पिछला भाग पढ़े:- मामा जी के साथ मेरी मस्त रंगरलियां-8
हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-
“मामा जी अपने ग्रुप सेक्स की कहानी बता रहे थे। मामा जी ने बताया कि वो और नाती मामी इस ग्रुप में नाती के कारण शामिल हुए थे।”
“कैसे? पढ़िए इस भाग में।”
नाती मामी ने चुदवाई अमर और हेमंत से।
“नाती मामी मामा जी को बता रही थी कि मामी की सहेलियां गोपाल मामा जी का लंड अपनी फुद्दी में लेना चाहती थी। और फिर क्या हुआ?”
“मामा जी मुझे बता रहे थे, “किरण, नाती मुझसे बोली, “गोपाल अब तुम ही बताओ, बात कहां से शुरू हुई थी कहां से कहां पहुंच गयी। अब बताओ गोपाल मैं उन तीनों को क्या जवाब दूं। वो तो तुम्हारा लंड अपने फुद्दी में लेने के लिए मरी जा रही हैं।”
“मामा जी ने मुझसे कहा, “किरण मैं नाती को क्या जवाब देता? जब नाती ने बताया कि सब इकट्ठे ही बोली, “ठीक है नाती कर लो बात, पर गोपाल क्यों मना करेंगे? बैठे बिठाये, बिना मेहनत के पांच-पांच फुद्दीयां – पांच-पांच क्यों छह-छह फुद्दीयां – एक तो बिल्कुल नई-नई नवेली है, रेनू की देवरानी दिव्या।”
“क्या बताऊं किरण ये सुनते ही मेरा लंड खड़ा होने लगा और मैंने नाती को कहा, “ठीक है नाती अगर ऐसा है तो फिर ऐसा ही सही।”
“नाती मेरी बात सुन कर हंस दी और बोली, “गोपाल तो फिर ठीक है, मजे लो चार-चार पांच-पांच फुद्दीयों के।”
“इसके बाद पहले तो पुष्पा, सीमा और कैलाश आयी, और हमारी मस्त चुदाई हुई। अगली बार पुष्पा रेनू को ले आयी। इसके अगली बार पुष्पा और रेनू आई साथ रेनू की देवरानी भी थी – बिल्कुल तुम्हारी उम्र की होगी दिव्या। एक-दम टाइट फुद्दी थी दिव्या की, बिलकुल तुम्हारी फुद्दी की तरह। रगड़ कर लंड जाता था फुद्दी में।”
“एक दम टाइट फुद्दी थी दिव्या की, बिलकुल तुम्हारी फुद्दी की तरह। रगड़ कर लंड जाता था फुद्दी में।”
“मामा जी की बात सुन कर मुझे लगा मुझे मजा ही आने वाला है – मेरी फुद्दी का पानी ही छूटने वाला है।”
“मामा जी बता रहे थे, “किरण, इसके बाद तो हर पंद्रह दिन महीने में ये महफ़िल जमनी शुरू हो गयी। कभी तीन लड़कियां, कभी चार, कभी पांच। सब हमारे घर आ जाती, और हममें मस्त चुदाई होती।”
“इसके बाद तो ये सिलसिला जो हुआ, समझो बस शुरू ही हो गया। कभी दो, कभी तीन, कभी चार। मेरे दोस्तों की बीवियां मस्त चुदाई करवाती थी सभी मुझसे।”
“एक दिन मुझे ऐसे ही ख्याल सा आया – अगर ये चारों आपस में इतना खुली हुई हैं और नाती इन्हें मुझसे चुदवा रही है, तो ये आपस में भी एक-दूसरे के घरवाले से चुदाई करवाती होंगी।”
“एक दिन मैं और नाती बैठे एक-दूसरे के साथ मस्ती कर रहे थे मैंने नाती को से पूछ ही लिया, “नाती तुम इन चारों से इतना खुली हुई हो, ये तो तुम्हारे सामने ही मुझसे चुदाई करवा लेती हैं, एक बात बताओ, ये चारों किसी और से भी चुदवाती हैं – मेरा मतलब एक-दूसरे के हस्बैंड से?”
