हेल्लो दोस्तों, मेरा नाम ऋतू है, और मैं अभी 22 साल की हूं। रंग गोरा, बदन छरहरा, फिगर 36-30-36 है। मेरी जवानी चरम पर थी। मेरी सहेलियां मुझे सेक्सी बातें करके मेरी चुदास बढ़ा देती थी। लेकिन मैं किसी आवारा लड़को के चक्कर में नहीं पड़ना चाहती थी। इसलिए मैं अपनी चूत सहला कर अपना काम चला लेती थी।
मेरी मम्मी बहुत ही सुंदर है, लेकिन तीखी मिर्ची की तरह। वह एक टीचर है। बेचारे पापा भी उनके सामने ज्यादा नहीं बोल पाते। जब मम्मी का मूड बनता तभी पापा को अपनी चूत देती थी, नहीं तो पापा को मैंने कई बार लंड सहलाते देखा है।
मैं उनकी लंड देख के हैरान रह गयी थी। मेरी सहेलिया जो लंड के बारे में बताती है, उससे कही अधिक बड़ा और मोटा लंड था इनका। मैं भी कई बार बहक के पापा के बारे में सोच के चूत रगड़ लेती थी, लेकिन बाद में थोड़ा गिल्ट फील होता था। ना जाने पापा मेरे बारे में क्या सोचते थे और मैं उनके बारे में इतनी गंदी ख्याल रखती थी।
पापा शहर से दूर दूसरे शहर में जॉब करते है और साल में 1 बार आते है। मम्मी कों उनके आने-जाने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, लेकिन मुझे पड़ता था। मैं अपना ज्यादातर समय पापा के साथ मस्ती में बिताती थी। पापा काफी समय बाद आये हुए थे।
सुबह का समय था। मैं अपने कमरे से निकल के आयी। तब मम्मी स्कूल जा चुकी थी और पापा अकेले टीवी देख रहे थे। मैं भी उनसे सट के बैठ गयी और अपना सर उनके कंधे पर टिका दी।
पापा बोले, “क्या हुआ ऋतू बेटी? तुम उदास क्यूं हो?”
मैं, “आई लव यू पापा। मुझे आपके साथ बहुत अच्छा लगता है (मैंने हमेशा पापा को हीरो की नजर में देखा है। मैं अपना बीएफ पापा जैसा ही चाहती हूं)।”
मुझे उदास देख कर पापा ने मुझे अपने बाहों में भर लिये और बोले, “मैं भी अपनी बेटी को बहुत प्यार करता हूं। क्या चाहिए मेरी बेटी को?”
मैं, “बस आप और कुछ नहीं।”
ये सुन कर पापा की लूंगी में हलचल हुई। पापा टीवी की आवाज बढ़ा दिये और बोले कि, “चलो आज साथ में प्यार करते है।” मैं शर्माई तो पापा मुझे कस के बाहों में भर लिए।
मैं पापा के बगल में लेटी थी, मेरी साँसें तेज थी, और मेरा टॉप हल्का सा ऊपर खिसक गया था, जिससे मेरी कमर का कुछ हिस्सा दिख रहा था। “ऋतू, ठंड लग रही है?,” पापा ने धीरे से पूछा। उनकी आवाज़ में एक गर्माहट थी जो मेरे रोंगटे खड़े कर रही थी। “हाँ, पापा… थोड़ी सी,” मैंने धीरे से जवाब दिया। मेरी आवाज़ में हल्की सी कांप थी।
उन्होंने अपनी चादर मेरे ऊपर डाल दी और मेरे कंधे पर हाथ रख कर मुझे अपनी तरफ खींच लिया। उनकी उंगलियाँ मेरे नंगे कंधे पर गर्म थी, और मेरे दिल की धड़कनें तेज हो गईं। “पापा, आप हमेशा मेरा इतना ख्याल रखते हो,” मैंने धीरे से कहा, उनकी आँखों में देखते हुए।
“तू मेरे लिए बहुत कीमती है, ऋतू,” उन्होंने गहरी आवाज़ में कहा, और उनकी नज़रें मेरे चेहरे से मेरे टॉप की नेकलाइन तक खिसक गई।
उनका हाथ मेरे कंधे से मेरी कमर की तरफ बढ़ा, और मेरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया। “पापा… ये… ठीक है ना?” मैंने हिचकिचाते हुए पूछा, मेरा मन डर और उत्तेजना के बीच झूल रहा था। “ऋतू, तू चिंता मत कर। बस अपने दिल की सुन,” उन्होंने मेरे कान के पास फुसफुसाया, उनकी गर्म साँसें मेरे कानों को छू रही थी।
