पिछला भाग पढ़े:- मेरी जान्हवी दीदी और मैं
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
अगले दिन घर में सब एक-दम चुप-चाप थे क्योंकि जान्हवी दीदी अपने कमरे में देर तक सो रही थी। उन्होंने पहले ही कहा था कि इतनी लंबी फ्लाइट के बाद जेट लैग की वजह से उनका पूरा बदन टूट रहा था, इसलिए कोई भी उन्हें परेशान नहीं कर रहा था ताकि वे आराम से सो सकें।
दोपहर के करीब 12 बज रहे थे। मैं हॉल में सोफे पर बैठ कर टीवी देख रहा था। तभी अचानक दीदी के कमरे का दरवाजा खुला। वे गहरी नींद से उठ कर बाहर आ रही थी। सोकर उठने की वजह से उनके बाल थोड़े बिखरे हुए थे और आँखों में अब भी हल्का सा आलस था। वे अपनी आँखें मलते हुए धीरे-धीरे हॉल की तरफ बढ़ने लगी।
वह सीधे आकर सोफे पर मेरे बिल्कुल करीब, मुझसे सट कर बैठ गई। उनके बैठते ही सोफे का वह हिस्सा थोड़ा नीचे को दबा और उनके जिस्म की भीनी-भीनी खुशबू के साथ एक मदहोश कर देने वाली गर्माहट सीधे मेरे बदन को छूने लगी। दोनों के बीच की दूरी अब पूरी तरह खत्म हो चुकी थी।
उस वक्त वे घर के बेहद आरामदायक और ढीले कपड़ों में थी। उन्होंने ऊपर एक छोटा सा सफेद क्रॉप टॉप पहन रखा था और नीचे नीले रंग का सिल्क शॉर्ट्स था। उनका वह टॉप गले के पास से काफी फैला हुआ था, जो उनके कंधों पर सिर्फ दो बेहद पतली, धागे जैसी पट्टियों के सहारे टिका था। जैसे ही वे सोफे की बैकरेस्ट से टेक लगा कर पीछे हुई, वह ढीला टॉप सामने से और नीचे खिसक गया, जिससे उनके दोनों स्तनों का भारीपन और उनके बीच की वह गहरी, गोरी लकीर पूरी तरह साफ़ दिखने लगी। नीचे पहने उस छोटे से शॉर्ट्स से उनकी मखमली जांघें साफ़ नज़र आ रही थी।
उन्होंने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी, इसलिए उस पतले कपड़े के पार से ही उनके सीने का उभार साफ़ समझ आ रहा था। कमरे में छाई खामोशी के बीच उनकी हर एक सांस के साथ जब उनका सीना ऊपर-नीचे होता, तो कपड़े पर एक अंदरूनी खिंचाव बनता और उनके दोनों निप्पल्स एक-दम कड़क और उभरे हुए साफ़ दिखाई देते। वे तीखे उभार उस पतले कपड़े को चीर कर बाहर आने को बेताब लग रहे थे।
तभी वे सामने टेबल पर रखा रिमोट उठाने के लिए थोड़ा सा आगे की तरफ झुकी। उनके झुकते ही वह ढीला टॉप उनके बदन से अलग होकर आगे की तरफ हवा में लटक गया। इस एक हरकत से ऊपर से झांकने पर उनके भारी स्तनों की गोलाई, उनका पूरा अंदरूनी हिस्सा और वह गहरी घाटी बिल्कुल साफ़ और सीधे मेरी नज़रों के सामने आ गई, जिसने एक पल में मेरे होश उड़ा दिए।
चैनल बदलते-बदलते ही उन्होंने हल्के से मेरी तरफ चेहरा घुमाया। उनकी आंखों में एक अजीब सी थकान और बेबसी थी। वे बेहद धीमी और भारी आवाज़ में मुझसे बोली, “गोलू, मेरे पूरे बदन में बहुत तेज़ दर्द हो रहा है… मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूँ।”
मैंने उनकी तरफ देखा और फौरन कहा, “दीदी, क्या हम डॉक्टर के पास चलें?”
