पिछला भाग पढ़े:- पापा की परी प्रीती-15
हिंदी चुदाई कहानी का अगला भाग-
भूपिंदर की ऐसी सूखी गांड चुदाई हुई कि भूपिंदर तो चिल्लाने ही लग गयी, “अवतार, तुझे सुनाई नहीं दे रहा था, मैं बोलती जा रही थी दुःख रही है दुःख रही है – और तू? रुक ही नहीं रहा था। ऐसे चुदाई करते हैं क्या बीवी की गांडू, भोसड़ी के अवतार?”
मैं भूपिंदर के पास ही बैठ गया और बोला, “सॉरी भूपिंदर, चुदाई के मजे में मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था।”
मेरे सॉरी बोलते ही भूपिंदर का गुस्सा उतर गया और भूपिंदर ने मेरा लंड पकड़ कर कहा, “अवतार बड़ा मोटा लंड है तुम्हारा। पता नहीं क्या हाल किया है इसने मेरी गांड का।”
मैंने कहा, “जा कर बाथरूम में फ्रेश हो आओ, फिर दिखाना कैसे हुई तुम्हारी गांड। तुम तो इसे चुदाई करवा-करवा कर लाल करना चाहती थी, अब देखते हैं लाल हुई या नहीं हुई। चुदाई तो गांड की रगड़ कर ही हुई है।”
भूपिंदर उठी और बाथरूम की तरफ चलते हुए बोली, “तुम लोग नहीं चलोगे? प्रीती आज मुतवाना नहीं पापा से अपनी फुद्दी पर?”
प्रीती बोली, “मम्मी मैं तो पापा से अपने मम्मों और फुद्दी पर मुतवाने के मजे ले चुकी, अब आज आप भी लेलो।”
मैं उठा तो प्रीती बोली, “पापा याद है ना, पहले मम्मी के मम्मों पर, और फिर मम्मी की फुद्दी पर मूतना है।”
इस मूतने के काम से फारिग हो कर हम नहाये और कपड़े पहन कर बाहर आ गए। बाथरूम में हमारा नहाना भी मस्त रहा। भूपिंदर ने कम से कम दस बार मेरा लंड चूसा। हमने एक-दूसरे की गांड में खूब उंगली की। भूपिंदर बीच में बोली, “अवतार जब तुम मेरी गांड में उंगली करते हो तो थोड़ी सी दर्द होती है। जरा एक बार देखो, क्या हाल है मेरी गांड का।”
ये कह कर भूपिंदर नीचे की तरफ झुकी और पीछे हाथ करके चूतड़ खोल दिए। मैंने नीचे झुक कर देखा, भूपिंदर की गांड का छेद भी हल्का लाल हो गया था। भूपिंदर की गांड देख कर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने लंड का टोपा भूपिंदर की गांड में डाला और मुट्ठ मारने लगा।
भूपिंदर बोली, “अवतार क्या कर रहे हो, अब मत डाला लंड गांड में।”
मैंने कहा, “भूपिंदर गांड देख कर रहा नहीं गया, थोड़ा सा ही लंड अंदर डाला है, बाकी काम मुट्ठ मार कर करूंगा।”
भूपिंदर बोली, “क्या हो गया है अवतार तुम्हें, क्यों मुट्ठ मार रहे हो, आओ चूस कर निकाल देती हूं। मुझे भी मुंह में लेने का मजा आ जाएगा। गांड तो पहले ही दुःख रही है।”
मैंने कहा, “भूपिंदर ऐसे ही चलने दो, दो मिनट की ही तो बात है। निकालने दे गांड में ही।”
भूपिंदर ने कहा, “ठीक है निकाल लो, मगर अब दुबारा अंदर मत डालना।”
दो मिनट में ही लंड का पानी भूपिंदर की चूत में निकल गया। भूपिंदर टॉयलेट सेट पर बैठ गयी और नीचे हाथ कर के गांड साफ़ करने लगी। जब गांड में से मलाई निकलनी बंद हो गई तो भूपिंदर उठी और हम बाहर आ गये। प्रीती भी कपड़े पहन चुकी थी। प्रीती बोली, “क्या हुआ मम्मी, बड़ा टाइम लगा दिया, क्या फिर से चुदाई हो का मन हो गया था?”
