पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-9
हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-
दिव्या के एक चुदाई और हो गयी थी – इस बार पीछे से हुई। दिव्या को तो मजा आ गया था, मगर मेरा लंड अभी भी खड़ा ही था। दिव्या का मन तो एक बार और चुदाई करवाने का था, मगर मम्मी की आने का टाइम हो चुका था।
मैंने घड़ी के तरफ देखा पांच बजने वाले थे। मैंने दिव्या से कहा, “दिव्या पांच बजे को है। अब तो चुदाई नहीं हो पाएगी। अगर तुम कहो तो रात को एक बार और चोद दूंगा।”
दिव्या बोली, “मगर रात को तो तुमने मम्मी को चोदना है।”
मैंने कहा, “कोइ बात नहीं, वो मुझ पर छोड़ दो। एक बार लंड का गर्म-गर्म शहद फुद्दी में डलवा कर तो देखो। उसका भी बड़ा मजा आता है। तुम बस हां बोलो। एक बार तुम्हे चोद कर उसके बाद मम्मी को चोद दूंगा। मम्मी को मैं समझा लूंगा।”
दिव्या बोली, “ठीक है धीरज, जैसा तुम ठीक समझो। रात को एक बार और चोद लेना। तब तक मैं आराम भी कर लूंगी। इतनी चुदाई से थक सी भी गयी हूं, नींद भी आ रही है।”
ये कह कर दिव्या उठी और अपनी मैक्सी पहन ली। मैं भी उठा बाथरूम गया और लंड की धुलाई करके वापस आया और कपड़े पहन लिए। दिव्या बोली, “धीरज मैं यहीं सो जाती हूं, बड़ी सुस्ती सी आ रही है।”
इतनी चुदाई के बाद सुस्ती और नींद आना कोइ बड़ी बात नहीं।
मैंने ने दिव्या से पूछा, “दिव्या, क्या फुद्दी में दर्द भी हो रहा है?”
दिव्या बोली, “हां धीरज दर्द भी है और हल्की जलन सी हो तो रही है।”
मैंने कहा, “दिव्या दर्द की कोइ गोली खा लो, आराम मिल जाएगा। दर्द की गोली पड़ी है मेरे पास।”
दिव्या बोली, “ठीक है धीरज।”
मैंने अलमारी में से एस्प्रीन की दो गोलियां दिव्या को दी और साथ पानी का गिलास लेकर आ गया। दिव्या ने दोनों गोलियां खा लीं और कम्बल ओढ़ कर लेट गयी। तब तक सवा पांच हो चुके थे।
मैंने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और नीचे जा कर बाहर के दरवाजे की कुंडी हटाई और वापस ऊपर आ कर डाइनिंग टेबल पर बैठ कर मम्मी का इंतजार करने लगा। पूरे साढ़े पांच बजे मामी आ गयी।
मम्मी के हाथ में कपड़ों का बंडल था। आते ही मम्मी बोली, “धीरज दिव्या कहा है, नीचे अपने कमरे में तो नहीं है।”
मैंने कहा, “हां मम्मी दिव्या उधर मेरे कमरे में सो रही है।”
मम्मी बोली, “तुम्हारे कमरे में सो रही है? और तुम्हारे कमरे में क्यों? क्या हुआ है, तबीयत तो ठीक है दिव्या की?”
मैं कुछ देर चुप रहा और फिर मम्मी से बोला, “मम्मी एक मिनट बैठो यहां, आपसे कुछ बात करनी है।”
मम्मी बैठी नहीं और खड़ी ही रही।
मैंने कहा, “मम्मी मेरी और दिव्या की चुदाई हो गयी है। चुदाई करवा ली दिव्या ने मुझसे।”
मम्मी हैरानी से बोली, “अरे? चुदाई हो गयी? कब? कैसे?”
और ये कह कर मम्मी ने कपड़ों का बंडल मेज पर रखा और मेरे साथ की कुर्सी पर बैठ कर बोली, “कैसे हो गयी चुदाई धीरज – ये अचानक? और दिव्या की फुद्दी की सील? दिव्या तो अभी तक चुदी ही नहीं थी। और तुम्हारा ये मोटा लंड, कोइ परेशानी तो नहीं हो गयी दिव्या को? दिव्या ठीक तो है?”
