पिछला भाग पढ़े:- सोनाली दीदी और मेरा सिक्रेट-5
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
रात के लगभग आठ बजे मैं सोनाली दीदी के ऑफिस के बाहर खड़ा था। मैंने अपना काला ब्लेज़र पहन रखा था। दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था। पहली बार मैं उनकी दुनिया में कदम रखने जा रहा था, इसलिए हल्की घबराहट भी थी और उत्साह भी।
गेट पर खड़े सिक्योरिटी गार्ड ने मुझे रोक लिया। मैंने उन्हें बताया कि सोनाली दीदी यहाँ काम करती हैं और मैं उनका बॉयफ्रेंड हूँ। आज वैलेंटाइन डे की पार्टी में उन्होंने ही मुझे बुलाया है। यह सुनते ही गार्ड मुस्कुराया, मेरा नाम पूछा और फिर मुझे अंदर जाने दिया। उसने लिफ्ट की तरफ इशारा करते हुए कहा कि पार्टी सातवीं मंजिल पर चल रही थी।
मैं लिफ्ट में चढ़ा और कुछ ही पलों में सातवीं मंजिल पर पहुँच गया। जैसे ही लिफ्ट का दरवाज़ा खुला, सामने एक खूबसूरत माहौल मेरा इंतज़ार कर रहा था। हॉल में हल्के अंग्रेज़ी रोमांटिक गाने बज रहे थे। कुछ लोग कुर्सियों पर बैठ कर बातें कर रहे थे, जबकि कुछ लोग संगीत की धुन पर धीरे-धीरे डांस कर रहे थे। सामने एक छोटा सा स्टेज बना था, जिस पर लाल दिलों के गुब्बारे लटके हुए थे। पूरा माहौल बेहद रोमांटिक लग रहा था।
मैंने भीड़ के बीच नज़र दौड़ाई, और तभी सोनाली दीदी की नज़र मुझ पर पड़ी। मुझे देखते ही उनके चेहरे पर एक चमकती हुई मुस्कान फैल गई। वह धीरे-धीरे लोगों के बीच से रास्ता बनाती हुई मेरी तरफ आने लगी।
आज उन्होंने वही लाल रंग की बिना बाजू वाली ड्रेस पहन रखी थी, जिसे हमने कल साथ जाकर खरीदा था। उनकी पीठ पूरी तरह खुली हुई थी, और ड्रेस उनकी कमर से चिपकी हुई उनके शरीर की हर खूबसूरत रेखा को उभार रही थी। ड्रेस का कपड़ा उनके स्तनों पर इतनी नर्मी से टिका हुआ था कि उनके भरे हुए स्तनों का गोल आकार साफ़ दिखाई दे रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे उन्होंने अंदर कुछ भी नहीं पहना हो। हर कदम के साथ उनके स्तन हल्के-हल्के थिरक रहे थे, और लाल कपड़े के भीतर उनके बदन की गर्माहट साफ महसूस हो रही थी। ड्रेस की छोटी लंबाई की वजह से उनकी चिकनी, गोरी जांघें खुलकर नज़र आ रही थी, और उन्हें देखकर मेरी साँसें खुद-ब-खुद गहरी होने लगी।
वह मेरे बिल्कुल सामने आकर रुकी। उनके चेहरे पर शरारती मुस्कान थी और आँखों में चमक। अगले ही पल उन्होंने बिना कुछ कहे अपने दोनों हाथ मेरी गर्दन के पीछे ले जाकर मुझे कस कर गले लगा लिया। उनके गर्म, मुलायम स्तन मेरे सीने से दब गए। उस एक पल में मेरा पूरा शरीर जैसे सिहर उठा। उनकी खुशबू, उनके बदन की गर्माहट और उनके स्तनों का दबाव मुझे भीतर तक बेचैन कर रहा था।
उन्होंने अपना चेहरा मेरे कान के पास लाकर धीमे से फुसफुसाया, “थैंक यू फॉर कमिंग, गोलू।”
मैं कुछ कह पाता, उससे पहले ही उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया। उनकी उँगलियाँ मेरी उँगलियों में उलझ गई, और वह मुझे भीड़ के बीच खींचते हुए अपने दोस्तों के पास ले गई। उनके चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी।