भूपिंदर बोली, “चुदाई तो नहीं हुई, मगर अवतार ने मुट्ठ मार कर लंड का पानी एक बार और मेरी गांड में निकाल दिया।” और भूपिंदर ने बाथरूम का सारा किस्सा प्रीती को सुना दिया। प्रीती ने एक बार मेरी तरफ देखा, मगर बोली कुछ नहीं।
जुगनू के आने का टाइम हो गया था। जुगनू आया और मैं दोपहर बाद मैं सत्रह चला गया। वापस आया तो रात को फिर वही मां-बेटी की चूत और गांड चुदाई शुरू हो गयी। अगले चार पांच दिनों तक यही सिलसिला चलता रहा।
इतनी चुदाई के बाद मुझे थकान होने लगी थी। मुझे पहली बार लगा कि “यार” ये सेक्स – ये फुद्दी चुदाई, ये गांड चुदाई कुछ ज्यादा ही हो रही है। वैसे तो जिस दिन से सुखचैन गया था, उसके अगले दिन से जो सेक्स शुरु हुआ तो ऐसा था जिसे “नान स्टॉप” ही कहा जा सकता है। पहले हर रोज बेटी प्रीती, फिर बीवी भूपिंदर और अब दोनों मां-बेटी।
मुझे ऐस लग रहा था जैसे मैं खस्सी ही हो चुका हूं – खस्सी मतलब जिसका चुदाई का मन ही नहीं करता मैंने सोच लिया कि अब कुछ दिन इस सेक्स – इस चुदाई से दूर रहना का वक़्त आ गया है – खास कर अगर आगे भी ऐसी ही बढ़िया सेक्स लाइफ एन्जॉय करनी है – ऐसे ही मां बेटी दोनों को चोदते रहना है तो।
बस, तभी मैंने फैसला कर लिया कि अब एक हफ्ते तक कोइ चुदाई नहीं करनी – ना भूपिंदर की, ना प्रीती की और ना ही बिशनी की।
मैंने सोच लिया कि अब मैं कसौली जाऊंगा अपने हॉलिडे होम में। पहाड़ियों पर घुमूंगा बियर पीयूंगा पहाड़ी मच्छी खाऊंगा और सोऊंगा। अगर भूपिंदर, प्रीती ने साथ चलना है तो चलें, मगर चोदूंगा नहीं उन्हें, चाहे फुद्दी खोल कर मेरे आगे लेट ही क्यों ना जाएं।
अगले दिन सत्रह में ऊपर ऑफिस में जाते ही मुझे नींद गयी। ये पहली बार था कि ना तो मैंने अपने किसी दोस्त को बुलाया था और और ना ही बियर की बोतल ही खोली थी।
शाम को मैं घर आया तो बिल्कुल ढीला ढाला थी। प्रीती बोली, “क्या हुआ पापा तबीयत तो ठीक है?”
मैंने बस इतना ही कहा, “कुछ नहीं आज मैं जल्दी सोने के मूड में हूं।”
भूपिंदर तो नहीं समझी मगर प्रीती समझ गयी। प्रीती बोली, “मम्मी पापा को दो चार दिन आराम की जरूरत है। जब से सुखचैन गया है पापा रोज चुदाई कर रहे हैं। पहले मैंने पापा को नहीं छोड़ा, रोज़ चुदाई करवाई, फिर आप और अब हम दोनों। कितनी चुदाई कर लेंगे पापा भी, कितना चोद लेंगे हम दोनों को। अब हर वक़्त भी तो लंड खड़ा नहीं रहता।”
“औरतों का क्या, टांगें उठा आकर चौड़ी कर दी, फुद्दी खोली और बोल दिया, “आओ जी डालो इसमें लंड। या फिर चूतड़ उठा कर गांड खोल दी – मम्मी अब लंड भी तो तभी जाएगा ना जब खड़ा होगा।”
फिर प्रीती मेरे तरफ देखते हुए बोले, “क्यों पापा ठीक कह रही हूं ना मैं?” मैं चुप रहा। मेरे चुप्पी ही एक तरह से मेरी हां थी।”
भूपिंदर भी लगा समझ गयी। बोली, “कोइ बात नहीं प्रीती, कुछ दिन अवतार को आराम करने देते हैं।”
भूपिंदर मुझसे बोली, “अवतार तो फिर अब क्या प्रोग्राम है? एक हफ्ता फार्म पर गुजारें?” फिर प्रीती की तरफ देख कर बोली, “क्यों प्रीती?”
