पिछला भाग पढ़े:- साक्षी दीदी और मेरी सेक्स कहानी-5
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
साक्षी दीदी और मैं कंबल के अंदर पूरी तरह नंगे लेटे हुए थे। उनका शरीर ठंडा था। वह ठंडा शरीर मेरे गर्म बदन से चिपक गया था। उनके मुलायम स्तन मेरी छाती पर दब रहे थे। उन स्तनों की मुलायमी रुई जैसी लग रही थी, लेकिन वे ठंडे थे। उनके निप्पल कड़े हो गए थे और मेरी छाती पर रगड़ खा रहे थे। जब साक्षी दीदी सांस लेती थी, तो उनके स्तन मेरी छाती पर और जोर से दब जाते थे और फिर हल्के हो जाते थे। कंबल के अंदर मुझे उनके शरीर का ठंडापन साफ महसूस हो रहा था। मैं उनके निप्पल की ठोकर भी अपनी छाती पर महसूस कर सकता था।
साक्षी दीदी ने थोड़ी हिचकिचाहट के साथ पूछा, “क्या हुआ, गोलू?”
मैंने अपना मुँह उनके कान के पास ले जाकर धीरे से कहा, “कुछ नहीं दीदी। ”
मैंने धीरे से अपना लंड साक्षी दीदी के नाज़ुक हिस्से से सटाया। वह जगह बहुत मुलायम और हल्की सी गीली थी। कंबल के अंदर अंधेरा था और कुछ दिख नहीं रहा था, लेकिन वहां की गर्मी सीधे महसूस हो रही थी। जैसे ही मैंने थोड़ा आगे दबाया, मेरा लंड उनके गीले हिस्से के बीच धीरे-धीरे अंदर फिसलने लगा। वह जगह इतनी तंग थी कि अंदर जाते ही उसने मेरे लंड को चारों तरफ से कस लिया, जिससे मेरा लंड और ज़्यादा टाइट होने लगा।
उस तंग और गर्म जगह में जैसे ही लंड थोड़ा और अंदर गया, दीदी के मुंह से एक दबी हुई आह निकली। उन्होंने अंधेरे में ही कस कर मेरा कंधा पकड़ लिया और धीरे से फुसफुसाई, “अह्ह… रुको, बहुत टाइट है।”
मैं उनके फुसफुसाने पर एक पल के लिए रुक गया, लेकिन मेरे लंड पर उनका वो गर्म और टाइट हिस्सा पूरी तरह जकड़ा हुआ था। कंबल के अंदर हम दोनों की सांसें बहुत तेज़ चल रही थी। दीदी ने मेरे कंधे को और कस कर पकड़ लिया, जैसे वो उस दबाव को संभालने की कोशिश कर रही हों।
मैंने थोड़ा रुक कर उनके बदन को ढीला होने का मौका दिया और फिर धीरे से कमर को थोड़ा और आगे बढ़ाया। मेरा लंड उनके उस बेहद गीले हिस्से में थोड़ा और गहराई तक धंस गया। इस बार उनके मुंह से एक लंबी और तीखी सिसकी निकली, “ओह्ह… धीरे…”
दीदी की उस सिसकी ने मेरे अंदर की उत्तेजना को और बढ़ा दिया। मैंने अपनी रफ्तार को थोड़ा धीमा रखा ताकि उन्हें दर्द ना हो, लेकिन हर बार जब मैं पीछे हट कर दोबारा अंदर दबाता, तो उनका वह गीला और तंग हिस्सा मेरे लंड को पूरी तरह से भिगो देता।
कंबल के अंदर की हवा अब हम दोनों की गर्म सांसों से भर चुकी थी। दीदी का पूरा बदन धीरे-धीरे ढीला पड़ने लगा था और अब वह दर्द की जगह एक अलग ही अहसास में डूब रही थी। उन्होंने अपनी उंगलियां मेरे बालों में फंसा ली और हर झटके के साथ उनके मुंह से हल्की-हल्की सुबकियां निकलने लगी।