“गाइज, मीट माय बॉयफ्रेंड गोलू,” उन्होंने मुस्कुराते हुए सब को मेरे बारे में बताया।
उनकी सहेलियों ने मुझे देख कर शरारती मुस्कान के साथ हैलो कहा। कुछ ने सोनाली दीदी को छेड़ते हुए कहा कि उन्होंने अपने बॉयफ्रेंड के बारे में बहुत कुछ बताया है। मैं हल्का-सा मुस्कुराया और उनके साथ खड़ा हो गया।
उसी समय वहाँ एक कपल गेम चल रहा था। हॉल के बीचो-बीच सभी लड़कियाँ अपने-अपने बॉयफ्रेंड के साथ गोल घेरा बना कर बैठी हुई थी। खेल काफी मजेदार था। लड़की को एक बोतल घुमानी होती थी, और जब बोतल घूम कर ठीक उसके बॉयफ्रेंड की तरफ रुकती, तो उसे एक छोटे कटोरे में रखे हुए कागज़ों में से एक कागज़ उठाना होता था। उस कागज़ पर लिखा होता कि कपल को क्या करना है।
कुछ कागज़ों में हाथ पकड़ने, गले लगाने या एक-दूसरे की तारीफ करने जैसे प्यारे टास्क होते थे। सब लोग हँसते हुए खेल का मज़ा ले रहे थे। मैं और सोनाली दीदी भी उनके दोस्तों के साथ खड़े हो कर यह सब देख रहे थे।
एक बार एक कागज़ में लड़के को अपनी गर्लफ्रेंड के स्तनों को सबके सामने दबाने का टास्क मिला। यह पढ़ते ही लड़की शर्म से लाल हो गई। उसने हँसते हुए सिर हिलाया और साफ मना कर दिया। अगले ही पल वह अपने बॉयफ्रेंड का हाथ पकड़ कर खेल से बाहर चली गई। इस पर सब लोग जोर-जोर से हँसने लगे और उसे छेड़ने लगे।
तभी सोनाली दीदी की एक सहेली ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब तो सोनाली को भी खेलना पड़ेगा। आखिर उसका बॉयफ्रेंड भी आ गया है।”
बाकी सभी दोस्तों ने भी वही बात दोहराई। सबकी नज़रें अब हम दोनों पर टिक गई थी। सोनाली दीदी ने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में हल्की शरारत थी। उन्होंने मेरा हाथ दबाया और मुस्कुराते हुए मुझे अपने साथ उस गोल घेरे में ले गई।
हम दोनों आमने-सामने बैठ गए। खेल शुरू हुआ। सोनाली दीदी ने बोतल को थोड़ा ज़ोर से घुमाया, जैसे वह चाहती हों कि बोतल मेरी तरफ आकर ना रुके। लेकिन किस्मत बार-बार हमें साथ ला रही थी। कभी बोतल मेरी तरफ रुक जाती और कागज़ में लिखा होता कि हमें एक-दूसरे का हाथ पकड़ना है, तो कभी मुझे उन्हें अपनी बाहों में लेकर कुछ पल के लिए पास बैठना होता।
हर छोटे टास्क के साथ हम दोनों की झिझक कम होती जा रही थी। जब भी मैं उनका हाथ पकड़ता, उनकी उँगलियाँ मेरी उँगलियों को कस कर थाम लेती। जब मैं उन्हें अपने पास खींचता, उनके नरम स्तन हल्के से मेरी बाँह या सीने को छू जाते, और मेरे भीतर एक मीठी बेचैनी दौड़ जाती।
फिर एक बार बोतल घूमते-घूमते आकर ठीक मेरी तरफ रुक गई। हॉल में बैठे सभी लोग चिल्लाने लगे। सोनाली दीदी ने कटोरे से एक कागज़ उठाया और पढ़ते ही उनके चेहरे का रंग बदल गया। उस कागज़ पर लिखा था कि हमें दो मिनट तक एक-दूसरे को चूमना है।
यह पढ़ते ही उन्होंने तुरंत सिर हिलाया। “नहीं, यह नहीं होगा,” उन्होंने शर्माते हुए कहा।
लेकिन उनकी सहेलियाँ कहाँ मानने वाली थी। सभी ने एक साथ शोर मचाना शुरू कर दिया।
“कम ऑन, सोनाली!”
