पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-1
मैं इंजीनियरिंग कालेज में-
जब मैंने यहां एडमिशन लिया तो हॉस्टल में पहली ही रात को रैगिंग के दौरान कालेज के सीनियर स्टूडेंट नए दाखिल हुए लड़कों को पकड़ कर कालेज की कैंटीन में ले गए और बोले, “बच्चो, चलो अपनी अपनी पैंटें, पायजामे, कच्छे उतारो और दिखाओ तुममें से कोइ हिजड़ा तो नहीं है – सब मर्द ही हैं ना। ये कालेज तो मर्दों के लिए है। हिजड़ों को इस कालेज में एडमिशन नहीं मिलती। चलो भोसड़ी वालो, जल्दी उतारो अपनी अपनी पेंटें।”
अब सब कालेजों में रैगिंग तो चलती ही है। इंजीनियरिंग और मेडिकल कालेज में ये कुछ ज्यादा ही चलती है। सीनियर हुक्म देते हैं और नए-नए लड़के-लड़कियों को उन हुक्मों का पालन करना होता है आँखें बंद करके। ये गाली गलौच – “मादरचोद भोसड़ी वालो”, ये आम बातें हैं। रैगिंग करते हुए सीनियर ऐसी ही भाषा का इस्तेमाल करते है।
अगर रैगिंग वाले दिन सीनियर का कहा ना माना जाए तो पिटाई भी हो जाती है, और सुनने में तो ये भी आया कि गांड चुदाई भी हो जाती है। मगर अब ऐसा नहीं होता। क्योंकि सरकार की तरफ से सख्ती हो गयी है।
तब भी… सीनियर का डर तो रहता ही है।
सो सब लड़कों ने देर और नहीं अपनी पैंटें, पायजामे और अंडरवियर सब उतार दिए।
जब सीनियर लड़के सब का मजाक बनाते हुए कुछ-कुछ बोल रहे थे, तो मेरे सामने आ कर एक लड़का, महेंद्र नाम था उसका, मेरे लंड को देखते हुए बोला, “अबे भोसड़ी के, ये क्या है बे?”
असल में बात ये है कि मेरा लंड 3XL साइज़ का है। बैठा हुआ पांच इंच का और खड़ा आठ इंच का और ढाई इंच मोटा। महेंद्र ने सब को आवाज़ लगाई, “रामबीर, महेश, भूदेव, अशोक, अबे भोसड़ी के भाटिये इधर आओ, ये देखो ये क्या है यहां, इस मादरचोद के पास?”
सारे लड़के मेरे सामने आ गए। मेरे लंड को देखते हुए एक सीनियर बोला, “अबे नाम क्या है साले तेरा और ये क्या है बे? भैंस बांधने का खूंटा?”
मैने धीरे से कहा, “जी धीरज राठी।”
दूसरा बोला, “अबे भोसड़ी वाले, नाम पूछा था तेरी कास्ट नहीं। फिर मेरे लंड की तरफ इशारा करते हुए एक लड़का बोला, “धोबनों का कपड़े पीटने वाला डंडा है क्या ये?”
तीसरा बोला, “अबे बेटीचोद धीरज, किसी लड़की की चूत में डाला है क्या इसे अब तक या नीचे से अपनी ही गांड में लेता है इसे?”
सब सीनियर लड़के मेरे लम्बे लंड का मजाक बना रहे थे। लेकिन इसका फायदा ये हुआ कि उस रात के बाद मेरी की रैगिंग नहीं हुई और सब सीनियर लड़कों के साथ मेरी दोस्ती हो गयी, महेंद्र से तो खास कर के।
काम वाली सुमन की चुदाई-
एक दिन महेंद्र मेरे पास आया और बोला, “धीरज, अबे किसी लड़की की चूत चोदी है?”
