“हर्ष, नींद नहीं आ रही?” उसने मेरी तरफ देखे हुए कहा, और अपने पल्लू को थोड़ा सरकाया। इसके बाद दूध का क्लीवेज साफ दिखने लगा। मेरा लंड एक-दम तन गया, पर मैंने कंट्रोल किया और कहा, “हां मामी, थोड़ी गर्मी है।”
उसने कहा, “गर्मी तो मुझे भी लग रही है। पर यहां ठंडी हवा है।” वो मेरे पास आई, और उसकी साड़ी का पल्लू धीरे से गिर गया। मैं उसका दूध देख के पागल हो गया। वो एक काले ब्लाउज में थी, जिसके निपल्स साफ दिख रहे थे।
मैंने हिम्मत करके उसका हाथ पकड़ा, और वो शर्मा के मुझसे चिपक गयी। “हर्ष, ये ग़लत है,” उसने कहा। पर उसकी सांसे गरम हो रही थी। मैंने उसके होठों पर किस्स कर दिया, और वो भी साथ देने लगी। हम छत पर एक कोने में छुप गए, और मैंने उसकी साड़ी ऊपर करके उसकी चूत पर हाथ फेरा।
वो सिहर उठी और “आह हर्ष!” बोल के सिसकारी भरने लगी. मैंने उसका ब्लाउज खोला, और उसके बड़े-बड़े दूध चूसने लगा। वो मेरा लंड पैंट के ऊपर से ही सहलाने लगी।
पर तभी एक अजीब सी आवाज़ आई, जैसे कोई सीढ़ी से ऊपर आ रहा हो! मामी एक-दम डर गई, और उसने कहा, “हर्ष, ये माँ होगी, छुप जा!” मैं जल्दी से एक पानी के टैंक के पीछे छुप गया, और देखा मामा छत पर आ गए। उन्हें देखा, जो अपनी साड़ी ठीक कर रही थी, और गुस्से में कहा, “रितु, इतनी रात को यहाँ क्या कर रही हो? कोई था यहाँ?”
मामी ने झूठ बोला, “नहीं, बस हवा खा रही थी।” पर मामा का शक नहीं गया, और वो इधर-उधर देखने लगे। मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था, अगर पकड़ा गया तो घर में हंगामा हो जाएगा।
फिर मामा ने मामी को नीचे ले जाने की कोशिश की, पर मामी ने कहा, “मैं थोड़ी देर बाद आती हूं।” मामा गुस्से में नीचे चले गए, और मामी ने मुझे इशारा किया। वो बोली, “हर्ष, ये बहुत जोखिम भरा है, पर मुझे तुझसे ये मज़ा चाहिए।”
मैंने टैंक के पीछे ही लिटाया, उसकी साड़ी ऊपर की। फ़िर अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। वो तड़प के बोली, “हर्ष, जल्दी डाल दो, मामा वापस आ सकते है!”
मैंने एक ज़ोरदार धक्का मारा, और मेरा लंड उसकी टाइट चूत में घुस गया। उसकी चीख निकल गई, पर मैंने उसके मुँह पर हाथ रख दिया। फिर धीरे-धीरे धक्के शुरू किये, और वो अपनी गांड उठा-उठा के साथ देने लगी। “कठोर, और तेज़!”
उसकी सिसकियों के साथ छत पर गूँज रहा था। मैंने उसके दूध मसलते हुए उसे घोड़ी बनाया, और उसकी बड़ी गांड पर थप्पड़ मारते हुए चोदा। हर धक्के के साथ उसकी गांड हिल-हिल के मजा दे रही थी। 10 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए, और थक कर वहीं लेट गए।
दो दिन बाद मामी ने मुझे गांव के पास एक खेत में बुलाया, जहां कोई नहीं आता था। वहां उसने एक टाइट कुर्ती और लेगिंग्स पहनी थी, जिसकी उसकी गांड और दूध और भी कयामत ढा रहे थे।
हम खेत के बीच एक पेड़ के नीचे चले गए, और मैंने उसकी कुर्ती उतार दी। फिर मैं उसक दूध चूसने लगा, और वो सिसकारियां भरने लगी। चुदाई के बाद जब हम दोनों थक के लेट गए, मामी के चेहरे पर एक उदासी सी दिख रही थी।
मैंने पूछा, “मामी, क्या बात है? तुम खुश नहीं हो?”
वो रो पड़ी और बोली, “हर्ष, मैं ये सब एक वजह से कर रही हूं। मेरी उम्र बढ़ रही है, और मैं मां से प्रेग्नेंट नहीं हो पा रही हूं। डॉक्टर ने कहा मामा में प्रॉब्लम है, पर वो ये बात कबूल नहीं करते। घर में सब ताने देते हैं कि मैं बांझ हूं। मैं तुझसे इस तरह चुदी, ताकि शायद तुझसे एक बच्चा हो जाए, और मेरा ये कलंक मिट जाए।”
ये सुनते ही मेरे होश उड़ गए। मैं तो बस चुदाई के लिए ये सब कर रहा था, पर ये बात मेरे दिल को हिला गई। पर तभी एक और खतरनाक ट्विस्ट आया। एक गांव का चौकीदार हमें देख चुका था! वो वहाँ आ गया, और बोला, “ये क्या कर रहे हो? मैं मामा को बता दूँगा!”
मम्मी डर गई, और उसने मुझसे कहा, “हर्ष, इसे चुप करा दो, वरना सब ख़त्म हो जाएगा!” मैंने हिम्मत करके चौकीदार से बात की, और 5000 देकर उसे चुप कराया। पर उसने कहा, “मामा को शक हो गया है, वो गाँव में पूछता फिर रहा है।” ये सुनते ही हम दोनों के होश उड़ गए, अगर माँ को ये राज़ पता चला, तो घर में तूफ़ान आ जाएगा।
अब हमें छुप के मिलना पड़ता है, पर मामी का ये दर्द और मेरी चुदाई का ये खेल चालू है। अगली बार क्या हुआ, वो अगले हिस्से में बताऊंगा!
तब तक ये कहानी आपको कैसी लगी कमेंट करके अपनी फीडबैक ज़रूर दें। आपकी फीडबैक मेरा हौंसला बढ़ाएगी आगे की कहानी जल्दी आप तक लाने के लिए।