“सिर्फ दो मिनट की बात है!”
“इतना तो बनता है!”
कुछ लड़कियाँ हँसते हुए उन्हें छेड़ने लगी, जबकि बाकी लोग तालियाँ बजा कर हमारा नाम लेने लगे। सोनाली दीदी ने एक पल के लिए मेरी तरफ देखा। उनके गाल लाल हो चुके थे। उन्होंने हल्के से होंठ भींचे, फिर गहरी साँस ली और धीरे से मुस्कुरा दी।
“ठीक है,” उन्होंने धीमी आवाज़ में कहा।
उनके इतना कहते ही पूरे हॉल में जोरदार तालियाँ गूँज उठी।
हम दोनों अपनी जगह से उठे और हॉल के बीच बने खाली घेरे के अंदर आ गए। अब सब लोग हमें चारों तरफ से घेर कर खड़े थे। हर तरफ से सीटियाँ, तालियाँ और शरारती आवाज़ें सुनाई दे रही थी। सबको यही लग रहा था कि हम एक आम कपल थे, जो सबके सामने अपने प्यार का इज़हार करने वाला था।
लेकिन मेरे और सोनाली दीदी के लिए यह पल कहीं ज़्यादा गहरा था। दुनिया की नज़रों में हम एक कपल थे, लेकिन सच यह था कि हम भाई-बहन थे। हम दोनों जानते थे कि भाई-बहन का इस तरह सबके सामने एक-दूसरे को चूमना गलत माना जाता है। शायद यही वजह थी कि इस भीड़ के बीच खड़े होकर एक-दूसरे के इतने करीब आना हमारे लिए और भी ज़्यादा रोमांचक और भावुक बन गया।
अचानक वह थोड़ा और करीब आई। उनके होंठ मेरे कान के पास आ गए और उनकी गर्म साँस मेरे चेहरे को छूने लगी। बहुत धीमी आवाज़ में उन्होंने फुसफुसा कर पूछा, “क्या हम सच में किस्स कर सकते हैं, गोलू?”
मैंने उनकी आँखों में देखते हुए हल्की मुस्कान के साथ धीरे से कहा, “हां दीदी।”
मेरे इतना कहते ही उनके चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान फैल गई। मैंने अपने दोनों हाथों से उनका चेहरा थाम लिया। उनकी आँखें एक पल के लिए झुक गई, जैसे वह अब भी इस पल की सच्चाई को महसूस कर रही हो। चारों तरफ लोगों का शोर था, लेकिन उस पल मुझे सिर्फ उनकी धड़कनों का एहसास हो रहा था।
मैं धीरे-धीरे उनके और करीब आया और अपने होंठ उनके होंठों से छुआ दिए। शुरुआत में वह हल्का-सा ठिठकी, जैसे इस एहसास को अपने भीतर उतार रही हों। अगले ही पल उन्होंने भी अपनी आँखें बंद कर ली और पूरे मन से मेरा साथ देने लगी।
उनके होंठ बेहद नरम थे। स्ट्रॉबेरी फ्लेवर वाली लिपस्टिक की मीठी खुशबू और स्वाद मेरे होंठों पर घुल गया। मैंने पहले उनके ऊपरी होंठ को धीरे-से चूमा, फिर उनके निचले होंठ को अपने होंठों के बीच हल्के से दबाया। वह हल्का-सा सिहर उठी और और भी करीब आ गई।
कुछ ही सेकंड बाद उन्होंने अपने होंठ थोड़ा खोल दिए। हमारी साँसें एक-दूसरे में घुलने लगी। मैंने उनकी गर्म साँसों के साथ उनके मुँह की मीठी स्ट्रॉबेरी-सी खुशबू महसूस की। हमारे होंठों के बीच जमा नमी धीरे-धीरे दोनों के मुँह तक पहुँच रही थी। हर बार जब हम होंठ बदलते, हमारे बीच की वह मिठास और भी गहरी होती जा रही थी।
