पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-2
सुमन और उसकी भाभी निर्मला की गांड चुदाई-
सुमन की चुदाई महेंद्र के घर हुई। मस्त चुदाई के बाद सुमन हमें उसके भाभी निर्मला को भी चोदने के लिए बोलने लगी। सुमन ने बताया कि निर्मला गांड चुदाई की शौक़ीन थी।
सुमन महेंद्र से बोली, “महेंद्र कल निर्मला जब आएगी आगे-पीछे दोनों का मजा ले लेना।” फिर मेरी तरफ देखते हुए सुमन बोली, “धीरज जब निर्मला की गांड चोदोगे, तब मेरी गांड भी चोद लेना।”
मैंने हैरानी से महेंद्र की तरफ देखा। महेंद्र ने लंड खुजलाते हुए कहा, “यार धीरज मुझे तो ये गांड वाली बात का तो पता ही नहीं था, नहीं तो मैं तो गांड ही चोदता सुमन की। गांड चुदाई में लंड पर लगने वाले रगड़ों की तो यार बात ही अलग होती है।”
ये बोल कर उसने भी सुमन को पकड़ लिया और बोला, “साली एक साल से तुझे चोद रहा हूं। तूने अब तक तो नहीं बताया कि तू गांड भी चुदवाती है। मन तो कर रहा है अभी की अभी ही डाल दूं तेरी गांड में लंड। मुझसे अब नहीं रहा जा रहा तेरी ये बातें सुन-सुन कर।”
ये कह कर महेंद्र सुमन को बेड की तरफ ले जाते हुए सलवार का नाड़ा दुबारा खोल कर बोला, “चल सुमन चूतड़ पीछे करके लेट जा, आज ही गांड चोदूंगा तेरी।”
सुमन बोली, “महेंद्र कल तक सबर कर लो, गांड चुदाने के लिए मना थोड़े ही कर रही हूं। बोल तो रही हूं गांड चुदवा लूंगी। आज अगर गांड चुदाई के चक्कर में पड़ गए तो देर हो जाएगी और बेकार में ही किसी को शक हो जाएगा। लेने के देने ही ना पड़ जाए कहीं। कल मेरे साथ मेरे साथ मेरी भाभी निर्मला भी आएगी, तुम दोनों बारी-बारी से जितनी चाहो हमारी गांड चोद लेना।”
महेंद्र को भी बात समझ में आ गयी और वो बोला, “ठीक है सुमन तो फिर कल गांड ही चोदेंगे।”
अगले दिन फिर हम दोनों कालेज का एक पीरियड छोड़ कर महिंदर के घर पहुंच गए। उनके पहुँचने के दस-पंद्रह मिनट के बाद ही सुमन और निर्मला भी आ गयी।
निर्मला उम्र की बड़ी थी – होगी कोइ पच्चीस-सत्ताईस साल की, मगर थी दुबली पतली। देखने में भी सुन्दर थी। माथे पर बड़ी सी बिंदी लगाई हुई थी। होठों पर हल्की लिपस्टिक थी। सुमन ने तो सलवार कमीज ही पहनी हुई थी, मगर निर्मला ने साड़ी पहनी हुई थी।
नमस्ते-नमस्ते के बाद सुमन धीरज की तरफ इशारा करके बोली, “भाभी ये धीरज है।” फिर हाथ का इशारा करके – उंगली और अंगूठे से गोलाई बना कर सुमन बोली, “भाभी, ये मस्त लंड मोटा लंड है धीरज का। तुम्हारी सारी शिकायत दूर हो जाएगी धीरज से चुदाई करवा के – भाभी धीरज से भले ही गांड चुदवा लेना, मगर एक बार धीरज का लंड फुद्दी में जरूर लेना, मजा आ जाएगा चुदाई का। मस्त चोदता है और लंड जल्दी पानी भी नहीं छोड़ता।”
फिर महेंद्र की तरफ इशारा करके सुमन बोली, “और भाभी ये महेंद्र है, इसके बारे में तो आप जानती ही हैं। ये घर इसी का है। मस्त चोदता है ये भी। कह रहा था आज हम दोनों की गांड ही चोदेगा।”
निर्मला बोली कुछ नहीं और हंस दी और बोली, “चलो देखते हैं कितने गुणी हैं ये दोनों, कितना दम हैं इनमें। आज मैं आगे-पीछे दोनों जगह लूंगी इनके लंड।”
