पिछला भाग पढ़े:- दीपिका दीदी और मेरा राज-6
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
अगली सुबह जब मेरी आँख खुली, तो मुझे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि यह दिन मेरे लिए इतना भारी साबित होगा। मैं अभी बिस्तर पर ही था कि माँ ने कमरे के बाहर से आवाज़ लगाई, “जल्दी उठ जा, दीपिका दीदी आज वापस मुंबई जा रही है। उसकी कॉलेज की छुट्टियाँ खत्म हो गई हैं।”
माँ की बात सुनते ही जैसे मुझे जोर का झटका लगा। कुछ पल तक मैं बिस्तर पर चुप-चाप बैठा रहा। मुझे समझ ही नहीं आया कि इस खबर पर क्या महसूस करूँ। ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने अचानक मेरे अंदर की सारी खुशी छीन ली हो।
इन कुछ दिनों में दीपिका दीदी मेरे लिए सिर्फ मेरी बड़ी बहन नहीं रह गई थी। दिन में हम अक्सर साथ बैठ कर बातें करते थे। कभी छत पर, कभी कमरे में, तो कभी रात को सब के सो जाने के बाद धीमी आवाज़ में एक-दूसरे से दिल की बातें करते थे। उन पलों में दीपिका दीदी का एक अलग ही रूप सामने आता था। वह कभी मेरे बालों में उँगलियाँ फेरती, कभी मेरे गालों को छूकर मुस्कुराती, तो कभी मुझे अपने पास खींच कर लंबे समय तक गले लगाए रखतीं।
धीरे-धीरे हमारे बीच की दूरी लगभग खत्म हो गई थी। कई बार वह मेरे सीने पर सिर रख कर लेट जाती थी। मैं उनके स्तनों की गर्माहट अपने सीने पर महसूस करता था। कभी मैं उनके स्तनों को अपने हाथों में लेकर हल्के से दबाता और सहलाता, तो वह आँखें बंद करके मुस्कुरा देती थी। कई बार वह मेरे बहुत करीब आकर मेरे लंड को अपने हाथों से महसूस करती थी, जिससे मेरी साँसें तेज हो जाती थी। मैं भी उनके स्तनों को चूमता, उन्हें अपने हाथों से सहलाता और उनके नाजुक हिस्से की झलक याद करके भीतर तक सिहर उठता था। जब उन्होंने पहली बार मुझे अपना नाजुक हिस्सा दिखाया था, तो मेरी साँसें तेज हो गई थी।
हालांकि उन्होंने मुझसे कहा था कि जिस दिन मैं उनसे शादी करूँगा, उस दिन वह खुद को पूरी तरह मेरे हवाले कर देंगी।लेकिन अब जब माँ ने बताया कि वह वापस मुंबई जा रही हैं, तो मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरे हाथ से कुछ बहुत खास फिसल रहा हो।
मैं सोच रहा था कि हमने इन छुट्टियों में कितना कुछ महसूस किया। उनकी हँसी, उनका मेरे कंधे पर सिर रख कर बैठना, मेरा उन्हें बाँहों में भरना, उनका मुझे अपने पास सुलाना, उनके स्तनों की गर्माहट, मेरे लंड का उनके स्पर्श से सख्त हो जाना, और उनका नाजुक हिस्सा पहली बार देखने का वह पल — यह सब मेरी जिंदगी के सबसे यादगार पल बन चुके थे। मैं बिस्तर पर बैठा यही सोचता रहा कि अब वह वापस अपनी पढ़ाई पूरी करने चली जाएँगी, और मैं फिर से उनके इंतज़ार में दिन गिनता रहूँगा।
मैं धीरे-धीरे उनके पास गया। कुछ पल तक मैं चुप-चाप उन्हें सामान रखते हुए देखता रहा। आखिर मैंने धीमी आवाज़ में पूछा, “दीदी, आपने मुझे कल रात क्यों नहीं बताया कि आप आज मुंबई वापस जा रही हैं?”
