पिछला भाग पढ़े:- सिमरन दीदी और उसका छोटा भाई-1
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
अगली सुबह मैं ऐसे दिखाने की कोशिश कर रही थी जैसे कुछ हुआ ही नहीं था। लेकिन सच यह था कि मेरे दिमाग में बार-बार पिछली रात का वही पल घूम रहा था। जब मैं और मेरा भाई गोलू एक ही बिस्तर पर सो रहे थे, तब उसका हाथ कुछ देर तक मेरे सीने पर था और उसकी उंगलियों का दबाव मेरे स्तनों पर साफ महसूस हुआ था।
मैं समझ नहीं पा रही थी कि मेरे भाई ने यह जान-बूझ कर किया था या नींद में अनजाने में उसका हाथ वहाँ आ गया था।
मेरे मन में कई बार आया कि गोलू से सीधे पूछ लूँ। लेकिन फिर मैंने सोचा कि अगर उसने जान-बूझ कर कुछ नहीं किया होगा, तो यह बात पूछने से उसके मन में झिझक आ जाएगी और हमारे बीच अजीब-सा माहौल बन जाएगा। आखिर वह मेरा भाई था। और अगर उसने जान-बूझ कर ऐसा किया होगा, तो भी इस बारे में बात करना हम दोनों के लिए बहुत असहज होता।
इसलिए मैंने तय किया कि इस बारे में चुप रहना ही बेहतर है। मैं बिस्तर से उठी और बाथरूम में नहाने चली गई। शॉवर के नीचे खड़ी होकर भी मैं पिछली रात की बात भूल नहीं पा रही थी। मेरे भाई के हाथ का एहसास अब भी मेरे मन में ताजा था, और यही सोचकर मैं और ज्यादा उलझन में पड़ रही थी।
नहाने के बाद जब मैंने इधर-उधर देखा तो मुझे याद आया कि अपना तौलिया मैं पिछली रात अपने बॉयफ्रेंड के फ्लैट पर ही छोड़ आई थी। मेरे पास पहनने के लिए कुछ नहीं था। मजबूरी में मैंने बाथरूम में टंगा हुआ गोलू का एक तौलिया उठा लिया और उसे अपने शरीर के चारों तरफ लपेट लिया।
मैंने जैसे ही बाथरूम का दरवाज़ा खोला और लिविंग रूम में कदम रखा, मेरी सांस एक पल के लिए थम गई। गोलू पहले से जाग चुका था और सोफे पर बैठा हुआ था।
उसकी नजर अचानक मुझ पर पड़ी। तौलिया छोटा था और मेरे शरीर को पूरी तरह ढक नहीं पा रहा था। मेरी गर्दन और जांघों का काफी हिस्सा खुला हुआ था। नहाने के बाद मेरे गीले बाल मेरे सीने से चिपके हुए थे। ठंडे पानी की वजह से मेरे निप्पल उभरे हुए थे, जो तौलिये के ऊपर से भी साफ नज़र आ रहे थे। पतले कपड़े के नीचे मेरे स्तनों का हल्का आकार भी दिख रही थी।
कुछ सेकंड के लिए उसकी नज़र मेरे सीने पर ठहर गई। फिर उसने तुरंत नज़र दूसरी तरफ फेर ली, जैसे उसने खुद को संभालने की कोशिश की हो।
उसके इतना कहते ही वह उठ कर बाथरूम की तरफ चला गया। कुछ ही देर बाद अंदर से शॉवर चलने की आवाज़ आने लगी। मैं जल्दी से अपने कपड़े पहनने लगी। कपड़े बदलने के बाद मुझे याद आया कि गोलू का तौलिया अभी भी मेरे पास था। मैं बाथरूम के दरवाज़े के पास गई और तौलिया उसे दे दिया। उसने अंदर से हाथ बढ़ा कर तौलिया ले लिया।
इसके बाद मैं किचन में गई और उसके लिए चाय बनाने लगी। पानी उबलने लगा तो मैंने उसमें चायपत्ती, चीनी और दूध डाल दिया। मेरा ध्यान काम में था, लेकिन मन अब भी सुबह की उन छोटी-छोटी बातों में उलझा हुआ था।
कुछ देर बाद गोलू नहा कर बाहर आया। उसने ऑफिस के कपड़े पहन लिए थे। वह सीधे किचन में आया और मेरे पास आकर खड़ा हो गया। बिना कुछ कहे उसने काउंटर पर रखा चाय का कप उठा लिया।
मैंने उसकी तरफ देखा और धीमी आवाज़ में कहा, “गोलू, क्या मैं तुमसे एक बात पूछ सकती हूँ?”
