पिछला भाग पढ़े:- सोनाली दीदी और मेरा सिक्रेट-6
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
पार्टी वाली बात के बाद लगभग तीन महीने तक हमारे बीच कुछ नहीं हुआ। मैं और सोनाली दीदी उसी अपार्टमेंट में रह रहे थे। हम दोनों ऐसे बिहेव कर रहे थे जैसे उस रात कुछ हुआ ही नहीं था। कभी-कभी जब मैं उनकी तरफ देखता था तो मुझे पार्टी वाली रात याद आ जाती थी, लेकिन मैं तुरंत अपना ध्यान दूसरी तरफ कर लेता था। सोनाली दीदी भी पहले जैसी बनने की कोशिश कर रही थी। वो मेरे साथ हंसती थी, बातें करती थी, मेरे लिए खाना बनाती थी, लेकिन फिर भी हमारे बीच पहले जैसा आराम नहीं रहा था।
लेकिन एक चीज़ थी जिससे वो बहुत खुश थी। उस दिन हम लोग एक मनाली ट्रिप के टिकट जीत गए थे। तब से वो बार-बार मनाली की बातें करती रहती थी। कभी होटल के बारे में बात करती, कभी बर्फ देखने की। उनको इतना खुश देख कर मुझे भी अच्छा लगता था।
फिर एक दिन शाम को वो ऑफिस से वापस आई। जैसे ही वो अंदर आई मुझे लगा आज उनका मूड ठीक नहीं है। उन्होंने आते ही ना मुझसे ठीक से बात की और ना ही मुस्कुराई। वो चुप-चाप अपना बैग सोफे पर रख कर बैठ गई। उनके चेहरे पर हल्की टेंशन दिख रही थी।
मैं उनके पास जाकर बैठ गया और पूछा, “क्या हुआ दीदी? ऑफिस में कुछ हुआ क्या?”
वो कुछ सेकंड तक चुप रही। फिर उन्होंने धीरे से मेरी तरफ देखा। उनके चेहरे पर अजीब सा एक्सप्रेशन था, जैसे वो कुछ सोच रही हो।
“गोलू… क्या मैं तुम्हें मोटी लग रही हूँ?” उन्होंने धीमी आवाज में पूछा।
मैं तुरंत बोला, “नहीं दीदी, आप बिल्कुल मोटी नहीं लग रही।”
मेरी बात सुन कर भी उनके चेहरे पर मुस्कान नहीं आई। उन्होंने धीरे से लंबी सांस ली और सोफे पर पीछे टिक गई।
“ऑफिस में मेरी कुछ दोस्त बोल रही थी कि मैं थोड़ी मोटी होने लगी हूँ,” उन्होंने उदास आवाज में कहा। “पहले तो मैं हंस कर टाल रही थी… लेकिन फिर बार-बार वही बात सुन कर मुझे बहुत बुरा लगने लगा।”
मैं कुछ सेकंड तक उनको देखता रहा। मेरे दिमाग में बस यही चल रहा था कि कोई उनको मोटी कैसे बोल सकता है। उनकी फिगर बिल्कुल परफेक्ट थी। ऐसा फिगर जो शायद हर लड़की चाहती होगी। ना वो ज्यादा पतली थी और ना ही मोटी। उनकी कमर पतली थी, शरीर का शेप बहुत अच्छा था और उन पर हर कपड़ा बहुत अच्छा लगता था।
उस दिन उन्होंने नीले रंग की कुर्ती पहनी हुई थी। ऑफिस से आने की वजह से उनके बाल थोड़े बिखरे हुए थे, लेकिन फिर भी वो बहुत सुंदर लग रही थी। उनकी कुर्ती उनके शरीर पर बिल्कुल फिट बैठ रही थी। कुर्ती के अंदर से उनकी पतली कमर साफ समझ आ रही थी।
उनके बड़े स्तन भी कुर्ती के अंदर साफ नजर आ रहे थे। कुर्ती का कपड़ा उनके स्तनों के ऊपर हल्का सा खिंचा हुआ था जिससे उनका उभार और भी साफ दिख रहा था। जब वो सांस ले रही थी तब उनके स्तन हल्के हल्के ऊपर नीचे हो रहे थे। कोई भी एक नज़र में समझ सकता था कि उनकी बॉडी कितनी खूबसूरत थी। उनकी कुर्ती उनके शरीर पर इतनी अच्छी लग रही थी कि मैं कुछ सेकंड तक बस उनको देखता ही रह गया।
