पिछला भाग पढ़े:- काजल दीदी और मेरा प्यार-5
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
आम के पेड़ की ठंडी छाँव के नीचे हम खड़े थे, लेकिन मेरा दिल इतनी जोर से धड़क रहा था कि मुझे डर था कि कहीं उन्हें सुनाई ना दे जाए। काजल दीदी की बात मेरे कानों में गूंज रही थी और मेरे शरीर में एक अजीब सी हलचल हो रही थी।
मुझे वो दिन याद आ गया जब मम्मी ने हमें छत पर देख लिया था। तब रिश्तेदारों और समाज के डर से उन्होंने बात को दबा दिया था। लेकिन अब अगर उन्हें पता चला कि उनकी अपनी बेटी मेरा लंड अपने मुँह में ले रही थी, तो सब कुछ खत्म हो जाएगा। वो बवाल बहुत बड़ा होगा और हम कहीं के नहीं रहेंगे।
मैंने डरते-डरते इधर-उधर देखा कि कोई आस-पास ना हो। मेरी सांसें बहुत तेज़ हो गई थी। मैंने कांपती हुई आवाज़ में उनसे पूछा, “दीदी, क्या तुम सच में ये करना चाहती हो? तुम्हें पता है ना कि अगर मम्मी ने देख लिया, तो कितना बड़ा लफड़ा हो जाएगा?”
वह धीरे से मेरे करीब आई और अपना हाथ मेरे गालों पर रख कर बोली, “डर मत गोलू, मैं फटाफट कर लूंगी, किसी को भनक भी नहीं लगेगी।”
इतना कहते ही वह मेरे पैरों के बीच घुटनों के बल बैठ गई। उनके बाल उनके चेहरे पर गिर रहे थे, जिन्हें उन्होंने एक झटके में पीछे की तरफ हटा कर कानों के पीछे फँसाया। उन्होंने मेरी पैंट के बटन खोले और उसे नीचे सरकाया, साथ ही मेरा अंडरवियर भी खींच कर नीचे कर दिया।
खुली हवा का स्पर्श होते ही मेरा लंड सिहर उठा, लेकिन डर और घबराहट की वजह से वह अभी भी ढीला और सुस्त था। उन्होंने उसे अपने हाथों में लिया और मेरी आँखों में देखते हुए शरारत से बोली, “इतना ढीला क्यों पड़ा है? अगर ये ऐसे ही सोया रहा तो मैं इसे अपने मुंह में कैसे ले पाऊंगी?”
उन्होंने अपनी हथेली पर जोर से थूक लिया और फिर दोनों हाथों को आपस में रगड़ कर उस लार को अच्छी तरह फैला लिया। जब उनके हाथ पूरी तरह चिकने और फिसलन भरे हो गए, तो उन्होंने उन्हें मेरे लंड के चारों तरफ लपेट लिया। उन्होंने अपनी उंगलियों का दबाव बढ़ाते हुए ऊपर-नीचे तेजी से उसे रगड़ना शुरू किया। उस नमी, गर्मी और उनके हाथों की रफ़्तार ने तुरंत अपना असर दिखाया; मेरी धड़कनें और तेज़ हो गई। मेरी पीठ पीछे आम के पेड़ के खुरदरे तने से टिक गई थी, और मैं महसूस कर सकता था कि कैसे धीरे-धीरे मेरा लंड उनके दबाव में आकर सख्त होने लगा और फड़कने लगा।
जब मेरा लंड पूरी तरह से सख्त और खड़ा हो गया, तो उन्होंने अचानक हाथ चलाना बंद कर दिया। मैं हैरान होकर उन्हें देख रहा था कि तभी उनकी नज़र ज़मीन पर गिरे हुए एक पके हुए आम पर पड़ी। उन्होंने उसे उठाया और उसका छिलका हटाकर उसके अंदर का रसीला पीला हिस्सा बाहर निकाल लिया।
मैं यह देख कर परेशान हो गया कि वह उस आम के उस पीले हिस्से को मेरे लंड पर लगाने लगी। मैंने घबराते हुए पूछा, “दीदी, ये क्या कर रही हो?”
