एक फैमिली ऐसी भी-9

भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-

मेरी और दिव्या की चुदाई होने वाली थी। मैंने दिव्या को बिस्तर पर लिटा दिया। मेरे मुंह में दिव्या के मम्मे का निप्पल था। इसके साथ ही मैंने हाथ नीचे करके दिव्या की फुद्दी मैं उंगली ऊपर-नीचे करनी शुरू कर दी।

दिव्या मस्ती में बोली, “बस धीरज, अब अंदर डालो यार फुद्दी के अंदर, रहा नहीं जा रहा।”

मैं उठा और एक हाथ से लंड पकड़ा और दिव्या की फुद्दी की फांकों के बीच ऊपर-नीचे करने लगा। एक जगह लंड जरा सा अटका, और वहीं मैंने लंड को अंदर धकेल दिया। छेद बहुत टाइट था। लंड मुश्किल से अंदर जा पा रहा था। मैंने लंड छेद पर रख कर छोड़ दिया और दिव्या को बाहों में ले कर लंड को और अंदर धकेला। लंड का टोपा शायद अंदर चला गया था।