मेरी बात सुनते ही उन्होंने धीरे से ना में सिर हिला दिया। “नहीं, कोई बात नहीं… ठीक हो जाएगा।”
हम दोनों एक साथ टीवी स्क्रीन की तरफ देखने लगे। उन्होंने रिमोट घुमाया और कार्टून चैनल पर ‘टॉम एंड जेरी’ लगा दिया। दोपहर का वक्त था, इसलिए खिड़की से आ रही तेज धूप को रोकने के लिए कमरे के भारी पर्दे गिरे हुए थे, जिससे कमरे में एक धुंधला सा सुकून था। टीवी की रंग-बिरंगी रोशनी सीधे उनके चेहरे पर पड़ रही थी। नींद से बोझिल, अधखुली आँखों से कार्टून देखते हुए उनके होठों पर एक हल्की सी मुस्कान तैर रही थी।
कुछ मिनट और गुज़र गए। टीवी पर कार्टून चल रहा था, तभी अचानक उन्होंने धीरे से अपना सिर मेरी जांघों पर रख दिया।
उनके सिर की वह छुअन मेरी जांघों पर महसूस होते ही मेरे भीतर एक गर्म लहर सी दौड़ गई। उनके रेशमी और घने बाल बिखर कर मेरी त्वचा को सहलाने लगे, जिससे पूरे बदन में एक तीखी सिहरन पैदा होने लगी। सोफे पर उनके इस तरह लंबे लेटते ही उनका शॉर्ट्स जांघों पर थोड़ा और ऊपर चढ़ गया था, जिससे उनकी गोरी और चिकनी जांघें साफ़ नज़र आने लगी।
मेरी जांघों पर उनका सिर टिका हुआ था और मेरी नज़रें सीधे नीचे की तरफ थी। सोफे पर सीधे लेटने की वजह से उनका टॉप उनकी छाती पर पूरी तरह टाइट हो चुका था। बिना ब्रा के होने के कारण उनके स्तनों का भारी उभार उस पतले कपड़े के नीचे साफ़ आकार ले रहा था, और उस कसे हुए कपड़े के ऊपर दो छोटे और कड़े बिंदु साफ़ उभर आए थे, जो सीधे मेरी नज़रों के सामने थे।
उन कड़े बिंदुओं को देख कर मेरा हाथ कांपने लगा। दिल किया कि बस अपनी उंगलियों से उन्हें पकड़ कर धीरे से दबा दूं, या फिर अपना पूरा मुंह उनके स्तनों पर रख कर उन्हें पागलों की तरह चूसना शुरू कर दूं। बिना ब्रा के उनका वह हिस्सा कितना मुलायम होगा, यह सोच कर ही मेरी पैंट के अंदर मेरा लंड तेजी से कड़ा होने लगा और कपड़े को फाड़ कर बाहर आने के लिए बेताब हो गया।
लंड की नसें तन चुकी थी और उसकी तपन सीधे मेरी जांघों को छू रही थी। लेकिन चूंकि उनका चेहरा अभी भी ठीक मेरी जांघों पर टिका हुआ था, मेरी जान हलक में अटकी थी। मैं अपनी भारी होती सांसों को रोकने की कोशिश कर रहा था ताकि उन्हें भनक ना लगे, पर पैंट के अंदर बढ़ता हुआ वह कसाव और उनकी जांघों की नजदीकी मुझे पूरी तरह पागल कर रही थी।
तभी अचानक बाहर से मम्मी की आवाज़ गूंजी, “जान्हवी! चल जल्दी आ, नाश्ता कर ले।”
मम्मी की आवाज़ सुनते ही जैसे मेरा दिल धक से रह गया। लेकिन जांघों पर सिर रखे हुए जान्हवी दीदी ने अपनी आँखें बंद ही रखी। उन्होंने ज़रा सा करवट बदलते हुए चिढ़ कर जवाब दिया, “नहीं मम्मी, मुझे अभी कुछ नहीं खाना। मुझे डिस्टर्ब मत करो।”