गोलू ने मेरी तरफ देखा और हल्का-सा मुस्कुराया। फिर उसने शांत आवाज़ में कहा, “हाँ दीदी, बिल्कुल पूछो।”
मैंने चाय का एक लंबा घूंट लिया ताकि अपने मन की घबराहट को थोड़ा कम कर सकूँ। कुछ सेकंड तक मैं कप की तरफ देखती रही, फिर धीरे से बोली, “कल रात मैंने तुम्हें बताया था ना कि मेरे बॉयफ्रेंड ने मुझसे ब्रेकअप कर लिया, क्योंकि मैंने उसका लंड मुंह में लेने से मना कर दिया था।”
मैंने एक पल के लिए उसकी आँखों में देखा और फिर पूछा, “तुम क्या सोचते हो? क्या हर लड़के को यह पसंद होता है, या मेरा बॉयफ्रेंड ही ऐसा था?”
मेरी बात सुन कर गोलू कुछ पल चुप रहा। फिर उसने हल्की-सी मुस्कान के साथ मेरी तरफ देखा और कहा, “दीदी, आप मेरी बड़ी बहन हो। मैं इस तरह के सवाल का जवाब आपको कैसे दूँ?”
मेरी बात सुन कर उसने हल्के से गला साफ किया। वह कुछ सेकंड तक सोचता रहा, जैसे सही शब्द चुनने की कोशिश कर रहा हो। फिर उसने धीरे से कहा, “देखो दीदी, सच कहूँ तो ज्यादातर लड़कों को यह पसंद होता है जब उनकी गर्लफ्रेंड उनका लंड मुंह में लेती है।”
उसने चाय का एक घूंट लिया और आगे बोला, “मेरी भी एक गर्लफ्रेंड है, और वह मेरे साथ ऐसा करती है। मुझे अच्छा लगता है, लेकिन इसलिए क्योंकि उसे भी इसमें कोई परेशानी नहीं होती। वह अपनी मर्जी से करती है।”
उसने मेरी तरफ देख कर शांत आवाज़ में कहा, “लेकिन अगर तुम्हें यह पसंद नहीं है, तो तुम्हें सिर्फ किसी को खुश करने के लिए ऐसा करने की जरूरत नहीं है।”
कुछ पल रुक कर उसने साफ शब्दों में कहा, “अगर तुम्हारे बॉयफ्रेंड ने सिर्फ इस वजह से तुमसे रिश्ता तोड़ दिया, तो मुझे लगता है कि ब्रेकअप होना ही बेहतर था।”
उसकी बात खत्म होने के बाद उसने कप सिंक में रखा, अपना बैग उठाया और ऑफिस जाने के लिए तैयार हो गया। दरवाज़े तक पहुँच कर उसने मेरी तरफ देखा और कहा कि अगर मुझे किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो मैं उसे फोन कर सकती हूँ। फिर वह मुस्कुराया और काम पर चला गया।
दरवाज़ा बंद होते ही फ्लैट में अचानक सन्नाटा छा गया। अब मैं बिल्कुल अकेली थी। कुछ देर के लिए मेरे मन में आया कि अपने पुराने बॉयफ्रेंड को फोन करूँ। लेकिन अगले ही पल मैंने वह सोच अपने दिमाग से निकाल दी। उसने जिस वजह से मुझसे रिश्ता तोड़ा था, उसके बाद उसे फोन करना मेरे लिए सही नहीं था।
समय बिताने के लिए मैंने गोलू के फ्लैट की सफाई करने का फैसला किया। सच कहूँ तो उसका फ्लैट काफी बिखरा हुआ था। वह अकेला रहता था और काम की वजह से उसे घर साफ करने का समय नहीं मिलता था।
मैंने सबसे पहले लिविंग रूम ठीक किया। सोफे पर पड़े कपड़े समेटे, सेंटर टेबल साफ की और फर्श पर झाड़ू लगाई। इसके बाद मैं किचन में गई, बर्तन धोए और काउंटर साफ किया। फिर मैंने उसके कपड़े धोने शुरू किए। शर्ट, पैंट, टी-शर्ट और उसके अंडरवियर भी धुलने के लिए डाल दिए। कुछ कपड़े काफी दिनों से पड़े हुए लग रहे थे।
करीब तीन घंटे बाद पूरा फ्लैट पहले से कहीं ज्यादा साफ लग रहा था। मैं थक चुकी थी, इसलिए थोड़ी देर आराम करने के लिए सोफे पर बैठ गई। फिर मैंने गोलू का लैपटॉप खोला और समय बिताने के लिए कोई फिल्म ढूँढने लगी।
