मेरे परिवार को गए एक हफ्ता हो गया था। उनके पीछे मुझे घर में कोई दिक्कत नहीं थी, क्यूंकि लीला घर का सारा काम कर देती थी, और मेरे लिए खाना बना देती थी। दिक्कत थी, तो बस एक, और वो ये था कि मुझे चुदाई करने को नहीं मिल रही थी।
उस शाम ऑफिस से आने के बाद मेरा बहुत मूड बना हुआ था। ऑफिस में बैठे हुए मैंने 3-4 बढ़िया पोर्न वीडियो डाउनलोड कर ली थी। मेरा इरादा था कि रात को उन विडियोज को देख कर मुठ मारूंगा। लेकिन मुझे क्या पता था कि किस्मत ने रात को मेरे लिए चूत का इंतजाम कर रखा था।
उस दिन मैं शाम को घर आया। लीला मेरे आने के थोड़ी देर बाद आ गई और खाना बनाने लगी। मैं फ्रेश हुआ और हॉल में जाके बैठ गया। मैंने टीवी चलाया और उस पर मूवी देखने लगा।
जब मैं हॉल में बैठा था, तो अचानक से किचन से कुछ गिरने की आवाज़ आई। हमारा हॉल किचन के सामने ही है, और वहां से पूरा किचन दिखता है। मैंने वहीं से देखा कि लीला के हाथ से मसालों से भरी प्लेट गिर गई थी। वो अब नीचे बैठ कर सफाई कर रही थी।
लीला ने लेगिंग्स और कुर्ती पहनी हुई थी, और दुपट्टा वो घर पर लेती नहीं थी। जैसे कि मैंने बताया कि लीला का फिगर अच्छा है। तो जब वो नीचे बैठ कर सफाई कर रही थी, झुकने की वजह से उसकी क्लीवेज दिख रही थी। मेरी नज़र सीधे उसकी क्लीवेज पर गई।
अब मैं तो पहले से भूखा था। और मेरे सामने एक जवान लड़की के चूचे लहरा रहे थे। तो नज़र तो जानी ही थी। मुझे उसके चूचे देखने में मजा आने लगा। फिर जब वो दूसरी तरफ घूमी, तो उसकी टाइट लेगिंग्स में उसकी गांड मस्त लग रही थी।
उसका गठीला जिस्म देख कर मेरा लंड खड़ा होने लगा गया। मैं मन ही मन इमेजिन करने लगा कि अगर लीला किसी तरह चुदाई के लिए मान जाए, तो मजा आ जाएगा।
अब मेरी नज़र उसी पर थी। वो जब इधर-उधर जा रही थी, तो मैं कभी उसके चूचे, कभी गांड देख कर और गरम हो रहा था। लेकिन सवाल ये था कि उसको मैं चोदूंगा कैसे?
फिर खाना बन गया और वो खाना परोसने लगी। वैसे तो मैं लीला से बहुत कम बात करता था, क्योंकि उससे बात करने की ज़रूरत नहीं पड़ती थी। लेकिन आज मुझे उसकी चूत की ज़रूरत थी। तो जब वो खाना परोस रही थी, तो मैंने उससे बात शुरू की।
मैं: लीला तुमने खाना खा लिया?
लीला: भैया मैं तो सब के खाने के बाद ही खाती हूं।
मैं: अच्छा। चलो आज मेरे साथ खा लो।
लीला मेरी तरफ देखने लगी और बोली: जी भैया!
मैं: अरे आज घर पर कोई नहीं है, और मुझे अकेले खाना खाने की आदत नहीं है। इसलिए बोल रहा हूं कि मेरे साथ खा लो। इससे तुम्हारा खाना भी हो जाएगा और मुझे कंपनी भी मिल जाएगी।
लीला ने कुछ सेकंड सोचा, और फिर मेरे साथ खाना खाने बैठ गई। मैं खुश हो गया कि प्लान शुरू तो हुआ। फिर मैंने बात आगे बढ़ाते हुए बोला-
मैं: और बताओ लीला, तुम्हारे पिता जी ठीक है?
लीला: जी ठीक है।
जब मैं उससे बात कर रहा था, तो मेरी नज़र उसकी चूचियों पर ही थी, जो पास से और बड़ी और रसीली लग रही थी।
फिर मैंने कहा: वैसे तुम उनकी अकेली बेटी हो ना?
लीला: जी भैया।
मैं: फिर तो घर की जिम्मेदारी तुम्हारे ऊपर ही होगी। या तुम्हारी माता जी भी काम करती है?
लीला: नहीं मैं ही करती हूं।
मैं: तो तुम्हारी शादी के बाद क्या होगा?
लीला: पता नहीं, कुछ सोचा नहीं।
मैं: लड़का तो देख रखा होगा तुमने कोई?
लीला: वो तो घर वाले देखेंगे।
मैं: क्यों, तुम्हें कोई पसंद नहीं है? तुम्हारा भी तो कोई बॉयफ्रेंड होगा?
ये सुन कर लीला मुस्कुराने लगी और शर्मा गई। उसको शर्माते देख मैं समझ गया कि लौंडिया इतनी भोली नहीं है, और उसका बॉयफ्रेंड भी है। फिर मैं बोला-
मैं: तभी मैं सोचूं, कि तुम तो अच्छी खासी दिखती हो। तुम्हारे पीछे तो लड़के लगे रहते होंगे।
लीला: नहीं, इतने भी नहीं लगे रहते।
मैं: अच्छा तो अपने बॉयफ्रेंड के बारे में बताओ।
लीला: भैया क्या आप भी मेरी टांग खींच रहे हो?
मैं: अरे टांगें तो वो खींचता होगा तुम्हारी (मैंने थोड़ा फ्री होने के लिए कहा)।
लीला: भैया! ऐसा कुछ नहीं है। हम बस पसंद करते है एक-दूसरे को।
मैं: अरे पसंद तो करते ही होते। लेकिन आगे जाके तो टांगें ही खींचनी होती।
लीला शर्मा गई।
मैं: वैसे एक बात पूछूं?
लीला: जी?
मैं: कुछ किया के नहीं?
लीला: जी नहीं।
मैं: क्यों?
लीला: कहां करेंगे। सारा दिन काम पे होती हूं। उसके पास जगह भी तो नहीं है।
ये सुन कर मैं समझ गया कि लड़की तो चुदाई के लिए तैयार थी, लेकिन दिक्कत जगह की थी।
दोस्तों आज की कहानी यहीं तक। आगे की कहानी अगले पार्ट में। फीडबैक [email protected] पर दीजिए।