पिछला भाग पढ़े:- सिमरन दीदी और उसका छोटा भाई-2
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
गोलू के साथ उस मुंबई वाले अपार्टमेंट में रहना मेरे ब्रेकअप के बाद पूरी जिंदगी में लिया गया सबसे अच्छा फैसला था। क्योंकि उसके साथ मैं अधिक आज़ाद महसूस करने लगी थी। पहले जब मैं अपने बॉयफ्रेंड के साथ रहती थी तब भी मैं इतनी खुल कर नहीं रह पाती थी, लेकिन गोलू के साथ मुझे कोई बंधन महसूस नहीं होता था।
कभी-कभी आधी रात को जब मुझे प्यास लगती थी, तो मैं सिर्फ अपनी ब्रा और पैंटी में ही बिस्तर से उठ कर किचन की तरफ चल देती थी। मुझे पता होता था कि गोलू अक्सर रात में जागता रहता है, कभी लैपटॉप पर काम करते हुए तो कभी मोबाइल देखते हुए। जब मैं किचन से गुजरती थी तो वह मेरी तरफ देखता था। उसकी निगाहें मेरे ब्रा से ढके स्तनों पर ठहर जाती थी, लेकिन मुझे कोई शर्म या अजीब-पन नहीं होता था। मैं बस उसे एक छोटी सी मुस्कान देकर अपना काम करती थी और वापस कमरे में चली जाती थी।
कभी मैं पूरे दिन सिर्फ एक बड़ी सी ओवरसाइज़्ड टी-शर्ट और नीचे शॉर्ट्स पहने रहती थी। वह टी-शर्ट मेरे लिए बहुत ढीली और बड़ी थी, इसलिए जब मैं आगे-पीछे होती थी तो कभी मेरे स्तन उसके अंदर से बाहर निकल आते थे। कभी ऐसा होता था कि मेरे निप्पल उस पतले कपड़े के ऊपर से साफ दिखाई देते थे या कभी टी-शर्ट के कपड़े के अंदर से वह उभर कर बाहर आ जाते थे। लेकिन मेरे लिए यह सब बिल्कुल सामान्य था। मैं उसके सामने छुपाने की कोशिश नहीं करती थी और ना ही गोलू कभी कुछ अजीब कहता था। वह बस देखता रहता था और मैं अपनी जिंदगी जैसे चल रही थी वैसे ही चलने देती थी।
कभी सोफे पर मूवी देखते हुए मैं और गोलू हम दोनों अक्सर बहुत पास बैठ जाते थे। कभी एक ही कंबल में बैठ कर फिल्म देखते रहते। उस पल कई बार गलती से उसका हाथ मेरे स्तनों को छू जाता या फिर शायद वह जान-बूझ कर छूता और फिर ऐसे दिखाता कि यह सब गलती से हो गया। पहले यह अजीब लगता था लेकिन वक्त के साथ गोलू की यह हल्की शरारतें अच्छी लगने लगी थी। उसका हाथ जब भी मेरे स्तनों से टकराता मुझे अपने निप्पल सख्त होते हुए महसूस होते।
जब हम दोनों किचन में चाय बनाते थे, गोलू मेरे पीछे से बर्तन लेने के लिए आगे बढ़ता। तब उसकी छाती मेरी पीठ से लगती, और उसका हाथ आगे बढ़ते हुए कभी मेरे स्तन के साइड को छू जाता। वह तुरंत माफी बोलता और पीछे हट जाता, लेकिन अगले ही पल फिर ऐसा करता।
कभी हम दोनों बालकनी में खड़े होकर बातें करते। वह आराम से रेलिंग पर हाथ रखता और मेरी तरफ झुकता। हाथ हिलाते हुए उसकी उंगलियाँ मेरे स्तन के नीचे वाले हिस्से को छू जातीं। वह अनदेखा करता रहता, मानो कुछ हुआ ही नहीं।
एक बार हम दोनों फोटो देख रहे थे। गोलू मेरे पास बैठा था और मेरे फोन पर स्वाइप कर रहा था। एक फोटो पर रुका, तो उसने मेरी तरफ देखा और हंसते हुए मेरे कंधे पर हाथ रखा। वह हाथ फिसलते हुए मेरे स्तन के ऊपर से निकल गया।
बेशक गोलू मेरा छोटा भाई था और उसका मेरे स्तनों को इस तरह गलती से छूना बहुत अजीब था, लेकिन मेरे ब्रेकअप को अब लगभग दो महीने हो चुके थे। इन दो महीनों में एक बार भी किसी ने मेरे बदन को नहीं छुआ था। जब मेरा रिश्ता चल रहा था, तब अक्सर मेरा बॉयफ्रेंड मेरे बदन से खेलता रहता था। वह मेरे स्तनों को अपने मुंह में लेता था और कभी वह मेरे उस नाजुक हिस्से को अपने मुंह से चाट लेता था। मुझे वह छुआ जाना बहुत अच्छा लगता था, लेकिन जब वह सब बंद हो गया तो मैं एक-दम तरस गई।