मैं उसकी फाइलें देख रही थी ताकि कोई अच्छी मूवी मिल जाए। तभी मेरी नज़र एक प्राइवेट फोल्डर पर पड़ी। कुछ पल मैं रुकी, लेकिन मन नहीं माना और मैंने वह फोल्डर खोल दिया। फोल्डर खुलते ही मैं कुछ सेकंड के लिए हैरान रह गई। उसमें कई तस्वीरें और कुछ वीडियो थे। ज्यादातर तस्वीरें गोलू की गर्लफ्रेंड की थी।
अलग-अलग एंगल से खींची गई तस्वीरों में वह पूरी तरह बिना कपड़ों के थी। कुछ तस्वीरों में वह अपने स्तन कैमरे की तरफ दिखा रही थी। कुछ में उसका नाजुक हिस्सा साफ दिखाई दे रहा था। हर तस्वीर पहले से ज्यादा निजी थी।
उन तस्वीरों के बीच गोलू की भी कई तस्वीरें थी। उनमें उसका लंड साफ दिखाई दे रहा था। यह पहली बार था जब मैंने अपने भाई को इस तरह देखा था। मैं कुछ सेकंड के लिए बिल्कुल शांत रह गई। मेरे दिल की धड़कन अचानक तेज हो गई।
मैंने ध्यान से तस्वीर को देखा। उसका लंड बड़ा और मोटा था। यह देख कर मैं और ज्यादा चौंक गई। मेरे मन में तुरंत यही आया कि वह मेरा भाई है और मुझे यह सब नहीं देखना चाहिए।
मैंने घबरा कर लैपटॉप बंद कर दिया। कुछ सेकंड तक मैं चुप-चाप सोफे पर बैठी रही। दिल तेज़ी से धड़क रहा था। मुझे लग रहा था जैसे मैंने कुछ ऐसा देख लिया हो जो मुझे नहीं देखना चाहिए था। लेकिन फिर मेरे मन में एक और विचार आया। यह सिर्फ तस्वीरें थी। गोलू को कभी पता भी नहीं चलेगा कि मैंने यह फोल्डर खोला था।
धीरे-धीरे मेरा मन फिर से उसी तरफ जाने लगा। उसकी गर्लफ्रेंड के स्तनों की तस्वीरें, उसके नाजुक हिस्से के अलग-अलग एंगल, और गोलू के लंड की तस्वीरें बार-बार मेरे दिमाग में घूम रही थी। मैंने गहरी सांस ली, लैपटॉप दोबारा खोला और वही फोल्डर फिर से खोल दिया। इस बार मैंने एक-एक करके सारी तस्वीरें ध्यान से देखनी शुरू कर दी।
कुछ देर बाद मैंने वीडियो वाला फोल्डर खोला और एक वीडियो चलाया। वीडियो शुरू होते ही स्क्रीन पर गोलू और उसकी गर्लफ्रेंड दिखाई दिए।
कभी उसकी गर्लफ्रेंड गोलू का लंड अपने मुंह में ले रही थी। कभी गोलू उसके नाजुक हिस्से को अपने होंठों से सहला रहा था। हर वीडियो में दोनों अलग-अलग तरीकों से एक-दूसरे के साथ पूरी तरह डूबे हुए थे।
मैं एक के बाद एक वीडियो चलाती गई। कहीं वे बिस्तर पर थे, कहीं सोफे पर, और कहीं कमरे के अलग-अलग कोनों में। उनकी नज़दीकी देख कर मुझे लग रहा था कि यह किसी भी पोर्न साइट से ज्यादा निजी और ज्यादा दिलचस्प था, क्योंकि यह सब सच था।
कुछ वीडियो में उसकी गर्लफ्रेंड गोलू के लंड से निकला सफेद पानी अपने होंठों से समेट रही थी। कुछ में गोलू उसे पीछे से पकड़ कर उसके पिछवाड़े पर थपकी दे रहा था और दोनों हँस रहे थे।
एक वीडियो ने मेरा ध्यान सबसे ज्यादा खींचा। उसमें उसकी गर्लफ्रेंड बाथरूम के कमोड पर पूरी तरह बिना कपड़ों के बैठी थी। कैमरा उसके सामने रखा था। कुछ ही पल बाद गोलू ने अपनी गर्लफ्रेंड के नंगे बदन पर पेशाब करना शुरू किया। पेशाब की पतली धार उसके चेहरे से होती हुई उसके स्तनों पर बहने लगी और छोटी-छोटी बूंदें उसके पूरे शरीर पर फैलती चली गई।