उन्होंने मेरी तरफ देखा, उनके चेहरे पर एक हल्की सी शर्म और शरारत थी। धीरे से मुस्कुराते हुए वह बोली, “तुम्हारे लंड को आम का स्वाद दे रही हूँ।”
उनके हाथों में आम का वो मीठा और चिपचिपा हिस्सा था, जिसे वह मेरे सख्त हो चुके लंड के हर तरफ अच्छी तरह लगा रही थी। उस ठंडे और मीठे रस का एहसास मेरे लंड पर एक अजीब सी सिहरन पैदा कर रहा था। जैसे ही उन्होंने उसे पूरी तरह से आम के रस से भर दिया, उन्होंने अपने हाथ हटा लिए और झुक कर अपनी गर्म जीभ से उस रस को चाटना शुरू कर दिया।
उनकी जीभ की नोक बहुत ही आराम से मेरे लंड पर फिसल रही थी, और वह उसे धीरे-धीरे चाटकर उस आम का स्वाद ले रही थी। उनके भीगे हुए होंठों का दबाव जब मेरे लंड के आगे के हिस्से पर पड़ा, तो वह उसे अपने मुंह में लेकर धीरे-धीरे चूसने लगी। उनकी जीभ ऊपर से नीचे की तरफ बढ़ रही थी और उनके होंठ बार-बार मेरे लंड को पूरी तरह अपने घेरे में ले रहे थे। उनकी जीभ की हर हरकत और होंठों का बार-बार छूना मुझे बहुत अच्छी तरह महसूस हो रहा था, जिससे आम का वो स्वाद और भी बढ़ गया था।
वह घुटनों के बल नीचे ही बैठी रही और ऊपर की तरफ देखते हुए, आँखों में आँखें डालकर धीमी आवाज़ में बोली, “ये बहुत ही मजेदार है गोलू।”
इतना कहते ही उन्होंने अपना सिर और झुकाया और मेरे लंड को अपने मुंह में भर लिया। जैसे ही उन्होंने उसे अपने अंदर लिया, मुझे उनके मुंह की गहराई और गर्माहट का पूरा अहसास हुआ। उनके होंठों का दबाव बहुत ही जबरदस्त था और वह उसे काफी अंदर तक ले जा रही थी। वह अपने सिर को ऊपर-नीचे तेजी से चला रही थी, जिससे मुझे उनके मुंह के अंदर की नमी और जीभ की हरकत साफ महसूस हो रही थी। उनके मुंह की वो गहराई और खिंचाव मुझे पूरी तरह से बेकाबू कर रहा था, और मैं अपनी कमर को उनके चेहरे की तरफ धकेलने पर मजबूर हो गया था।
जैसे-जैसे वह उसे अपने मुँह में अंदर-बाहर कर रही थी, उनकी रफ़्तार और तेज़ हो गई। वह बिना रुके पूरी कोशिश कर रही थी, और मुझे उनके गले का दबाव महसूस हो रहा था जो मेरे लंड को पूरी तरह जकड़े हुए था। उनके मुँह की गर्मी और गीलापन मुझे हर हरकत के साथ और पागल किए जा रहा था। मैं अब खुद को संभाल नहीं पा रहा था; मेरी कमर अपने आप उनके सिर के साथ हिल रही थी।
तभी उन्होंने अपने हाथ मेरी कमर पर रख लिए और उन्हें अपनी ओर ज़ोर से खींच लिया, जिससे मैं और भी अंदर उनके मुँह में जा रहा था। उनके मुँह से अब धीमी आवाज़ें आ रही थी। मैं बस उन्हें देख पा रहा था कि कैसे वह मुझे पूरी तरह अपने मुँह में समा लेने की कोशिश कर रही थी। उनके मुँह की वह गहराई और खिंचाव मुझे पूरी तरह से बेकाबू कर रहा था और मैं बस इसी लम्हे का मज़ा ले रहा था।