लेकिन मम्मी कहाँ मानने वाली थी। बाहर से उनकी आवाज़ फिर आई, “नखरे मत कर, चुप-चाप आकर खा ले, ठंडा हो रहा है।”
कुछ देर तक बहस करने और आना-कानी करने के बाद, आख़िरकार जान्हवी दीदी बड़बड़ाती हुई उठ खड़ी हुई और भारी कदमों से किचन की तरफ चली गई। जैसे ही वह किचन के अंदर गई, मैंने राहत की सांस ली। पैंट के अंदर लंड अभी भी पूरी तरह कड़ा था, इसलिए मैंने बिना देर किए सोफे से खड़ा हुआ और सीधे बाथरूम की तरफ भाग गया।
बाथरूम का दरवाज़ा बंद करते ही मैंने चैन की सांस ली। मैं किसी भी तरह खुद को शांत करना चाहता था, क्योंकि अगर घर में किसी को भी भनक लग जाती कि मेरी पैंट के अंदर क्या चल रहा है, तो मेरे लिए बहुत बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाती। पर मेरा लंड शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा था; वह लगातार लोहे की तरह अकड़ा हुआ था।
मजबूर होकर मैंने अपनी पैंट और अंडरवियर दोनों नीचे खिसका दिए। मेरा कड़ा हुआ लंड अब सीधे हवा में लहरा रहा था। जब तनाव कम करने का कोई और रास्ता नहीं सूझा, तो मैंने अपनी पैंट की जेब से मोबाइल निकाल लिया। लेकिन इस बार मैंने कोई पोर्न साइट खोलने के बजाय सीधे अपना इंस्टाग्राम अकाउंट ओपन किया और जान्हवी दीदी की प्रोफाइल पर चला गया।
उनकी प्रोफाइल उनकी एक से बढ़ कर एक खूबसूरत तस्वीरों से भरी हुई थी। कुछ तस्वीरों में वह साड़ी पहने हुए थी, जिसमें उनकी पतली कमर और गहरी नाभि पूरी तरह साफ़ दिखाई दे रही थी, जो बेहद कातिलाना लग रही थी। कुछ दूसरी तस्वीरों में उन्होंने क्लोज़-अप सेल्फी ली हुई थी, जहाँ उनकी ड्रेस के गले से उनकी गहरी क्लीवेज साफ उभर कर नज़र आ रही थी।
लेकिन मेरी नजरें जाकर टिकीं उनकी उस सबसे हॉट तस्वीर पर, जो उन्होंने अपने मालदीव ट्रिप के दौरान खींची थी। उस फोटो में वह एक नीले रंग की बिकिनी पहने हुए थी। बिकिनी के उस छोटे से कपड़े से उनके स्तनों का साइड का हिस्सा इस तरह बाहर को छलक रहा था, जैसे उनके भारी स्तन उस पतले कपड़े को चीर कर अभी बाहर आ जाएंगे। उस नीले कपड़े में उनके स्तनों का वह उभार देख कर मेरे लंड की नसें और ज्यादा तन गई।
मैंने उस नीले रंग की बिकिनी वाली तस्वीर पर अपनी नज़रें टिका दी और अपने कांपते हाथ से अपने कड़े लंड को जड़ से पकड़ लिया। जान्हवी दीदी के उस रूप को देखते हुए मैंने धीरे-धीरे अपने हाथ को आगे-पीछे हिलाना शुरू किया। जैसे-जैसे स्क्रीन पर उनका वह हॉट अवतार मेरी आँखों के सामने घूम रहा था, मेरे हाथ की रफ्तार तेज होती गई।