मैंने कुछ नहीं कहा, बस उनकी बाहों में सट गई। उन्होंने मेरे गाल पर एक नरम, गीला चुम्बन दिया, और मेरा शरीर कांप उठा। “आह…” मेरे मुँह से हल्की सी सिसकारी निकली। फिर उन्होंने मेरे होंठों पर अपने होंठ रखे। उनका चुम्बन गहरा और भूखा था, जैसे वो मुझे पूरा महसूस करना चाहते हों।
मैंने भी उनके होंठों का जवाब दिया, मेरी जीभ उनकी जीभ से लिपट गई। “उह… पापा…” मैंने सिसकते हुए कहा, मेरी साँसें तेज थी। हम एक-दूसरे को बेतहाशा चूम रहे थे, और मेरे शरीर में गर्मी बढ़ रही थी।
पापा ने मेरे टॉप को धीरे से ऊपर सरकाया।
मेरी गोरी, चिकनी कमर उनके सामने थी। उनकी उंगलियाँ मेरी त्वचा पर फिसली, और मेरे मुँह से सिसकारी निकली, “आह… पापा…” उन्होंने मेरी कमर पर गीले चुम्बन दिए, उनकी जीभ मेरी त्वचा पर हल्के से चाट रही थी। “ऋतू, तेरा शरीर इतना नरम है…” उन्होंने फुसफुसाया। मैंने अपने होंठ काटे, मेरी साँसें तेज हो रही थी। फिर उन्होंने मेरा टॉप ऊपर खींचा और मेरी काली लेस वाली ब्रा दिखने लगी।
मेरे 34C के बूब्स टाइट ब्रा में उभरे हुए थे, और मेरे निपल्स सख्त होकर ब्रा के ऊपर से दिख रहे थे। पापा ने मेरी ब्रा के हुक खोले, और मेरे बूब्स आजाद हो गए। “उफ… ऋतू, ये कितने खूबसूरत हैं…” उन्होंने मेरे निपल्स को अपनी उंगलियों से हल्के से दबाया। “आह… पापा… धीरे…” मैंने सिसकते हुए कहा। उनकी जीभ मेरे एक निपल पर फिसली, और वो उसे चूसने लगे। “उह… आह…” मेरी सिसकारियाँ अब तेज हो गई थी। मैं उनके बालों में उंगलियाँ फिरा रही थी, और मेरा शरीर आनंद से कांप रहा था।
मैंने हिम्मत करके पापा की शर्ट के बटन खोले। उनकी चौड़ी, मज़बूत छाती पर हल्के काले बाल थे, जो उन्हें और मर्दाना बना रहे थे। मैंने उनके सीने पर चुम्बन दिए, मेरे होंठ उनकी गर्म त्वचा पर फिसल रहे थे। उनकी साँसें तेज हो गई थी, और उनकी लूंगी और अंडरवियर नीचे सरकते ही उनका 7 इंच का सख्त लंड मेरे सामने था।
वो मोटा और गर्म था, और उसकी नसें उभरी हुई थी। “पापा… ये तो… बहुत बड़ा है…” मैंने शर्माते हुए कहा, मेरी आँखें उसकी सख्ती पर टिकी थी। “ऋतू, ये सिर्फ तुझसे प्यार करने के लिए है,” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा। मैंने उनके लंड को हल्के से सहलाया, मेरी उंगलियाँ उसकी गर्मी को महसूस कर रही थी। “आह… ऋतू…” उनकी सिसकारी निकली।
मैंने हिम्मत करके उनके लंड के टोपे पर एक गीला चुम्बन दिया, और उनकी साँसें और तेज हो गई। “उफ… मेरी जान…” उन्होंने मेरे बालों को सहलाते हुए कहा।
पापा ने मुझे सोफे पर लिटाया और मेरे ऊपर आ गए। उन्होंने मेरी लेगिंग्स को धीरे-धीरे नीचे खींचा, मेरी काली पैंटी उनके सामने थी। मेरी चूत पहले से गीली थी, और पैंटी पर हल्का सा गीलापन दिख रहा था।
“ऋतू, तू इतनी गीली हो चुकी है…” उन्होंने मेरी पैंटी को नीचे सरकाते हुए कहा। मेरी चिकनी, गुलाबी चूत उनके सामने थी। उन्होंने मेरी जांघों पर चुम्बन दिए, और मेरी टांगें कांपने लगीं। “आह… पापा…” मैं सिसक रही थी। उनकी जीभ मेरी चूत के होंठों पर फिसली, और वो मेरे क्लिट को हल्के से चूसने लगे।