उन्होंने अपना हाथ मेरे पैर के बीच के हिस्से पर जमाए रखा और अपनी जीभ को मेरे लंड के नीचे वाली नस पर जोर से फेरने लगी। उनकी जीभ का वह हिस्सा बहुत ही गर्म था, जो बार-बार वहां लग रहा था। वह रुक नहीं रही थी, बल्कि अपने सिर को और तेजी से ऊपर-नीचे कर रही थी। उनके होंठों की पकड़ अब और भी टाइट हो गई थी, जिससे मुझे बार-बार उनके दांतों की हल्की सी रगड़ महसूस हो रही थी जो बहुत मजेदार थी।
जब भी वह ऊपर आती, उनके होंठ मेरे लंड के ऊपरी हिस्से पर जोर से खिंचते और फिर नीचे जाते ही उनका गला उसे पूरी तरह अंदर ले लेता। मुझे उनके मुंह के अंदर की हर एक हलचल साफ़ महसूस हो रही थी। उन्होंने एक बार फिर ऊपर देखा, उनकी आँखें पूरी तरह से बदली हुई थी और वह बिना कुछ कहे फिर से नीचे झुक गई, इस बार और भी ज्यादा ताकत से उसे चूसने लगी।
उनके मुंह की उस जबरदस्त पकड़ और हरकतों ने मुझे पूरी तरह से बेकाबू कर दिया था। अब मैं इसे और ज़्यादा बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। मेरी धड़कनें बहुत तेज़ हो गई थी और मेरे शरीर में एक ऐसी लहर दौड़ रही थी जो साफ इशारा कर रही थी कि अब मैं बस गिरने ही वाला हूँ।
मैंने अपना हाथ उनके बालों में डाल दिया और उन्हें अपने पास और भी कस कर खींच लिया। मेरा लंड उनके मुंह के अंदर और भी ज़्यादा फड़कने लगा था। मुझे महसूस हो रहा था कि अब सब कुछ मेरे काबू से बाहर हो रहा है और मैं बिल्कुल आखिरी मोड़ पर हूँ। मैंने हल्की सी आह भरी और अपनी कमर को उनके चेहरे की तरफ और ज़ोर से धकेला, क्योंकि मुझे पता था कि अब बस एक-दो सेकंड की बात है और मैं अपना सब कुछ उनके मुंह में खाली कर दूँगा।
मैंने उनकी आँखों में देखते हुए हाँफते हुए कहा, “दीदी, मैं आने वाला हूँ!”
उन्होंने बस एक बार अपना सिर हिलाया, मानो वह मुझे कह रही हों कि मैं बिना किसी फिक्र के सारा सफ़ेद पानी उनके मुँह में ही निकाल दूँ। जैसे ही मैंने झटके के साथ अपना शरीर छोड़ा, मैंने उनके मुँह के अंदर ही सब कुछ खाली करना शुरू कर दिया।
वह अपने होंठों को मेरे लंड के चारों तरफ और भी जोर से चिपका कर बैठ गई ताकि एक बूंद भी बाहर ना जाए। उनकी पकड़ बहुत मजबूत थी, लेकिन जैसे-जैसे मैं अंदर सफ़ेद पानी छोड़ रहा था, उनका मुँह पूरी तरह भर गया। वह सब कुछ अंदर लेने की कोशिश कर रही थी, लेकिन फिर भी कुछ बूँदें उनके होंठों के कोने से रिसने लगी।
वह सफ़ेद, गाढ़ा तरल धीरे-धीरे उनके होंठों के कोने से फिसलते हुए उनकी गर्दन से होता हुआ उनकी ब्रा पर गिरने लगा, जिससे उनकी ब्रा का कपड़ा वहां से गीला और भीगा हुआ हो गया। वह तब भी अपने होंठों को मेरे लंड पर जमाए बैठी थी, और उसे धीरे-धीरे चूसती रही।
उस दिन पहली बार था जब काजल दीदी ने मेरे साथ ऐसा कुछ किया था। सच कहूँ तो, पापा की शादी के बाद से मुझे सब कुछ बहुत अजीब और बुरा लग रहा था, लेकिन उस पल, जब काजल दीदी ने मेरे लंड को चूसना शुरू किया, तो मुझे लगा कि पापा ने मुझे दुनिया की सबसे अच्छी सौतेली बहन दी है। उस सुकून ने मेरी सारी कड़वाहट को कहीं पीछे छोड़ दिया था।