मैं स्क्रीन से नज़र नहीं हटा पा रही थी। जितना ज्यादा मैं देख रही थी, उतना ही मुझे महसूस हो रहा था कि गोलू और उसकी गर्लफ्रेंड के बीच किसी तरह की झिझक नहीं थी। वे एक-दूसरे के साथ पूरी तरह खुले हुए थे और हर चीज़ अपनी मर्जी से कर रहे थे।
समय बीतता गया और मैं उन वीडियो में पूरी तरह खोती चली गई। मेरा ध्यान अब सिर्फ स्क्रीन पर चल रहे सिन पर था। हर नया वीडियो मेरे भीतर एक अलग तरह की गर्माहट पैदा कर रहा था। मैंने धीरे से अपना शॉर्ट नीचे सरकाया और अपनी गुलाबी पैंटी भी उतार दी। मेरा दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था। कमरे में सन्नाटा था और सिर्फ लैपटॉप से आती आवाज़ें सुनाई दे रही थी।
मैं सोफे पर थोड़ा पीछे सरक कर बैठ गई और अपने पैरों को हल्का-सा फैलाया। मेरे नाजुक हिस्से में पहले से ही हल्की नमी महसूस हो रही थी। मैंने झिझकते हुए अपने हाथ वहां ले जाकर खुद को सहलाना शुरू किया।
स्क्रीन पर गोलू और उसकी गर्लफ्रेंड एक-दूसरे में खोए हुए थे, और मैं भी अनजाने में उन्हीं पलो के साथ बहती जा रही थी। हर स्पर्श के साथ मेरे शरीर में सिहरन दौड़ रही थी।
मेरे दिमाग में बार-बार यही ख्याल आ रहा था कि मैं अपने भाई के निजी वीडियो देख रही हूँ, लेकिन उस पल मैं खुद को रोक नहीं पा रही थी। मेरी सांसें गहरी होती जा रही थी और मेरी आँखें स्क्रीन पर टिकी हुई थी।
कुछ मिनट बाद मेरे पूरे शरीर में एक तेज़ झटका-सा महसूस होने लगा। मेरी उंगलियों की हर हरकत के साथ मेरे भीतर जमा हुई गर्माहट और भी बढ़ती जा रही थी। मेरी साँसें इतनी तेज़ हो चुकी थी कि मुझे अपनी ही धड़कनें साफ सुनाई दे रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे मेरा शरीर धीरे-धीरे अपने आप पर से पकड़ छोड़ता जा रहा हो।
फिर अचानक मेरे नाजुक हिस्से में एक बहुत तेज़ एहसास उठा और मेरा शरीर हल्का-सा काँप गया। मैं कुछ देर के लिए बिल्कुल रुक गई। मेरी उंगलियाँ वहीं ठहर गई और मैंने गहरी साँस ली। उसी समय मुझे महसूस हुआ कि मेरे नाजुक हिस्से से सफेद रंग का पतला तरल धीरे-धीरे बाहर आने लगा। वह तरल बहुत ज्यादा नहीं था, लेकिन इतना जरूर था कि वह बाहर निकल कर मेरी जाँघों के बीच फैलने लगा।
मैंने नीचे देखा तो वह सफेद तरल मेरे नाजुक हिस्से के बाहर चमक रहा था। उसकी गर्माहट मुझे साफ महसूस हो रही थी। मेरा शरीर अभी भी हल्का-हल्का काँप रहा था और मेरे भीतर एक अजीब-सा ढीला-पन फैल चुका था।
मैंने अपनी बैठने का तरीका बदला और नीचे झुक कर सोफे पर गिरी उन छोटी-छोटी सफेद बूंदों को ध्यान से देखा। उनमें हल्की-सी नमकीन गंध थी। मैंने अपना चेहरा थोड़ा और पास ले जाकर उन्हें सूंघा। उस गंध में मेरे अपने शरीर की गर्माहट मिली हुई थी।
मेरे होंठ अपने आप थोड़ा खुल गए। मैंने धीरे से अपनी जीभ बाहर निकाली और सोफे पर पड़ी उन बूंदों को चाट लिया ताकि सोफे पर कोई निशान ना रह जाए। जैसे ही वह स्वाद मेरी जीभ पर आया, मुझे उसका हल्का-सा नमकीन स्वाद महसूस हुआ।
मैंने ध्यान से बाकी छोटी-छोटी बूंदों को भी साफ कर दिया। मैं यह पक्का करना चाहती थी कि सोफे पर कुछ भी बाकी ना रहे। जब सब कुछ साफ हो गया, तो मैंने सीधा होकर गहरी साँस ली।