मेरी बात सुन कर उनके हाथ एक पल के लिए रुक गए। उन्होंने बैग की चेन पर रखी उँगलियाँ ढीली छोड़ दी और मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में हल्की सी उदासी थी। वह कुछ पल तक मुझे देखती रही, जैसे सही शब्द ढूँढ रही हो।
फिर उन्होंने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा, “अगर मैं तुम्हें कल रात बता देती, तो शायद हमारी आखिरी रात इतनी खूबसूरत नहीं रह पाती। तुम सारी रात उदास रहते, और मैं भी।”
इतना कह कर उन्होंने बैग की चेन बंद कर दी। उन्होंने बैग उठाने के लिए हाथ बढ़ाया ही था कि मैंने जल्दी से उनका हाथ पकड़ लिया। उन्होंने हैरानी से मेरी तरफ देखा। मेरी उँगलियाँ उनके हाथ को कस कर थामे हुए थी। मैं उन्हें जाते हुए देखने के लिए तैयार नहीं था। गले में कुछ अटक सा गया था, लेकिन फिर भी मैंने धीमी आवाज़ में कहा, “दीदी, अभी तो हमारे बीच बहुत कुछ बाकी है। हमने अभी तक कितनी बातें अधूरी छोड़ दी हैं।”
मेरी बात सुन कर उनके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आ गई। उन्होंने अपना बैग वापस बिस्तर पर रख दिया और मेरे और करीब आ गई। अपने खाली हाथ से उन्होंने मेरे गाल को हल्के से सहलाया और बहुत नरम आवाज़ में बोली, “गोलू, मैंने तुम्हें पहले ही कहा था… अगर तुम मुझे चोदना चाहते हो, तो पहले तुम्हें मुझसे शादी करनी होगी।”
उनकी बात सुन कर मैं चुप-चाप उनकी आँखों में देखता रहा। अगले ही पल वह और करीब आ गई। हमारे बीच अब इतनी कम दूरी बची थी कि मैं उनकी साँसों की गर्माहट अपने चेहरे पर महसूस कर सकता था। उन्होंने धीरे से अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। वह चुंबन बहुत छोटा था, सिर्फ एक पल का। जब वह पीछे हटी, तो उनके होंठों पर हल्की सी मुस्कान थी। फिर उन्होंने शांति से अपना बैग उठाया, मुड़ी, और कमरे से बाहर चली गई। मैं वहीं खड़ा उन्हें जाता हुआ देखता रह गया।
उस दिन दीपिका दीदी मुंबई वापस चली गई। जब उनकी ट्रेन स्टेशन से निकल गई, तो मुझे पहली बार सच में महसूस हुआ कि घर कितना खाली हो गया है। पिछले कुछ दिनों में मैं हर पल उनके साथ रहा था, और अब अचानक सब कुछ सूना-सूना लगने लगा था।
शुरू के कुछ दिन मेरे लिए बहुत भारी रहे। मैं अक्सर उनके कमरे के पास रुक जाता, उनकी हँसी याद करता, और उन पलों को सोचता जो हमने साथ बिताए थे। लेकिन दीपिका दीदी ने मुझे कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया। हम रोज़ फोन पर बात करते थे। जैसे ही वह कॉलेज से अपने फ्लैट पर पहुँचती, कुछ ही देर बाद मेरे फोन पर उनकी तस्वीरें आने लगती। यह एक दिन की बात नहीं थी। लगभग हर दिन यही होता था।