थोड़ी देर बाद, हमने अपने कपड़े पहने और कुछ आम उठाए और फार्म हाउस की तरफ निकल पड़े। जब हम पहुँचे, तो माँ दरवाजे पर ही खड़ी थी, जबकि घर के अंदर पापा और बाकी रिश्तेदार बैठ कर बातें कर रहे थे। हमें देखते ही घर के बच्चे दौड़ कर हमारे पास आ गए। हमने उन्हें वे आम दिए और वे मजे से उन्हें खाने लगे।
जैसे ही हम अंदर जाने वाले थे, माँ ने काजल दीदी से पूछा, “इतनी देर क्यों लगा दी?”
दीदी ने बिल्कुल शांत रह कर जवाब दिया, “क्योंकि गोलू को आम तोड़ने के लिए पेड़ पर चढ़ना पड़ा था।”
अगली सुबह, रिश्तेदार आखिरकार अपने घर जाने के लिए तैयार हो गए। सुबह का माहौल काफी भाग-दौड़ वाला था। रिश्तेदार अपना सामान समेट रहे थे और घर में काफी चहल-पहल थी। मैं गाड़ी लेकर बाहर इंतज़ार कर रहा था। जैसे ही सब लोग गाड़ी में सवार हुए, काजल दीदी भी जल्दी से बाहर आई। वह आज काफी अच्छी दिख रही थी, उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान थी जो मुझे देख कर और भी गहरी हो गई।
माँ ने उन्हें टोकते हुए कहा, “काजल, तुम क्यों जा रही हो? बस से चली जाती।”
लेकिन रिश्तेदारों ने बीच में बोल कर बात संभाल ली, “अरे, क्या हर्ज है! हम इसे रास्ते में कॉलेज छोड़ देंगे और फिर स्टेशन निकल जाएंगे।”
दीदी पीछे की सीट पर मेरे पीछे ही बैठी थी। गाड़ी पूरी तरह भरी हुई थी और आस-पास रिश्तेदारों का शोर और सामान की भीड़ थी। मुझे गाड़ी धीरे चलानी पड़ रही थी, लेकिन मेरा पूरा ध्यान पीछे दीदी पर था। मैं बार-बार मिरर में देख रहा था कि वह क्या कर रही हैं। गाड़ी के झटकों की वजह से कभी-कभी उनके घुटने मेरी सीट से टकरा रहे थे, जो मुझे उस कल वाली बात की याद दिला रहा था।
जब कॉलेज का गेट आया, तो मैंने गाड़ी रोकी। दीदी बाहर निकली, लेकिन जाने से पहले उन्होंने खिड़की के पास झुक कर मेरी तरफ ऐसे देखा जैसे वो सब कुछ जानती हो। मैंने उनसे बस एक नज़र मिलाई और वह मुस्कुरा कर अंदर चली गई।
स्टेशन पहुँचने पर पता चला कि ट्रेन दो घंटे लेट है। उन रिश्तेदारों की बोरिंग बातों के बीच मेरा मन वहीं अटका हुआ था। मैं स्टेशन के बेंच पर उनके साथ बैठा तो था, लेकिन मेरा दिमाग कल की यादों में खोया हुआ था—वह सफ़ेद पानी का दीदी के होंठों से गिरना और उनकी वो साज़िश भरी मुस्कान। दो घंटे का वो इंतज़ार मुझे बहुत लंबा लग रहा था। आखिरकार ट्रेन आई, सब लोग उसमें चढ़े और जब ट्रेन चली गई, तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैं किसी भारी बोझ से बच गया हूँ और अब मैं काजल दीदी से दोबारा मिलने के लिए पूरी तरह फ्री हूँ।
मैं सीधे कॉलेज के अंदर गया और वहीं से काजल दीदी को कॉल लगाया।
उन्होंने फोन उठाया और पूछा, “कहाँ हो?”