सुमन महेंद्र से बोली, “तो महेंद्र चलें? टाइम क्यों बर्बाद करना है। अदल-बदल कर गांड चुदाई करो दोनों तुम। दोनों दो दो गांडों का मजा लो, कर लो गांड चुदाई की हसरत पूरी।
हम चारों फिर से कमरे में आ गए। सुमन ने अपने कपड़े उतार दिये, और निर्मला से बोली, “चलो भाभी तुम भी उतारो और लेट जाओ – फुद्दी चुदवानी है तो सीधी लेट जाओ, अगर गांड चुदवानी है तो उल्टी हो कर चूतड़ उठा कर लेट जाओ। मैं तो आज गांड ही चुदवाऊंगी।”
ननद-भाभी दोनों मस्त चुदाई के मूड में लग रहीं थी। मैंने और महिंदर ने भी अपने कपड़े उतार दिये। सुमन बेड के किनारे पर उल्टी लेट गयी और निर्मला सीधी लेट गई और चूतड़ों के नीचे तकिया सरका लिया।
सुमन मुझसे से बोली, “धीरज तुम पहले निर्मला को अपने मोटे लंड का मजा दे दो। मैं तब तक महेंद्र से गांड चुदवाती हूं। फिर अदल-बदल करेंगे।”
महेंद्र की बदौलत सुमन और उसकी भाभी निर्मला के साथ मेरी मस्त चुदाई हुई। चूत, फिर गांड, फिर चूत और फिर से गांड। चुदाई का मजा आ गया।
ये सिलसिला चलता ही रहा। महीने में एक बार तो मौक़ा मिल ही जाता था सुमन को चोदने का। सुमन के साथ अब उसकी भाभी निर्मला भी आने लग गई थी।
मगर सुमन कभी-कभी किसी और लड़की को भी ले आती थी, सरोज नाम था उसका – बीस साल की होगी, मगर लंड मस्त लेती थी – आगे-पीछे सब जगह। सब एक से बढ़ कर एक चुदक्कड़ थी और ये सब हो रहा था मेरे 3XL लंड की बदौलत। जो भी लड़की एक बार मेरा लंड अपने चूत में डलवा लेती थी, बस उसके बाद तो समझो वो महीने, दो महीने में एक बार नीचे लेटती ही थी।
मम्मी ने मुझे चुदाई के लिए उकसाया।
इसी बीच कुछ ऐसा हुआ, जो मेरी समझ से परे था, मैंने कभी सोचा ही नहीं था कि ऐसा भी हो सकता है। हुआ ये कि किसी त्यौहार के सिलसिले में मेरा कालेज पांच दिन के लिए बंद था। मतलब पूरे हफ्ते की छुट्टी। हमेशा की तरह मैं गुडगांव अपने घर चला गया।
मम्मी अकेली ही घर पर थी। फोन पर पापा के बारे में तो मम्मी ने बताया ही था कि किसी सरकारी काम से चंडीगढ़ गए हुए थे, और दिव्या, दिल्ली – रोहिणी गयी हुई थी मौसी के यहां।
रात हुई तो खाना खा कर मैं ऊपर अपनी मम्मी-पापा के साथ वाले कमरे में बैठा टीवी देख रहा था। तभी मम्मी आयी और ज़रा सा दरवाजा खोल कर बोली, “धीरज बेटा जरा बात सुनना।”
मैंने कहा, “जी मम्मी अभी आया।”
मैं मम्मी के कमरे में गया तो देखा मम्मी बिस्तर पर लेटी हुई थी – अजीब सी ड्रेस पहन कर। नीचे सलवार और ऊपर ढीली ढाली कुर्ती। कुर्ती पूरा पेट भी नहीं ढक पा रही थी – कुर्ती मम्मों से जरा सी ही नीचे थी।
मम्मी की ड्रेस मुझे कुछ अजीब तो लगी, मगर फिर उसने सोचा अब रात को सोना ही तो है, कपड़ों से क्या फर्क पड़ता है।
मुझे कमरे में आया देख लेटे-लेटे ही मम्मी बोली, “धीरज जरा मेरी पीठ की मालिश कर दे बेटा और जरा सी कमर दबा भी, दे थोड़ी दुःख सी रही है।” ये बोल कर मम्मी उल्टी हो गयी और कुर्ती जरा सी ऊपर और सलवार खींच कर थोड़ी नीचे कर दी।
मैं मम्मी के पास ही बिस्तर पर बैठ गया और हल्के हाथों से मम्मी की पीठ पर मालिश करने लगा। मालिश करते हुए मैंने मम्मी से पूछा, “मम्मी कब से दुःख रही है आपकी कमर?”