“नाती कुछ चुप सी हुई और फिर बोली, “गोपाल चुदवाती तो हैं। पुष्पा सीमा रेनू और कैलाश एक-दूसरे के पति से चुदाई करवाती हैं। इन चारों ने अपना एक ग्रुप बनाया हुआ है। और गोपाल एक बात और बताऊं? ये सब पुष्पा या सीमा के घर पर होता है उनके घर बड़े हैं, उनके बेड भी बड़े बड़े हैं। सब कुछ एक ही कमरे में हो जाता है। सब एक-दूसरे के पति से, एक-दूसरे के सामने ही चुदाई करवा लेती हैं।
“मुझे ये सुन कर बहुत ही हैरानी हुई। मेरी दोस्तों में इतना सब कुछ हो रहा है और नाती ये सब जानती है? मैंने ऐसे ही पूछा लिया, “और नाती तुम?”
“और किरण नाती ने जो कहा, वो सुन एक बार तो मेरे होश ही उड़ गए। नाती ने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और बोली, “गोपाल मुझे माफ़ कर दो, मैं भी एक बार अमर और हेमंत से चुदाई करवा चुकी हूं। मगर ये सब मुझसे अनजाने में हो गया, प्लीज़ मुझे माफ़ कार दो। एक बार उन दोनों से चुदाई करवाने के बाद मैंने दुबारा कभी चुदाई नहीं करवाई।”
“किरण ये सुन कर मुझे गुस्सा भी आया और मैं सोच में डूब गया कि मेरी नाक के नीचे ये क्या-क्या हो रहा था और मुझे कुछ पता ही नहीं?”
“गुस्सा तो मुझे बहुत आया मगर फिर मैंने सोचा कि नाती भी तो अपनी सहेलियों को मुझसे चुदवाती है – और मैं भी मजे ले-ले कर एक-दूसरी के सामने ही उनकी चुदाई करता हूं। अगर नाती भी पुष्पा और सीमा के पति से एक बार चुदाई करवा ही ली तो क्या गलत हो गया।”
“मैंने नाती से यही बात बोल दी। मैंने कहा, “नाती देखो जो गया सो हो गया। मैं भी तो आखिर तुम्हारी सहेलियों को चोदता ही हूं, वो भी एक-दूसरी के सामने। और तुम बता रही हो ये सब भी एक-दूसरे के सामने चुदाई करते हैं। अगर तुमने भी ये करवा लिया तो कौन सा पहाड़ टूट गया। लेकिन नाती ये बताओ तुम्हारा ये कैसे शुरू हुआ और कब से?”
“नाती ने मेरा हाथ छोड़ा और मेरा लंड पकड़ कर बोली, “गोपाल सच में ही तुम नाराज़ नहीं हो?
“मैंने नाती का हाथ अपने लंड पर दबाते हुए कहा, “सच में नाती मैं नाराज़ नहीं हूं, लेकिन नाती मुझे सारी बात बताओ, कि तुम्हारा ये कैसे हो गया?”
“नाती बोली, “गोपाल ये तब की बात है जब तुम लुधियाना गए हुए थे। एक दिन मैं पुष्पा के घर गयी, देखा तो अमर घर पर ही था। हम आपस में खुले तो हुए ही थे। मैंने अमर से पूछा, “अमर आज घर पर कैसे? फिर मैंने हंसते हुए कहा, “मैं गलत टाइम पर तो नहीं आ गयी?”
“जवाब पुष्पा ने दिया, “नहीं नाती तुम उल्टा आज तो तुम बिलकुल सही टाइम पर आयी हो, आराम, से बैठो टेंशन मत लो। ये बोल कर पुष्पा ने अमर की तरफ देख कर कुछ इशारा सा किया और हंस दी।”
“मैं हैरान हुई की इसमें हंसने की क्या बात थी और पुष्प ने अमर की तरफ को क्या इशारा किया?”
