भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
मेरी और दिव्या की चुदाई होने वाली थी। मैंने दिव्या को बिस्तर पर लिटा दिया। मेरे मुंह में दिव्या के मम्मे का निप्पल था। इसके साथ ही मैंने हाथ नीचे करके दिव्या की फुद्दी मैं उंगली ऊपर-नीचे करनी शुरू कर दी।
दिव्या मस्ती में बोली, “बस धीरज, अब अंदर डालो यार फुद्दी के अंदर, रहा नहीं जा रहा।”
मैं उठा और एक हाथ से लंड पकड़ा और दिव्या की फुद्दी की फांकों के बीच ऊपर-नीचे करने लगा। एक जगह लंड जरा सा अटका, और वहीं मैंने लंड को अंदर धकेल दिया। छेद बहुत टाइट था। लंड मुश्किल से अंदर जा पा रहा था। मैंने लंड छेद पर रख कर छोड़ दिया और दिव्या को बाहों में ले कर लंड को और अंदर धकेला। लंड का टोपा शायद अंदर चला गया था।
जैसे ही जरा सा लंड दिव्या की फुद्दी में गया, दिव्या ने चूतड़ ऊपर-नीचे किये जैसे पूरा लंड फुद्दी में लेना चाहती हो। दिव्या बोली, “धीरज बड़ा ही अच्छा लग रहा है।”
इसके बाद मैं पांच दस सेकंड रुका और थोड़ा लंड अंदर डालने के बाद उसने दिव्या से पूछा, “दिव्या कोई प्रॉब्लम तो नहीं?”
दिव्या तो जैसे बिफर ही गयी। दिव्या ऊंची आवाज में बोली, “भोसड़ी के धीरज, साले मादरचोद तू अभी भी यही सोच रहा है कि तू अपनी छोटी बहन को चोदने जा रहा है। अबे चूतिये, यहां मैं तेरा पूरा लंड अपनी फुद्दी में अंदर तक लेने के लिए मैं मरी जा रही हूं और तुझे मेरी प्रॉब्लम की पड़ी है? ऐसे चोद धीरज जैसे पैसे देकर एक रंडी को चोदने के लिए लाया है। चोद-चोद कर फाड़ मेरी फुद्दी, सुजा इसको, झाग निकाल फुद्दी में से चोद-चोद कर। धीरज ज्यादा सोच-सोच कर मेरा दिमाग खराब मत कर, और चोद मुझे अब।”
कहां तो मैं दिव्या को अभी भी छोटी कमसिन बच्ची समझ रहा था, और कहाँ दिव्या मेरा मोटा 3XL साइज़ फुद्दी में लेने के लिए मेरी जा रही थी। जिस तरीके की भाषा दिव्या बोल कर हटी थी, मैं समझ गया कि दिव्या भले ही अभी तक चुदी ना हो, मगर वो बच्ची नहीं थी।
जैसे ही दिव्या ने कहा, “भोसड़ी के धीरज, साले मादरचोद तू अभी भी यही सोच रहा है कि तू अपनी छोटी बहन को चोदने जा रहा है। अबे चूतिये, यहां मैं तेरा पूरा लंड अपनी फुद्दी में अंदर तक लेने के लिए मैं मरी जा रही हूं और तुझे मेरी प्रॉब्लम की पड़ी है? ऐसे चोद धीरज जैसे पैसे देकर एक रंडी को चोदने के लिए लाया है।”
इसके बाद तो मैंने लंड को दिव्या के फुद्दी पर रख कर एक ऐसा धक्का लगाया, कि मेरा मोटा लम्बा लंड दिव्या की फुद्दी की झिल्ली को चीरता हुआ टट्टों तक दिव्या की फुद्दी तक बैठ गया। इसके साथ ही मैं बोला, “ले फिर मादरचोद रंडी, ले मेरा लौड़ा। अब तुझे रंडी समझ कर ही चोदूंगा। अब देख फाड़ता हूं तेरी फुद्दी, निकालता हूं तेरी फुद्दी की झाग।”
जैसे ही मेरा का लंड दिव्या की फुद्दी में बैठा, दिव्या के मुंह से चीख निकली, “मर गयी धीरज, बड़ी जलन हुई है।”