मेरा शरीर उस स्पर्श के लिए तरस गया, मेरे स्तन उस गर्माहट के लिए तरस गए, और मेरे निप्पल जो पहले हर रोज किसी के मुंह में हुआ करते थे, वो अब पूरी तरह से अकेले और बेकार पड़े थे। ऐसे में गोलू का इस तरह गलती से या शायद जान-बूझ कर मेरे स्तनों को छूना, भले ही वह मेरा छोटा भाई था, अब अजीब नहीं लगता था बल्कि वह छूना मुझे अच्छा लगने लगा था।
एक दिन गोलू ऑफिस से वापस आया तो उसके चेहरे पर एक अजीब सी खुशी थी। उसने अपना बैग एक तरफ रखा, किचन में जाकर पानी पिया और फिर सोफे पर मेरे पास आकर बैठ गया। वह कुछ देर चुप रहा जैसे वह सोच रहा हो कि बात कैसे शुरू करे। फिर उसने मेरी तरफ देखा और मुझसे कहा, “दीदी, मैंने तुम्हारे लिए मेरे ऑफिस में एक जॉब ढूंढ ली है।”
मैंने कहा, “सच में गोलू?”
उसने कहा, “हाँ दीदी।”
मैंने खुशी में उसे गले लगा लिया। जब मैंने गोलू को गले लगाया, तो मेरे स्तन उसकी छाती से चिपक गए। क्योंकि मैंने ब्रा नहीं पहनी थी, इसलिए मेरे स्तन पूरी तरह से उसकी छाती पर फैल गए और दबने लगे। मेरे निप्पल उसके सीने से रगड़ खा रहे थे और वह दबाव मुझे साफ महसूस हो रहा था। जैसे-जैसे हम दोनों एक-दूसरे को कस कर पकड़ रहे थे, मेरे स्तन और ज्यादा दब रहे थे और मैं अपने निप्पल को सख्त होते हुए महसूस कर सकती थी।
गोलू ने मुझसे कहा कि उसने मेरे लिए उसकी कंपनी में रिसेप्शनिस्ट की जॉब ढूंढ ली है। उसने बताया कि इस जॉब में मुझे एक डेस्क के पीछे बैठना होगा और ऑफिस में आने वाले लोगों का स्वागत करना होगा और उन्हें अंदर भेजना होगा। उसने यह भी बताया कि कंपनी के ड्रेस कोड के हिसाब से मुझे साड़ी पहन कर आना होगा। गोलू ने अपने बॉस से मेरे बारे में पहले ही बात कर ली थी और उसे मेरी जरूरतों और बातों के बारे में समझा दिया था। इसलिए इंटरव्यू सिर्फ एक रस्म भर था, मतलब मुझे जॉब मिलना लगभग तय था। यह सुन कर मुझे बहुत अच्छा लगा और मैं काफी खुश हुई क्योंकि ब्रेकअप के बाद यह पहला मौका था जब मुझे लगा कि मेरी जिंदगी फिर से पटरी पर आ रही थी।
गोलू के जॉब वाली बात कहने के अगले दिन हम दोनों शॉपिंग के लिए बाहर गए। मुझे इंटरव्यू के लिए तैयार होना था इसलिए हमने एक साड़ी और ब्लाउज खरीदा। साड़ी खरीदते समय मैंने सोचा था कि मैं इसे पहनना सीख जाऊंगी, लेकिन असल में मैंने जिंदगी में कभी साड़ी नहीं पहनी थी।
हम घर वापस आए। मैं अपने कमरे के अंदर गई और तैयार होने लगी। गोलू बाहर लिविंग रूम में मेरा इंतजार कर रहा था। मैंने अपनी टी-शर्ट और शॉर्ट्स उतार दिए और साड़ी पहनने की कोशिश करने लगी। मैंने यूट्यूब पर एक ट्यूटोरियल वीडियो लगाया और उसे देखते हुए साड़ी पहनने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मैं हर बार कुछ ना कुछ गलत कर रही थी। साड़ी का पल्लू ठीक से नहीं गिर रहा था, कमर में प्लीट्स ढीली हो रही थी, या साड़ी खुल कर नीचे गिर रही थी। मैं बिना ब्रा के थी क्योंकि मैंने टी-शर्ट उतार दी थी और ब्लाउज पहनना बाकी था, इसलिए मेरे स्तन खुले थे और बार-बार साड़ी के कपड़े में उलझ रहे थे। मैं बहुत परेशान हो गई क्योंकि साड़ी पहनना मेरे लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था।
गोलू ने बाहर से आवाज लगाई, “अरे दीदी, तुम तैयार हो गई या नहीं?”