कई बार वह नहाने के तुरंत बाद तस्वीर भेजती थी। उनके बाल अभी भी गीले होते, पानी की बूँदें उनके कंधों, गर्दन और स्तनों पर चमक रही होती। कभी वह आईने के सामने खड़ी होती, तौलिया एक तरफ रखा होता, और कैमरे की तरफ देख कर हल्की सी मुस्कान देती।
कभी वह बिस्तर पर लेटी हुई फोटो भेजती थी। चादर कमर तक खिसकी होती, उनके खुले स्तन तकिए की सफेदी पर और भी उभर कर दिखते। कभी वह करवट लेकर लेटती, जिससे उनके बदन की बनावट और भी खूबसूरत लगती।
कभी वह सिर्फ शर्ट पहन कर फोटो भेजती थी, जिसके बटन खुले होते। कभी सिर्फ चादर में लिपटी होती, और चादर थोड़ा हटाकर अपने स्तनों की झलक दिखाती। कभी बाथरूम के धुँधले शीशे के सामने खड़ी होकर तस्वीर भेजती, जिसमें उनका पूरा बदन किसी सपने जैसा लगता।
वह अक्सर छोटे-छोटे वीडियो भी भेजती थी। कई वीडियो में वह कैमरे के सामने बैठकर अपने बाल सुखाती, फिर धीरे-धीरे अपने स्तनों पर हाथ फेरती। कभी-कभी वह मुझे और भी ज़्यादा छेड़ने के लिए एक खीरा लेकर वीडियो बनाती थी। पहले वह उसे अपने हाथ में पकड़ कर कैमरे के सामने धीरे-धीरे घुमाती। फिर उसे अपने नाजुक हिस्से पर रखती और धीरे-धीरे अंदर ले जाने लगती। उनके चेहरे के भाव, उनकी तेज होती साँसें और उनकी आँखों में दिखाई देती चाहत देख कर मेरा लंड बेकाबू हो जाता था। वह खीरे को अंदर-बाहर करती, जैसे वह मेरी कमी को उसी तरह महसूस कर रही हों जैसे मैं उन्हें याद कर रहा था।
लगभग छह महीने ऐसे ही निकल गए। इस दौरान मैं खुद को समझाने की बहुत कोशिश करता रहा, लेकिन हर बार जब उनकी भेजी हुई तस्वीरें देखता, मेरे अंदर की बेचैनी और बढ़ जाती। उनकी मुस्कुराती हुई आँखें, उनका खूबसूरत चेहरा, और यह बात कि वे मुझे अपने साथ पूरी तरह अपनाना चाहती थी, मुझे बार-बार सोचने पर मजबूर करती थी कि आखिर मैं किस चीज़ से भाग रहा हूँ। शायद मैं उसी लड़की को खोने वाला था जिसे मैंने आज तक सबसे ज्यादा चाहा था।
आखिरकार मैंने तय कर लिया कि अब और इंतज़ार नहीं करूँगा। मैं उनकी शर्त मानने के लिए तैयार था। यह बात फोन पर कहना मुझे अजीब लग रहा था, इसलिए मैंने उन्हें बस इतना बताया कि मैं अगले दिन मुंबई आ रहा हूँ। मेरा मैसेज पढ़ते ही उन्होंने बिना कोई सवाल किए अपना पता भेज दिया। उनके जवाब से ही साफ था कि वे भी इस मुलाकात का उतना ही इंतज़ार कर रही थी जितना मैं।
अगले दिन सुबह मैं ट्रेन से मुंबई के लिए निकल पड़ा। पूरे छह घंटे का सफर मेरे लिए बेचैनी से भरा हुआ था। खिड़की के बाहर बदलते नज़ारे दिख रहे थे, लेकिन मेरा ध्यान कहीं और था। मैं बार-बार सोच रहा था कि इतने महीनों बाद जब हम आमने-सामने होंगे तो क्या होगा। क्या वे मुझे देखते ही मुस्कुरा देंगी? क्या वे अब भी मुझे उसी तरह चाहती होंगी? शाम तक मैं उनके अपार्टमेंट के सामने खड़ा था। मेरा दिल इतनी तेजी से धड़क रहा था कि जैसे सीने से बाहर आ जाएगा। मैंने गहरी साँस ली और डोरबेल दबा दी। कुछ ही सेकंड बाद दरवाज़ा खुला।
