बर्फीली रात में मां बनी मेरी रखैल

हिमाचल की पहाड़ियों में हमारा छोटा सा कॉटेज था। मैं (विक्रम, 23 साल) और मेरी माँ (अनुराधा, 44 साल) सर्दियों की छुट्टियों में वहां आए थे। पापा आखिरी वक्त में बिजनेस मीटिंग में फंस गए, इसलिए सिर्फ हम दोनों थे।

दिन भर मौसम अच्छा था, लेकिन शाम होते-होते अचानक आसमान काला हो गया। तेज हवा चलने लगी और फिर बर्फ गिरनी शुरू हो गई। कुछ ही घंटों में चारों तरफ सफेद चादर बिछ गई। बाहर का तापमान -5 डिग्री तक गिर गया। रात 9 बजे अचानक बिजली भी चली गई।

घर में सिर्फ लकड़ी का फायरप्लेस जल रहा था। उसकी लाल-पीली रोशनी पूरे लिविंग रूम में फैली हुई थी। माँ ने कहा, “विक्रम, बाहर इतनी ठंड है कि हड्डियां जम जाएंगी। आ, फायरप्लेस के पास बैठते हैं।”

हम दोनों फायरप्लेस के सामने फर्श पर बैठ गए। माँ ने एक मोटा कंबल निकाला और हम दोनों उसी एक कंबल में लिपट गए। माँ मेरे बाएं तरफ थी। उनकी बॉडी की गर्मी मुझे सीधे महसूस हो रही थी।

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