मैंने जवाब दिया, “नहीं गोलू, अभी नहीं, क्योंकि मैं समझ नहीं पा रही हूँ कि साड़ी कैसे पहनती है।”
कुछ देर बाद गोलू फिर बोला, “सिमरन दीदी, अगर तुम्हें कोई दिक्कत नहीं है तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ। मेरी गर्लफ्रेंड ने मुझे सिखाया था कि साड़ी कैसे पहनी जाती है।”
मैंने थोड़ी हिचकिचाहट के साथ कहा, “ओके गोलू, अंदर आ जा।”
गोलू ने धीरे से दरवाजा खोला। पहले वह दरवाजे के बाहर खड़ा था, फिर धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए अंदर आया। जैसे ही उसकी नज़र कमरे के अंदर पड़ी, सबसे पहले उसकी निगाह मेरे स्तनों पर जाकर रुक गई। मैं उस समय सिर्फ अपनी पैंटी में खड़ी थी, ऊपर कुछ नहीं था। मेरे हाथ तुरंत अपने आप उठ गए और मैंने अपने स्तनों को उन हाथों से ढकने की कोशिश की, लेकिन मेरे निप्पल पहले से ही सख्त थे और वे हाथों के बीच से नीचे की तरफ दिख रहे थे। मेरी उंगलियों के बीच से वे बाहर झांक रहे थे, जैसे वे छुपना ही नहीं चाहते हों।
मैंने नीचे सिर्फ एक पतली सी पैंटी पहनी हुई थी। उस पैंटी के किनारों से मेरे कुछ बाल बाहर निकल रहे थे, क्योंकि पिछले कई दिनों से मैंने नीचे की सफाई नहीं की थी। शायद चार या पांच दिन हो गए थे, शायद उससे भी ज्यादा। वे बाल घुंघराले थे और पैंटी के कपड़े के ऊपर से बाहर चिपके हुए थे। उस जगह की हल्की कालिमा और नमी उन बालों के बीच से झलक रही थी।
यह सब देख कर मुझे थोड़ी शर्मिंदगी हो रही थी क्योंकि गोलू मेरा छोटा भाई था और वह मुझे इस तरह देख रहा था। लेकिन साथ ही साथ, जब उसकी नज़र उन बालों पर टिकी हुई थी और वह बस देखता रह रहा था, तो मेरे दिल में एक छोटी सी मुस्कान आ गई। उस देखने के तरीके में कोई बुराई नहीं थी, बल्कि एक कच्ची सी उत्सुकता थी जो मुझे अच्छी लगी।
गोलू ने मेरी तरफ देखा और थोड़ी हैरानी से पूछा, “दीदी, तुमने ब्रा क्यों नहीं पहनी है?”