मैं धीरे से बोला, “आप बिल्कुल भी मोटी नहीं हो दीदी। सच बोलूं तो आप पहले से भी ज्यादा अच्छी लग रही हो।”
लेकिन उन्होंने मेरी बात सुनने की जगह अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया। ऐसा लग रहा था जैसे उन्होंने अपने मन में कुछ तय कर लिया हो।
“नहीं गोलू,” उन्होंने तुरंत कहा। “अब मुझे भी लगने लगा है कि मुझे थोड़ा ध्यान देना चाहिए।”
मैं फिर उनको समझाने की कोशिश करने लगा, “दीदी आप बेकार में सोच रही हो। ऑफिस वाले तो कुछ भी बोल देते हैं।”
लेकिन इस बार वो मेरी बात बीच में ही काट कर बोली, “मैंने डिसाइड कर लिया है। कल से मैं जिम जॉइन कर रही हूँ।”
उस रात भी मैं उनको काफी देर तक समझाता रहा। मैं बार-बार बोल रहा था कि वो बिल्कुल भी मोटी नहीं हैं। मैंने उनको कहा कि उनकी बॉडी पहले से भी ज्यादा अच्छी लगती है। लेकिन वो मेरी कोई बात सुनने को तैयार ही नहीं थी। ऐसा लग रहा जैसे ऑफिस वालों की बात उनके दिमाग में बैठ गई थी।
अगले दिन शाम को जब वो ऑफिस से वापस आई तो उनके हाथ में एक बड़ा शॉपिंग बैग था। इस बार उनके चेहरे पर हल्की सी एक्साइटमेंट दिख रही थी। जैसे ही वो अंदर आई उन्होंने बैग सोफे पर रखा और मुस्कुरा कर बोली, “गोलू देखो मैं क्या लाई हूँ।”
उन्होंने बैग खोल कर अंदर से नया जिम आउटफिट निकाला। ऊपर का टॉप बहुत छोटा था। वो सिर्फ उनके स्तनों तक ही ढकने वाला था। कपड़ा भी काफी फिट था जिससे साफ समझ आ रहा था कि पहनने के बाद वो उनके शरीर पर कितना टाइट लगेगा।
उसके साथ उन्होंने एक छोटा सा शॉर्ट्स भी निकाला। वो इतना छोटा था कि उनके पूरे पैर और जांघें साफ दिखने वाली थी। उसको देख कर मुझे खुद हैरानी हुई कि सोनाली दीदी ने इतना छोटा आउटफिट खरीदा था।
वो कुछ सेकंड तक उस आउटफिट को अपने सामने पकड़ कर देखती रही। फिर अचानक उन्होंने मेरी तरफ देखा। “गोलू… क्या मैं इसे यहीं ट्राय करूं? फिर तुम बताना मैं इसमें कैसी लग रही हूँ,” उन्होंने हल्की मुस्कान के साथ कहा।
मैं कुछ बोल पाता उससे पहले ही वो आउटफिट लेकर अपने कमरे के अंदर चली गई। मैं वहीं हॉल में खड़ा रह गया। मेरे दिमाग में बस यही चल रहा था कि वो उस छोटे से आउटफिट में कैसी लगेंगी।
कमरे का दरवाजा बंद होने के बाद भी मेरा ध्यान बार बार उसी तरफ जा रहा था। अंदर से कभी हैंगर की आवाज आती, कभी अलमारी बंद होने की। मेरा दिल थोड़ा तेज धड़कने लगा था।
फिर कुछ मिनट बाद धीरे से कमरे का दरवाजा खुला। जैसे ही सोनाली दीदी बाहर आई, मैं कुछ सेकंड के लिए सांस लेना ही भूल गया।
वो जिम आउटफिट उनके शरीर पर इतना फिट बैठ रहा था कि उनकी पूरी बॉडी का शेप साफ दिख रहा था। नीले रंग का छोटा टॉप उनके स्तनों को टाइट तरीके से पकड़ रहा था। उनके स्तनों का उभार साफ नज़र आ रहा था और टॉप इतना फिट था कि हर मूवमेंट के साथ उनका शरीर और ज्यादा मदहोश लग रहा था। उनकी पतली कमर और फिट बॉडी उस आउटफिट में और भी ज्यादा सुंदर लग रही थी।