मैंने उनकी कमर को अपने हाथों से कस कर पकड़ा और एक गहरा झटका दिया। मेरा लंड लगभग पूरा उनके अंदर समा गया। दीदी ने अपनी आँखें कस कर बंद कर ली और मेरी पीठ पर अपने नाखून गड़ाते हुए धीरे से कराहती हुई बोली, “अह्ह… हां… ऐसे ही…”
उस जगह का गीलापन इतना ज़्यादा था कि मेरा लंड अब आसानी से अंदर-बाहर फिसलने लगा था। हर एक हल्के झटके के साथ, उस तंग जगह की पूरी गर्मी मेरे लंड को महसूस हो रही थी, जिसने मुझे पूरी तरह बेकाबू कर दिया था।
मैंने अपनी रफ्तार को थोड़ा और तेज़ कर दिया। कंबल के उस तंग और अंधेरे माहौल में सिर्फ हमारे बदन के टकराने की और उनके गीलेपन की आवाज़ आ रही थी। हर एक झटके के साथ मेरा लंड उनकी उस बेहद गर्म और तंग जगह में गहराई तक जा रहा था।
दीदी अब पूरी तरह से इस अहसास में बह चुकी थी। उनका बदन हर झटके के साथ ऊपर-नीचे हो रहा था। उन्होंने मेरे कंधों पर अपने हाथ और मजबूत कर लिए और हर बार जब मैं पूरा अंदर धंसता, तो उनके मुंह से एक गहरी और बेकाबू आह निकलती, “ऊह्ह… बहुत गहरा जा रहा है…”
उस जगह की टाइटनेस और लगातार बढ़ते गीलेपन की वजह से मेरा लंड अब अपने चरम पर था। मुझे महसूस हो रहा था कि अंदर की दीवारें मेरे लंड को हर तरफ से बुरी तरह भींच रही थी। अब मुझसे और रुका नहीं जा रहा था, मैंने उनकी कमर को और ऊपर उठाया और पूरी ताकत से आखिरी कुछ तेज़ झटके लगाने शुरू कर दिए।
मैंने हांफते हुए उनके कान के पास अपना मुंह किया और एक-दम दबी हुई आवाज़ में बोला, “दीदी… मेरा निकलने वाला है… अब रुक नहीं रहा।”
मेरी बात सुनते ही दीदी ने अपनी आँखें खोली, जो इस अहसास में पूरी तरह डूब चुकी थी। उन्होंने अपनी कमर को थोड़ा और ऊपर उठाया, मेरे लंड को अंदर और गहराई से महसूस किया, और मेरी पीठ को सहलाते हुए हांफती हुई आवाज़ में बोली, “गोलू… इतनी जल्दी? प्लीज… थोड़ा सा और रुको ना… कुछ मिनट और संभालो।”
उनकी इस बात और उस तंग जगह के लगातार बनते दबाव ने मेरे दिमाग को पूरी तरह सुन्न कर दिया। उनका वो गीलापन मेरे लंड पर और तेज़ी से रगड़ खा रहा था, जिससे खुद को रोकना मेरे लिए लगभग नामुमकिन होता जा रहा था। मैंने अपनी सांसों को काबू करने के लिए एक सेकंड के लिए अपनी रफ्तार धीमी की, लेकिन उनके बदन की गर्मी मुझे लगातार आगे बढ़ने पर मजबूर कर रही थी।
अचानक मेरे लंड में एक बहुत तेज़ हलचल हुई और मेरा पानी अंदर ही छूटने लगा। मैंने एक गहरा झटका दिया और पूरी ताकत से अपना लंड उनके अंदर दबा दिया। मेरा गर्म पानी पिचकारी की तरह उनके उस नाज़ुक हिस्से के अंदर गहराई में गिरने लगा।
जैसे ही मेरा पानी अंदर छूटा, मेरे मुंह से एक लंबी और बेबस आह निकली, “अह्ह… दीदी…”
कंबल के अंदर, मुझे साफ़ महसूस हो रहा था कि मेरा गर्म पानी उनकी उस तंग जगह को अंदर से पूरी तरह भर रहा है। जब तक आखिरी बूंद तक अंदर नहीं निकल गई, मैं उनके बदन पर पूरी तरह ढीला होकर गिर गया। दीदी ने भी अपनी बाहें मेरी पीठ पर कस ली और हम दोनों की तेज़ सांसें उस शांत कमरे में गूंजने लगी।