मैंने जवाब दिया, “साड़ी पहनने के लिए।” मैंने सोचा था कि शायद साड़ी पहनते वक्त ब्रा नहीं पहननी चाहिए या फिर मुझे लगा कि बिना ब्रा के साड़ी पहनना ज्यादा आरामदायक होगा, इसलिए मैंने पहले ही ब्रा नहीं पहनी थी।
गोलू ने समझाते हुए कहा, “दीदी, साड़ी पहनने के लिए तुम अपने ब्लाउज के अंदर ब्रा भी पहन सकती हो।” उसने कहा कि ब्लाउज के अंदर ब्रा पहनना नॉर्मल है और ज्यादातर लड़कियां ऐसे ही करती हैं, इससे साड़ी भी ठीक से सेट हो जाती है और कुछ गलत भी नहीं है। उसने मुझे यह भी बताया कि उसकी गर्लफ्रेंड भी साड़ी पहनते समय ब्रा पहनती है और ब्लाउज के ऊपर से कुछ दिखाई नहीं देता है।
गोलू के कहने के बाद मैंने अपनी ब्रा उठाई और पहन ली। वह ब्रा एक पतले हल्के रंग के कपड़े से बनी थी और बहुत छोटी थी। जैसे ही मैंने उसे पहना, उस छोटे से कपड़े ने मेरे स्तनों को ढक लिया, लेकिन सिर्फ निप्पल के आस-पास का हिस्सा ही ढका था। मेरे स्तनों का ऊपरी हिस्सा और बीच में बनी लंबी गहरी क्लीवेज पूरी तरह से बाहर खुली हुई थी। ब्रा के कपड़े के अंदर मेरे निप्पल की बनावट साफ महसूस हो रही थी और वे बाहर से भी दिख रहे थे क्योंकि कपड़ा इतना पतला था कि कुछ भी छुपा नहीं रहा था।
गोलू मेरे और करीब आ गया। अब हम दोनों के बीच की दूरी बहुत कम थी। उसने साड़ी का एक सिरा लिया और मेरी कमर के चारों ओर उसे लपेटना शुरू किया। सबसे पहले उसने साड़ी को मेरी कमर पर टिकाया और फिर उसे घुमाने लगा। जब भी उसके हाथ मेरी खुली हुई कमर के आस-पास आते, उसकी उंगलियाँ मेरी त्वचा को छू जाती। वह छूना बहुत हल्का था, लगभग वैसे ही जैसे कोई पंख सरका दिया जाए।
पहली बार जब उसकी उंगली मेरी कमर के बायीं तरफ पड़ी तो मुझे एक झटका सा लगा और मेरी रीढ़ के नीचे एक हल्की सी सिहरन दौड़ गई। जब वह साड़ी को खींचते हुए मेरे पेट के सामने से घुमा रहा था, उसके हाथ की हथेली मेरी नाभि के पास आ गई और उसने अपने अंगूठे से साड़ी को दबाते हुए मेरी नाभि को हल्के से रगड़ दिया। उस पतली सी सनसनी ने मेरे अंदर कुछ करवट ले ली।
गोलू की उंगलियाँ बेहद मुलायम थी, जैसे उसने अभी क्रीम लगाई हो। वह जब भी मेरे पेट या कमर को छूता, मैं सोचने लगती कि काश वह उन्हीं मुलायम उंगलियों को मेरी ब्रा के अंदर डाल कर मेरे स्तनों को दबाए। मेरे अंदर एक अजीब सी बेचैनी हो रही थी। मैं चाह रही थी कि वह मुझे छूते रहे और ज्यादा छूते रहे। मेरे निप्पल ब्रा के अंदर पहले से ही कड़े हो चुके थे और कपड़े को बाहर की तरफ धकेल रहे थे।
जब गोलू कमर के चारों ओर साड़ी लपेट कर समाप्त कर चुका, तो उसने कहा, “दीदी, अब अपना ब्लाउज पहन लो।”
उसकी आवाज आम थी, लेकिन उसकी सांस थोड़ी तेज लग रही थी। मैंने बिना कुछ कहे अपना ब्लाउज उठाया और पहन लिया। ब्लाउज पहनने के बाद उसने कहा कि अब साड़ी के ऊपरी हिस्से को सेट करना है। वह फिर से मेरे करीब आया और उसने साड़ी के पल्लू को मेरे सीने के पास उठा कर प्लीट्स बनानी शुरू की।