मैं अभी सोच ही रही थी की सीमा और उसका पति हेमंत भी आ गए। आते ही सीमा पुष्पा से बोली, “अरे वाह आज तो नाती भी यहीं है।”
“थोड़ी गपशप के बाद पुष्पा सीमा से बोली, “तो सीमा चलें?”
“सीमा बोली, “और पुष्पा, नाती? नाती नहीं आएगी?”
“मैं फिर हैरान – कहां जाना था इन लोगों को, और नाती नहीं आएगी – इसका क्या मतलब?”
“पुष्प बोली, “नाती भी आ जाएगी, हम लोग तो चलें।”
“चारो – अमर, पुष्पा, सीमा और हेमंत साथ वाले कमरे में चले गए।”
“दस मिनट के बाद ही मुझे अजीब-अजीब आवाजें सुनाई देने लगी। गौर से सुना तो समझ आया ये तो पुष्प और सीमा की चुदाई वाली सिसकियां हैं – आह और जोर से, रगड़ो आज। बड़े दिनों की बाद आये हो तुम लोग – ये पुष्पा की आवाज थी।”
उधर सीमा बोल रही थी, “मजा आ गया आज तो, थोड़े और मस्त रगड़े लगाओ, जोर-जोर से।”
“मैं समझ गयी कि दूसरे कमरे में चुदाई चल रही थी।”
“गोपाल, क्या बताऊं, चुदाई की ये सिसकारियां, ये मस्ती भरी आवाजें सुन कर मेरी फुद्दी भी गरम होने लगी। मैं उठी और साथ वाले कमरे की तरफ चल पड़ी ये देखने के लिया की ये हो क्या रहा है –
आखिर ये चारों कर क्या रहे हैं?”
“गैलेरी से हो कर जैसे ही कमरे के सामने पहुंची तो देखा कमरे का दरवाजा खुला था और अंदर जो चल रहा था वो देख कर मेरे होश उड़ गए।”
“सब नंगे थे – अमर और हेमंत एक-दूसरे की बीवी चोद रहे थे। पुष्पा और सीमा अगल बगल में बेड के किनारे पर लेटी हुईं थी। दोनों के चूतड़ों के नीचे मोटे तकिये लगे था और दोनों ने टांगें उठाई हुई। हेमंत अमर की बीवी पुष्पा को चोद रहा था और अमर हेमंत की बीवी सीमा को।”
“एक पल को तो गोपाल मुझे समझ ही नहीं आया ये क्या हो रहा है। अमर और हेमंत एक-दूसरे की बीवी को चोद रहे हैं, वो भी एक-दूसरे के सामने? और नीचे लेटी हुईं पुष्प और सीमा भी मस्त चुदाई करवा रहीं थी – चूतड़ घुमा-घुमा कर।”
“जैसे ही पुष्पा की नज़र मुझ पर पड़ी, पुष्पा हंसते हुए बोली, “आओ नाती, तुम भी देखो क्या हो रहा है यहां और मजे लो। देखो हम क्या कर रहे हैं।”
“गोपाल मैं वहीं जम कर खड़ी हो गया। मुझे समझ ही नहीं आया कि ये लोग कर क्या रहे थे? एक-दूसरे की बीवी चोद रहे थे वो भी एक-दूसरे के सामने?
“अपनी आंखों के आगे इस तरह की चुदाई होते देख मेरी फुद्दी में आग लगने लगी। मेरा मन किया के घर आऊं और तुम्हारा लंड फुद्दी में ले लूं। मगर उन दिनों तुम लुधियाना गए हुए थे?”
“मैं वहीं खड़ी हो कर चुदाई देखने लगी। जल्दी ही पुष्पा और सीमा जोर से चीखी, “आह मजा आ गया, निकल गया मेरी फुद्दी का पानी।”
“आधे मिनट के बाद अमर और हेमंत ने दोनों की फुद्दी यों में से लंड निकाले और जा कर सोफे पर बैठ गए।”
“दोनों के लंड खड़े के खड़े थे।”
“पुष्पा और सीमा लेटी हुई ही थी। सीमा मुझसे बोली, “नाती आ जाओ, तुम भी लेट जाओ हमारे पास ही।”
“ये बोल का सीमा हंस दी – पुष्पा भी हंस दी और बोली, “सीमा ठीक बोल रही है नाती आ जाओ, मजे लो अमर और हेमंत के लंडों के, मस्त छोड़ते हैं दोनों।”
“और गोपाल, मैं अपने जगह से हिल ही नहीं पा रही थी। मेरे पैर तो जैसे जमीन पर जम ही गए थे। मैं ये भी देखना छाती थी कि चुदाई तो हो चुकी, लेकिन पुष्पा और सीमा अभी भी क्यों लेटी हुई थी?”