कुछ मिनटों के बाद, जब हम दोनों की सांसें थोड़ी नॉर्मल हुई, तो मैं धीरे से उनके ऊपर से हटा। मेरा लंड अब पूरी तरह ढीला हो चुका था और बाहर आ गया। मैंने बेड के पास से टिश्यू पेपर उठाया और अपने लंड को साफ किया। उसके बाद मैंने दीदी को भी टिश्यू दिया, और उन्होंने भी अपने उस हिस्से को अच्छे से साफ कर लिया।
कंबल के अंदर अब थोड़ी ठंडक लगने लगी थी। उनका बदन थोड़ा ठंडा पड़ रहा था, इसलिए हमने तय किया कि हम बिना कपड़ों के ही ऐसे ही चिपक कर सोएंगे, ताकि मेरे बदन की पूरी गर्मी सीधे उन्हें मिल सके। मैंने कंबल को अच्छे से ऊपर तक ओढ़ लिया।
तभी उनके चोटिल हिस्से पर, जहाँ प्लास्टर चढ़ा हुआ था, वहाँ उन्हें थोड़ा सा दर्द हुआ। लेकिन उन्होंने मेरी छाती पर अपना सिर टिकाया और मुस्कुरा कर धीरे से कहा, “थोड़ा सा दर्द हो रहा है गोलू… लेकिन इस मजे के आगे यह दर्द कुछ भी नहीं है।”
मैंने उन्हें और कस कर अपने गले से लगा लिया और उस अंधेरे कंबल के अंदर, बिना कपड़ों के एक-दूसरे की गर्मी को महसूस करते हुए हम दोनों धीरे-धीरे सोने लगे।
अगली सुबह मेरी आँख बहुत जल्दी खुल गई। मैंने चुप-चाप अपने कपड़े पहने और बिना कोई आवाज़ किए सीधे अपने कमरे में आ गया। साक्षी दीदी उस वक्त अभी भी गहरी नींद में सो रही थी।
अपने कमरे में अकेले बेड पर बैठते ही मेरे दिमाग में दो तरह की बातें चलने लगी और मैं बुरी तरह उलझ गया। पहली चीज़ थी गिल्ट। सच तो यह था कि मैं शुरू से ही उन्हें चोदना चाहता था। लेकिन जब कल रात मुझे सच में मौका मिला और मैंने उन्हें चोद दिया, तो अब मेरे दिमाग में अजीब-अजीब डर आने लगे।
मुझे लगा कि अपनी ही दीदी को चोदना कितना गलत था। मैं सोचने लगा कि भले ही मम्मी-पापा बाहर गए हैं, पर अगर कभी भी उन्हें इस बात का पता चल गया तो क्या होगा? अगर घर में या बाहर किसी को भी इस बात की भनक लग गई, तो सब खत्म हो जाएगा। यह सोच कर ही मेरे हाथ-पैर ठंडे होने लगे। मुझे खुद से ही अजीब सा डर लगने लगा था।
लेकिन जैसे ही मैं दूसरी तरफ सोचता, मेरे मन में एक बहुत बड़ी खुशी आ जाती। मैं बेड पर लेटे-लेटे रात की बातें याद करने लगा। उनका वो गीलापन, वो टाइट जगह, और उनका मेरे कान में “गोलू” कह कर फुसफुसाना—यह सब याद आते ही मेरे चेहरे पर मुस्कान आ जाती। जिस दीदी को मैं हमेशा सिर्फ देखता रहता था, कल रात आखिरकार मुझे उन्हें चोदने का मौका मिल गया था। मैंने उन्हें वो मजा दिया था जिसके बारे में मैं रोज़ रात को अकेले में सोचता था। आखिरकार मैंने वो कर दिखाया था जो मैं हमेशा से चाहता था। यह खुशी इतनी बड़ी थी कि मेरा डर और गिल्ट इसके आगे धीरे-धीरे कम होने लगता।