मम्मी बोली, “हल्की-हल्की दर्द तो साल डेढ़ साल से है।”
इस पर मैंने कहा, “तो मम्मी डाक्टर को दिखाया?”
मम्मी बोली, “बेटा इस दर्द का इलाज डाक्टरों के पास नहीं है।”
ये कहते हुए मम्मी ने अपने चूतड़ थोड़े ऊपर उठाए और हाथ नीचे करके सलवार का नाड़ा खोल दिया और सलवार थोड़ी और नीचे कर दी और बोली, “धीरज थोड़ी और नीचे कर मालिश बेटा।”
जैसे ही मम्मी ने सलवार नीचे की, मम्मी की सलवार चूतड़ों के उभार तक पहुंच गयी – यहां तक कि चूतड़ों की लाइन भी जरा सी दिखाई देने लग लगी। मम्मी ने सलवार के नीचे चड्ढी भी नहीं पहनी हुई थी।
मैं थोड़ा और नीचे मालिश करने लगा। मेरा हाथ चूतड़ों के उभार को छू रहा था।
बाईस साल का नया-नया जवान हुआ मैं, और मेरे सामने एक इस तरह आधी नंगी औरत – भले ही वो मेरी मम्मी ही थी – पर तो थी तो एक औरत ही। एक फुद्दी और मुलायम-मुलायम चूतड़ों वाली औरत।
मेरे इतना नीचे मालिश करने पर मम्मी थोड़े कसमसाई और हल्का सा आगे होती हुई बोली, “हां धीरज बेटा ऐसे ही। बड़ा आराम मिल रहा है। जैसे ही मम्मी थोड़ी आगे की तरफ हुई, मम्मी की सलवार और नीचे खिसक गयी। मम्मी ने हाथ पीछे करके सलवार थोड़ी और नीचे कर दी।
मम्मी ने जैसे ही सलवार पीछे की तरफ खींची, तो सलवार आधे चूतड़ों तक जा पहुंची। मम्मी ने कहा, “हां बेटा जरा नीचे के तरफ मालिश कर दे।”
जब मम्मी ने कहा, “बेटा जरा नीचे के तरफ मालिश कर दे”, तब तो मैं हैरान ही हो गया – सलवार पहले ही आधे चूतड़ों तक जा चुकी थी, थोड़ा और नीचे? थोड़ा और नीचे तो चूतड़ों का छेद ही था, और उसके नीचे फुद्दी।
चूतड़ों की तकरीबन पूरी लाइन साफ दिखाई दे रही थी। मम्मी के चूतड़ बिलकुल गोल-गोल और मुलायम थे। मुझे सुमन और निर्मला के चूतड़ याद आ गए। मम्मी के चूतड़ सुमन और निर्मला के चूतड़ों सी कहीं ज्यादा नरम और मुलायम थे।
मम्मी का इस तरह से चूतड़ नंगे करना – मुझे अब कुछ अजीब सा लगने लगा था। मैं सोचने लगा मम्मी ऐसा मेरे सामने चूतड़ नंगे क्यों कर रही है, आखिर चाहती क्या है मम्मी?
