पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-29
हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-
दारू की मस्ती में जीजा जी खड़े हो गए और जब जीजा जी ने हमारी तरफ देखते हुए कहा, “हां तो मादरचोद सुधा, क्या कहा था तुमने? आज तेरे जीजा जी से ऐसी चुदाई करवाएंगे दोनों बहने, कि यश को जन्नत का मजा आ जाए। भूलेंगे नहीं ये आज की चुदाई।”
“यही कहा था ना तुमने मेरी जान? चलो अब तैयार हो जाओ दोनों बहनें, तुम दोनों की गांड और फुद्दीयों में लौड़ा डालता हूं आज, वो भी एक दूसरी के सामने” – धीरज जीजा जी मुंह से ये सुन कर मुझे बड़ा मजा आया।”
“इसके बाद हम तीनों – जीजा जी, मैं और जीजी अंदर आ गए।
जीजी ने मुझसे कहा, “कौशल्या, यश पूरे नशे में है। नशे में आज यश का लंड जल्दी नहीं झड़ने वाला। अब बता कहा डलवाना है, फुद्दी में या गांड में? यश तो गांड चोदने के पूरे मूड में लग रहा है।”
“मैंने कहा, “जीजी मुझे तो लगता है आज जीजा जी गांड से ही शुरू करेंगे। फिर मैंने कहा, “जीजी मुझे तो गांड चुदवाने के आदत है, मैं तो हफ्ते में बार जरूर गांड में लंड लेती हूं, आप अपना सोचो।”
“जीजी बोली, “कौशल्या, तूने यश से गांड चुदवा कर यश को गांड चोदने का चस्का तो लगा ही दिया है। अब कब तक बचेगी मेरी ये गांड यश के लंड से? कभी ना कभी अगर गांड चुदाई होनी ही है – तो फिर आज ही क्यों नहीं?”
“जीजी की बात पर मैं हंसी और हम दोनों सोफे पर चूतड़ पीछे करके उल्टा लेट गए।”
“जीजी ने लेटे लेटे ही कहा, “कौशल्या एक एक मजा तो फुद्दी का ले ही लेते हैं, फिर डलवाएंगे गांड में।”
“फिर मैंने कहा, “वैसे तो जीजी मैं तो कहती हूं, आज जीजा जी पर ही छोड़ दो सब कुछ। जहां डालना चाहें डालने दो, कुछ मत बोलो – बस मजे लो। वैसे एक बात बोलूं जीजी, मर्दों को तो गांड चोदने में ज्यादा मजा आता है। लंड की रगड़ा-पच्ची मस्त होती है। एक बार जीजा जी को गांड चोदने का चस्का लग गया, तो हर हफ्ते पंद्रह दिनों के बाद आपकी गांड में लंड डाला करेंगे।”
“जीजी बोली, “चल कौशल्या ऐसे ही सही। मगर एक बात बोलूं, तू मुझसे उम्र में जरूर छोटी है। मगर चुदाई में तेरा तजुर्बा मुझे से कहीं ज्यादा है।”
“मैंने जीजी से कहा, “जीजी ये सब मनोहर की वजह से है, जिसने पहली ही रात शराब के नशे धुत्त हो कर चोद-चोद कर मेरी फुद्दी और गांड का भुर्ता बना दिया थे। अगली सुबह मेरी सास ने जब मेरी हालत देखी तो मनोहर को गुस्से में कमरे से ही बाहर निकाल दिया था। लेकिन जो भी था जीजी उस पहली रात की गांड चुदाई के बाद तो मुझे गांड चुदाई का ऐसा चस्का लगा कि जैसे ही मेरी गांड का छेद ठीक हुआ मैंने ही मनोहर से कह दिया, “आज पीछे डालो जी, बड़ा मन कर रहा है।”
“जीजी बोली, “कौशल्या अगर ऐसी बात है तो आज मैं भी गांड में ही डलवाती हूं।”
