साक्षी दीदी और मेरी सेक्स कहानी-5

पिछला भाग पढ़े:- साक्षी दीदी और मेरी सेक्स कहानी-4

भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-

मम्मी-पापा अगले दिन सुबह शादी से वापस आने वाले थे, यानी मेरे पास साक्षी दीदी के साथ पूरा एक और दिन था। यह सोच कर ही मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई। सच कहूँ तो उनकी देख-भाल करना मुझे किसी जिम्मेदारी या बोझ की तरह बिल्कुल नहीं लग रहा था। उल्टा, ऐसा लग रहा था जैसे मुझे वह समय मिल गया हो जिसकी मैंने हमेशा मन ही मन इच्छा की थी।

उनका एक हाथ प्लास्टर में बंधा हुआ था। चोट की वजह से उन्हें हर छोटे काम के लिए मेरी मदद की जरूरत पड़ रही थी। लेकिन मुझे इसमें ज़रा भी थकान नहीं होती थी। उनके पास रहना, उनसे बातें करना, उनके लिए कुछ करना—यह सब मेरे लिए किसी खास तोहफे से कम नहीं था।