नशा इस कदर हावी था कि बीच-बीच में मैं अपने लंड के आगे के हिस्से से मोबाइल की स्क्रीन को छू रहा था, मानो मैं सचमुच उनके होठों को चूम रहा हूँ। मेरा दिमाग पूरी तरह उन्हीं के विचारों में डूब चुका था—मैं सोच रहा था कि उनके वह छोटे और नाजुक होंठ जब मेरे इस गर्म लंड को अपने मुंह में लेंगे तो कैसा फील होगा, या जब मैं उनके उन दोनों भारी बूब्स के बीच अपने लंड को फंसा कर रगडूंगा तो वह नर्मी कैसी महसूस होगी। उनकी पतली कमर, उनका पिछवाड़ा और उनके नाजुक हिस्से का ख्याल आते ही मेरे बदन में एक सिहरन दौड़ गई।
अब इसे रोक पाना मेरे बस में नहीं था। लंड की नसें पूरी तरह तन चुकी थी और अंत में, खुद पर से पूरा काबू खोते हुए मेरा सफ़ेद पानी तेजी से पिचकारियां मार कर बाहर निकलने लगा।
बाथरूम में सब साफ करने के बाद जब मैं बाहर आया, तो जान्हवी दीदी सोफे पर बैठी हुई प्लेट से पोहा खा रही थी। जैसे ही उनकी नजर मुझ पर पड़ी, उन्होंने पोहे का चम्मच मुंह में डालते हुए मेरी तरफ देखा और पूछा, “कहाँ गायब हो गया था इतनी देर से?”
मैंने थोड़ा संभलते हुए जवाब दिया, “बस बाथरूम में था, अपना चेहरा धो रहा था।”
वह पूरा दिन उन्होंने ज्यादातर अपने कमरे में ही बिताया—या तो वह सो रही थी या फिर कोई फिल्म देख रही थी। उनका पूरा बदन काफी भारी महसूस हो रहा था और वह थकान से चूर थी। दीदी की यह हालत देख कर शाम को मैं मार्केट गया और वहां से उनके लिए कुछ दवाइयां और एक बाम खरीद लाया, ताकि उन्हें थोड़ा आराम मिल सके।
रात को डिनर करने के बाद वह सोने के लिए अपने कमरे में चली गई। रात के करीब 11 बज रहे थे, घर के बाकी सब लोग सो चुके थे और मैं अपने बिस्तर पर लेटा मोबाइल चला रहा था। तभी अचानक मेरे फोन पर उनका कॉल आया। उन्होंने मुझसे कहा, “मेरे कमरे में आओ।”
मैंने पूछा, “क्या हुआ दीदी?”
उन्होंने बस इतना ही कहा, “तुम बस अंदर आओ।”
मैं उनके कमरे के पास गया और दरवाज़े पर धीरे से नॉक किया। थोड़ी ही देर में उन्होंने दरवाज़ा खोला। कमरे की हल्की लाइट में मैंने देखा कि उन्होंने अभी भी वही ढीले-ढाले कपड़े पहन रखे थे—वही ढीला टॉप और छोटा शॉर्ट्स, जिसमें उनके पैर साफ़ दिख रहे थे। मैं उनके कमरे के अंदर गया और उनकी तरफ देखते हुए सीधे पूछा, “क्या हुआ दीदी?”
उन्होंने मेरी तरफ देखा और बोली, “गोलू, मेरा पूरा बदन अभी भी बहुत दर्द कर रहा है, तो क्या तुम बाम लगा दोगे?”
मैंने उनसे कहा, “अगर आप कहो तो मैं मम्मी को जगा देता हूँ।”
उन्होंने धीरे से कहा, “दरअसल मेरे पूरे बदन में दर्द है, मम्मी इतनी मालिश नहीं कर पाएँगी। क्या तुम कर दोगे?”