“आठ दस मिनट ऐसे ही गुज़र गए। तभी पुष्पा बोली, “आ जाओ अमर हमारी फुद्दीयां फिर से तैयार हैं।”
“अमर और हेमंत उठे और बेड की तरफ चल पड़े। इस बार अमर अपनी बीवी पुष्पा के पास गया और हेमंत अपनी बीवी सीमा के पास। चुदाई का ये खेल फिर शुरू हो गया।”
“पुष्पा और सीमा चूतड़ हिला-हिला कर चुदाई करवा रही थी। अमर और हेमंत भी उन्हें मस्त चोद रहे थे।”
“सीमा चुदाई करवाते-करवाते मुझसे बोली, “अरे नाती, तू क्या सोच रही हो, आ और तू भी मजे ले हेमंत और अमर के लंडों के, जैसे हम मजे लेती हैं तेरे घरवाले गोपाल के लंड के। मस्त चोदते हैं दोनों भी, मजा आ जाएगा।”
“मैं हैरान थी की किस आसानी के साथ सीमा ने अपनी और तुम्हारी चुदाई की बात हेमंत के सामने कर ली थी।”
“हेमंत और अमर सीमा की बात पर हंस पड़े।”
“लेकिन गोपाल इस तरह अपने सामने दो दो लड़कियां चुदते देख मेरी फुद्दी में से पानी टपक टपक कर मेरी टांगों में बहने लगा था। मुझे लग रहा था हेमंत और अमर के लंड पुष्पा और सीमा की फुद्दी में नहीं मेरी फुद्दी में डले हुए हैं, और उनके लंड पुष्पा और सीमा की फुद्दीयों में अंदर-बाहर नहीं हो रहे मेरी फुद्दी में अंदर-बाहर हो रहे हैं।”
“गोपाल, क्या बताऊं मैं ना चाहते हुये भी बेड की तरफ चल पड़ी।”
“अमर ने मुझे देखा तो अपनी बीवी पुष्पा की फुद्दी में से लंड निकाला और मेरे पास आ आया और बिना कुछ बोले मेरे कपड़े उतारने लगा। मैं कुछ कर हे नहीं पा रही थी – ना मैं बोल ही रही थी, और ना ही अपनी जगह से हिल ही पा रही थी।”
“अमर ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मुझे पुष्पा के पास ही लिटा दिया और नीचे बैठ कर मेरी फुद्दी चूसने चाटने लगा।”
“कुछ देर के बाद अमर उठा और हेमंत से बोला, “हेमंत तुम भी टेस्ट करो नाती की फुद्दी, मस्त नमकीन पानी से भरी पडी है – लंड लेने के लिए एक-दम तैयार है।”
“जैसे ही हेमंत ने सीमा की फुद्दी में से लंड निकाला और मेरी तरफ आया मेरे फुद्दी चूसने, अमर ने जा कर सीमा के फुद्दी मैं लंड डाल कर सीमा को चोदने लगा।”
“हेमंत ने कुछ देर मेरी फुद्दी चूसी और खड़ा हो कर मेरी टांगें फैला दी, फुद्दी में लंड थोड़ा ऊपर नीचे किया और एक झटके के साथ लंड मेरी फुद्दी में डाल दिया और मुझे चोदने लगा।”
“मस्त लम्बा लंड था हेमंत का। पूरा फुद्दी के आख़िरी हिस्से तक जा रहा था।”
“बस गोपाल हेमंत के बाद मुझे अमर ने भी चोद दिया।”
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