एक फैमिली ऐसी भी-2

पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-1

मैं इंजीनियरिंग कालेज में-

जब मैंने यहां एडमिशन लिया तो हॉस्टल में पहली ही रात को रैगिंग के दौरान कालेज के सीनियर स्टूडेंट नए दाखिल हुए लड़कों को पकड़ कर कालेज की कैंटीन में ले गए और बोले, “बच्चो, चलो अपनी अपनी पैंटें, पायजामे, कच्छे उतारो और दिखाओ तुममें से कोइ हिजड़ा तो नहीं है – सब मर्द ही हैं ना। ये कालेज तो मर्दों के लिए है। हिजड़ों को इस कालेज में एडमिशन नहीं मिलती। चलो भोसड़ी वालो, जल्दी उतारो अपनी अपनी पेंटें।”

अब सब कालेजों में रैगिंग तो चलती ही है। इंजीनियरिंग और मेडिकल कालेज में ये कुछ ज्यादा ही चलती है। सीनियर हुक्म देते हैं और नए-नए लड़के-लड़कियों को उन हुक्मों का पालन करना होता है आँखें बंद करके। ये गाली गलौच – “मादरचोद भोसड़ी वालो”, ये आम बातें हैं। रैगिंग करते हुए सीनियर ऐसी ही भाषा का इस्तेमाल करते है।