मैंने हाँ में अपना सिर हिला दिया।
उन्होंने दरवाज़ा लॉक कर दिया और अपने कपड़े उतारने लगी। उन्होंने पहले अपना टॉप ऊपर खींचा और उसे उतार कर बेड पर डाल दिया, और फिर अपने शॉर्ट्स को भी नीचे सरका दिया। अब वह सिर्फ एक लाल रंग की ब्रा और पैन्टी में खड़ी थी।
कपड़े उतारते वक्त वह थोड़ी शरमा रही थी और उन्होंने अपनी आँखें नीचे कर रखी थी। उस टाइट लाल ब्रा में उनके भारी स्तन पूरी तरह से भींचे हुए थे, जिससे उनके स्तनों का उभार ऊपर की तरफ साफ झलक रहा था। ब्रा का कपड़ा उनके स्तनों के भारीपन को संभाल नहीं पा रहा था, और उनके स्तनों के बीच की गहरी दरार साफ देखी जा सकती थी।
शॉर्ट्स हटने के बाद उनकी जांघों के बीच उनका नाजुक हिस्सा साफ नज़र आ रहा था। लाल रंग की पैन्टी उस हिस्से को पूरी तरह नहीं ढक पा रही थी; पैन्टी के पतले कपड़ों के नीचे से उनके नाजुक हिस्से का उभार बिल्कुल साफ आकार में दिख रहा था। पैन्टी के किनारों से उनके नाजुक हिस्से के कुछ बाल बाहर की तरफ झांक रहे थे, जो उनके गोरे बदन की त्वचा पर साफ दिखाई दे रहे थे।
जब वह बेड की तरफ जाने के लिए मुड़ी, तो उनका पिछवाड़ा भी पैन्टी में साफ शेप में उभर कर सामने आया। कमरे की हल्की लाइट में उनके पूरे बदन की यह बनावट साफ और गहरी दिख रही थी।
उन्होंने बाम की डिब्बी मेरे हाथ में थमाई और धीरे से पेट के बल बेड पर लेट गई। उनका चेहरा नीचे था, लेकिन उनके भारी स्तन इतने बड़े और भरे हुए थे कि सीने का वो हिस्सा बेडशीट से पूरी तरह टच नहीं हो पा रहा था, वो थोड़ा ऊपर की तरफ उठा हुआ था। ब्रा के अंदर उनके स्तन एक-दम जेली की तरह फैल गए थे, जिससे उनका उभार बेड पर साफ दिख रहा था और ब्रा के कप्स के बीच उनके स्तनों की गहराई और ज्यादा साफ लग रही थी।
वह हल्के से करवट लेकर बोली, “गोलू, मेरे पैरों से शुरू करो।”
मैंने कहा, “ठीक है दीदी।” मैंने बाम की डिब्बी खोली और अपनी हथेलियों पर थोड़ा सा बाम निकाला। उसमें से गुलाब की बहुत ही तेज और नशीली खुशबू आ रही थी। मैंने अपने दोनों हाथों को आपस में रगड़ कर उस बाम को गर्म किया और उनके पैरों के ऊपरी हिस्से से मालिश शुरू की।
उनकी स्किन इतनी ज्यादा मुलायम और कोमल थी कि छूते ही ऐसा लगा जैसे वह मेरी हथेलियों के नीचे पिघल रही हो। जब मैंने अपनी उंगलियों से उनकी बड़ी और भारी जांघों को दबाया, तो वो बिल्कुल किसी नरम गद्दे की तरह दबी—इतनी सॉफ्ट और भरी हुई कि मेरी उंगलियां उसमें धंस गई। उनके पैर पूरी तरह साफ और चिकने थे, एक भी बाल नहीं था, जिससे उनकी गोरी स्किन शीशे की तरह चमक रही थी।
जैसे-जैसे मैं धीरे-धीरे उनके पैरों से ऊपर की तरफ बढ़ रहा था, उनकी स्किन की गर्माहट मेरी हथेलियों में घुल रही थी। उनके शरीर की उस छुअन में एक अजीब सी बिजली थी, जिसने मेरे अंदर हलचल पैदा कर दी। हर बार जब मैं उनकी जांघों के नरम और गोरे मांस को दबाता, तो मुझे उनके शरीर का भारीपन और कसावट महसूस होती।