मगर फिर मैं नहीं रुका और दिव्या को बाहों में जकड़ कर दिव्या के होंठ अपने होंठों में ले लिए और जोर-जोर के धक्के लगाने लगा – बिलकुल वैसे ही जैसे वो होटलों में रंडियां चोदते वक़्त – जैसे सुमन, निर्मला को लगाए थे और जैसे मम्मी को चोदते हुए लगाए थे।
इसके बाद तो मैंने जैसे दिव्या की चुदाई शुरू की, फिर मैं नहीं रुका, जब तक दिव्या की फुद्दी पानी नहीं छोड़ गयी।
दिव्या बस यही बोल रही थी, “धीरज जलन हो रही है आह दर्द कर रहा है। मगर जल्दी ही दिव्या की दर्द जगह मजे ने ले ली।
अब दिव्या बोल रही थी, “धीरज मजा आ रहा है, क्या मस्त लंड है धीरज, क्या रगड़ाई हो रही है फुद्दी की।” दिव्या ने अपनी टांगें मेरे पीछे की और मुझे टांगों में जकड़ लिया।
बस इसके बाद तो दिव्या नीचे से चूतड़ घूमने लगे। अपनी ज़िंदगी की पहली चुदाई दिव्या दस मिनट भी नहीं झेल पायी और दिव्या को मजा आ गया। मेरी और दिव्या की मस्त चुदाई हो रही थी। दिव्या की टाइट फुद्दी की वजह से लंड पर खूब रगड़े लग रहे थे।
दिव्या को एक बार मजा आया, फिर दूसरी बार मजा आया, मगर जब दो बार मजा आने की बाद भी दिव्या ने मुझे अपनी टांगों में जकड़े रखा, तो मैं समझ गया कि अब दिव्या पूरी मस्ती में आ चुकी थी और अभी और चुदाई करवाना चाहती थी।
मैं दिव्या को चोदता रहा। और जब दिव्या की फुद्दी ने तीसरी बार पानी छोड़ा, तब दिव्या बोली, “कितना मजा आता है यार चुदाई करवाने का।” और इसके साथ ही दिव्या ने टांगें मेरी कमर से हटा ली और ढीली हो गयी।
दिव्या जैसे अपने आप से बोली, “शुक्र है मेरी पहली चुदाई ही मस्त रही, मेरी फ्रेंड्स तो बताती कई बार तो कुंवारी फुद्दी देख कर लड़कों का लंड तो फुद्दी के अंदर जाने से पहले बाहर ही पानी छोड़ देता है।”
दिव्या बोली, “सच में धीरज बड़ा ही मजा आया है तुझसे चुदाई करवाने का। अब तो जब तक तुम्हारी शादी नहीं हो जाती, और मेरे पास भी मेरा अपना लंड नहीं आ जाता, ऐसे ही चोदते रहना मुझे।”
मैंने लंड दिव्या की फुद्दी में से निकाल लिया और दिव्या के पास ही लेट गया। दिव्या ने मेरा खड़ा लंड हाथ में ले लिया और हल्का-हल्का दबाने लगी। दिव्या कुछ देर ऐसे ही लेटी रही, फिर दिव्या उठी और बोली, “धीरज मुझे पेशाब आया है, मैं पेशाब करके आती हूं।” उठते हुए दिव्या बोली, “धीरज नीचे कुछ गीला-गीला सा लग रहा है।”
उठते ही दिव्या ने नीचे हाथ करके अपनी फुद्दी पर हाथ फेरा और हाथ की तरफ देखा। हाथ पर लाल-लाल कुछ लगा हुआ था। फिर दिव्या ने तकिये की तरफ देखा। तकिये पर भी खून का लाल-लाल धब्बा था। दिव्या बोली, “धीरज लगता है सील टूट गयी मेरी फुद्दी की।” इसके साथ ही दिव्या ने तकिये का कवर उतारा और बाथरूम में ले गयी।
पंद्रह मिनट के बाद दिव्या बाहर आई।
मैंने दिव्या से पूछा, “दिव्या सब ठीक है ना, कोइ दिक्कत कोइ प्रॉब्लम तो नहीं?”
दिव्या बोली, “नहीं धीरज, फुद्दी में हल्की जलन और दर्द हो रही है।”
ये बोल कर दिव्या मेरे पास ही लेट गयी – नंगी, और मेरा खड़ा लंड हाथ में पकड़ लिया। फिर जैसे दिव्या को कुछ ध्यान आया और दिव्या बोली, “धीरज तुम्हारा अभी भी क्यों खड़ा है, तुम्हें चुदाई का मजा नहीं आया?”