उन्होंने मेरे निचले होंठ को अपने होंठों में लेकर हल्के से दबाया। मैं मुस्कुराया और जवाब में उनके निचले होंठ को बहुत प्यार से हल्का-सा काट लिया। उन्होंने बंद आँखों के साथ धीमी-सी साँस छोड़ी और अपने हाथ मेरे कंधों पर और कस लिए।
अब हमारा चुमना और भी गहरा हो चुका था। कभी मैं उनके होंठों को धीरे-धीरे चूमता, कभी वह अपने होंठों को मेरे होंठों पर कुछ सेकंड तक टिकाए रखती। हमारे होंठों की नमी बार-बार एक-दूसरे में मिल रही थी।
उनकी उँगलियाँ मेरे कंधों पर कस गई और मेरे हाथ उनके चेहरे से सरकते हुए उनकी कमर तक पहुँच गए। उनके लाल ड्रेस के भीतर से आती गर्माहट साफ महसूस हो रही थी। वह पूरी तरह मेरे करीब सिमट गई थी।
चारों ओर से तालियों और सीटियों की आवाज़ें गूँज रही थी, लेकिन हम दोनों के लिए दुनिया जैसे थम गई थी। जब हम धीरे-धीरे अलग हुए, तो हमारे होंठों पर अब भी एक-दूसरे की नमी बाकी थी। उनकी आँखें बंद थी, साँसें तेज़ थी और स्ट्रॉबेरी लिपस्टिक की मीठी खुशबू अब भी मेरे होंठों पर टिकी हुई थी।
इसके बाद हम लगभग आधे घंटे तक बाकी कपल्स के साथ खेल खेलते रहे। हर बार जब मैं सोनाली दीदी के पास बैठता, मेरे मन में अभी-अभी हुए उस किस्स की मिठास फिर से ताज़ा हो जाती।
करीब आधे घंटे बाद स्टेज के पास खड़े एंकर ने माइक पर सभी लोगों को पास आने के लिए कहा। यह सुनते ही सभी लोग अपनी-अपनी जगह से उठ कर स्टेज की तरफ बढ़ने लगे। मैं और सोनाली दीदी भी साथ-साथ चलते हुए भीड़ में शामिल हो गए।
मैं उनके थोड़ा करीब झुका और मुस्कुरा कर धीमे से कहा, “सोनाली दीदी, आपके होंठ बहुत नरम हैं।”
मैं बस उनकी तारीफ करना चाहता था, लेकिन मेरी बात सुनते ही उन्होंने मुझे हल्की नाराज़गी से देखा। उन्होंने धीमी आवाज़ में कहा, “गोलू, यह मत भूलो कि मैं तुम्हारी बड़ी बहन हूँ। मुझसे बात करते समय थोड़ा इज्ज़त रखा करो।”
उनकी बात सुन कर मैं तुरंत संभल गया। मैंने हल्का-सा सिर झुका कर कहा, “सॉरी, दीदी। मेरा वह मतलब नहीं था।”
मेरी बात सुन कर उनके चेहरे की नाराज़गी पिघल गई। उन्होंने हल्के से मुस्कुरा कर मेरा हाथ दबाया और हम दोनों स्टेज के सामने खड़े हो गए।
थोड़ी ही देर में एंकर ने आज की रात के अगले गेम के बारे में बताया। यह सिर्फ मज़े के लिए नहीं था, बल्कि इस गेम में जीतने वाले कपल को कंपनी की तरफ से मनाली घूमने का शानदार ट्रिप मिलने वाला था। गेम के नियम बहुत आसान थे। हर कपल को एक ही कुर्सी पर साथ बैठना था। जैसे-जैसे राउंड आगे बढ़ता, कपल्स को खुद को संभालते हुए उसी कुर्सी पर टिके रहना होता। जो कपल सबसे आखिर तक कुर्सी पर बैठा रहता, वही इस गेम का जीतने वाला माना जाता।