जीजी ने जीजा जी को शराब पिला कर नशे में तो कर ही कर दिया था। जीजा जी आये और आते ही मेरे गांड में लंड डाल दिया। जब गांड चुदवाते-चुदवाते मुझे फुद्दी का मजा आया और मैंने चूतड़ घुमाते हुए जोर के सिसकारी ली तो जीजा जी ने मेरी गांड से लंड निकाला और जीजी की गांड में डाल दिया। जीजी दर्द से चिहुंकी, मगर जीजा जी नहीं रुके और जीजी की कमर पकड़ कर जीजी की गांड रगड़ते रहे।”
“नशे में जीजा जी रगड़-रगड़ कर चोद रहे थे हम दोनों को। मस्त चुदाई की हम दोनों की जीजा जी ने। फुद्दी, गांड मुंह में सब जगह जीजा जी ने लंड डाल दिया उस दिन।”
“धीरज, उस रात दो बजे तक जीजा जी के साथ हमारी चुदाई चली। जीजा जी के लंड का पानी ही नहीं निकल रहा था। और आखिर में मैंने ही चूस कर जीजा जी के लंड का पानी अपने मुंह में निकाला।”
“जैसे ही जीजा जी के लंड का पानी मेरे मुंह में निकला तो जीजा जी दहाड़े, “ले मादरचोद सुधा निकल गया मेरे लंड का पानी, अब चाट जितना चाटना है। मतलब जीजा जी पूरे नशे में थे। जीजा जी को ये भी ध्यान नहीं था कि उनके लंड का पानी किसके मुंह में निकल रहा था।”
“लेकिन धीरज जो भी था, उस रात की चुदाई थी तो बड़ी मस्त। शराब के नशे में जीजा जी खूब गालियां दे रहे थे, खूब बोल रहे थे – चुदाई तो मस्त वो कर ही रहे थे।”
“अगली सुबह – इतवार को – हम तीनों टेबल पर बैठे चाय पी रहे थे। रात की चुदाई से माहौल हल्का हो चुका था।”
“जीजी ने जीजा जी से पूछा, “यश मजा आया रात को?”
जीजा जी मस्ती में बोले, “सुधा दो-दो जवान फुद्दीयां और दो-दो गांडें चोद कर किसको मजा नहीं आएगा सुधा – मस्त मजा आया?”
“धीरज की पहल से मेरी जीजी की और यश जीजा जी की इकट्ठी चुदाई हो गयी। अब जीजी आगे कुछ ऐसा कहने जा रही थी जो मैंने और शायद यश जीजा जी ने भी सोचा नहीं होगा।”
जीजी कुछ देर चुप रही फिर बोली, ‘यश तुमने दो दो फुद्दीयां और दो-दो गांडें चोद ली। कौशल्या दो-दो लंड अपनी फुद्दी और गांड में ले रही है – अब बचे मैं और मनोहर।”
मुझे जीजी की बात समझ नहीं आयी। जीजा जी ही बोले, “अब बचे तुम और मनोहर? क्या मतलब सुधा, मैं कुछ समझा नहीं।”
जीजी बोली, “यश मतलब साफ़ है। तुम दो दो फुद्दीयों को चोदने के मजे ले रहे हो। कौशल्या दो दो लंडों से चुदाई के मजे ले रही है, तो बताओ, मैं और मनोहर ही क्यों पीछे रहें?”
“जीजा जी कुछ चुप से हो गए। जीजी ने बात तो घुमा कर कही थी, मगर मतलब तो साफ़ ही था। मुझे समझ आ चुका था कि जीजी के कहने का क्या मतलब है। और धीरज अगर मुझे समझ आ गया था तो जीजा जी को भी समझा ही गया होगा। मगर जीजा जी बोले कुछ नहीं।”
“जीजी ही फिर बोली, “यश मेरे पास एक आईडिया है, एक नई तरह से सेक्स के मजे लेने का। अगर तुम्हें पसंद आये तो हां बोलना ना पसंद आये तो मना कर देना, बात यहीं खत्म हो जाएगी। कहो तो बोलूं?”
“जीजा जी बोले, “बोलो सुधा, तुम्हारा आडिया भला किसे पसंद नहीं आएगा?”