उस सुबह मेरे अंदर नाश्ता बनाने की बिल्कुल भी हिम्मत नहीं थी। रात भर की थकान और दिमाग में चल रही बातों की वजह से मैं बहुत थका हुआ महसूस कर रहा था। इसलिए मैं चुप-चाप घर से बाहर निकला और पास की दुकान से कुछ इडलियाँ खरीद लाया।
जब मैं वापस घर आया, तो देखा कि साक्षी दीदी पहले ही जाग चुकी थी। वह सोफे पर बैठी हुई थी, शायद मेरा ही इंतज़ार कर रही थी। मैंने इडली का पैकेट खोला और सोफे पर उनके सामने रख दिया, फिर मैं भी वहीं उनके पास बैठ गया। दीदी ने मुस्कुराते हुए एक इडली उठाई और उसकी पहली बाइट ली।
इडली की पहली बाइट लेने के बाद, दीदी ने उसे चबाया और फिर कुछ सोचते हुए रुक गई। उनके चेहरे पर थोड़ी हिचकिचाहट साफ़ दिख रही थी, जैसे वह कुछ कहना चाहती थी लेकिन समझ नहीं पा रही थी कि कैसे कहें।
उन्होंने इडली को नीचे रखा, अपनी नज़रें मुझसे थोड़ी चुराई और फिर धीरे से हिचकिचाते हुए बोली, “गोलू… मैं तुमसे थोड़ी नाराज़ हूँ।”
उनकी यह बात सुनते ही मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गई। मुझे लगा कि शायद रात वाली बात को लेकर वह मुझसे सच में गुस्सा हैं या उन्हें इस बात का बुरा लगा है। मैं चुप-चाप उनके चेहरे को देखने लगा, यह जानने के लिए कि वह आगे क्या कहती हैं।
दीदी ने मेरी तरफ देखा और उनके चेहरे पर वो हिचकिचाहट अभी भी थी। उन्होंने इडली को हाथ में पकड़े हुए थोड़ा शर्माते हुए और हल्के गुस्से में कहा, “मैं नाराज़ इसलिए हूँ गोलू… क्योंकि तुमने तो कहा था कि तुम सिर्फ अपने लंड का टिप ही अंदर डालोगे… लेकिन कल रात तो तुमने मुझे पूरा चोद ही दिया।”
उनकी यह बात सुनते ही मेरी बोलती बंद हो गई। कल रात का वो पूरा नज़ारा मेरी आँखों के सामने आ गया, जब मैंने शुरुआत में सिर्फ टिप डालने का वादा किया था, लेकिन बाद में मजे के चक्कर में खुद पर काबू नहीं रख पाया और उन्हें पूरा चोद डाला।
मैंने एक गहरी सांस ली और थोड़ा शर्माते हुए उनकी तरफ देखा। मेरे पास छुपाने के लिए कुछ नहीं था, इसलिए मैंने सच ही कह दिया। मैंने धीरे से कहा, “क्योंकि मैं खुद को रोक ही नहीं पाया दीदी…”
मेरी यह बात सुन कर दीदी ने अपनी नज़रें नीचे कर ली। उनके गालों पर हल्की सी लाली आ गई और वह बिना कुछ बोले बस चुप-चाप अपनी इडली चबाने लगी।
नाश्ता खत्म करने के बाद, हमारे पास पूरे दिन करने के लिए कुछ खास काम नहीं था। मम्मी-पापा शाम को शादी से वापस आने वाले थे, इसलिए हमारे पास सिर्फ कुछ ही घंटे अकेले बचे थे।
कल रात जो कुछ भी हुआ था, उसकी वजह से हम दोनों के बीच एक अजीब सी शर्म और झिझक आ गई थी। एक-दूसरे के सामने आने में हमें बहुत अजीब लग रहा था, इसलिए पूरे दिन हम दोनों ने एक-दूसरे को इग्नोर करने की कोशिश की। लेकिन चाह कर भी मेरी आँखें बार-बार उसी पर टिक जाती थी। जब भी वह सोफे पर बैठती या घर के अंदर चलती-फिरती, मेरी नज़रें चुपके से उनका पीछा करने लगती।