नीचे उन्होंने जो छोटा शॉर्ट्स पहना था वो उनकी जांघों को लगभग पूरा दिखा रहा था। उनकी गोरी और मुलायम जांघें साफ नजर आ रही थी। शॉर्ट्स इतना फिट था कि उनके शरीर का शेप और ज्यादा उभर कर दिख रहा था। सामने की तरफ कपड़े की हल्की फिटिंग उनके नाजुक हिस्से की जगह को भी थोड़ा उभार रही थी, जिसे देख कर मैं तुरंत दूसरी तरफ देखने की कोशिश करने लगा। उनके खुले बाल कंधों पर गिर रहे थे और वो हल्की मुस्कान के साथ मेरी तरफ देख रही थी। शायद वो मेरे चेहरे का रिएक्शन देखना चाहती थी।
फिर अचानक उन्होंने हल्की शर्म वाली आवाज में कहा, “गोलू… तुम्हारा लंड खड़ा हो रहा है।”
पहले तो मुझे समझ ही नहीं आया कि वो क्या बोल रही थी। मैं बस उनको देखे जा रहा था। फिर उन्होंने धीरे से नीचे की तरफ इशारा किया।
मैंने जैसे ही अपनी पैंट की तरफ देखा, मेरा चेहरा शर्म से गर्म हो गया। मेरी पैंट का कपड़ा आगे की तरफ उभरा हुआ था। शायद उनको उस आउटफिट में देख कर मुझे खुद पता भी नहीं चला कि मेरा शरीर कैसे रिएक्ट कर रहा था।
मैंने तुरंत अपने हाथ से उसे ढकने की कोशिश की और नज़रें नीचे कर ली।
“सॉरी दीदी…” मैंने शर्माते हुए धीरे से कहा।
लेकिन इस बार उन्होंने ना मुझे डांटा और ना ही गुस्सा किया। कुछ साल पहले वाली सोनाली दीदी होती तो शायद मुझे थप्पड़ मार देती या फिर गुस्से में घर से बाहर चली जाती। लेकिन अब चीजें पहले जैसी नहीं रही थी।
पिछले कुछ महीनों में हमारे बीच बहुत कुछ बदल चुका था। हम दोनों एक ही अपार्टमेंट में रहते-रहते एक-दूसरे के इतने करीब आ गए थे कि अब कुछ बातें उतनी अजीब नहीं लगती थी जितनी पहले लगती थी।
मैं उनको पहले भी बिना कपड़ों के देख चुका था। उन्होंने मुझे किस्स भी किया था। वैलेंटाइन डे वाली रात तो वो कुछ देर के लिए मेरी गोद में भी बैठी थी। उस समय हम दोनों ने कपड़े पहने हुए थे, लेकिन फिर भी उस पल की नज़दीकी आज तक मेरे दिमाग में थी।
उन्होंने बस हल्की सी शर्म वाली मुस्कान दी और फिर मेरी तरफ देख कर बोली, “इतना भी मत शर्मा गोलू… मैं समझ सकती हूँ।”
अगले दिन से सोनाली दीदी ने जिम जाना शुरू कर दिया। सच बोलूं तो मेरा भी उनके साथ जिम जाने का मन था। मैं उनके साथ टाइम बिताना चाहता था और उनको वर्कआउट करते देखना भी। लेकिन उन्होंने जिस जिम को जॉइन किया था वो सिर्फ महिलाओं का जिम था। वहां लड़कों को अंदर आने की इजाजत नहीं थी।
जब भी वो शाम को जिम के लिए तैयार होती थी, मैं उनको बस देखता रह जाता था। उनका वही टाइट जिम टॉप और छोटा शॉर्ट्स उनकी बॉडी पर बहुत अच्छा लगता था। वो अपने बाल ऊपर बांधती थी और फिर पानी की बोतल लेकर निकल जाती थी।