उनकी कोमल जांघों को अपने हाथों में लेकर मालिश करना मुझे किसी और ही दुनिया में ले जा रहा था, और मुझे लगा कि उनकी जांघों के उस नरम एहसास में मैं खोता जा रहा हूँ।
वह अपनी आँखें बंद किए हुए धीमी और दबी आवाज में बोली, “गोलू, ज़्यादा ऊपर मत जाना।”
उनकी आवाज़ में कोई सख्ती नहीं थी, लगा जैसे वो बस हमारे रिश्ते की सीमा याद दिला रही हों। मैंने उनके मना करने पर भी हाथ नहीं हटाए। मैंने उनकी भरी हुई जांघों को अपने हाथों में जकड़ लिया, ठीक उनके पिछवाड़े के ऊपर वाले मोड़ के पास, और अपनी उंगलियों से जोर से दबाने लगा। उनकी स्किन काफी नरम और गर्म लग रही थी, और जैसे-जैसे मैं जोर लगा रहा था, उनकी जांघों का हिलना मुझे साफ महसूस हो रहा था।
मालिश करते वक्त, बार-बार मेरे हाथ थोड़े और ऊपर की ओर खिसक जाते और उनके पिछवाड़े के हिस्से को छू लेते। ऐसा होते ही मैं तुरंत ऐसे दिखाता जैसे मैं बहुत घबरा गया हूँ, जैसे मेरा हाथ बस गलती से फिसल गया हो और ये सब बस एक हादसा है। मैं अपनी पकड़ और मजबूत कर देता, और जब भी मेरा हाथ उनके पिछवाड़े को छू जाता, तो मैं बिना उनकी तरफ देखे या कुछ कहे बस अपना काम जारी रखता, ताकि उन्हें लगे कि मैं पूरी तरह काम में लगा हूँ और ये सब सिर्फ एक गलती है।
कुछ मिनट बाद उन्होंने कहा, “गोलू, अब पैरों का बहुत हो गया, मेरी पीठ पर करो।”
उनकी पूरी पीठ खुली हुई थी, जिस पर बस उनकी ब्रा की पतली पट्टी दिख रही थी। जैसे ही मैंने उस पट्टी को हटाने के लिए हाथ बढ़ाया, वो एक-दम चौंक गई और डरकर बोली, “ये क्या कर रहे हो?”
मैंने कहा, “दीदी, इस पट्टी की वजह से मैं बाम नहीं लगा पा रहा हूँ, ये बहुत तंग कर रही है।” वो कुछ पल चुप रही, फिर उन्होंने बिना कुछ कहे अपना चेहरा बेडशीट की तरफ घुमा लिया और शांत होकर लेट गई।
मैंने मौके का फायदा उठाया और अपनी उंगलियों से उस ब्रा के हुक को टटोला। मैंने बहुत ध्यान से हुक को पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच कर अलग कर दिया। जैसे ही हुक खुला, वो पट्टी ढीली होकर दोनों तरफ गिर गई, और उनकी पूरी पीठ मेरी नज़रों के सामने आ गई। वो अभी भी बेडशीट की ओर मुंह करके लेटी हुई थी, इसलिए उन्हें ये महसूस नहीं हुआ कि मैंने उसे खोल दिया है।
जैसे ही ब्रा की पट्टी हटी, उनकी पूरी पीठ मेरे सामने थी। मैंने बाम अपनी हथेलियों पर रगड़ा और उसे उनकी कमर से लेकर कंधों तक धीरे-धीरे मलना शुरू किया। मालिश करते हुए मेरी उंगलियां उनकी मुलायम स्किन पर फिसल रही थी।