मैं तो कसौली जाने का सोच रहा था मगर ये फार्म वाला आईडिया भी ठीक था। प्रीती को भी आईडिया जमा और मुझे भी।
प्रीती बोली,”मम्मी बात तो ठीक है। क्या हर वक़्त भाग दौड़, भाग दौड़। कुछ वक़्त कुदरत के साथ, पेड़ पौधों के साथ, जानवरों के साथ भी गुजारना चाहिए।”
भूपिंदर प्रीती से बोली, “हां प्रीती ये ठीक रहेगा। अवतार को भी चुदाई से थोड़ा रेस्ट चाहिए और हमें भी। अगर हम फार्म पर रहते भी हैं तो अवतार को डिस्टर्ब नहीं करेंगे, और मैं और तुम मजे करेंगे – एक दूसरे की फुद्दी चूसेंगे, गांड चाटेंगे और एक दूसरी की फुद्दी की चुदाई करेंगे।”
फैसला हो गया, अगले दिन ही हम फार्म के लिए रवाना हो गए। फार्म पहुंच कर जुगनू को मैंने वापस भेज दिया। हमारा एक हफ्ते का प्रोग्राम था। एक हफ्ता जुगनू और कांता हमारे सेक्टर पांच वाले घर में ही रहने वाले थे। जुगनू को मैंने बोल दिया, “जुगनू अब तुम और कांता मौज करो एक हफ्ता। मुझे अगर कोइ काम होगा या हमने वापस चंडीगढ़ जाना तो मैं तुझे फोन कर दूंगा।”
जुगनू के चेहरा पर रौनक आ गयी। मैंने सोचा “अब ये चोदेगा कांता को दिन-रात।”
सात दिन फार्म में मस्त गुज़रे। इन दिनों बिशनी सुबह और हम को ही फार्महाउस के अंदर आती थी। दिन में हम अंदर तीनों ही होते थे।
मैंने एक बार भी भूपिंदर या प्रीती को नहीं चोदा मगर भूपिंदर और प्रीती ने दिन रात आपस में मजे किये। जब देखो दोनों मां-बेटी एक-दूसरी की फुद्दी चूस रही होती, गांड का छेद खोल कर चाट रही होते या फिर एक-दूसरी के ऊपर लेट कर एक दूसरी की फुद्दी के साथ फुद्दी रगड़ते हुए मजे ले रही होती।
मैं सोफे पर बैठा बियर या व्हिस्की के घूंट भरता हुआ उनको इस तरह मजे लेते हुए देखता रहता। रोज़ रात को मीट मुर्गा शारब – जैसे और कोइ काम ही नहीं।
सात दिन बाद जुगनू को मैंने फोन कर दिया। जुगनू आया तो मैंने भूपिंदर से कहा, “भूपिंदर तुम और प्रीती जुगनू के साथ चली जाओ और इसे वापस भेज देना। मैं शाम को आऊंगा। इन सात दिनों में बस खाना पीना ही हुआ है, जरा पूरन को बुला कर फार्म का काम काज भी देख लूं।”
भूपिंदर “ठीक है” कह बाहर के तरफ चल पड़ी। प्रीती मेरे पास आयी और धीरे से मेरे कान में बोली, “पापा बिशनी की फुद्दी गांड, जो भी चोदो बढ़िया से चोदना, मगर लंड की मलाई बिशनी की चूत या गांड में मत निकालना। रात आपने हमने भी चोदना है, हमने चाहिए आपके लंड की गर्म-गर्म मलाई।”