वे मेरे सामने थी। छह महीने बाद उन्हें सामने देख कर मैं कुछ पल के लिए वहीं रुक गया। तस्वीरों में वे जितनी सुंदर लगती थी, असल में उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत थी।
उन्होंने बिना कुछ कहे तुरंत मेरे गले में बाँहें डाल दी। मैं भी उन्हें कस कर अपने सीने से लगा लिया। इतने महीनों की दूरी एक पल में खत्म हो गई। उनका गर्म शरीर पूरी तरह मेरे शरीर से सट गया था। उनके मुलायम स्तन मेरे सीने पर दबे हुए थे। जब उन्होंने मुझे और कस कर पकड़ा, तो उनके स्तनों का नरम दबाव मुझे साफ महसूस हो रहा था। उनके शरीर की गर्माहट, उनकी खुशबू और उनके स्तनों का मेरे सीने से लगा होना मेरे अंदर दबे हुए सारे एहसास एक साथ जगा रहा था।
मैंने उन्हें और कस कर पकड़ा और धीमे से कहा, “मैंने आपको बहुत मिस किया, दीदी।”
उन्होंने मेरे गाल पर हाथ फेरते हुए कहा, “मैंने भी तुम्हें बहुत मिस किया, गोलू।”
उनके मुँह से अपना नाम सुनते ही मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अंदर ले आई। अपार्टमेंट साफ-सुथरा और बहुत आरामदायक लग रहा था। दरवाज़ा बंद करने के बाद उन्होंने मुझे सोफे पर बैठने का इशारा किया। कुछ ही पल बाद वे रसोई में गई और मेरे लिए पानी का एक गिलास लेकर लौटी। उन्होंने मुस्कुराते हुए गिलास मेरी ओर बढ़ाया।
मैंने पानी पिया और गिलास टेबल पर रख दिया। वे मेरे सामने बैठ गई। उन्होंने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “मैंने पहले से सोच रखा है कि आज की रात हम कैसे बिताने वाले है।” वे थोड़ी और पास खिसक आई और बोली, “यह तुम्हारा मुंबई आने का पहला मौका है, है ना?”
मैंने सिर हिला कर कहा, “हाँ, पहली बार आया हूँ।”
उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहा, “तो मैं चाहती हूँ कि आज की रात तुम्हारे लिए हमेशा यादगार बन जाए। मैं तुम्हें अपनी सबसे पसंदीदा जगह दिखाना चाहती हूँ।”
इतना कह कर वे धीरे से खड़ी हो गई। उन्होंने मुस्कुरा कर कहा, “चलो, पहले अच्छे कपड़े पहन लेते है।”
मैं अभी उन्हें देख ही रहा था कि उन्होंने अपने टी-शर्ट का किनारा पकड़ा और उसे धीरे-धीरे ऊपर उठाने लगी। कुछ ही सेकंड में उन्होंने टी-शर्ट उतार कर एक तरफ रख दी। अब उनके ऊपरी शरीर पर सिर्फ सफेद रंग की ब्रा थी। उनके भरे हुए स्तन उस ब्रा में साफ उभर रहे थे। ब्रा के कपड़े के पीछे उनके सख्त निप्पल हल्के से उभरे हुए दिख रहे थे। मैं उन्हें देखता रह गया। इतने महीनों तक सिर्फ तस्वीरों में देखने के बाद आज उन्हें अपने सामने इस तरह देखकर मेरी साँसें तेज़ हो गई।
उन्होंने मेरी तरफ देखा और मुस्कुरा कर पूछा, “क्या हुआ, गोलू? अपनी बड़ी बहन के सामने कपड़े बदलने में शर्म आ रही है?”