ईमानदारी की बात तो ये कि मैंने तीन बार ही लड़कियों की चुदाई की थी, जब वो कालेज में था, तीनों बार हरियाणा के होटलों में जा कर। कभी होटल में, कभी फ़रीदाबाद और कभी सोहना में। वो भी अपने इस लम्बे मोटे लंड और एक रईस दोस्त की बदौलत। तीनों बार पैसे उस दोस्त ने ही खर्च किये थे। तीनों बार लड़कियां अलग-अलग थी और बला की खूबसूरत थी और पढ़ी-लिखी फैशनेबल भी। मेरा लंड देखते ही उछलने लगती थी, और हट-हट – मतलब चूतड़ घुमा-घुमा कर, झटका-झटका कर फुद्दी मरवाती – मतलब चुदवाती थी।
अब तक मैं खुद से एक भी लड़की पटा नहीं पाया था। कारण ये था कि गुडगाँव में हमेशा मैं उसी स्कूल में पढ़ा जहां उसकी मम्मी पढ़ाती थी, उसके बाद कालेज और फिर मैं सीधा यहां आ गया।
मैंने ने जवाब दिया, “हां चोदी है, तीन बार।”
महेंद्र मुझसे बोला, “अब यहां चोदेगा?”
अब भला लड़की चोदने से कौन मना करेगा? मैंने कहा, “हां चोदूंगा, कौन है लड़की?”
महेंद्र बोला, “ये छोड़ कौन है। बढ़िया लड़की है बीस इक्कीस साल की। मस्त चुदवाती है, चूतड़ झटका-झटका कर। कल दोपहर बाद तैयार रहना, चलेंगे।”
अगले दिन आख़िर का पीरियड मिस करके मैं महेंद्र के साथ हो लिया। महेंद्र के पास बुलेट मोटर बाइक है। महेंद्र मुझे जहां ले कर गया वो उसका ही घर था।
उस वक़्त महेंद्र के घर कोइ नहीं था। महेंद्र के मम्मी-डैडी किसी शादी में गए हुए थे। ताला खोल हम लोग घर अंदर चले गए और ड्राईंग रूम में बैठ गए।
मैंने महेंद्र से पूछा, “महेंद्र ये तो तेरा घर है, यहां आएगी लड़की? यहां कैसे आ जाएगी?”
महेंद्र अपनी घड़ी की तरफ देखते हुए बोला, “हां मेरा घर ही है, यहीं आएगी लड़की। अभी पंद्रह-बीस मिनट में आ जाएगी।”
मैंने महेंद्र से पूछा, “भाई अब तो बता दे है कौन, और तेरे घर में कैसे आ जाएगी?”
महेंद्र बोला, “हमारी मेड है – काम वाली। सुमन नाम है – बाहरवीं पास है, मेड है मगर लगती नहीं मेड है। गोरी चिट्टी है, चुदाई बढ़िया करवाती है। मेरे साथ फंसी हुई है। जब भी मौक़ा मिलता है महीने दो महीने में हमारी चुदाई हो जाती है। पिछले एक साल से चोद रहा हूं उसे। चुदाई करवाते हुए खूब चूतड़ घुमाती है।”
फिर महेंद्र बोला, “बात ये है धीरज, एक दिन चुदाई के दौरान ऐसे ही बातों-बातों मैंने तेरे लम्बे मोटे लंड का ज़िकर कर दिया, बस तब से मेरे पीछे पड़ी है कि उसे भी एक बार तेरा लंड लेना है अपनी चूत में। मैंने भी सोचा, ठीक है मेरा क्या जाता है। अब पांच दिनों के लिए घर खाली है मम्मी-पापा किसी शादी में गए हुए हैं। अगर मौक़ा लग गया तो इन तीन चार दिनों में बढ़िया चुदाई हो जाएगी। इसलिए मैं तुझे भी ले आया हूं।”
तभी दरवाजे के घंटी बजी। महेंद्र ने दरवाजा खोला और सुमन अंदर आ गयी। सुमन सच में ही मेड तो नहीं लगती थी। जैसा महेंद्र ने बताया था, गोरी-चिट्टी थी, साफ़ सुथरी। अच्छे कपड़े पहने हुए थे।