लेकिन पता नहीं क्यों, मुझे अंदर ही अंदर जलन भी होने लगी थी। मैं सोचता था कि वहां जिम में बाकी लड़कियां रोज उनको ऐसे देखती होंगी। जब सोनाली दीदी भारी वजन उठाती होंगी तो उनके स्तन हल्के हल्के हिलते होंगे। उनके माथे और गर्दन पर पसीना आता होगा। शायद पसीने की छोटी बूंदें उनके गले से नीचे जाती होंगी और उनके टॉप के अंदर गायब हो जाती होंगी।
कभी-कभी मैं उनके बारे में सोचते हुए उनकी पतली कमर याद करने लगता था। वर्कआउट के बाद शायद उनकी कमर पर पसीने की हल्की चमक आ जाती होगी। उनके जिम वाले कपड़े शरीर से चिपक जाते होंगे और वो थक कर गहरी सांस लेती होंगी। ये सब सोच कर मेरे मन में अजीब सी बेचैनी और खिंचाव दोनों होने लगता था।
फिर धीरे-धीरे लगभग पूरा महीना गुज़र गया। अब सोनाली दीदी रोज जिम जाती थी। पहले के मुकाबले वो थोड़ी ज्यादा फिट और एक्टिव लगने लगी थी, लेकिन साथ में उनकी थकान भी बढ़ गई थी।
एक शाम जब वो जिम और ऑफिस दोनों से वापस आई तो उनको देख कर मुझे तुरंत समझ आ गया कि आज वो बहुत ज्यादा थक चुकी थी। वो धीरे-धीरे चल रही थी, जैसे उनके शरीर में बिल्कुल ताकत नहीं बची हो। उनके बाल थोड़े बिखरे हुए थे और चेहरे पर थकान साफ दिख रही थी।
उन्होंने आते ही अपना बैग नीचे रखा और बिना कुछ बोले सीधे सोफे पर बैठ गई। बैठते ही उन्होंने लंबी सांस ली और अपना सिर पीछे टिकाकर आंखें कुछ सेकंड के लिए बंद कर ली।
मैं तुरंत उनके पास गया और पूछा, “क्या हुआ दीदी? आप ठीक हो?”
उन्होंने धीरे से अपनी आंखें खोली और थकी हुई आवाज में बोली, “गोलू… आज तो मेरे हाथों में बिल्कुल जान नहीं बची। मुझसे कुछ उठाया भी नहीं जा रहा।”
इतना बोलते हुए उन्होंने अपने हाथ हल्के से ऊपर उठाने की कोशिश की, लेकिन फिर दर्द की वजह से वापस नीचे रख दिए।
मैंने उनकी हालत देख कर धीरे से पूछा, “दीदी… मैं आपके हाथों की मसाज कर दूं क्या?”
उन्होंने तुरंत थकी हुई आवाज में कहा, “प्लीज गोलू… कर दो। बहुत दर्द हो रहा है।”
मैं जल्दी से कमरे में गया और जंडू बाम लेकर वापस आया। तब तक वो सोफे पर आराम से लेट चुकी थी। उन्होंने अपने दोनों हाथ ढीले छोड़ दिए थे और आंखें आधी बंद कर रखी थी।
मैं उनके पास बैठ गया और धीरे-धीरे उनके हाथों पर बाम लगाने लगा। बाम की खुशबू पूरे हॉल में फैलने लगी। उनकी मुलायम गोरी त्वचा पर जैसे ही मैंने बाम लगाया, वहां हल्की लालिमा आने लगी।
मैं बहुत आराम से उनके हाथ दबा रहा था। कभी उनकी हथेलियां दबाता, कभी बाजुओं को हल्के हाथों से दबाता। शुरुआत में वो दर्द की वजह से हल्का सा चेहरा सिकोड़ रही थी, लेकिन धीरे धीरे उनके चेहरे पर आराम दिखने लगा।
उनके होंठों से धीमी-धीमी राहत वाली आवाजें निकल रही थी। कभी वो गहरी सांस लेती, कभी आंखें बंद करके सिर पीछे टिकाती। ऐसा लग रहा था जैसे दर्द और आराम दोनों एक साथ महसूस हो रहे हों।
फिर थोड़ी हिचकिचाहट के साथ उन्होंने मेरी तरफ देखा और धीमी आवाज में बोली, “गोलू… मेरे सीने में भी बहुत दर्द हो रहा है। क्या तुम वहां भी हल्की मसाज कर दोगे?”