साड़ी के कपड़े को प्लीट करते हुए उसकी उंगलियाँ बार-बार मेरे स्तनों के ऊपरी और बगल के हिस्से को छू रही थी। वह बहुत धीरे और हल्के से छू रहा था, जैसे वह जान-बूझ कर उन्हें छू रहा हो लेकिन ऐसे दिखा रहा हो कि साड़ी ठीक करते हुए गलती से हो रहा है। हर छूने पर मेरा शरीर हल्का सा हिल जाता था और ब्रा के अंदर मेरे निप्पल और ज्यादा सख्त हो जाते थे। वह छूना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और मैं चाह रही थी कि वह कभी खत्म ना हो।
जब हम साड़ी पहन कर तैयार हो गए, तो मैंने आखिरी बार आईने में देखा। साड़ी में मेरे स्तन ब्लाउज के अंदर से काफी उभरे हुए लग रहे थे और मेरा क्लीवेज साफ दिख रहा था, लेकिन तब तक मैं इसके बारे में सोच कर थक चुकी थी। हमने एक कैब ली और गोलू के ऑफिस की तरफ निकल गए।
कैब के अंदर बैठते ही मुझे थोड़ी घबराहट होने लगी थी। मैं अपनी साड़ी को बार-बार ठीक कर रही थी क्योंकि बैठते ही साड़ी थोड़ी खुल गई थी और मेरे निप्पल ब्लाउज के पतले कपड़े के ऊपर से दिखने लगे थे। गोलू मेरे बगल में बैठा था और वह बाहर खिड़की से बाहर देख रहा था, लेकिन मैं देख सकती थी कि वह बीच-बीच में मेरी तरफ शीशे में देख रहा था।
थोड़ी ही देर में हम उसकी कंपनी की बिल्डिंग के सामने पहुंच गए। वह इमारत बहुत बड़ी थी और उसके आगे लोग छोटे-छोटे लग रहे थे। बाहर ही सिक्योरिटी गार्ड खड़े थे और अंदर जाने से पहले उन्होंने हमारा बैग चेक किया। फिर हम अंदर गए। अंदर का हॉल बहुत ऊंची छत वाला था और हर तरफ लोग अपने काम में लगे थे। गोलू मुझे लेकर एक कॉरिडोर से गुजरा और फिर एक कमरे के बाहर रुक गया।
उसने मेरी तरफ देखा और फिर मेरा हाथ पकड़ लिया। उसकी उंगलियाँ बहुत लंबी थी और जब उन्होंने मेरी उंगलियों को छुआ तो मुझे लगा जैसे वह मेरे हाथ को कोमलता से लपेट रहा है। उसकी उँगलियों की मुलायमी इतनी अच्छी थी कि मैं चाहती थी कि वह मेरा हाथ थोड़ी देर और पकड़े रहे।
उसने धीरे से कहा, “बेस्ट ऑफ लक, दीदी।”
मैंने उसकी आँखों में देखा और कहा, “ओके गोलू, अब तुम अपना काम करो।”
फिर मैंने उसका हाथ छोड़ा और अंदर चली गई।
कमरे के अंदर एक बड़ी सी डेस्क थी और उसके पीछे एक आदमी बैठा था। उसने काले रंग के फ्रेम वाला चश्मा पहना हुआ था और उसके बाल बिल्कुल सीधे थे। उसने मुझे बैठने का इशारा किया और फिर उसने सवाल पूछना शुरू कर दिए। उसने पूछा कि मेरा नाम क्या है, मैंने पहले कहाँ काम किया है और मैं रिसेप्शनिस्ट की जॉब क्यों करना चाहती हूँ। वह सवाल बहुत आसान थे, लेकिन फिर भी मैं थोड़ी घबरा रही थी। मेरा मन बार-बार इस बात पर जा रहा था कि मेरी साड़ी ठीक से बंधी है या नहीं और कहीं मेरे निप्पल दिख तो नहीं रहे हैं। मैंने जैसे-तैसे सारे जवाब दे दिए।
लगभग आधे घंटे बाद उसने कहा कि इंटरव्यू खत्म है और वह बाद में बताएगा। मैं उठी और बाहर आ गई। जैसे ही मैं कॉरिडोर में आई, मैंने देखा कि गोलू बिल्कुल उसी जगह पर खड़ा था, जहाँ मैंने उसे छोड़ा था। वह एक दीवार से लग कर खड़ा था और अपने मोबाइल पर कुछ देख रहा था। जैसे ही उसने मुझे देखा, उसने मोबाइल जेब में रख लिया और मेरी तरफ बढ़ा। वह अभी भी मेरा इंतजार कर रहा था।
यह देख कर मेरे दिल में गर्माहट भर गई। मैं उसके पास गई और बिना कुछ सोचे उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया। उसकी छाती मेरे स्तनों से फिर से दब गई, लेकिन इस बार साड़ी और ब्लाउज के बीच से। फिर मैंने अपने होंठों को उसके गाल पर रख दिया। उसकी त्वचा गर्म थी और मेरे होंठ उस पर कुछ सेकंड टिके रहे।