वह उस समय एक एक-दम फिटिंग वाली टी-शर्ट पहनी हुई थी। उस टाइट टी-शर्ट के अंदर उनके बड़े-बड़े स्तन दूध से भरे गुब्बारों की तरह हिलते हुए साफ दिख रहे थे। जैसे ही वह कदम बढ़ाती, उनका उभार ऊपर-नीचे होता। उनके स्तन की कड़क निप्पल टी-शर्ट के कपड़े को फाड़ कर बाहर आने को तैयार लग रही थी। कपड़ों के ऊपर से ही उनके बदन का वह नज़ारा इतना साफ और तीखा था कि उसे देख कर मेरा पूरा बदन फिर से गर्म होने लगा, भले ही हम दोनों ऊपर से एक-दूसरे से नजरें चुरा रहे थे।
दोपहर के करीब तीन बजे, मुझसे और ज़्यादा रहा नहीं गया और मैं धीरे से उनके कमरे के अंदर गया। उस समय साक्षी दीदी बेड पर लेटी हुई थी और अपने मोबाइल में कुछ देख रही थी। जैसे ही उनकी नज़र मुझ पर पड़ी, उन्होंने अपना फोन एक तरफ रखा और बेड पर उठ कर बैठ गई। उन्होंने अपनी टी-शर्ट को थोड़ा ठीक किया, जिससे उनके स्तनों का उभार और साफ दिखने लगा।
मुझे इस तरह अचानक अपने कमरे में खड़ा देख कर उन्होंने अपनी आँखों से झिझक को छुपाते हुए धीरे से पूछा, “क्या हुआ गोलू? कुछ चाहिए क्या?”
मैंने थोड़ा झिझकते हुए और अपनी उंगलियों को आपस में मरोड़ते हुए उनकी तरफ देखा। मैंने हिचकिचाते हुए कहा, “दीदी… मैं उस बारे में बात करना चाहता हूँ जो कल रात हम दोनों के बीच हुआ था।”
मेरी बात सुन कर उन्होंने थोड़ा गंभीर होकर पूछा, “उसके बारे में क्या बात करनी है गोलू?”
मैंने अपनी नज़रें नीचे की और बहुत धीरे से, अपनी आवाज़ को दबाते हुए कहा, “क्या हम कभी इसे फिर से कर सकते हैं दीदी? या आपने कल रात यह सब सिर्फ इसलिए होने दिया क्योंकि माहौल ऐसा बन गया था और बस वो हो गया?”
मेरी बात सुन कर दीदी कुछ सेकंड के लिए बिल्कुल शांत हो गई। फिर उन्होंने एक गहरी सांस ली, मेरी तरफ देखा और बहुत ही गंभीर लेकिन शांत आवाज़ में बोली, “गोलू, कल रात हम दोनों के बीच जो कुछ भी हुआ, वह गलत था। हम भाई-बहन हैं, और हम यह सब बार-बार नहीं कर सकते। हमें इसे यहीं रोकना होगा।”
यह कह कर वह थोड़ी देर के लिए रुकी, जैसे उनके दिमाग में कुछ चल रहा हो। फिर उन्होंने मेरी तरफ देखा, उनकी आँखों में एक अजीब सी नरमी थी। उन्होंने अपनी आवाज़ को और धीमा करते हुए आगे कहा, “लेकिन… अगर किसी दिन तुम खुद पर बिल्कुल कंट्रोल नहीं कर पाओ और तुम्हारा बहुत मन हो, तो मैं कभी-कभी तुम्हारी मदद कर सकती हूँ।”
मैंने कहा, “तो दीदी, मुझे अभी आपकी मदद की ज़रूरत है क्योंकि मैं अब और कंट्रोल नहीं कर पा रहा हूँ।”
यह कहते हुए मैंने नीचे अपने लंड की तरफ इशारा किया, जो पैंट के अंदर पूरी तरह से बड़ा और कड़क हो चुका था और बाहर आने को बेताब दिख रहा था। मेरी पैंट में उभरे उस उभार को देख कर पहले तो दीदी के चेहरे पर हैरानी आई, लेकिन अगले ही पल उनके होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान आ गई।