मनाली का नाम सुनते ही पूरे हॉल में तालियों और सीटियों की आवाज़ गूँज उठी। सभी कपल्स खुश होकर एक-दूसरे की तरफ देखने लगे।
यह सुनते ही सोनाली दीदी के चेहरे पर चमक आ गई। उनकी आँखों में खुशी साफ दिखाई दे रही थी। वह मेरी तरफ मुड़ी और बच्चों जैसी मुस्कान के साथ बोली, “गोलू, क्या हम भी यह गेम खेलें? अगर हम जीत गए तो हमें मनाली जाने का मौका मिलेगा।”
मैं अभी उन्हें जवाब देता, उससे पहले ही उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया। उनकी उँगलियों की गर्माहट में इतनी बेचैनी और खुशी थी कि मुझे कुछ कहने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी। वह मुझे लगभग खींचते हुए स्टेज की तरफ ले गई और हम दोनों ने इस गेम में अपना नाम लिखवा दिया।
कुल मिला कर लगभग बीस लोग इस गेम में हिस्सा ले रहे थे। स्टेज पर रखी कुर्सियाँ देख कर ही समझ में आ गया कि यह खेल जितना आसान दिख रहा था, उतना था नहीं। कुर्सी काफी छोटी थी। दो लोगों का उस पर साथ बैठना अपने आप में एक चुनौती थी।
जब हमारी बारी आई, तो मैं पहले जाकर कुर्सी पर बैठ गया। मैंने सोनाली दीदी की तरफ देख कर धीरे से कहा, “आप मेरी गोद में बैठ जाइए। तभी हम आराम से टिक पाएँगे।”
उन्होंने एक पल के लिए मेरी तरफ देखा, फिर बिना कुछ कहे हल्की मुस्कान के साथ मेरी गोद में बैठ गई। लेकिन अगर वह मेरी तरफ पीठ करके बैठती, तो उनके पैर जमीन को छू सकते थे और हम तुरंत हार जाते। इसलिए उन्होंने अपना चेहरा मेरी तरफ रखते हुए बैठना चुना। उन्होंने अपने दोनों पैर कुर्सी के पीछे मोड़ लिए और अपने हाथ मेरे कंधों पर रख दिए।
अब हम दोनों इतने करीब थे कि हमारे बीच एक साँस भर की भी दूरी नहीं बची थी। उनके स्तन मेरे सीने से पूरी तरह दब गए थे। उनकी गर्म साँसें मेरे चेहरे से टकरा रही थी। उनके खुले बालों की खुशबू मुझे चारों तरफ से घेर रही थी।
गेम शुरू होते ही मुझे महसूस हुआ कि हमने शायद इस खेल को जितना आसान समझा था, यह उतना आसान नहीं था। उनका पूरा वजन मेरी गोद पर था। कपड़ों के बावजूद उनका नाजुक हिस्सा मेरे लंड के ठीक ऊपर आकर टिका हुआ था। हमारे बीच कपड़ों की परतें थी, फिर भी उनका हर हल्का-सा हिलना मुझे साफ महसूस हो रहा था।
सोनाली दीदी भी यह सब महसूस कर रही थी। उनके गाल हल्के-हल्के लाल हो गए थे। उन्होंने अपने हाथ मेरे कंधों के चारों ओर और कसकर लपेट लिए, ताकि वह आराम से बैठी रह सकें। हर बार जब वह थोड़ा-सा अपनी जगह बदलती, उनका नाजुक हिस्सा मेरे लंड पर और गहराई से दब जाता, और मेरे भीतर एक तेज़ सिहरन दौड़ जाती।