मैं हल्का सा मुस्कुरा दिया। बाहर पूरन को बुला कर फार्म का काम काज समझाया। जो उसको चाहिए था उसके लिस्ट बनाई और फार्महाउस के अंदर आ गया। बिशनी मेरे पीछे-पीछे ही अंदर आ गयी।
मैं अंदर की तरफ जाने लगा और बिशनी भी मेरे पीछे पीछे ही आ गयी। अंदर आते ही मैंने बिशनी को बाहों में ले और बोला, “चल बिशनी बहुत दिन हो गए तेरी चुदाई नहीं हुई। चल आजा मस्त चुदाई करूं तेरी। बिशनी ने मेरा लंड पकड़ लिया मेरा लंड हाथ में लेकर बोली, “सरदार जी बड़े दिनों की बाद आज मौक़ा मिला है। मेरी फुद्दी तो पिछले दस दिनों आपके लंड के लिए तरस रही है, दस दिनों से गीले हुई पड़ी है सूख ही नहीं रही।”
बोल कर बिशनी ने अपने पूरे कपड़े उतार दिए। बिशनी अक्सर सलवार ही उतारा करती थी जब चुदाई करवानी होती थी, पूरी तरह से नंगी वो नहीं होती थी। बिशनी को इस तरह नंगा देख कर मैंने भी अपने पूरे कपड़े उतार दिए। बिशनी बिस्तर पर लेट गयी और चूतड़ों के नीचे तकिया रख कर टांगे चौड़ी कर दी।
मैंने लंड पर कंडोम चढ़ाया, बिशनी की टांगें पकड़ कर लंड बिशनी की चूत पर रखा और जैसी ही चुदाई शुरू करने लगा। बिशनी बोली, “सरदार जी उस दिन की तरह चोदना, जैसे उस दिन चोदा था, बाहों में जकड़ कर। रगड़ के रख दो आज फिर से मेरी फुद्दी, तोड़ कर रख दो मेरा जिस्म और निकाल दो मेरी फुद्दी का पानी तीन चार बार।”
मैंने बिशनी की मस्त चुदाई की और तीन बार जब बिशनी की चूत पानी छोड़ गयी तो मैंने खड़ा लंड बाहर निकाल दिया। बिशनी बोली, “क्या हुआ सरदार जी, निकाल क्यों लिया, लंड तो अभी खड़ा ही है। मजा तो लेलो चुदाई का।”
मैंने कहा, “नहीं बिशनी आज तेरी सरदारनी को भी ऐसी ही चोदना है जैसे तुझे चोदा है, रगड़ कर। आज उसका भी जिस्म तोड़ना है।”
बिशनी कपड़े पहनती हुई बोली, “ऐसा क्या हो गया सरदार जी, क्या बहुत दिनों से फुद्दी नहीं मारी उनकी? प्रीती दीदी ने मौक़ा नहीं दिया छोड़ने का?”
मैंने भी कपड़े पहनते हुए कहा, “कुछ ऐसा ही है बिशनी। मगर आज तुझे चोदने का मजा बहुत आया है।” मैंने बिशनी को बाहों में लेकर एक बार उसके होंठ चूसे और कहा बिशनी अगली बार तेरी गांड चोदूंगा।”
बिशनी बोली, “अगली बार क्यों सरदार जी आज ही चोद लो, लंड तो खड़ा ही है।”
मैंने कहा, “नहीं बिशनी आज नहीं, जिस दिन चोदनी होगी तसल्ली से चोदूंगा।” ये कह कर जा जरा देख जुगनू आ गया या नहीं?”