फिर मैंने उससे कहा, “थैंक यू, गोलू।”
वह थोड़ा शरमा गया और फिर उसने मुझे बाहर तक छोड़ने के लिए रास्ता दिखाया। हम मेन गेट तक आए और फिर मैंने उसे वहीं छोड़ दिया। उसे अभी ऑफिस में रहना था।
गोलू के ऑफिस में रुक जाने के बाद मैं अकेले ही कैब लेकर अपार्टमेंट वापस आ गई। कैब से उतरते ही जब मैं अंदर दाखिल हुई, तो पूरा अपार्टमेंट मुझे कुछ अलग सा लग रहा था। वही दीवारें, वही सोफा, वही रसोई, लेकिन सब कुछ मानो नया हो गया था। शायद इसलिए क्योंकि आज पहली बार मेरे दिल के अंदर कुछ बदल गया था। मैं गोलू को अब सिर्फ अपने छोटे भाई की तरह नहीं देख रही थी। वह मेरी आँखों में एक बड़े लड़के की तरह दिख रहा था, एक ऐसा लड़का जिसने मेरे लिए सब कुछ किया था।
मैं सोचने लगी कि गोलू ने मेरे ब्रेकअप के बाद मुझे अपने साथ रखा, उसने मेरे लिए नौकरी ढूंढी, उसने मुझे साड़ी पहनना सिखाया, और आज वह मेरा इंतजार करता रहा। उसने कभी कुछ मांगा नहीं, बस देता रहा। और आज मैं उसके लिए कुछ खास करना चाहती थी। मैंने सोचा, उसे क्या चीज खुश करेगी? पहले मैंने सोचा कि एक अच्छी वाइन ले आऊं ताकि हम मेरी नई नौकरी का जश्न मना सकें। मैं बाहर गई और एक अच्छी सी वाइन खरीद लाई। फिर मैंने रसोई में जाकर उसके लिए अच्छा खाना बनाया। मैंने सब कुछ ध्यान से रखा।
धीरे-धीरे समय बीतता जा रहा था। शाम होने वाली थी और गोलू लौटने वाला था। लेकिन जैसे-जैसे समय पास आ रहा था, मुझे लगने लगा कि सिर्फ वाइन और खाना काफी नहीं है। मैं कुछ और करना चाहती थी, कुछ ऐसा जो असल में उसे खास लगे।
तभी मुझे उस पहली रात का ख्याल आया, जब मैं इस अपार्टमेंट में आई थी। उस रात गोलू ने सोचा था कि मैं पूरी तरह सो रही हूँ और उसने मेरे स्तनों को छुआ था। वह धीरे से मेरी ब्रा के ऊपर से मेरे स्तनों को सहला रहा था। मैं सो रही नहीं थी, लेकिन मैंने आँखें बंद रखी। उस रात के बाद से मैं सोचती रही थी कि शायद स्तनों के साथ खेलना हर लड़के को अच्छा लगता है। शायद गोलू भी यही चाहता है।
मैंने अपना मन बना लिया। आज मैं उसे मौका दूंगी। अगर वह मेरे स्तनों को छूना चाहता है, तो मैं उसे छूने दूंगी। और अगर वह और ज्यादा चाहता है, तो मैं उसे और भी दूंगी।
शाम ढलते ही मैंने अपनी नई ड्रेस पहनी। वह एक हल्का सा वन पिस था, जो ऊपर से थोड़ा खुला हुआ था और अंदर मैंने ब्रा नहीं पहनी थी। मैंने एक ट्रे पर दो गिलास में वाइन भरी और बीच में एक छोटी मोमबत्ती जला दी। पूरा कमरा हल्की रोशनी से भर गया। मैं सोफे पर बैठ गई और उसका इंतजार करने लगी।
मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था। हर छोटी सी आवाज पर मैं चौंक जाती थी। फिर अचानक दरवाजे की घंटी बजी। मेरी सांसें तेज हो गई। मैं उठी और दरवाजे की तरफ बढ़ी। मेरे हाथ थोड़े काँप रहे थे। मैंने गहरी सांस ली और दरवाजा खोला।
लेकिन दरवाजे के पीछे गोलू नहीं था।
वहाँ एक लड़की खड़ी थी। उसने मुझे देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “हैलो, मैं गोलू की गर्लफ्रेंड हूँ।”