अंदर आते ही महेंद्र ने दरवाजा बंद किया और सुमन के मम्मे दबाने लगा। सुमन ने भी कोइ ऐतराज नहीं किया और हंसती रही। फिर महेंद्र सुमन से बोला, “सुमन ये है धीरज। इसकी बात की थी मैंने तुमसे। इसका लंड ही है – अपने हाथ से बताता हुआ महिंदर बोला, “इतना लम्बा।”
सुमन मेरी तरफ देखती हुई बोली, “नमस्ते धीरज।”
सुमन और महेंद्र सोफे पर बैठ गए और एक-दूसरे के साथ मस्तियां करने लगे। तभी महेंद्र ने पैंट से लंड निकाल कर सुमन के हाथ में पकड़ा दिया। सुमन कुछ देर ऐसे ही महेंद्र का लंड दबाती रही। फिर झुक कर लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी।
थोड़ा चूसने के बाद सुमन उठी और मेरी तरफ इशारा करते हुए महेंद्र से बोली, “इनको भी बोलो लंड पैंट से बाहर निकालें।
महेंद्र मुझसे बोला, “धीरज निकाल के दिखा भाई अपना लौड़ा सुमन को। मैंने तो बड़े गीत गाये हैं तेरे लौड़े की तारीफ़ में।”
मैं खड़ा हुआ और पैंट की ज़िप खोल कर अपना लंड बाहर निकाल लिया। लंड खड़ा तो था लेकिन अभी सख्त नहीं हुआ था। वैसे भी मेरा लंड लम्बा और मोटा होने के कारण खड़ा होने के बाद भी थोड़ा नीचे की तरफ ही रहता है।
मेरे लंड के लिए सब बोलते हैं भारी लंड है इसका। आगे से कम मोटा, मगर पीछे से कुछ ज्यादा ही मोटा है। खड़ा होते ही लंड के टोपे से स्किन अपने आप ही पीछे की तरफ सरक जाती है और गुलाबी टोपा बाहर निकल आता है।
सुमन तो मेरा खड़ा लंड देख कर ही मस्त हो गयी और महेंद्र से बोली, “महेंद्र ठीक ही कहा था तुमने, इनका लंड में तो सच में ही बहुत बड़ा है।” ये बोल कर सुमन मेरे सामने आ गयी और नीचे बैठ कर मेरा लंड मुंह में ले कर चूसने लगी।
थोड़ा चूसने के बाद सुमन महेंद्र से बोली, “महेंद्र चलें?”
महेंद्र बोला, “चलो।”
और फिर महेंद्र मेरी तरफ देखता हुआ बोला, “आजा भाई धीरज, चल अंदर और डाल अपना ये भैंस बांधने का खूंटा सुमन की फुद्दी में।”
“भैस बांधने का खूंटा” ये दोहराते हुए सुमन हंस पड़ी।
हम तीनों अंदर महेंद्र के कमरे में आ गए। अंदर आ कर महेंद्र ने अपने कपड़े उतार दिए और सुमन की सलवार का नाड़ा खोल दिया। सलवार नीचे खिसक गयी। सुमन ने नीचे चड्ढी नहीं पहनी हुई थी। सुमन की फुद्दी गहरे काले घुंघराले बालों से ढंकी हुई थी – फुद्दी का कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था ना फुद्दी के फांकें, ना फांकों के बीच की लाइन।
ये काम वालियां, धोबनें अपनी झांटें नहीं साफ़ करती। उनका कहना है कि उनके मर्दों को बिना झांटों वाली फुद्दीयां पसंद नहीं l बिना झांटों वाली फुद्दी को ना चूसने का मजा नहीं आता और ना ही चोदने का।
फिर महेंद्र ने सुमन की कमीज भी उतार दी और घुमा कर पीछे से सुमन के ब्रा का हुक खोल कर ब्रा भी उतार दी। सुमन के मम्मे बिलकुल खड़े थे – तने हुए। महेंद्र सुमन के मम्मे चूसने लग। मम्मे चूसने कि साथ साथ महेंद्र सुमन के चूतड़ों मैं उंगली भी अंदर बाहर कर रहा था।