मैंने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “नहीं दीदी, मुझे कोई शर्म नहीं है।”
मेरी बात सुनकर उनकी मुस्कान और गहरी हो गई। मैं भी खड़ा हो गया और अपने सफर वाले कपड़े उतारने लगा। जैसे-जैसे मेरे कपड़े उतरते गए, मेरा लंड पूरी तरह तनकर खड़ा हो गया। इतने महीनों से जिस पल का इंतज़ार कर रहा था, वह आखिर मेरे सामने था।
उसी समय उन्होंने अपनी ब्रा की हुक खोली और उसे धीरे से उतार कर एक तरफ रख दिया। उनके खुले हुए स्तन पूरी तरह मेरे सामने थे। वे भरे हुए, मुलायम और बेहद खूबसूरत लग रहे थे। उनके निप्पल हल्के से सख्त थे। इसके बाद उन्होंने अपना शॉर्ट्स और फिर पैंटी उतार दी। कुछ ही पलों में हम दोनों एक-दूसरे के सामने बिना किसी परदे के खड़े थे। छह महीनों की दूरी के बाद यह पल मेरे लिए किसी सपने से कम नहीं था।
वे अलमारी के सामने जाकर कपड़े चुनने लगी। हर बार जब वे झुकती या ऊपर रखे कपड़ों की तरफ हाथ बढ़ाती, उनके स्तन हल्के-हल्के उछलते। मेरी नज़रें बार-बार उन्हीं पर जाकर टिक जाती। ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें पता हो कि मैं उन्हें लगातार देख रहा हूँ, फिर भी वे जान-बूझ कर बिना किसी जल्दबाज़ी के कपड़े चुन रही थी।
एक पल के लिए उनकी नज़र मेरे तन कर खड़े लंड पर ठहर गई। जैसे ही उन्होंने उसे देखा, उनकी साँस हल्की सी तेज हो गई। अगले ही पल उन्होंने शर्म से नज़रें दूसरी तरफ कर ली। उनके गालों पर एक प्यारी सी मुस्कान उभर आई।
मैं उन्हें देखता रहा, और वे धीरे-धीरे कपड़े चुनती रहीं। जब भी वे झुकती, उनके स्तन फिर से हिलते और मेरा ध्यान पूरी तरह उन्हीं पर टिक जाता। मुझे साफ महसूस हो रहा था कि वे मेरी नज़रों से पूरी तरह वाकिफ थी, और शायद इसी वजह से वे हर हरकत जान-बूझ कर धीरे-धीरे कर रही थी।
आखिरकार हमने कपड़े पहन लिए। उन्होंने अपने लिए नीले रंग की एक बहुत सुंदर बैकलेस ड्रेस चुनी। जब उन्होंने वह ड्रेस पहनी, तो उनकी खुली पीठ और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी। उनके बाल कंधों पर बिखरे हुए थे, जिससे उनकी पीठ का नज़ारा और भी दिलकश लग रहा था। मैं भी अपने कपड़े पहन लिए। लगभग पंद्रह मिनट बाद हम दोनों पूरी तरह तैयार थे। उन्होंने आईने में खुद को देखा, फिर मेरी तरफ मुड़ कर मुस्कुराई।
हम नीचे उतरे और सड़क से एक टैक्सी ली। टैक्सी में मैं उनके बिल्कुल पास बैठा था। उनके शरीर की गर्माहट और उनकी हल्की खुशबू मुझे लगातार महसूस हो रही थी। इतने करीब बैठ कर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।
कुछ देर बाद टैक्सी हमें गेटवे ऑफ इंडिया के सामने छोड़ गई। रात की रोशनी में वह जगह और भी खूबसूरत लग रही थी। चारों तरफ ठंडी हवा चल रही थी और पानी की तरफ से आती नम हवा माहौल को और खास बना रही थी।
उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और टिकट काउंटर तक ले गई। वहाँ से उन्होंने रात में पानी के बीच जाने वाले क्रूज़ के दो टिकट लिए। मैं उन्हें देख कर मुस्कुराया। अब समझ आ रहा था कि उन्होंने इस रात की कितनी खास तैयारी कर रखी थी। कुछ ही देर बाद हम क्रूज़ पर चढ़ गए। पानी के बीच जाते हुए ठंडी हवा मेरे चेहरे से टकरा रही थी। चारों तरफ सिर्फ पानी, दूर-दूर तक शहर की रोशनी और लहरों की आवाज़ सुनाई दे रही थी।