जो भी था अपनी मम्मी के गोल मुलायम चूतड़ देख कर मुझे भी मस्ती आने लगी थी। मेरे लंड में थोड़ी हरकत सी होने लगी थी। मेरा हौसला बढ़ने लगा और लंड खड़ा होने लगा।
मुझसे अब रहा नहीं रहा गया और मैंने भी मम्मी के पूरे चूतड़ों पर हाथ फेर ही दिया।
मम्मी थोड़ी कसमसाई और मम्मी ने चूतड़ हिला दिए, मगर मम्मी बोली कुछ भी नहीं।
जब मैंने मम्मी के चूतड़ों पर हाथ फेरा और मम्मी कुछ नहीं बोली, तो कमर के मालिश तो मैं भूल ही गया और चूतड़ों पर ही हाथ फेरने लगा। मम्मी के चूतड़ तो पहले ही नंगे थे, मैंने सलवार की अंदर से मम्मी के चूतड़ जरा से दबा दिए। मम्मी फिर भी कुछ नहीं बोली।
मैंने हाथ थोड़ा और नीचे किया तो सलवार थोड़े और नीचे खिसक गयी। मैंने धीरे से मम्मी के चूतड़ों की लाइन में उंगली डाली और उंगली ऊपर-नीचे करने लगा। जब मैं उंगली ऊपर-नीचे कर रहा था, तभी मेरी उंगली मम्मी के चूतड़ों के छेद पर जा अटकी। मैंने थोड़ी सी उंगली मम्मी की गांड के अंदर डालने की कोशिश की, मगर सूखी उंगली और सूखी ही गांड का छेद। उंगली जरा सी ही गांड के अंदर गयी।
मम्मी तब भी कुछ नहीं बोली।
मम्मी के चुप्पी से मेरा हौंसला बढ़ता जा रहा था। मैंने उंगली पर ढेर सारा थूक लगाया और उंगली मम्मी की गांड में डाल दी। थूक से सनी हुई उंगली फिसल कर मम्मी की गांड में चली गयी। ये करते हुए मुझे डर भी लगा, मगर मम्मी ने “आह धीरज” के अलावा कुछ भी नहीं कहा।
इसके बाद तो मेरी झिझक जाती रही और मैंने उंगली मम्मी की चूतड़ों के अंदर-बाहर करनी शुरू कर दी। मम्मी ने भी अपनी टांगें थोड़ी फैला दी। ये एक तरह का यही कहना था कि “धीरज और करो ऐसे ही अंदर-बाहर।” मेरी उंगली पूरी मम्मी की गांड के छेद में जा रही थी। मैं उंगली मम्मी की गांड के अंदर-बाहर करने लगा।
मम्मी को इस तरह देख कर मुझे मस्ती आ गयी। मैं झुका और मम्मी के चूतड़ चाटने लगा। इतना कुछ हो रहा था, मगर मम्मी चुप थी। मम्मी की चूतड़ों से नीची सलवार, नीचे चड्ढी भी नहीं और इतनी ढीली कुर्ती और मम्मी का मुझे इस तरह चूतड़ चाटने के बावजूद भी कुछ ना कहना – ऊपर से घर में हम दोनों अकेले।
मैं अभी मम्मी की गांड चाट रहा था और साथ ही मम्मी की गांड में उंगली कर रहा था कि मम्मी एक-दम पलट कर सीधी हो गयी। मम्मी की सलवार इतनी नीचे हो चुकी थी कि सलवार मम्मी की फुद्दी को ढक भी नहीं पा रही थी। मुझे मम्मी की झांटों के छोटे-छोटे बाल भी साफ़ दिखाई दे रहे थे।
मम्मी ने अपनी सलवार और थोड़ी नीचे की और मेरी तरफ देखने लगी। मैं समझ गया कि मम्मी क्या चाहती थी। मम्मी अब अपनी फुद्दी में मेरी उंगली लेना चाहती थी।
इतना कुछ होने के बावजूद मेरी झिझक पूरी तरह से दूर नहीं हुई थी और मुझे डर भी लग रहा था। मैं धीरे-धीरे मम्मी की फुद्दी पर हाथ फेरने लगा। मम्मी ने आंखें बंद कर ली और लम्बे-लम्बे सांस लेने लगी और मम्मी ने अपने टांगें थोड़ी और फैला दी। ये सारा इशारा था कि मैं मम्मी की फुद्दी में उंगली डालूं या फिर फुद्दी का दाना रगडूं।
इतना कुछ होने से मेरा लंड बेकाबू होने लगा था। मुझे अब फुद्दी चोदनी थी। फुद्दी में लंड डालना था, चाहे वो फुद्दी मेरी मम्मी की ही क्यों ना हो।