हम दोनों की आँखें एक-दूसरे से मिली। उनके होंठों पर हल्की मुस्कान थी, लेकिन साँसों की रफ्तार बता रही थी कि यह खेल अब हमारे लिए सिर्फ एक खेल नहीं रह गया था। मनाली का सपना अपनी जगह था, लेकिन उस पल हम दोनों को सबसे ज़्यादा अपने बीच की बढ़ती हुई नज़दीकी महसूस हो रही थी।
धीरे-धीरे मुझे महसूस होने लगा कि सोनाली दीदी का पूरा वजन मेरी गोद पर होने की वजह से मेरा लंड सख्त होने लगा था। कपड़ों की परतों के बावजूद उनका नाजुक हिस्सा ठीक उसी जगह टिका हुआ था, इसलिए मेरे शरीर में हो रहा यह बदलाव उनसे छिपा नहीं रह सकता था।
सोनाली दीदी भी यह बात तुरंत समझ गई। उन्होंने मेरी आँखों में देखा, हल्के से होंठ भींचे और बहुत धीमी आवाज़ में मेरे कान के पास फुसफुसाई, “गोलू, तुम्हारा लंड सख्त हो रहा है… खुद को संभालो।”
मैंने उनकी आँखों में देखते हुए उतनी ही धीमी आवाज़ में कहा, “मैं अपने लंड को कैसे कंट्रोल करूँ, दीदी, जब आप उसी पर बैठी हैं?”
मेरी बात सुनते ही उनके गाल और लाल हो गए। उन्होंने मुझे हल्की-सी नाराज़गी और शरमाई हुई मुस्कान के साथ देखा, फिर मेरे कंधों को थोड़ा और कसकर पकड़ लिया।
“फिर भी कोशिश करो,” उन्होंने फुसफुसा कर कहा।
हम दोनों ने गहरी साँस ली और कुर्सी पर टिके रहने पर ध्यान देने की कोशिश की, लेकिन उस पल उनके नाजुक हिस्से और मेरे लंड के बीच हो रहे लगातार स्पर्श को अनदेखा करना लगभग नामुमकिन था।
कुछ सेकंड तक मैंने खुद को संभालने की कोशिश की, लेकिन हर हल्की हरकत के साथ मेरे लिए शांत रहना और मुश्किल होता जा रहा था। मैंने उनकी आँखों में देखते हुए बहुत धीमी आवाज़ में कहा, “दीदी, क्या हम यह गेम छोड़ दें?”
मेरी बात सुन कर उन्होंने तुरंत हल्के से सिर हिलाया और धीमी आवाज़ में बोली, “नहीं, गोलू।”
धीरे-धीरे बाकी कपल्स एक-एक करके गेम से बाहर होने लगे। कोई कुर्सी से फिसल गया, किसी के पैर जमीन को छू गए। हर बार जब कोई कपल बाहर होता, हॉल में तालियों और हँसी की आवाज़ गूँज उठती।
समय बीतता गया। लगभग आधे घंटे बाद स्टेज पर सिर्फ दो ही कपल बचे थे — मैं और सोनाली दीदी, और हमारे सामने बैठा एक दूसरा कपल। अब पूरे हॉल की नज़रें सिर्फ हम दोनों पर थी। चारों तरफ से लोग हमारा नाम लेकर चिल्ला रहे थे। कुछ लोग तालियाँ बजा रहे थे, कुछ सीटियाँ मार रहे थे, और कुछ ज़ोर-ज़ोर से हमें हौसला दे रहे थे।
इतनी देर तक एक-दूसरे से सट कर बैठे रहने की वजह से हमारे बीच की नज़दीकी और भी गहरी हो गई थी। सोनाली दीदी का नाजुक हिस्सा अब भी मेरी गोद पर उसी जगह टिका हुआ था, और मेरा लंड अब भी पूरी तरह सख्त होकर उनके नीचे दबा हुआ था। कपड़ों की परतों के बावजूद हम दोनों उस दबाव को साफ महसूस कर पा रहे थे।