“जीजी बोली, “यश तुम्हें याद यही कल जब तुम्हारे और कौशल्या की चुदाई के बाद मैंने तुमसे पुछा था कि, क्या सोच कर तुमने कौशल्या को चोद दिया – यही कि साली होती है आधी घरवाली? तुम चुप रहे थे और अपनी बात का जवाब भी मैंने ही दिया था।”
“मैं और जीजा जी जीजी की तरफ देख रहे थे।”
“जीजी बोली, “यश मैंने कहा था यश तुम मुझे चोद रहे थे, कौशल्या मनोहर से मस्त फुद्दी और गांड चुदवा रही थी, फिर भी तुमने आपस में चुदाई कर ली? कभी सोचा है ऐसा क्यों हुआ? यश ऐसा इसलिए हुआ क्यों कि हर इंसान कुछ नया चाहता है। कुछ रोमांचक करना चाहता है। कौशल्या की मस्त चुदाई हो रही थी, मगर उसे कुछ नया चाहिए थी। इसी तरह, तुम भी मेरी मस्त चुदाई कर रहे थे, मगर तुम्हें भी कुछ नया चाहिए था। बस इसी बात पर तुम्हारी और कौशल्या की चुदाई हो गई। और यश तुमने इस पर कहा था सुधा असल में हुआ तो यही है।”
“मैं और जीजा जी चुप थे और जीजी की बातें सुन रहे थे।”
“और इसके बाद जीजी कुछ देर चुप बैठी रही और फिर बोली, “यश क्यों ना हम कुछ ना हम सब भी कुछ नया करना शुरू करें, कुछ रोमांचक।”
“जीजा जी बोले, “हम सब? कुछ नया, कुछ रोमांचक? क्या मतलब सुधा, साफ़-साफ़ बोलो?”
“जीजी आगे की तरफ थोड़ी झुकी और बोली, “यश क्यों ना हम ग्रुप सेक्स करें – तुम मैं, कौशल्या और मनोहर। तुम और मनोहर एक ही कमरे में एक ही बिस्तर पर एक-दूसरे के सामने अदल-बदल कर मेरी और कौशल्या – हम दोनों की चुदाई करो, हमारी फुद्दी और गांड में लंड डालो। चारों के मजे हो जायेंगे और घर की बात भी घर में ही रहेगी।”
“जीजी की बात सुन कर चुप्पी छा गयी, एक तरह का पूरा सन्नाटा – इंग्लिश में जिसको कहते हैं “पिन ड्राप साइलेन्स”
“जीजा जी बोली, “मगर सुधा एक-दूसरे के सामने? तुम्हारी और मनोहर की चुदाई? ये कैसे हो सकता है?”
“जीजी बोली, “क्यों नहीं हो सकता यश? अगर तुम अपनी साली, मनोहर की बीवी को चोद सकते हो, उसकी चुदाई के मजे ले सकते हो – वो भी मेरे सामने तो फिर मनोहर अपनी साली, तुम्हारी बीवी को क्यों नहीं चोद सकता – तुम्हारी बीवी की चुदाई के मजे नहीं ले सकता, तुम्हारे सामने? जो रिश्ता तुम्हारा और कौशल्या का है, वही रिश्ता मेरा और मनोहर का भी है – जीजा-साली का।”
“जीजा जी के पास जीजी की इस बात का कोई जवाब नहीं था। धीरज जीजा जी बस इतना ही बोले, “मगर सुधा?”
“जीजी बोली, “मगर क्या यश?”
“इसके बाद कोइ कुछ नहीं बोला। पांच मिनट बीत गए।”
“फिर जीजा जी ही बोले, “सुधा अगर तुम ऐसा चाहती हो तो ठीक है, मुझे कोइ एतराज़ नहीं। मगर क्या मनोहर मान जाएगा? उससे कौन बात करेगा?”
“जीजा जी के इस सवाल के जवाब में जीजी बोली, “मैं करूंगी बात, ये मास्टरनी की मास्टरी कब काम आएगी।”
“आखिर जीजा जी बोले, “सुधा अगर ऐसा है तो ठीक है। ये भी करके देख लेते हैं।”
जीजी बोले, “करके देख क्या लेते हैं यश कर लेते हैं – ये कोइ नई चीज़ नहीं जो हम पहली बार करेंगे – सारी दुनिया करती है।”
“जीजी की इस बात से मैं हैरान थी, जीजी ये क्या कह रही है और जीजी को ये सब कैसे पता, सारी दुनिया करती है? फिर ध्यान आया जीजी एक मास्टरनी है – जीजी का तो तरह तरह के लोगों से वास्ता पड़ता होगा।”
“जब जीजा जी ने कहा, सुधा अगर ऐसा है तो ठीक है ये भी करके देख लेते हैं”, तो जीजी ने बोली, “ठीक है तो यश अभी चलते है रोहिणी। आज इतवार है, मनोहर घर पर ही होगा।”
“जीजा जी बोले, “अभी?”