वह बेड से उतरीं और धीरे से चल कर मेरे बिल्कुल करीब आ गई। इसके बाद, वह मेरे पैरों के बीच अपने घुटनों के बल बैठ गई और बिना कोई और बात किए मेरे कपड़े उतारने लगी। उन्होंने सबसे पहले मेरी पैंट को नीचे खिसकाया और फिर मेरे अंडरवियर को भी उतार दिया।
अब मेरा लंड पूरी तरह से नंगा और कड़क होकर उनके चेहरे के ठीक सामने हवा में लहरा रहा था।
वह कुछ पलों के लिए बस चुप-चाप मेरे कड़क हो चुके लंड को देखती रही। उनके चेहरे पर वही हल्की सी मुस्कान थी, लेकिन आँखों में अब एक गहरा नशा सा आ गया था। उन्होंने अपनी नज़रें ऊपर उठाई, मेरी आँखों में देखा और बहुत धीरे से फुसफुसाई, “गोलू… यह सिर्फ तुम्हारे लिए है, क्योंकि तुम खुद को रोक नहीं पा रहे हो।”
इतना कह कर उन्होंने अपने चेहरे को और करीब लाया। जैसे ही उनके गीले और बेहद नरम होंठ मेरे लंड की टिप पर छुए, मेरे पूरे बदन में बिजली का एक झटका सा लगा। उनके होंठ इतने गर्म और मुलायम थे कि मुझे लगा जैसे मैं किसी मखमली दुनिया में डूब रहा हूँ।
तभी उन्होंने अपनी जीभ बाहर निकाली और लंड के ऊपरी हिस्से पर धीरे-धीरे गोल घुमाते हुए चाटना शुरू किया। उनकी जीभ का वो तीखा और गीला अहसास जब मेरी त्वचा से टकराया, तो मेरे मुंह से एक गहरी आह निकल गई, “अह्ह्ह… दीदी…”
मेरी आवाज़ सुन कर उन्होंने अपनी आँखें बंद की और धीरे-धीरे पूरे लंड को अपने मुंह के अंदर लेना शुरू कर दिया। उनके मुंह के अंदर की वो तंग और जादुई गर्माहट पूरी तरह से अलग थी। जैसे ही उन्होंने अंदर-बाहर करना शुरू किया, उनके गाल अंदर की तरफ पिचकते और फिर फूलते।
उनकी जीभ लगातार नीचे से ऊपर की तरफ रगड़ खा रही थी, जिससे मुझे मजा मिलने लगा था। मैं दीवार के सहारे टिक गया, मेरे हाथ उनके बालों में चले गए, और मैं बस उनके सिर की हरकत को देखता रहा जो मेरे पैरों के बीच लगातार आगे पीछे हो रहा था।
दीदी के मुंह की वो गर्म गर्माहट और उनकी जीभ की लगातार होने वाली हरकत मुझे पूरी तरह से बेकाबू कर रही थी। हर बार जब वह थोड़ा और गहराई से अंदर लेती, तो उनके होंठ मेरे लंड के निचले हिस्से से कस कर रगड़ खाते, जिससे मुझे एक तीखा और मदहोश कर देने वाला मज़ा मिल रहा था।
कमरे में सिर्फ उनके सांस लेने की और इस पूरे काम की एक हल्की सी गीली आवाज़ गूंज रही थी। मेरा पूरा बदन इस मज़े से कांप रहा था। मैंने धीरे से अपने हाथ उनके सिर पर रखे, अपनी उंगलियों को उनके बालों में फंसाया और हल्की आवाज़ में कहा, “दीदी… आप बहुत अच्छा कर रही हैं… मैं ज़्यादा देर रुक नहीं पाऊंगा।”
मेरी बात सुन कर उन्होंने एक पल के लिए अपनी आँखें ऊपर उठाई। उनकी आँखों में पूरी तरह से एक अलग ही नशा साफ़ दिख रहा था। उन्होंने बिना रुके अपनी स्पीड को थोड़ा और तेज़ कर दिया। अब उनका मुंह और भी कस कर आगे-पीछे हो रहा था, और उनकी जीभ का हर एक स्ट्रोक सीधे मेरे दिमाग की नसों पर असर कर रहा था।