जब मैंने हाथ उनकी पसलियों की तरफ घुमाया, तो मेरी उंगलियां उनकी छाती के नीचे वाले हिस्से को छू गई। वह स्पर्श बहुत ही नरम था और उनकी छाती का उभार मेरी उंगलियों के पोरों पर साफ महसूस हो रहा था। मैंने मालिश की रफ्तार धीमी कर दी और अपनी उंगलियों को वहीं रोक कर उनकी स्किन की गर्माहट को महसूस करने लगा। वो आंखें बंद करके सुकून से लेटी थी और उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि मेरी उंगलियां उनकी पीठ को छोड़ कर उनके आगे के हिस्से को सहला रही थी।
मैं मालिश के बहाने अपनी उंगलियों को उनके सीने के नीचे बार-बार हल्का सा रगड़ रहा था। मुझे लगा कि शायद उन्हें पता नहीं चल रहा है, लेकिन तभी उनकी सांसें थोड़ी भारी हो गई और उनका शरीर हल्का सा अकड़ गया। उन्हें साफ पता चल गया था कि मेरी उंगलियां उनकी छाती को छू रही हैं।
वो कुछ बोली नहीं, लेकिन उनकी खामोशी से साफ लग रहा था कि वो बहुत अजीब महसूस कर रही थी। शायद उन्हें यह समझ नहीं आ रहा था कि वो इस हरकत पर क्या कहें, क्योंकि मैं उनका भाई था। वो मन ही मन सोच रही होंगी कि एक भाई अपनी बहन के साथ ऐसा कैसे कर सकता है। उन्हें लग रहा होगा कि अगर वो कुछ बोलेंगी, तो रिश्ता कितना खराब हो जाएगा, इसलिए वो बस चुप-चाप आंखें मूंदे सब सहती रही।
कुछ मिनट बीत गए, मैं अपनी उंगलियों से उनके सीने के निचले हिस्से को बार-बार छू रहा था। वो पूरी तरह शांत थी, लेकिन उनकी साँसों की रफ्तार और उनके शरीर की हल्की थरथराहट बता रही थी कि वो सब कुछ समझ रही थी। उन्हें यह बात बिल्कुल अच्छी नहीं लग रही थी कि उनका भाई उन्हें इस तरह से छू रहा है, लेकिन वो किसी बड़े झगड़े या शर्मिंदगी से बचने के लिए कुछ कह नहीं पा रही थी।
तभी उन्होंने अपनी आंखें खोली और भारी आवाज में बोली, “गोलू, अब बहुत हो गया, बस करो। अब तुम यहाँ से जा सकते हो।”
मैं उनके कमरे से बाहर निकला। मेरी पैंट के अंदर मेरा लंड पूरी तरह खड़ा था और बहुत ज्यादा सख्त हो चुका था, जिससे मुझे चलने में भी अजीब लग रहा था। मैं बिना किसी से बात किए सीधे अपने बाथरूम में गया और अंदर से कुंडी लगा दी।
मेरे दिमाग में बस वही लम्हा घूम रहा था जब मेरी उंगलियां उनके शरीर को छू रही थी। मैंने अपना फोन निकाला और गैलरी में उनकी तस्वीरें खोलने लगा। एक-एक फोटो को देखते हुए, उनकी खूबसूरती और उनके शरीर की यादों ने मुझे और पागल कर दिया। मैंने अपनी पैंट की ज़िप खोली और अपने लंड को बाहर निकाल कर उसे सहलाने लगा। मैं तस्वीरें देखते हुए जोर-जोर से अपने लंड को मुट्ठी में लेकर चलाने लगा।
मेरे दिमाग में बस एक ही ख्याल था—काश एक दिन वो खुद मेरे पास आएं, अपनी मर्जी से मेरे सामने झुकें और मेरा लंड अपने मुंह में लेकर उसे चूसना शुरू करें। उस पल की कल्पना ने मेरी रफ़्तार और बढ़ा दी। मैं बस इसी सोच में डूबा था कि क्या वो दिन कभी आएगा, मुझे उस वक्त बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि वो दिन मुझसे बस कुछ दिनों की दूरी पर था।