“जीजी बोली, “यश अभी क्यों नहीं? शुभ काम में देरी क्यों करनी। जब ये करना ही है तो फिर आज से ही क्यों नहीं? अगर बात बन गयी तो आज ही कर लेंगे ग्रुप चुदाई का मुहूर्त।”
“जीजा जी बोले, “सुधा क्या बात है ज्यादा ही उतावली हो रही हो मनोहर का लंड फुद्दी लेने के लिए।”
“जीजी ने कहा, “फुद्दी में ही क्यों, गांड में भी। रात की मस्त चुदाई के बाद अब तो मेरी फुद्दी और गांड भी मनोहर का लंड डलवाये बिना नहीं मानेगी। हां अगर मनोहर ही मना कर दे तो अलग बात है।”
“जीजा जी बोले, “मनोहर क्यों मना करेगा? उसे भी तो एक नई फुद्दी और नई गांड में लंड डालने का मजा आएगा। और सुधा तुम्हारी गांड का तो छेद तो वैसे ही बहुत टाइट है, मनोहर को तो मजा ही आ जाएगा।”
“जीजी बोली, “तो फिर चलो चलते हैं रोहिणी।”
“धीरज मैं तो बस जीजी और जीजा जी की बातें सुन ही रही थी। मगर धीरज मुझे कोइ फर्क नहीं पड़ रहा था। मनोहर का लंड तो मैं लेती ही थी, अब जीजा जी का लंड भी ले ही चुकी थी – और तो और मैं और जीजी के सामने जीजा जी से चुदाई भी करवा चुकी थी। जीजी की बातें सुन-सुन कर मेरी फुद्दी तो वैसे ही तैयार हो चुकी थी और मेरी गांड में खुजली मची पड़ी थी।”
“फिर हम तीनों तैयार हो कर रोहिणी के लिए रवाना हो गए। जीजा जी ने तेरे मौसा को फोन कर ही दिया था। हम पहुंचे तो तेरे मौसा हमारा इंतजार कर ही रहे थे। हमे देखते ही बोले, “क्या हुआ कौशल्या रात वहीं रुक गयी?”
“मैं ही बोली, “असल में मनु, मैं जब गुड़गांव पहुंची तो पता चला जीजी की कोइ ट्रेनिंग है, जीजी शाम को आयी तो जीजी ने मुझे रोक लिया।”
“जीजी हंसते हुए बोली, “क्या हुआ मनोहर, कौशल्या के बिना नींद नहीं आई क्या रात को?”
“तेरे मौसा बोले, “नहीं-नहीं जीजी ऐसी कोई बात नहीं, वो तो मैंने तो वैसे ही पूछ लिया।”
“जीजी ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “अरे मनोहर क्या हुआ जो रात रुक गई कौशल्या। तुम तो रोज मजे लेते हो कौशल्या के साथ, थोड़ा जीजा साली को भी तो कुछ मजे लेने दो, आखिर को साली भी तो आधी घरवाली ही होती है। कौशल्या यश की आधी घरवाली है और जैसे मैं तुम्हारी आधी घरवाली हूं।”
“धीरज तेरे मौसा जीजी की बात पर बस हंस दिए।”
“इसके बाद तो जीजी ने जैसे बम्ब ही फोड़ दिया। जीजी ने सीधा ही तेरे मौसा से कह दिया, “मनोहर, तुमने मजे लेने हैं अपनी साली – आधी घरवाली के साथ?”
“जीजी ने इतना साफ़-साफ़ पूछा था कि तेरे मौसा हैरान परेशान से हो गए, कि जीजी सबके सामने ये कैसी बातें कर रही है?”
“तेरे मौसा बोले, “मजे जीजी? कैसे मजे, मैं समझा नहीं।”
“जीजी बोली, “अरे मनोहर, मजे मतलब मजे – मर्द कैसे मजे लेते है लड़कियों के साथ, वैसे मजे। बोलो लेने हैं?”
“इसके बाद तेरे मौसा जी सोच ही रहे थे कि जीजी बोल पड़ी, “मनोहर मैं कह रही हूं चुदाई के मजे मनोहर, फुद्दी चोदने के मजे।”
“तेरे मौसा को तो एक पल कि लिए समझ ही नहीं आया की जीजी ये बोल क्या रही है।”
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