द जो गंदी गंदी सेक्सी बातें बोलते हैं, उनसे लड़कियों को ज्यादा मजा आता है, मुझे भी आता है, दिव्या को भी आता होगा – हर लड़की को ही आता है।”
“अब मैं तुम्हारी मम्मी हूं और तुम मुझे चोदते हो। मगर चुदाई के दौरान भी नहीं भूल पाते कि तुम अपनी मम्मी को चोद रहे हो। इसलिए तुम कोइ सेक्सी बात भी नहीं करते। वही अगर तुम चुदाई के दौरान बोलो, “ले मेरी रंडी मम्मी, तेरी मां का भोसड़ा, साली मादरचोद चुदक्कड़ रंडी, आज तेरी फुद्दी का कचरा ही कर दूंगा। एक रखैल एक कालगर्ल की तरह चोदूंगा तुझे – फाड़ दूंगा तेरी फुद्दी। जब देखो फुद्दी खोल कर चुदाई के लिए तैयार रहती है। धीरज अगर तुम ये सब बोलो तो मेरा चुदाई का मजा दुगना हो जाएगा। चुदाई के वक़्त ऐसा गंद बोलने से हमारा रिश्ता थोड़ी ना बदल जाएगा।”
मेरी हंसी छूट गयी और मम्मी भी हंसते हुए बोली, “मगर धीरज दिव्या के साथ ये सब मत बोलना। वो अभी पहली-पहली बार चुदाई करवा रही है। उस इन सब बातों का पता नहीं। उसके लिए, ले मेरी रानी, ले मेरी जान, लेले पूरा लंड अपनी फुद्दी में, अपने नरम-नरम चूतड़ों के छेद में, अपनी गांड में जड़ तक लेले मेरी लंड मरी जान,” – धीरज इतनी बात ही उसे बहुत मजा दे देगी – यहीं सब उसे बहुत मजा देगा।”
मैंने मम्मी से कहा, “मम्मी आपको तो बहुत कुछ पता है।”
मामी हंसते हुए बोली, “बेटा अब तक टीचरी – मास्टरी ही तो की है। दसवीं, ग्याहरवीं, बाहरवीं की जवान होती लड़कियों को ये सब जानने की बहुत उत्सुकता होती है। उन्हें ये सब कई बार मुझे ये सब बताना समझाना पड़ता था। बस उनसे बात करते हुए – चूत फुद्दी, लंड जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करती थी।”
बातों-बातों में वक़्त का पता ही नहीं चला – आठ बजने को थे। मामी बोली, “हां धीरज अब बोलो। मेरी तुम्हारी चुदाई तो हो गयी। दिव्या को कब चोदोगे कब डालोगे उसकी फुद्दी मैं अपने लंड का पानी?”
मैंने कहा, “मम्मी, दिव्या ने आज पहली बार चुदाई करवाई है, वो भी लम्बे मोटे लंड से ढाई तीन घंटे। चुदाई में पांच बार उसने मजा लिया है। चुदाई की थकान से तब से सोई ही हुई है। बस ये हुआ है कि मेरी लंड का गर्म पानी उसकी फुद्दी में नहीं गया। एक बार वो जाग जाए, फिर देखते हैं क्या कहती है, कैसी तबीयत है उसकी, उसकी फुद्दी की दर्द का क्या हाल है। आप से कैसे बात करती है।”
“उसके बाद ही डिसाइड होगा मम्मी, अगर तो दिव्या की फुद्दी की दर्द कम हो गयी होगी और एक बार मेरे लंड का गर्म पानी फुद्दी में डलवाना चाहती होगी, तब तो चोद दूंगा। मम्मी लंड का पानी तो पहले ही डलवाना चाहते थी मगर चुदाई करते-करते पांच बज गए थे और आपके आने का टाइम हो गया था।”
मम्मी बोली, “हां धीरज दिव्या की बातें सुन कर ही आगे कुछ करेंगे। वैसे धीरज एक बात बताऊं। अगर लड़की की पहली चुदाई मस्त हुई हो और लड़की को पूरा मजा आया हो ऐसे चुदाई से लड़की खुश बहुत होती है और कई कई दिनों तक चुदाई का मजा याद करके चहकती रहती है। औरतें तो लड़की को इस तरह खुशी से चहकते देख कर एक मिनट में पहचान लेती हैं कि लड़की हाल ही में मस्त चुदी हैं।” फिर मम्मी उठते हुए बोली, “चलूं रात के खाने की तैयारी करूं।”
मम्मी साथ लगी किचन में चली गयी और रात के खाने की तैयारी करने लगी। कोइ बीस मिनट के बाद दिव्या आ गयी दिव्या बिलकुल फ्रेश लग रही थी। हाथ मुंह धो कर बाल संवार कर आयी थी।
आते ही दिव्या ने एक नज़र मुझे पर डाली और बिना कुछ भी कहे मम्मी के पास किचन में चली गयी और मम्मी को पीछे से पकड़ कर बोली, “मेरी स्वीट स्वीट मम्मी।”
और जैसे ही मम्मी मुड़ी, दिव्या ने कमाल ही कर दिया। दिव्या ने मम्मी को बाहों में ले लिया और उसके के होंठ चूसने लगी। पहले तो मम्मी हिली ही नहीं मम्मी को समझ ही नहीं आया होगा, ये क्या हो रहा था। दिव्या ये कर क्या रही थी।
मम्मी ने दिव्या के कंधो के ऊपर से मुझे देखते हुए आंखों का इशारा किया – “मम्मी शायद मुझसे कह रही थी कि देख धीरज, ये देख – ये होती है मोटे लम्बे लंड से हुई चुदाई के मजे की मस्ती।”
मैं सोचने लगा, ठीक ही कह रही थी मम्मी, “अगर लड़की की पहली चुदाई मस्त हुई हो और लड़की को पूरा मजा आया हो ऐसे चुदाई से लड़की खुश बहुत होती है और कई-कई दिनों तक चुदाई का मजा याद करके चहकती रहती है। औरतें तो लड़की को इस तरह खुशी से चहकते देख कर एक मिनट में पहचान लेती हैं कि लड़की हाल ही में मस्त चुदी है।”
यही तो दिव्या भी कर रही थी।