मैंने कहा, “मैं अंदर आ गया हूँ, तुम कहाँ हो?”
उन्होंने धीमी आवाज़ में जवाब दिया, “मैं लाइब्रेरी में हूँ।”
मैं भागते हुए लाइब्रेरी के अंदर गया। मैंने अपनी पुरानी वाली सीट पर देखा, पर वो वहाँ नहीं थी। मैं उन्हें ढूँढने के लिए लाइब्रेरी के बीच वाली अलमारियों के पास गया। वहाँ एक कोने में वो खड़ी थी और सबसे ऊपर वाले शेल्फ से एक किताब निकालने की कोशिश कर रही थी। उनके हाथ ऊपर की तरफ उठे हुए थे, जिससे उनकी कुर्ती ऊपर खिंच गई थी और उनकी कमर दिख रही थी। वो पंजों के बल खड़ी होकर ज़ोर लगा रही थी और उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि मैं ठीक उनके पीछे खड़ा हूँ।
मैंने धीरे से उनसे कहा, “दीदी, क्या मैं आपकी मदद करूँ?”
मेरी आवाज़ सुनते ही वह बुरी तरह चौंक गई। उन्होंने एक-दम पीछे मुड़ कर देखा, उनकी आँखें फटी की फटी रह गई। लेकिन जब उन्होंने मुझे देखा, तो उनका चेहरा शर्म से लाल हो गया। उन्होंने नज़रें नीचे झुका ली और धीमी, कांपती हुई आवाज़ में बोली, “हाँ… गोलू, मेरा हाथ वहाँ तक नहीं पहुँच रहा।”
मैंने अपनी बाहें उनकी पतली कमर के चारों तरफ लपेटी और उन्हें ऊपर उठा दिया। मेरे हाथ उनकी नरम कमर को अच्छी तरह महसूस कर रहे थे। उन्हें अचानक ऊपर उठता देख वह पूरी तरह सकपका गई। वह अपनी नज़रें चुराते हुए, शर्म से लाल चेहरे के साथ फुसफुसाते हुए बोली, “गोलू, तुम… ये क्या कर रहे हो?”
मैंने उनकी आंखों में देखते हुए उनके करीब आकर कहा, “दीदी, आपकी मदद कर रहा हूँ।”
मैंने उन्हें कमर से मजबूती से पकड़ कर हवा में उठा लिया। उनकी पतली कमर मेरी हथेलियों के बीच थी और उनकी स्किन इतनी नरम थी कि मुझे लगा मेरी उंगलियां उनके बदन में धंस रही हैं। वह एहसास ऐसा था जैसे उनकी रेशमी त्वचा मेरी उंगलियों को अपनी ओर खींच रही हो, मानो उनकी कमर मेरी पकड़ को और गहराई से महसूस करना चाहती थी।
उन्होंने हाथ बढ़ा कर किताब निकाली और मैंने उन्हें धीरे से नीचे उतारा। जैसे ही उनके पैर जमीन पर लगे, वे तुरंत मेरी तरफ घूमी। हमारी नजरें मिली और मैं देख सकता था कि उनकी सांसें कितनी तेज और गहरी चल रही थी। उनकी हर सांस के साथ उनका पूरा सीना तेजी से ऊपर-नीचे हो रहा था।
उनकी कुर्ती के अंदर उनके भारी और उभरे हुए स्तन साफ झलक रहे थे, जो उनकी हर एक गहरी सांस के साथ जोर-जोर से उछल रहे थे। वह अपनी बढ़ती धड़कन को छिपा नहीं पा रही थी और उनकी आंखों में दिख रही बेचैनी साफ बता रही थी कि वह इस पल का असर महसूस कर रही हैं।