“आपके सीने में… दीदी?” मैंने थोड़ा हिचकिचाते हुए पूछा।
उन्होंने धीरे से सिर हिलाया। फिर कुछ सेकंड चुप रहने के बाद वो धीमी आवाज में बोली, “हां गोलू… लेकिन पहले एक बात का प्रॉमिस करो।”
मैं उनकी तरफ देखने लगा।
“तुम कुछ गलत मत सोचना,” उन्होंने हल्की शर्म और झिझक के साथ कहा। “तुम ये सिर्फ इसलिए कर रहे हो क्योंकि तुम्हारी बड़ी बहन दर्द में है… और तुम एक अच्छे छोटे भाई की तरह उनकी मदद कर रहे हो। बस इतना ही।”
मैंने धीरे से सिर हिलाया और बोला, “ओके दीदी… मैं कुछ गलत नहीं सोचूंगा।”
उन्होंने लंबी गहरी सांस ली, खड़ी हुई और अपना टॉप उतार दिया। अंदर उन्होंने काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी। वो मेरी आंखों में देखने लगी। फिर उन्होंने धीरे से ब्रा खोली और उसे नीचे जमीन पर फेंक दिया। अब उनके स्तन पूरी तरह मेरी आंखों के सामने थे।
मैं कुछ सेकंड तक बस उनको देखता रह गया। उनके बड़े और गोल स्तन बिल्कुल खुले थे। उनकी गोरी त्वचा पर हल्की लालिमा अभी भी दिख रही थी, शायद जिम की वजह से। उनके स्तन भारी होने की वजह से हल्के नीचे की तरफ झुके हुए थे, लेकिन फिर भी बहुत खूबसूरत लग रहे थे। जब वो गहरी सांस ले रही थी तब उनके स्तन धीरे धीरे ऊपर नीचे हो रहे थे।
मैंने खुद को संभालते हुए धीरे से कहा, “अब सोफे पर लेट जाइए दीदी।”
उन्होंने तुरंत अपने दोनों हाथों से अपने स्तनों को ढक लिया। उनके चेहरे पर हल्की शर्म साफ दिख रही थी। फिर वो धीरे-धीरे सोफे पर लेट गई। उनके लंबे बाल पूरे सोफे पर फैल गए थे। कुछ बाल उनके कंधों पर थे और कुछ उनकी छाती के पास आकर रुक गए थे। वो आराम से लेटी हुई थी और धीरे-धीरे सांस ले रही थी। हर सांस के साथ उनके स्तनों में हल्की सी हरकत हो रही थी।
मैं धीरे से उनके पास गया। मैंने बहुत आराम से उनके हाथों को थोड़ा साइड में किया ताकि वो आराम से लेट सकें। फिर मैंने उनके लंबे बालों को भी धीरे से हटा कर एक तरफ कर दिया क्योंकि वो उनकी छाती पर आ रहे थे।
मैंने जंडू बाम अपने हाथों पर लिया। बाम की खुशबू पूरे कमरे में फैल गई। फिर मैंने बहुत धीरे से बाम उनके ऊपरी स्तनों पर लगाना शुरू किया। जैसे ही मेरे हाथ उनकी गर्म चमड़ी को छुए, उनके होंठों से हल्की सी सांस निकली। शायद जिम की थकान की वजह से उनको सच में दर्द हो रहा था।
मैं धीरे-धीरे उनके स्तनों के ऊपर हाथ घुमा रहा था ताकि उनको आराम मिले। बाम की वजह से उनकी चमड़ी पर हल्की चमक आने लगी थी। मेरे हाथों के दबाव से उनके स्तन हल्के-हल्के दब रहे थे और फिर वापस अपने शेप में आ रहे थे। वो आंखें बंद करके बस धीरे धीरे राहत की आवाजें निकाल रही थी।