मैंने कहा, “दिव्या, मुझे जल्दी मजा नहीं आता, जल्दी मेरा लंड पानी नहीं छोड़ता। और वैसे भी जब मेरा लंड तुम्हारी फुद्दी में गर्म-गर्म पानी छोड़ेगा, तब तुम्हें भी पता चलेगा कि मेरे लंड में से कुछ गरम-गरम निकल कर तुम्हारी फुद्दी में गया है, और इसके साथ ही तुम्हें चुदाई से आने वाला मजा भी दुगना हो जाएगा।”
दिव्या फिर मेरे के पास ही लेट गयी और मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर ऐसे ही खिलवाड़ करती रही। दस-पंद्रह मिनट की बाद दिव्या बोली, “धीरज एक बार और चोद दो यार। बड़ा मजा आता है चुदाई का तो।”
मैनें कहा, “दिव्या, तुम तो कह रही थी जलन हो रही है, हल्का दर्द भी हो रहा है। फिर एक और चुदाई? अगर और दर्द हुआ तो? मेरा लंड तो तुम देख ही रही हो ये तो फिर से अंदर जाते हुए तुम्हारी फुद्दी को चौड़ा करेगा। अगर और ज़्यादा दर्द हुई तो?”
दिव्या बोली, “धीरज अगर दर्द होगी तो मजा भी तो आएगा, तुम चोदो बस, मेरी दर्द की परवाह मत करो।”
मैंने उठते हुए कहा, “अगर ये बात है तो ठीक है, चल दिव्या अब पीछे से चोदता हूं, लंड और भी अंदर तक जाएगा, मस्त रगड़े लगेंगे फुद्दी में।”
दिव्या भी उठते हुए बोली, “पीछे से? जैसे कुत्ता कुतिया को चोदता है, वैसे ही? और पूरा अंदर जाएगा?”
मैंने कहा, “हां दिव्या जैसे कुत्ता कुतिया को चोदता है, अपनी अगली टांगों में कुतिया को जकड़ कर – हिलने भी नहीं देता कुतिया को जितना मर्जी कुतिया चूं चूं कूँ कूँ करती रही। ऐसे ही अब मैं तुझे भी चोदूंगा – हिलने भी नहीं दूंगा तुझे।”
दिव्या बोली, “ये हुई ना बात मेरे भाई, बढ़िया है ये तो – बता कहां लेटना है और कैसे?”
मैंने कहा, “इधर आजा मेरी बहन”, और मैंने दिव्या को बेड की किनारे पर उल्टा लिटा दिया और नीचे बैठ कर दिव्या की चूतड़ चाटने लगा।
थोड़ी देर की बाद मैं खड़ा हुआ और थूक लगा कर लंड दिव्या के चूतड़ों के छेद पर रखा और अंदर धकेलने लगा। दिव्या ने फिर से सर घुमाया और बोली, “धीरज बड़ा मजा आ रहा है, ये क्या कर रहे हो?” साथ ही दिव्या बोली, “धीरज पीछे वाले छेद में डालना है क्या?”