दीदी ने हमारे लिए क्रूज के अंदर एक निजी कमरा भी बुक किया था। कमरे की बड़ी खिड़की से बाहर पानी का शानदार नज़ारा साफ दिखाई दे रहा था। अंदर एक बड़ा और मुलायम बिस्तर था, जिस पर बैठकर भी बाहर की लहरें देखी जा सकती थी।
क्रूज़ आगे बढ़ने लगा तो उन्होंने चुप-चाप मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया। उनकी उंगलियों की नरमी और उनके हाथ की गर्माहट ने मेरे अंदर एक अजीब सा सुकून भर दिया।
हम दोनों बिस्तर पर बैठ गए। मैंने खिड़की को थोड़ा सा खोल दिया। ठंडी हवा कमरे के अंदर आने लगी। बाहर लहरों के टकराने की आवाज़ कानों को बहुत अच्छी लग रही थी।
कुछ देर तक हम दोनों बिना कुछ कहे बाहर देखते रहे। फिर वे धीरे से मेरी तरफ खिसक आई और अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया। उनके बाल मेरे गाल को हल्के से छू रहे थे और उनकी गर्म साँसें मुझे साफ महसूस हो रही थी।
उन्होंने मेरा हाथ और कस कर पकड़ लिया और धीमी आवाज़ में बोली, “गोलू, तुमने अभी तक यह नहीं बताया कि तुम मुझसे मिलने यहाँ क्यों आए हो।”
मैंने उनकी तरफ देखा। मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था। यही वह बात थी जो मैं उन्हें बताने के लिए इतने दूर आया था। मैंने गहरी साँस ली और धीमे से कहा, “क्योंकि मैं आपको यह बताने आया हूँ, दीदी, कि मैं आपसे शादी करने के लिए तैयार हूँ।”
मेरी बात सुनते ही वे धीरे से उठी और मेरे सामने आकर खड़ी हो गई। उन्होंने अपने दोनों हाथ सीने के सामने बाँध लिए। उनकी आँखें सीधे मेरे चेहरे पर टिक गई। वे बिना कुछ बोले मुझे ऐसे देख रही थी जैसे मेरी आँखों के अंदर झाँक कर यह जानना चाहती हों कि मैं जो कह रहा हूँ, वह दिल से कह रहा हूँ या नहीं।
उन्होंने हल्की सी भौंहें उठाई और धीमी आवाज़ में पूछा, “तुम मेरा मज़ाक तो नहीं उड़ा रहे हो ना?”
मैं तुरंत खड़ा हो गया और उनकी आँखों में देखते हुए कहा, “नहीं दीदी, मैं सच कह रहा हूँ।”
मेरी बात सुनते ही जैसे उनकी खुशी अचानक बाहर आ गई। उनके चेहरे पर ऐसी मुस्कान फैल गई जिसे देख कर साफ पता चल रहा था कि वे इस पल का कितने समय से इंतज़ार कर रही थी। वे खुशी से इधर-उधर कदम रखने लगी, जैसे उनका मन नाच उठी हो। अगले ही पल उन्होंने मुझे कस कर गले लगा लिया। उनकी बाँहें मेरे गले के चारों तरफ लिपट गई और उन्होंने बिना कुछ सोचे सीधे मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। उनके होंठों में उनकी खुशी, उनका प्यार और पिछले छह महीनों का इंतज़ार साफ महसूस हो रहा था।
मैंने भी उन्हें अपनी बाहों में भर लिया। कुछ देर तक वे मुझे लगातार चूमती रही। ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें खुद भी समझ नहीं आ रहा था कि खुशी में क्या करें।
थोड़ी देर बाद उन्होंने अपने होंठ पीछे कर लिए। उनकी साँसें तेज चल रही थी, आँखें चमक रही थी और चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान थी। उन्होंने दोनों हाथों से मेरा चेहरा पकड़ लिया और मुस्कुराते हुए बोलीं, “गोलू, मैं बहुत खुश हूँ। मैं तुम्हारे लिए कुछ करना चाहती हूँ।”