थोड़ी देर महेंद्र सुमन के मम्मे चूसने के बाद हटा और मुझसे बोला, “चल भाई धीरज उतार अपने कपड़े और चढ़ जा सुमन पर।”
सुमन बिस्तर पर लेट गयी। सुमन ने अपने चूतड़ों के नीचे तकिया रखा, अपनी टांगें फैला दी और मेरी तरफ देखने लगी। सुमन की काली झांटों से ढकी फुद्दी देख कर मेरा लंड भी सख्त होने लगा था। मैंने भी अपने कपड़े उतार लिया और बिस्तर पर चला गया।
सुमन मस्ती से मेरी तरफ देख रही थी, जैसे कह रही हो, “अब आओ भी।”
मैंने अपना लंड सुमन की फुद्दी पर रखा और हल्का सा अंदर धकेला। तभी सुमन ने अपने चूतड़ों को जोर का एक झटका दिया और अगले ही पल मेरा पूरा का पूरा लंड सुमन की फुद्दी के अंदर था।
मस्त चुदाई करवाई सुमन ने। चुदाई के दौरान खूब चूतड़ घुमाती थी सुमन। दो बार सुमन की फुद्दी पानी छोड़ चुकी थी। जब तीसरी बार सुमन को मजा आया तो साथ ही मेरा लंड भी पानी छोड़ गया। कुछ टाइम बाद जब मेरा लंड ढीला हुआ तो मैं सुमन के ऊपर से उतारा और जा कर साथ लगे सोफे पर बैठ गया।
सुमन लेटी ही हुई थी। अब उसे चोदने की बारी महेंद्र की थी। महेंद्र उठा और जा कर सुमन की फुद्दी में लंड डाल कर सुमन को चोदने लगा। जैसे ही सुमन की चूत ने एक बार और पानी छोड़ा, महेंद्र का लंड भी पानी छोड़ गया।
पांच मिनट सुमन के ऊपर ही लेटा रहने के बाद महेंद्र ने पल्टी ली और सुमन के पास ही लेट गया। सुमन उठी और टांगें चौड़ी कर के चूत पर हाथ रख कर बाथरूम में चली गयी। सुमन की चूत दो-दो जवान लड़कों के लंड के पानी से भरी पड़ी होगी। सुमन ने सोचा होगा कहीं फुद्दी में से गाढ़ा-गाढ़ा पानी निकल कर टांगों पर ही ना बहने लगे।
सुमन फुद्दी की धुलाई करके बाहर आयी और बोली, “महेंद्र मजा आ गया आज। धीरज के साथ जैसी चुदाई हुई ऐसी चुदाई तो मेरी कभी भी नहीं हुई थी।”
फिर कुछ रुक कर सुमन बोली, “महेंद्र कल फिर लाओगे धीरज को, अंकल आंटी तो पांच दिनों के लिए गए हैं?”
महेंद्र बोला, “क्या हुआ, कल फिर चुदवानी है?”
सुमन बोली, “महेंद्र कल मैं अपनी भाभी को निर्मला को भी लेकर आऊंगी। उसको भी धीरज के लंड का मजा दिलवाती हूं एक बार। हमेशा बोलती रहती है, “सुमन तुम्हारे भैया के लंड में दम नहीं है।”
महेंद्र हंसते हुए बोला, “ठीक है।” और फिर महेंद्र मेरी तरफ देखता हुआ बोला, “तू क्या बोलता है, चोदनी है सुमन की भाभी निर्मला?”
अब मुझे भला क्या ऐतराज़ होना था। मैंने कहा, “ठीक है।”
तभी सुमन बोली, “धीरज निर्मला भाभी गांड चुदवाने की भी शौक़ीन है। मस्त गांड चुदवाती है, चूतड़ झटका-झटका कर। तुम्हारा मस्त मोटा लंड गांड में लेकर खुश हो जायेगी।”
सुमन की बात सुन कर धीरज ने सुमन के चूतड़ों को पकड़ते हुए सुमन से कहा, “और तुम सुमन? तुम नहीं लेती गांड में?”
सुमन बोली, “मैं भी लेती हूं,अगर कोइ डालना चाहे तो।”