मुझे लगा मम्मी कुछ परेशान सी है। मैंने मम्मी से कहा, “मम्मी सब ठीक है, बस थोड़ी थक गयी है दिव्या।”
मम्मी बोली, “थक गयी है? कितना चोदा तुमने उसे। और तुम्हारा मोटा लंड? और तुम्हारे लंड का तो पानी भी जल्दी नहीं निकलता। फुद्दी में कुछ गड़बड़ तो नहीं हो गयी धीरज।”
जब मम्मी ने पूछा , “थक गयी है? कितना चोद दिया धीरज तुमने दिव्या को? और तुम्हारा मोटा लंड? और तुम्हारे लंड का तो पानी भी जल्दी नही निकलता।”
मैंने कहा, “मम्मी परेशान मत हो, सब ठीक है। ढाई तीन घंटे चुदाई करवाई दिव्या ने दिव्या को तो तो चुदाई का मजा ही बहुत आ रहा था, छोड़ ही नहीं रही थी मुझे। पांच बार पानी निकल गया दिव्या की फुद्दी का। मगर मम्मी मेरे लंड से पानी इतनी चुदाई के बाद भी नहीं निकला। दिव्या लंड लंड का गर्म-गर्म पानी अपनी फुद्दी में डलवाने के चक्कर में एक बार और चुदवाना चाहती थी, मगर पांच बज गए थे, आपके आने का टाइम हो रहा था इसलिए एक और चुदाई नहीं हो पायी।”
मामी ने अपना हाथ अपने होठों पर रखा और बोली, “हे भगवान, तीन घंटे? वो भी कुंवारी सील बंद लड़की की पहली-पहली चुदाई? और पांच बार मजा गया दिव्या को और तेरा अभी भी नहीं निकला, देखूं तबियत तो ठीक है मेरी बेटी की?”
ये बोल कर मम्मी उठने लगी तो मैंने ने मम्मी को हाथ पकड़ कर बिठा दिया और उसके मम्मों को दबाता हुआ बोला, “मम्मी दिव्या की फुद्दी को कुछ नहीं हुआ है। जब पहली बार जब लंड अंदर गया तब दिव्या को थोड़ा सा दर्द हुआ और फुद्दी में थोड़ी जलन हुई और थोड़ा खून भी निकला था। मगर उसके बाद सब ठीक रहा। दिव्या ने चुदाई का खूब मजा लिया। खुद ही सोचो मम्मी, तीन घंटे की चुदाई के बाद भी दिव्या एक चुदाई के लिए तैयार थी। अगर कोइ प्रॉब्लम होती तो क्या ऐसा होता?”
मैंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “और मम्मी मजे के मारे दिव्या तो पागल हुई पड़ी थी, पता नहीं मजे में क्या-क्या बोल रही थी, “आह धीरज चोदते रहो, जब तक चाहो चोदो, आअह मम्मी आआह मजा आ गया ये तो धीरज फिर आने वाला है मुझे, आह धीरज आह मम्मी। आह धीरज और जोर से चोदो मेरे भाई, फाड़ दो आज मेरी फुद्दी अपने मोटे लंड से चोद चोद कर।”
“मम्मी, दिव्या ने मुझे कस कर पकड़ रखा था। और दो-दो तीन-तीन बार फुद्दी के मजे आने की बाद भी मुझे नहीं छोड़ रही थी। आप खुद ही सोचो दिव्या को अगर कोइ दिक्कत होती तो क्या वो इस तरह से चुदाई करवाती?”
मम्मी बोली, “पर धीरज ये चुदाई का प्रोग्राम एक-दम बना कैसे? तुम्हारा और दिव्या का पहले से ही कोइ चक्कर था क्या?”