मैं अभी कुछ समझ पाता, उससे पहले ही उन्होंने दोनों हाथों से मुझे हल्के से पीछे की ओर धक्का दिया। मैं बिस्तर के किनारे पर बैठ गया और वे मेरे सामने खड़ी होकर मुस्कुराने लगी।
फिर वे धीरे-धीरे मेरे और करीब आई। उन्होंने मेरी जिंस के बटन खोले, फिर मेरी बेल्ट खोली और मेरी जींस नीचे खींच दी। उसके बाद उन्होंने मेरा अंडरवियर भी नीचे कर दिया। अब मेरा लंड पूरी तरह उनके सामने खुला हुआ था। उसे देख कर उनके होंठों पर हल्की सी मुस्कान आ गई।
वे मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गई। उन्होंने ऊपर देख कर मेरी आँखों में देखा, फिर अपने होंठों को हल्का सा भिगा कर मेरे लंड पर थूक लगाया। अपनी उंगलियों से उन्होंने उस थूक को पूरे लंड पर धीरे-धीरे फैलाया और बहुत प्यार से उसे सहलाने लगी। उनके नरम हाथों के स्पर्श से मेरा लंड और ज्यादा सख्त होने लगा।
जब मेरा लंड पूरी तरह तन कर खड़ा हो गया, तो वे और करीब झुकी। उन्होंने पहले अपने होंठों से उसके ऊपरी हिस्से को हल्के से छुआ, फिर धीरे-धीरे उसे अपने मुँह में ले लिया। एक पल के लिए मेरी साँसें रुक सी गई।
कभी वे अपने नरम होंठों से मेरे लंड को कसकर पकड़ती, कभी अपनी जीभ से उसके चारों तरफ धीरे-धीरे फेरती। कुछ देर बाद उन्होंने अपना सिर आगे-पीछे करना शुरू किया। उनकी चाल कभी धीमी होती, कभी थोड़ी तेज। मैं बिस्तर पर बैठा उनकी ओर देखता रहा।
पिछले छह महीनों से मैं अपने लंड पर उनके स्पर्श को बहुत याद कर रहा था। अब जब वे मेरे सामने घुटनों के बल बैठी थी और मेरा लंड अपने मुँह में लेकर मुझे प्यार दे रही थी, तो हर पल मेरे लिए किसी सपने जैसा लग रहा था।
वे अपना सिर धीरे-धीरे आगे-पीछे कर रही थी। कभी उनके होंठ मेरे लंड को कस कर पकड़ लेते, कभी उनकी जीभ उसे नरमी से छू जाती। जैसे-जैसे उनकी रफ्तार बढ़ती गई, मेरा लंड उनके मुँह के अंदर और ज्यादा सख्त होता चला गया।
कुछ ही देर में मुझे महसूस होने लगा कि मैं खुद पर ज्यादा देर तक काबू नहीं रख पाऊँगा। मैंने भारी साँसों के बीच कहा, “दीदी… मैं आने वाला हूँ।”
मेरी बात सुनते ही उन्होंने एक पल के लिए ऊपर देखा। उनकी आँखों में शरारत भरी मुस्कान थी। लेकिन वे रुकी नहीं। उल्टा उन्होंने अपना सिर और तेज़ी से आगे-पीछे करना शुरू कर दिया।
अगले ही पल मेरे पूरे शरीर में एक तेज़ कंपन दौड़ गया और मेरा सफेद पानी उनके मुँह में निकलने लगा। उन्होंने अपने होंठ कस कर बंद कर लिए, जैसे वे मेरे सफेद पानी की एक भी बूँद नीचे गिरने नहीं देना चाहती हों। फिर भी कुछ बूँदें उनके होंठों के किनारों से बाहर निकल कर नीचे की ओर बह गई। उन्होंने धीरे से अपना सिर पीछे किया। उनके होंठ भीगे हुए थे और उनकी आँखों में खुशी साफ दिखाई दे रहा था।
उन्होंने अपने होंठों के किनारों पर लगा सफेद पानी जीभ से समेट लिया और जो बाकी था उसे भी धीरे-धीरे निगल लिया। उसके बाद वे उठ कर मेरे पास आई, मेरा चेहरा अपने हाथों में लिया और प्यार से मेरे माथे को चूम लिया।
धीमी आवाज़ में वे बोली, “आज की रात मैं कभी नहीं भूलूँगी, गोलू।”
मैंने उन्हें अपनी बाँहों में भर लिया। बाहर लहरों की आवाज़ अब भी गूँज रही थी, और उस छोटे से कमरे में हम दोनों पहले से कहीं ज्यादा करीब महसूस कर रहे थे।
अगला भाग पढ़े:- दीपिका दीदी और मेरा राज-8