“उह… पापा… और… आह…” मेरी सिसकारियाँ टीवी की आवाज के साथ में गूँज रही थी। उनकी उंगलियाँ मेरी चूत के अंदर-बाहर हो रही थी, और मेरी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। “पापा… मुझे और चाहिए…” मैंने सिसकते हुए कहा।
पापा ने अपने लंड को मेरी चूत पर हल्के से रगड़ा। उसकी गर्मी और सख्ती मेरे शरीर में बिजली दौड़ा रही थी। “पापा… धीरे… मुझे डर लग रहा है…” मैंने हल्की सी हिचकिचाहट के साथ कहा। “ऋतू, मैं तुझे तकलीफ नहीं दूँगा,” उन्होंने मेरे माथे पर चुम्बन देते हुए कहा। उन्होंने अपने लंड को मेरी चूत में धीरे से प्रवेश करवाया। पहली बार में हल्का सा दर्द हुआ, और मैंने अपनी आँखें बंद कर ली।
“आह… पापा…” मैंने सिसकारी भरी। “बस, मेरी जान, थोड़ा सा… अब मज़ा आएगा,” उन्होंने मुझे शांत करते हुए कहा। उन्होंने धीरे-धीरे गति बढ़ाई, और मेरा दर्द आनंद में बदल गया। “फच-फच-फच…” की आवाज़ रूम में गूँज रही थी। “उह… पापा… और तेज…” मैं चीख रही थी। उनका लंड मेरी चूत के अंदर गहराई तक जा रहा था, और मेरी चूत उसे टाइटली पकड़ रही थी। “ऋतू, तेरी चूत इतनी गर्म और टाइट है…” पापा ने सिसकते हुए कहा।
हमने कई पोजीशन आजमाए। पहले मैं उनके ऊपर चढ़ी। मैं उनके लंड पर ऊपर-नीचे हो रही थी, और मेरे बूब्स उनके सामने उछल रहे थे। “आह… पापा… कितना गहरा जा रहा है…” मैं चीख रही थी। “ऋतू, तू मुझे पागल कर देगी…” पापा ने मेरी गांड को सहलाते हुए कहा।
फिर उन्होंने मुझे डॉगी स्टाइल में लिया। मैंने अपनी गांड ऊपर उठाई, और पापा ने पीछे से मेरा कमर पकड़ कर अपना लंड मेरी चूत में डाला। “फच-फच-फच…” की आवाज़ तेज हो गई थी। “पापा, मेरी चूत को और जोर से चोदो…” मैं चीख रही थी।
पापा ने मेरी गांड पर हल्का सा थप्पड़ मारा, और मेरी सिसकारियाँ और तेज हो गईं, “आह… उह… पापा…” हमारा ये प्रेम खेल घंटों तक चला, और बस की हल्की हलचल इसे और रोमांचक बना रही थी।
आखिरकार, जब हम थक गए, पापा ने मुझे अपनी बाहों में लिया।
“ऋतू, तू मेरे लिए सब कुछ है,” उन्होंने मेरे माथे पर चुम्बन देते हुए कहा। मैंने उनकी छाती पर सिर रखा और कहा, “पापा, ये दिन मेरे लिए सबसे खास है।” हम एक-दूसरे से लिपट कर सो गए। शाम को दूर बेल बजने से जागे माँ आ चुकी थी। मैं अपने कपड़े लेकर रूम में भागी और पापा अपना लूंगी लपेट कर दरवाजा खोलने गये।
1 महीने बाद मेरी पीरियड नहीं आई तो मैं परेशान हो गयी। मैं प्रगनेंट हो गयी थी। पापा को बताई तो उन्होंने बच्चा गिराने को सलाह दी। लेकिन मैं ये नहीं चाहती थी। तब पापा बोले कि वो मुझे अपने साथ मम्मी से बात करके मेरी पढ़ाई के लिए दूसरे शहर ले जाएंगे।
वैसा ही पापा ने किया और हम दोनों (पापा और मैं) पढ़ाई के बहाने एक फ्लैट लेके दूसरे शहर रहने लगे। पापा यही काम करने लगे, पापा खुद 1 दिन के लिए घर जाते और मम्मी से कह देते की ऋतू की पढ़ाई है इसलिए वो अभी नहीं आई।
ठीक एक साल बाद मैंने बिना शादी के 1 बेटी को जन्म दिया। जब 6 महीने की मेरी बेटी हुई तब पापा ने घर में मम्मी से कहा की उन्हें एक 6 महीने की सड़क पर बच्ची मिली है और वो उसे अपने घर की सदस्य बनाना चाहते है। मम्मी भी इसके लिए तैयार हो गयी।
फिर मैं अपनी बेटी के साथ घर आ गयी। मम्मी को कोई शक भी नहीं हुआ।