उन्होंने मेरी आँखों में देखा। उनके चेहरे पर हल्की शरमाहट थी। बहुत धीमी आवाज़ में उन्होंने मेरे कान के पास कहा, “गोलू, यह अजीब है… मैं तुम्हारी बड़ी सगी बहन हूँ, फिर भी तुम्हारा लंड अब भी इतना सख्त है।”
मैंने हल्की मुस्कान के साथ उनकी आँखों में देखा और उतनी ही धीमी आवाज़ में कहा, “यह मुझे पता है, दीदी… लेकिन मेरे लंड को यह नहीं पता कि आप मेरी बड़ी बहन हैं।”
मेरी बात सुन कर उनके गाल और लाल हो गए। उन्होंने एक पल के लिए आँखें झुका ली, फिर धीरे से मेरे कंधों को और कस कर पकड़ लिया।
आखिरकार लगभग आधे घंटे बाद हमारे सामने बैठा आखिरी कपल भी कुर्सी से नीचे गिर गया। जैसे ही वे नीचे गिरे, पूरे हॉल में जोरदार तालियाँ गूँज उठी। लोग हमारा नाम लेकर चिल्लाने लगे। मैं और सोनाली दीदी कुछ पलों तक समझ ही नहीं पाए कि हम सच में जीत चुके थे।
सोनाली दीदी सबसे पहले मेरी गोद से उठ कर खड़ी हो गई। उनके चेहरे पर जीत की खुशी साफ दिखाई दे रही थी। मैं भी उठने लगा, लेकिन इतने लंबे समय तक एक ही तरह से बैठे रहने की वजह से मुझे खुद को संभालने में कुछ सेकंड लग गए।
एंकर ने मुस्कुराते हुए हमें स्टेज के बीच बुलाया और कंपनी की तरफ से मनाली ट्रिप का गिफ्ट वाउचर हमारे हाथ में दिया। सोनाली दीदी ने दोनों हाथों से वह गिफ्ट लिया और उनकी आँखों में बच्चों जैसी चमक थी। इसके बाद एंकर ने बता दिया कि पार्टी अब खत्म हो चुकी थी। धीरे-धीरे लोग हमसे हाथ मिलाने लगे, बधाई देने लगे और फिर हॉल खाली होने लगा।
जब हम दोनों बिल्डिंग से बाहर निकले, तो मैंने महसूस किया कि सोनाली दीदी पहले जैसी खुलकर बात नहीं कर रही थी। वह चुप-चाप मेरे साथ चल रही थी, लेकिन मेरी तरफ सीधा देखने से बच रही थी। शायद इतने लंबे समय तक उनका नाजुक हिस्सा मेरी गोद में, मेरे लंड के ठीक ऊपर होने का एहसास उन्हें अब भी याद आ रहा था।
मैं उनकी झिझक समझ सकता था। उनके लिए यह शाम शायद बहुत कुछ सोचने वाली रही होगी और थोड़ी अटपटी भी लगी होगी। लेकिन अगर सच कहूँ, तो मेरे लिए यह मेरी जिंदगी की सबसे यादगार रातों में से एक थी। मनाली ट्रिप जीतना अपनी जगह था, लेकिन उससे भी ज्यादा खास बात यह थी कि पूरी शाम सोनाली दीदी का नाजुक हिस्सा मेरे लंड के इतना करीब रहा। उनके स्तनों का मेरे सीने से दबना, उनकी खुशबू और उनका स्पर्श मेरे मन में गहराई तक उतर चुका था।
मैंने उनकी तरफ देखा। वह अब भी हल्की मुस्कान छिपाने की कोशिश कर रही थी। उस पल मुझे लगा कि यह रात हम दोनों कभी नहीं भूलेंगे।