बिशनी आयी और बोली, “सरदार जी अभी तो नहीं आया।”
मैंने फ्रिज में से बियर निकाली और सोफे पर बैठ कर हल्के-हल्के घूंट भरने लगा।
पांच बजे जुगनू आ गया। घर पहुंच कर मैं सीधा बाथरूम चला गया। फ्रेश हो कर बाहर आया तो प्रीती मिल गयी। मुझे देख कर प्रीती ने एक आंख बंद की और बोली, “पापा मलाई तो साथ ही लाये हो ना।”
मैंने हां में सर हिला दिया।
रात हुई और हम हल्का खाना खा कर हम तीनों लाउंज में आ गए। कांता जा चुकी थी। मैंने शिवाज़ रीगल की बोतल खोल दी और प्रीती भूपिंदर ने जिन की बोतल खोल दी। प्रीती ने तो जिन पीने से पहले ही अपने कपड़े उतार दिए। इतने दिनों के बाद प्रीती का नंगा सेक्सी जिस्म देख कर मेरा लंड एक-दम से खड़ा हो गया। मैंने भी उठा और मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए।
भूपिंदर ही क्यों पीछे रह जाती। वो भी नंगी हो गयी एक एक पेग पीने के बाद ही सब लोग मस्ती में आ गए। दोनों मां-बेटी अपनी अपने फुद्दी में उंगली करने लगी। सब बार-बार टाइम देख रहे थे। नौं बजे आखिर प्रीती खड़ी हो गयी और बोली, “चलो पापा अब नहीं रहा जा रहा। डालो अपना मोटा लंड हमारी चूत में और रगड़-रगड़ कर चोदो आज।
हम सब प्रीती के कमरे में चले गए। रात दो बजे तक हमारी चुदाई चली। पहले भूपिंदर, फिर प्रीती। फिर भूपिंदर और फिर से प्रीती। फुद्दी में गांड में मुंह में सब जगह लंड गया मेरा।
बीच बीच में मां बेटी ने एक-दूसरी की फुद्दी चूतड़ सब चूस-चाट लिए, और एक-दूसरी के ऊपर लेट कर एक-दूसरी की फुद्दी भी चोद ली।
मेरे लंड की गर्म मलाई एक बार प्रीती के फुद्दी में निकली, एक बार भूपिंदर की गांड में निकली। भूपिंदर तो तो लग रहा थी गांड चुदवाने का चस्का ही लग गया था। फुद्दी से ज्यादा उसने मेरा लंड गांड में लिया। मस्त टाइम निकला।
जब तक सुखचैन नहीं आया, मस्त चुदाई होती रही। हफ्ते में एक बार मैं बिशनी को भी चोद आता था। इस बीच बिशनी की गांड भी चोद ली थी। बड़ी हिम्मत वाली थी बिशनी। सूखी गांड चोदी मैंने उसकी। गांड बिलकुल टाइट थी, मगर बिशनी ने एक बार भी चूं तक नहीं की पूरा-पूरा साथ दे कर गांड चुदवाई।
बिशनी तो अब “जिस्म तोड़” चुदाई करवाने लग गयी थी। फुद्दी के एक बार के सीधे-सादे मजे से उसकी अब उसकी तसल्ली नहीं होती थी।
बस अब एक कांता ही बची थी, मगर पता नहीं क्यों उसे चोदने का मन नहीं करता था। शायद उसने भी कभी मुझसे चुदवाने का सोचा नहीं था। एक बार मेरा खड़ा लंड देख ले तो शायद फिसल जाए, उसका भी मन हो जाए।
खैर वो बाद की बात थी। सात महीने ढुबरी रहने के बाद सुखचैन की नई पोस्टिंग डगशाई में हो गयी। इन सात महीनों में तकरीबन रोज ही प्रीती को चोदा मैंने।
डगशाई चंडीगढ़ से उतना ही दूर है जितना कसौली, मतलब कार से ढाई तीन घंटे का रास्ता।
जिस दिन प्रीती ने जाना था, सुखचैन तैयार हो कर बाहर मिलिट्री की जीप में बैठा प्रीती का इंतज़ार कर रहा था। प्रीती हमें बाए बोलने आयी और मेरे होंठ चूसते हुए लंड पकड़ के बोली, “पापा आपका मस्त लंड कभी नहीं भूलूंगी – पर पर पापा टेंशन मत लेना, महीने में दो तीन दिन आया करूंगी आपसे चुदाई करवाने – आपका लंड फुद्दी में, गांड में, मुंह में लेने।
फिर प्रीती भूपिंदर के पास गयी और भूपिंदर के होंठ चूसते हुए बोली , “मम्मी आप भी टेंशन मत लेना। जब भी आऊंगी आपसे फुद्दी जरूर चुसवाऊंगी।” और फिर भूपिंदर की चूत पर हाथ फेरते हुए बोली, “और मम्मी आपको फुद्दी से फुद्दी के चुदाई का मजा भी तो मैं ही दूंगी? ओके पापा, ओके मम्मी – आप बेस्ट मम्मी पापा हो।”
और पापा की परी प्रीती सुखचैन के साथ डगशाई के लिए रवाना हो गयी। अब रोज़ चुदवायेगी सुखचैन से लंड की शौक़ीन ‘पापा की परी प्रीती’।
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