मैं कुछ देर तक चुप-चाप बैठी रही और सोचती रही कि अभी कुछ मिनटों में मेरे साथ क्या-क्या हो गया था। मैंने अपने कपड़े ठीक किए, सोफे पर सिर टिकाया और एक लंबी साँस ली। लैपटॉप की स्क्रीन अब भी सामने खुली थी, लेकिन मेरा ध्यान कहीं और था।
कुछ देर बाद मैंने लैपटॉप बंद किया और उसे अपने पास ही एक तरफ रख दिया। शरीर की सारी थकान अब साफ महसूस हो रही थी। मैं सोफे पर ही लेट गई। मन में बहुत सारे विचार चल रहे थे, लेकिन आँखें इतनी भारी हो चुकी थी कि कब मेरी आँख लग गई, मुझे पता ही नहीं चला।
उस दिन मुझे लंबे समय बाद बहुत अच्छी नींद आई। ऐसा लग रहा था जैसे मेरे मन का सारा तनाव कुछ देर के लिए गायब हो गया हो। मैं गहरी नींद में थी और तभी अचानक दरवाजे की घंटी बजने की आवाज़ से मेरी आँख खुली।
मैंने घड़ी की तरफ देखा तो समझ गई कि गोलू ऑफिस से वापस आ गया था। मैं जल्दी से उठी, अपने कपड़े ठीक किए और दरवाजे तक गई। जैसे ही मैंने दरवाजा खोला, गोलू सामने खड़ा था। उसके चेहरे पर हमेशा की तरह हल्की-सी मुस्कान थी।
उसने अंदर आते ही मुस्कुरा कर पूछा, “कैसा रहा आपका दिन, दीदी?”
मैंने उसकी तरफ देखा और बिना ज्यादा सोचे मुस्कुरा कर कहा, “उम्मीद से कहीं ज्यादा अच्छा रहा।”
मेरे जवाब पर वह हल्का-सा मुस्कुराया, अपना बैग किचन के पास रख कर सीधे बाथरूम की तरफ चला गया। जैसे ही बाथरूम का दरवाजा बंद हुआ, मेरे भीतर अचानक घबराहट दौड़ गई। मैंने तुरंत लैपटॉप उठाया और तेज़ी से उसे वापस उसी मेज़ पर रख दिया जहाँ वह पहले रखा था।
सब कुछ अपनी जगह रखने के बाद भी मेरा मन शांत नहीं हो रहा था। बार-बार मेरी आँखों के सामने वही वीडियो घूम रहा था। गोलू का बड़ा और मोटा लंड मेरे दिमाग से निकल ही नहीं रहा था। मैं बार-बार सोच रही थी कि उसका लंड वीडियो में कितना भरा हुआ और असरदार दिख रहा था। उससे भी ज्यादा मुझे उसकी गर्लफ्रेंड का चेहरा याद आ रहा था, जिस तरह वह उसके साथ पूरी तरह डूबी हुई और खुश दिखाई दे रही थी। मैं भी उसी तरह खुश होना चाहती थी। मैं भी उसका लंड अपने मुंह में लेना चाहती थी।
मैंने पहले कभी अपने बॉयफ्रेंड के बारे में इस तरह नहीं सोचा था लेकिन इस समय मेरे मन में गोलू को लेकर एक नया और उलझा हुआ एहसास जन्म ले चुका था। यह सोच कर ही मैं खुद चौंक रही थी कि अगर कभी मुझे मौका मिला, तो मैं उसका लंड अपने मुँह में लेकर उसे महसूस करना चाहूँगी।
यह खयाल आते ही मैं खुद हैरान रह गई। मैंने अपने बॉयफ्रेंड के लिए कभी ऐसा महसूस नहीं किया था, लेकिन अपने ही भाई के लिए मेरे मन में यह इच्छा उठ रही थी। एक तरफ मुझे शर्म महसूस हो रही थी, और दूसरी तरफ मैं इस बात से इनकार भी नहीं कर पा रही थी कि मेरे मन में उसके लिए कुछ बदल चुका था।
बाथरूम से पानी की आवाज़ आ रही थी और मैं सोफे पर बैठी अपने ही विचारों में उलझी हुई थी। मेरे दिल की धड़कन फिर से तेज़ हो गई थी। मैं जानती थी कि मेरे मन में जो चल रहा था, वह मेरे लिए बिल्कुल नया था, लेकिन अब मैं उसे नज़र-अंदाज़ नहीं कर पा रही थी।