मैं बोला, “नहीं दिव्या, ऐसे ही ट्राई कर रहा था।” इसके साथ ही मैंने लंड दिव्या की फुद्दी पर रखा और एक करारा झटका लगाते हुए लंड टट्टों तक दिव्या की फुद्दी के अंदर बिठा दिया।
दिव्या हल्की सी चिहुंकी मगर बोली कुछ नहीं। फिर मैंने दिव्या को जो चोदना शुरू किया और दिव्या को एक बार फिर मजा आ गया।
इस बार दिव्या पंद्रह-बीस मिनट की चुदाई झेल गयी। पंद्रह मिनट की चुदाई के बाद दिव्या ने फिर एक सिसकारी ली, “धीरज बड़ा मजा आ रहा है, आह धीरज चोदो, धीरज चोदो मुझे। आह धीरज बड़े रगड़े लग रहे हैं फुद्दी मैं, बड़ा ही मजा आ रहा है धीरज। सच में पूरा अंदर तक जा रहा है।”
मैंने दिव्या को कमर से कस कर पकड़ लिया और बोलने लगा, “ले दिव्या मेरी जान, तेरी फुद्दी भी तो मस्त है दिव्या। बिलकुल टाइट। लंड जकड़ा पड़ा है फुद्दी के अंदर।”
मजे के मारे दिव्या जोर-जोर से चूतड़ आगे-पीछे करने लगी और बोलने लगी, “धीरज ये तो फिर से मजा आने वाला हो गया। आह धीरज चोदते रहो ऐसे ही।”
तभी दिव्या ने एक सिसकारी ली, “आअह मम्मी आआह मजा आ गया ये तो आह धीरज बड़ा मजा आ रहा है। आह धीरज और जोर से चोदो मेरे ऱाजा, मेरे भाई और जोर से चोदो मेरी फुद्दी अपने इस मोटे लंड से।”
दिव्या के ये बातें सुन कर मैं समझ गया के दिव्या अब मस्त हो चुकी है, मैंने और भी जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। दिव्या पूरी मस्त हो चुकी थी। दिव्या बोली, “हां धीरज ऐसे ही, अब मत रुकना प्लीज़, अब मेरी फुद्दी छोड़ने लगे है पानी। तभी दिव्या ने एक जोर की सिसकारी ली, “आआह धीरज निकल गया, क्या मस्त मजा आया है। धीरज आअह आअह…आह… आह धीरज निकला मेरा आह आह धीरज, धीरज।”
मेरे धक्के चालू थे। दिव्या को मैंने कमर से पकड़ा हुआ था। कुछ ही से धक्कों के बाद दिव्या को फिर से मजा आ गया। इस बार का दूसरा और आज का पांचवां मजा।
मेरी नजर लंड पर गयी तो देखा लंड पर लाल लाल कुछ लगा हुआ था। मैं समझ गया दिव्या की फुद्दी का खून है, फुद्दी में से अभी भी हल्का-हल्का खून निकल रहा है – मगर दिव्या कुछ बोल नहीं रही थी इस लिए मैं भी नहीं रुका और दिव्या को चोदता ही कहा।
थोड़ी देर देर दिव्या सर पीछे घुमा कर बोली, “धीरज बस भाई, अब थक गयी मैं। अब बस करो।”
मैं भी समझ गया, दिव्या सच में ही थक गयी होगी। इतनी चुदाई झेलना वो भी इतने मोटे लंड की चुदाई, बड़ी हिम्मत वाली थी दिव्या।
और मैंने ने दिव्या की फुद्दी में से लंड निकल लिया। दिव्या भी सीधी हुई और मेरे खूंटे जैसे लंड को देख कर बोली, “ये क्या धीरज तुम्हारा लंड अभी भी वैसा का वैसा ही है ढीला नहीं हुआ? क्या निकला नहीं तुम्हारे लंड का पानी? मजा नहीं आया तुम्हे अब भी?” ये बोल कर दिव्या ने मेरा लंड पोंछा और मुंह में ले कर चूसने लगी।
मैंने कहा, “दिव्या अभी मुझे मजा नहीं आया। दिव्या तुझे बताया तो था, जब मुझे मजा आएगा तो तो मेरे लंड में से गरम गरम गाढ़ा-गाढ़ा सफ़ेद रंग का पानी निकल कर तुम्हारी फुद्दी में गिरेगा और तुम्हें भी पता लगेगा कि मेरे लंड से कुछ निकल कर तुम्हारी फुद्दी में गिरा है।”
दिव्या ने पूछा, “कमाल है इतनी चुदाई में भी नहीं निकला तुम्हारा? तो धीरज अब तुम क्या करोगे? कैसे लंड का वो गरम पानी निकालोगे?”
मैं कहा, “मैं अभी कुछ नहीं करूंगा। अगर तुम कहोगी तो मैं एक बार और तुम्हारी चुदाई कर दूंगा और लंड का पानी तुम्हारी चूत में निकाल दूंगा।”
दिव्या मेरा लंड पकड़ कर बोली, “धीरज मन तो बहुत है अभी की अभी चुदाई करवा के देखने का कि कैसा लगता है जब लंड से गरम पानी फुद्दी में जाता है।”
फिर जैसे दिव्या को कुछ याद आया। दिव्या बोली, “धीरज टाइम क्या हुआ है। मम्मी भी तो आने वाली होगी।”
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