जब मैं थोड़ा नीचे की तरफ मसाज करने लगा तो उनकी सांसें थोड़ी गहरी होने लगी। उनके स्तनों के बीच की जगह पर बाम की हल्की गर्माहट महसूस हो रही थी। उनके निप्पल ठंडी हवा और मेरे हाथों की वजह से थोड़े सख्त हो गए थे। जब कभी मेरे हाथ वहां के आस-पास जाते, उनके शरीर में हल्की सी हरकत महसूस होती।
फिर अचानक उन्होंने आंखें बंद रखते हुए धीमी आवाज में कहा, “गोलू… तुम्हारे हाथ बहुत मुलायम हैं।”
उनकी बात सुन कर मेरे चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई। मैं कुछ सेकंड तक उनको देखता रहा, फिर धीरे से बोला, “और आपके बूब्स भी बहुत मुलायम हैं दीदी।”
मेरी बात सुनते ही उन्होंने धीरे से आंखें खोली और हल्की शर्म के साथ बोली, “ऐसी बातें मत करो गोलू… मैं तुम्हारी बड़ी बहन हूँ।”
उनकी आवाज में गुस्सा नहीं था। वो बस थोड़ा शर्म महसूस कर रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे वो नहीं चाहती थी कि मैं उस तरह की बातें करूं। लेकिन उन्होंने मुझे रोका भी नहीं।
मैं तुरंत चुप हो गया। फिर बिना कुछ बोले धीरे धीरे उनके स्तनों की मसाज करता रहा। मेरे दोनों हाथ बहुत आराम से उनके स्तनों पर घूम रहे थे। जब मैंने उनको अपने हाथों में पकड़ा तो मुझे उनकी गर्माहट साफ महसूस हुई। उनके स्तन बहुत मुलायम थे। ऐसा लग रहा था जैसे मेरे हाथ किसी बहुत नरम चीज को छू रहे हों।
मैं बहुत धीरे-धीरे अपने हाथ घुमा रहा था। कभी ऊपर की तरफ, कभी साइड से पकड़ कर हल्का दबाव देता। उनके स्तनों की नरमी मेरे हाथों में लगातार महसूस हो रही थी। मेरे हाथों की हर हरकत के साथ उनका शरीर हल्का सा हिलता और वो आंखें बंद किए बस शांत लेटी रहती।
कभी उनके होंठों से हल्की सी सांस निकलती, कभी वो धीरे से लंबी सांस लेती। उनके चेहरे पर हल्की शर्म थी, लेकिन साथ में वो रिलैक्स भी महसूस कर रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे वो बस मेरे हाथों को महसूस कर रही हो और उस पल में खो गई हो।
लगभग आधा घंटा ऐसे ही गुजर गया। फिर उन्होंने धीरे से आंखें खोली और हल्की थकी हुई आवाज में बोली, “बस गोलू… अब काफी है। अब मुझे अच्छा लग रहा है।”
उनकी बात सुनते ही मैंने धीरे-धीरे अपने हाथ पीछे कर लिए और उनके स्तनों की मसाज रोक दी। फिर मैं चुप-चाप सोफे पर बैठ गया। मेरी सांस अभी भी थोड़ी तेज चल रही थी।
वो धीरे-धीरे उठ कर बैठी। फिर अपने खुले बालों को पीछे किया और हल्की शर्म वाली मुस्कान के साथ बोली, “मुझे अब कपड़े पहनने हैं। मैं अभी आती हूँ।”
इतना बोल कर वो धीरे-धीरे कमरे के अंदर चली गई। मैं उसी सोफे पर बैठा रह गया। मेरा दिमाग अभी भी उसी पल में अटका हुआ था। मैं बस यही सोच रहा था कि मैं कितना खुशनसीब हूँ कि सोनाली दीदी ने मुझे इतना करीब आने दिया। उनके स्तनों को अपने हाथों में महसूस करने का एहसास अभी भी मेरे हाथों में बाकी था और मैं चुप-चाप उसी बारे में सोचता रहा।