मेरा सांस लेना भारी हो गया था और पैर कांपने लगे थे। मुझे साफ़ महसूस हो रहा था कि अब मेरा निकलने का समय बेहद करीब आ चुका है, और मैं बस उस दीवार का सहारा लिए उनके इस अंदाज़ में पूरी तरह डूबता जा रहा था।
दीदी ने अपनी स्पीड और बढ़ा दी, और उस ज़बरदस्त रगड़ के कारण आख़िरकार मेरा बचा-कुचा कंट्रोल पूरी तरह से जवाब दे गया। मैंने अपने दोनों हाथों से उनके सिर को हल्के से थामा, अपनी आँखें कसकर बंद की, और मेरे मुंह से एक लंबी आह निकली। अगले ही पल, मेरे लंड से गर्म सफ़ेद पानी के तेज़ फव्वारे छूट कर सीधे उनके मुंह के अंदर जाने लगे।
वह सफ़ेद पानी लगातार उनके मुंह के अंदर जा रहा था जिससे उनके गाल पूरी तरह से फूल गए। दीदी ने तुरंत अपने होंठों को मेरे लंड के चारों तरफ बहुत ही कस कर सिकोड़ लिया और उसे कस कर पैक कर दिया, ताकि एक भी बूंद बाहर निकलकर फर्श पर ना गिर पाए। वह बहुत ही ध्यान से सब कुछ अपने मुंह के अंदर ही संभालने की कोशिश कर रही थी।
लेकिन जैसे ही उन्होंने उसे अंदर निगलने की कोशिश की, उनके होंठों के दोनों कोनों से सफ़ेद पानी की कुछ बूंदें रिस कर बाहर आ गई। वह गाढ़ी बूंदें धीरे-धीरे उनकी ठुड्डी से होते हुए नीचे की तरफ बहने लगी, जिससे उनकी त्वचा पर एक चमकती हुई लकीर बन गई। उनका मुंह पूरी तरह भरा हुआ था, आँखें बंद थी, और वह बस चुप-चाप घुटनों के बल बैठी उस सारे गर्म अहसास को अपने अंदर झेल रही थी।
तभी अचानक घर की डोरबेल ज़ोर-ज़ोर से बजने लगी, जिससे हम दोनों एक-दम से चौंक गए। बाहर से मम्मी की आवाज़ आई, “साक्षी, कहाँ हो तुम?”
शाम हो चुकी थी, इसलिए मम्मी और पापा बाहर से वापस लौट आए थे। साक्षी दीदी का मुंह इस वक्त पूरी तरह सफ़ेद पानी से भरा हुआ था और वह चाह कर भी तुरंत कुछ बोल नहीं सकती थी। बाहर से दोबारा बेल बजी और मम्मी ने फिर आवाज़ दी।
दीदी ने बिना एक पल गंवाए, किसी तरह एक ही घूंट में सारा सफ़ेद पानी गले से नीचे उतार लिया। उन्होंने जल्दी से अपने होंठों को साफ़ किया, अपनी गहरी सांस को संभाला और बाहर की तरफ देखते हुए थोड़ी ऊंची आवाज़ में कहा, “हाँ मम्मी, मैं बस आ रही हूँ!”
दीदी जल्दी से उठ खड़ी हुई, उन्होंने अपने बिखरे बालों को थोड़ा ठीक किया और कमरे के दरवाज़े की तरफ बढ़ गई। बाहर जाने से पहले उन्होंने एक आख़िरी बार पलट कर मेरी तरफ देखा और फिर तुरंत कमरे से बाहर निकल कर नीचे मम्मी के पास चली गई।
उनके जाते ही मैंने एक गहरी सांस ली। मैंने तुरंत अपनी पैंट ऊपर खींच कर उसकी ज़िप और बटन बंद किए, अपनी शर्ट को ठीक से सेट किया और यह पक्का किया कि सब कुछ पहले जैसा नॉर्मल हो जाए, ताकि नीचे जाने पर किसी को कुछ भी अजीब ना लगे।