मैं मम्मी की उलझन समझ गया। मैंने मम्मी से कहा, “नहीं मम्मी कोइ चक्कर-वक्कर नहीं था। दिव्या ने हालत ही ऐसे बना दिए की मुझे दिव्या को चोदना ही पड़ गया।”
मम्मी बोली, “चोदना ही पड़ गया? क्या मतलब, और दिव्या ने हालात ही ऐसे बना दिए – इसका क्या मतलब है धीरज? क्या दिव्या ने तुम्हारा लंड पकड़ कर अपनी फुद्दी में डाल लिया? ये क्या कह रहे हो, साफ साफ़ बताओ मुझे हुआ क्या, क्यों चोदना पड़ गया?”
मैं मम्मी की मम्मों को छोड़ मम्मी की फुद्दी पर हाथ फेरते हुए बोला, “सब बताता हूं मम्मी, पहले तो आप परेशान होना बंद करिये। देखो मम्मी मेरा लंड दिव्या फुद्दी में भी चला गया। दिव्या की मस्त भी चुदाई हो गयी। पांच-पांच बार मजा आ गया उसे – फुद्दी की सील टूट गयी। अब किस बात की परेशानी है?”
मम्मी को कुछ तसल्ली हुई। मम्मी ने मेरा हाथ अपनी फुद्दी पर दबाते हुए कहा, “धीरज, मुझे अपनी और दिव्या की चुदाई का पूरा हाल सुनाओ। मुझे पता तो चले, क्यों चुदाई करनी पड़ गई तुम्हें दिव्या की?”
और फिर मैंने मम्मी को शुरू से सारी बातें बता दी – दिव्या का मेरी और मम्मी की चुदाई का देखना और फिर अगले दिन सुबह दिव्या का मेरा लंड चूसना और डाइनिंग टेबल पर लेट कर मुझसे अपनी फुद्दी चुसवाना और फिर मुझे चुदाई के लिए कहना – मगर समय कम होने के कारण उस वक़्त चुदाई ना हो पाना – मैंने मम्मी को सब कुछ बता दिया।
फिर मैंने मम्मी से फिर कहा, “और मम्मी आज जब अपने कहा कि आप टेलर के यहां जा रही हैं और लेट आएंगी तो दिव्या ने तो मुझे साफ़ ही कह दिया कि आप हमें चुदाई का मौक़ा दे कर गयी हैं। मम्मी, दिव्या ने तो यहां तक बोल दिया कि जब आप दशहरे की छुट्टियों में तीर्थ पर जाएंगी तो आप दिल्ली से माधवी को भी यहां बुला लेंगी, ताकि उसकी भी चुदाई हो जाये और हम दोनों को चुदाई का मजा मिल जाए।”
इसके बाद मैंने मम्मी को दिव्या के साथ हुई चुदाई का जैसे पूरा आंखों देखा हाल सुना दिया। दिव्या का पहला मजा फिर दूसरा मजा और फिर तीसरी बार मजा आना और उसका लंड खड़ा का खड़ा रहना।
मैंने कहा, “मम्मी पहले तो तो मुझे भी लग रहा था कि मेरे मोटे लंड से दिव्या को कोइ तकलीफ ना हो, इसलिए मैं लंड दिव्या की फुद्दी में बड़े ही आराम-आराम से और धीरे-धीरे से डाल रहा था।”
“मम्मी जब एक बार जब लंड दिव्या की फुद्दी में डालते-डालते थोड़ा रुक कर मैंने दिव्या से पूछा, “दिव्या कोई प्रॉब्लम तो नहीं हो रही? मम्मी मेरी बात पर तो दिव्या जैसे गुस्से से फट ही पड़ी, और बोली, “भोसड़ी के धीरज, साले मादरचोद तू अभी भी यही सोच रहा है कि तू अपनी छोटी बहन को चोदने जा रहा है। अबे चूतिये, यहां मैं तेरा पूरा लंड अपनी फुद्दी में अंदर तक लेने के लिए मैं मरी जा रही हूं और तुझे मेरी प्रॉब्लम की पड़ी है? ऐसे चोद धीरज जैसे पैसे दे कर एक रंडी को चोदने के लिए लाया है।”
“अब बताओ मम्मी दिव्या का इतना कुछ कहने के बाद मैं क्या करता? मेरी और आपकी चुदाई देखनी के बाद तो दिव्या मुझसे चुदाई करवाने के लिए पागल हुई पड़ी थी। बस उसके बाद तो मम्मी मेरे लिए कोई रास्ता ही नहीं बचा। दिव्या ने भी पूरे मजे लिए चुदाई के। दिव्या चूतड़ घुमा-घुमा कर चुदाई करवा रही थी, जैसे आप घुमाती हो, चुदाई के वक़्त।”
मैंने मम्मी को ये भी बता दिया कि, “हम लोग चुदाई में इतने मस्त हो गए थे कि हमारे मुंह से कुछ भी कुछ भी निकल रहा था।”
मम्मी ने मेरा हाथ सलवार की ऊपर से हटा दिया और सलवार का नाड़ा खोल कर अपना हाथ सलवार के अंदर डाल लिया और पूछा, “क्या बोल रहे थे धीरज?”