उन्होंने लड़खड़ाते हुए कहा, “गोलू, सुनो… मैं सोच रही थी…” लेकिन इससे पहले कि वो अपनी बात पूरी कर पाती, मैंने उन्हें मौका ही नहीं दिया। मैंने अपना हाथ उनके चेहरे पर रखा और उन्हें और करीब खींच कर अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए। उन्होंने एक-दम से अपनी आँखें बंद कर ली और मैं महसूस कर सकता था कि वो इस अचानक हुए किस के लिए तैयार नहीं थी, पर अगले ही पल उन्होंने भी रिस्पॉन्स देना शुरू कर दिया। उनके होंठ बेहद नरम थे और हमारी सांसें आपस में मिल रही थी।
मैंने अपने होंठों से उनके होंठों को जोर से दबा लिया। वे शुरू में थोड़े झटके में थी, लेकिन फिर उन्होंने अपनी आँखें बंद कर ली और धीरे से मेरा साथ देने लगी। उनकी सांसें मेरे मुंह पर पड़ रही थी, जो बहुत गर्म थी।
मैंने उन्हें अपनी बाहों में कस लिया और उनके होंठों को जोर से चूसने लगा। वे शुरू में एक पल के लिए कांपी, लेकिन फिर उन्होंने भी अपना मुंह पूरी तरह खोल दिया और मेरी जीभ को अपने अंदर लेने लगीं। उनकी सांसें एक-दम गर्म होकर मेरे चेहरे पर लग रही थी।
मैंने अपना एक हाथ उनकी कमर से हटा कर नीचे उनके हिप्स पर रखा और उन्हें अपनी ओर जोर से खींच कर अपने बदन से सटा लिया। उनके भारी और उभरे हुए स्तन मेरी छाती से पूरी तरह दब रहे थे, और मैं उनके बदन की हर एक हरकत को महसूस कर पा रहा था। वे अपने होंठों से मेरे होंठों को खींच रही थी और उनके गले से जो आवाजें निकल रही थी, वो साफ बता रही थी कि वे पूरी तरह से पागल हो रही हैं।
मैंने उन्हें दीवार से सटा दिया और अपना दूसरा हाथ उनके बदन पर घुमाने लगा, जिससे उनकी घबराहट और बढ़ गई। वे पूरी तरह से मेरे काबू में थी और अपनी कमर को मेरे साथ रगड़ रही थी। मैंने अपना हाथ उनकी कुर्ती के अंदर डाला और उनकी पीठ पर धीरे-धीरे हाथ फेरने लगा, जिससे वे एक झटके के साथ और ज्यादा मेरे करीब सिमट गई।
उनके स्तन मेरी छाती से बुरी तरह दब रहे थे और मैं उनकी धड़कन को अपनी बॉडी पर महसूस कर पा रहा था। वे बेसुध होकर अपना सिर पीछे झुका रही थी और उनके मुंह से निकलने वाली आहें कमरे की खामोशी को चीर रही थी। मैंने उन्हें दीवार से और जोर से दबाया और अपना दूसरा हाथ उनके स्तनों की तरफ बढ़ा दिया, उन्हें महसूस करते हुए मैं उनकी गर्दन पर अपने होंठों से निशान बनाने लगा। वे पूरी तरह से कांप रही थी और अपने हाथों से मेरी शर्ट को अपनी तरफ खींच रही थी, जैसे वे चाहती थी कि मैं उन्हें और भी गहराई से महसूस करूँ।
मैं उनके बदन पर अपनी पकड़ और मजबूत करता गया। मैंने अपनी हथेली से कुर्ती के ऊपर से उनके उभरे हुए स्तनों को जोर-जोर से दबाना शुरू किया, जिसके चलते वे जोर-जोर से हांफने लगी। कपड़े का दबाव मेरी उंगलियों के नीचे साफ़ महसूस हो रहा था, और मैं उन्हें जोर से मसलते हुए अपने हाथों में भींच रहा था। हर बार जब मैं दबाव बढ़ाता, वे और ज्यादा बेहाल होती, और उनके बदन की गर्माहट मेरे हाथों में साफ महसूस हो रही थी।
मैंने अपनी हथेली से कुर्ती के ऊपर से उनके उभरे हुए स्तनों को जोर-जोर से दबाना जारी रखा, जिससे वे बेतहाशा हांफने लगीं। उसी समय, मैंने अपना चेहरा उनके सीने पर टिकाया और कुर्ती के कपड़े के ऊपर से ही उनके स्तनों को मुँह में भर कर चूसना शुरू किया। कपड़े की रगड़ से उनके निपल्स मेरे होंठों के बीच और ज्यादा सख्त होकर उभर आए, जिन्हें मैंने मजबूती से पकड़ कर ऐसे चूसना शुरू किया जैसे कोई बच्चा दूध पी रहा हो।
मेरी इस हरकत के साथ ही काजल दीदी ने अपने हाथ मेरे बालों में उलझा लिए; वे अपनी उंगलियों से मेरे बालों को पकड़ कर मुझे अपने और करीब खींच रही थी, और उनके गले से निकलती सिसकियाँ मेरे कानों में साफ़ सुनाई दे रही थी।
मैं उन्हें चूसने में इतना खोया था कि आसपास का होश ही नहीं रहा। तभी अचानक जूतों की आवाज़ और किसी के पास आने की आहट हुई। मैंने सिर उठा कर देखा, लाइब्रेरियन बस कुछ कदम की दूरी पर था, उसकी नज़रें हम पर थी।
“ये क्या कर रहे हो यहाँ?” उसने गुस्से में चिल्ला कर पूछा।
काजल दीदी का चेहरा एक-दम से सफेद पड़ गया। मैंने बिना एक पल सोचे उनका हाथ खींचा और अलमारियों के पीछे से भागते हुए पिछले दरवाजे की तरफ दौड़ पड़ा। लाइब्रेरियन पीछे से चिल्लाता रहा, पर हमने मुड़ कर नहीं देखा। हम भागते हुए सीधे पार्किंग एरिया में पहुँच गए। काजल दीदी का कॉलेज बैग लाइब्रेरी में ही छूट गया था, लेकिन उसमें सिर्फ दो नोटबुक थी, इसलिए किसी को कोई परवाह नहीं थी। हम जल्दी से कार में बैठे और मैंने बिना देर किए गाड़ी स्टार्ट कर दी।
कार को फुल स्पीड में भगाते हुए हम कॉलेज से काफी दूर निकल आए। जब मुझे लगा कि अब कोई पीछे नहीं था, तो मैंने गाड़ी धीरे की। तभी बगल की सीट पर बैठी काजल दीदी अचानक खिलखिला कर हँसने लगी। उनकी आवाज़ सुन कर मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ गई, भले ही मेरी धड़कनें अभी भी तेज़ थी।
वह सब बहुत पागलपन था—लाइब्रेरी में अलमारियों के बीच वो सब करना, फिर अचानक लाइब्रेरियन का सामने आ जाना और वहां से भागना। वो सब बिल्कुल भी ठीक नहीं था। पर उस भागदौड़ के बाद, गाड़ी में बैठे हुए ये पल कुछ अलग थे। काजल दीदी की हँसी देख कर मुझे महसूस हुआ कि उस पागलों वाली हरकत ने हमें एक-दूसरे के और करीब ला दिया है। हम दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और चुप-चाप आगे का रास्ता तय करने लगे