मैं समझ गया कि दिव्या कि चुदाई की बातें सुन-सुन कर मम्मी की फुद्दी गरम होने लगी थी।
मैं बोला, “मम्मी मैं कुछ ऐसी बातें बोल रहा था “ले दिव्या मेरी जान, क्या मस्त फुद्दी है दिव्या। बिलकुल टाइट। लंड जकड़ा पड़ा है फुद्दी के अंदर। आह दिव्या रोज़ चोदूंगा तुझे ऐसे ही बाहों में लेकर दिव्या मेरी रानी, मेरी जान, दिन में भी चुदाई करूंगा तेरी रात में भी चुदाई करूंगा। आह दिव्या तेरी फुद्दी आअह दिव्या तेरी गांड में भी डालूंगा। आह दिव्या क्या चूतड़ घुमाती है। कैसे हट-हट कर फुद्दी मरवाती है मेरी जान दिव्या आह।”
लग रहा था मम्मी अपनी फुद्दी में अपनी उंगली ऊपर-नीचे कर रही थी। मैंने आगे कहा, “और मम्मी मजे के मारे दिव्या चूतड़ घुमाते-घुमाते कुछ भी बोल रही थी – “आह धीरज चोदते रहो, जब तक चाहो चोदो, आअह मम्मी आआह मजा आ गया ये तो। धीरज फिर आने वाला है मुझे, आह धीरज आह मम्मी। आह धीरज और जोर से चोदो मेरे भाई, फाड़ दो आज मेरी फुद्दी अपने मोटे लंड से चोद-चोद कर। धीरज अब मत रुकना प्लीज़, आज पूरी रात चुदवाऊंगी तेरे से। तेरा लंड अपने चूतड़ों में भी लूंगी। चूसूंगी तेरा लंड। आह धीरज इतना मजा आता है चुदाई का हे भगवान स्वर्ग सा मजा आता है चुदाई में।”
मेरी बातें सुन-सुन कर मम्मी के मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी। मगर मम्मी गहरी गहरी सांसे लेने लगी थी। मम्मी धीरे से बोली, “फिर? तुम्हारा लंड खड़ा था फिर क्या हुआ धीरज?”
मैंने कहा , “मम्मी मैंने तब चुदाई बंद कर दी, और मैं दिव्या के पास ही लेट गया। दिव्या ने मेरा लंड पकड़ लिया और हल्का-हल्का दबाने लगी। मैंने दिव्या से पूछा, “दिव्या क्या और चुदाई करवानी है? मम्मी फिर दिव्या बोली, “धीरज मुझे पेशाब लग रहा है। पहले पेशाब कर के आऊं फिर बताती हूं।”
दिव्या बोली, “धीरज मुझे अपनी फुद्दी कुछ गीली-गीली सी लग रही है।” दिव्या ने फुद्दी पर हाथ लगाया तो उसे कुछ लाल-लाल दिखाई दिया। मम्मी दिव्या ने मुझे कहा, “धीरज लगता है खून निकला है। फिर दिव्या ने तकिये की तरफ देखा जो तकिया दिव्या के चूतड़ों के नीचे था, उस पर भी खून लगा हुआ था। दिव्या ने तकिये का कवर उतार लिया बाथरूम में चली गयी।”
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