पिछला भाग पढ़े:- काजल दीदी और मेरा प्यार-6
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
काजल दीदी के साथ उस घर में रहना मेरी ज़िंदगी में हुई सबसे अच्छी चीज़ों में से एक था। उनके साथ रहते हुए कब मुझे उस घर की, उनके आस-पास रहने की और हर दिन उन्हें देखने की इतनी आदत हो गई, मुझे खुद पता नहीं चला।
सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था और शायद इसी वजह से मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन अचानक सब बदल जाएगा। लेकिन अच्छी चीज़ें हमेशा एक जैसी नहीं रहती और हमारी ज़िंदगी में भी धीरे-धीरे बदलाव आना शुरू हो गया, जब माँ ने काजल दीदी की शादी के लिए लड़के देखना शुरू कर दिया।
मेरे लिए इस बात को मानना बहुत मुश्किल था और काजल दीदी भी शादी नहीं करना चाहती थी। उन्होंने कई बार माँ को मना करने की कोशिश की और जब माँ उनकी बात सुनने के लिए तैयार नहीं हुई, तो उन्होंने पापा से भी मदद माँगी। उन्हें उम्मीद थी कि शायद पापा माँ को समझा सकेंगे। लेकिन इस बार माँ ने अपना फैसला कर लिया था और वो किसी की भी बात सुनने के लिए तैयार नहीं थी।
कुछ लड़कों के बारे में बात करने और कुछ रिश्तों को मना करने के बाद आखिर माँ और पापा को एक लड़का पसंद आ गया। वो दिल्ली में नौकरी करता था और उसके परिवार को भी हमारा परिवार अच्छा लगा था।
जिस दिन वो लड़का अपने परिवार के साथ काजल दीदी को देखने हमारे घर आया, उस दिन मेरे लिए सब के सामने सामान्य बने रहना बहुत मुश्किल था। मैं चुप-चाप एक तरफ बैठा सब कुछ देख रहा था और मन ही मन चाहता था कि किसी वजह से उन्हें काजल दीदी पसंद ना आएँ और ये रिश्ता वहीं खत्म हो जाए।
लेकिन मुझे खुद भी पता था कि ऐसा होना मुश्किल था। काजल दीदी इतनी खूबसूरत थी कि पहली ही मुलाकात में वो लड़का उन्हें पसंद करने लगा और कुछ ही समय बाद दोनों परिवारों ने इस रिश्ते के लिए हाँ कर दी।
उसके बाद पंडित जी से शादी की तारीख के बारे में पूछा गया और उन्होंने सिर्फ दो महीने बाद की तारीख निकाल दी। जब मैंने ये बात सुनी, तो कुछ समय के लिए मुझे समझ ही नहीं आया कि मैं क्या करूँ।
सिर्फ दो महीने बाद काजल दीदी की शादी होने वाली थी और वो इस घर को छोड़ कर किसी और के साथ चली जाने वाली थी। जिस इंसान को हर दिन देखने की मुझे आदत हो गई थी, जिसके साथ रहना मेरी ज़िंदगी का इतना अच्छा हिस्सा बन चुका था, अब वही इंसान सिर्फ दो महीने बाद मुझसे दूर होने वाला था।
घर में सभी लोग शादी की तैयारियों को लेकर खुश थे। माँ हर दिन कुछ ना कुछ योजना बना रही थी, पापा रिश्तेदारों और बाकी तैयारियों में लगे हुए थे और मैं उनके बीच बैठ कर ऐसा दिखाने की कोशिश कर रहा था जैसे मुझे भी इस शादी से उतनी ही खुशी हो रही हो।
लेकिन सच ये था कि मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि मैं सामान्य कैसे रहूँ। दो महीने बाद काजल दीदी की शादी किसी और से होने वाली थी और मैं बस यही सोचता रहता था कि जब वो सच में इस घर से चली जाएँगी, तब मैं उनके बिना यहाँ कैसे रहूँगा।
शादी की तारीख तय होने के बाद मुझे काजल दीदी से अकेले में बात करने का मौका बहुत कम मिलता था, क्योंकि माँ लगभग हर समय उनके आस-पास रहती थी। कभी शादी की तैयारियों को लेकर दोनों कुछ बात कर रही होती, तो कभी कपड़ों, रिश्तेदारों और बाकी चीज़ों को लेकर। मैं भी उनसे बात करने की कोशिश नहीं करता था, क्योंकि मुझे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर उनसे कहूँ भी तो क्या कहूँ।
लेकिन एक दिन मुझे शादी के लिए अपने कुछ कपड़े खरीदने शहर जाना था। जब काजल दीदी को इस बारे में पता चला, तो उन्होंने पापा से कहा कि वो भी मेरे साथ जाना चाहती थी, क्योंकि उन्हें भी अपने लिए कुछ कपड़े खरीदने थे। उस समय माँ बाजार गई हुई थी, इसलिए पापा ने बिना ज्यादा कुछ पूछे उन्हें मेरे साथ जाने की इजाज़त दे दी।
हम दोनों कार में बैठे और शहर के लिए निकल गए। शुरुआत के कुछ मिनटों तक कार में बिल्कुल चुप्पी थी। मैं सामने सड़क की तरफ देखते हुए गाड़ी चला रहा था और काजल दीदी खिड़की से बाहर देख रही थी। मुझे लग रहा था कि वो मुझसे कुछ कहना चाहती थी, लेकिन मैं खुद से बात शुरू नहीं करना चाहता था।
कुछ देर बाद उन्होंने मेरी तरफ देखा और कहा, “गोलू, मुझे माफ कर देना। मुझे पता है कि इन सब चीज़ों से तुम्हें बहुत बुरा लग रहा है, लेकिन मैं अब माँ को और दुख नहीं दे सकती। मैंने बहुत कोशिश की, बहुत बार मना किया, लेकिन अब मुझमें उनसे लड़ने की हिम्मत नहीं है।” मैंने उनकी बात सुनी, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया।
मैं बस चुप-चाप गाड़ी चलाता रहा। मुझे डर था कि अगर मैंने उस समय कुछ बोलने की कोशिश की, तो शायद मेरे अंदर जो कुछ चल रहा था वो सब बाहर आ जाएगा। काजल दीदी ने भी मेरे जवाब का इंतजार किया, लेकिन जब मैंने कुछ नहीं कहा तो वो दोबारा खिड़की से बाहर देखने लगी और बाकी रास्ते हम दोनों के बीच फिर वही चुप्पी रही।
कुछ समय बाद हम शहर पहुँचे और सीधे मॉल चले गए। सबसे पहले हम मेरे लिए कपड़े देखने गए। मैंने शादी में पहनने के लिए कुछ कपड़े पसंद किए और उन्हें खरीदने के बाद हम लेडीज़ सेक्शन की तरफ चले गए। वहाँ पहुँचते ही काजल दीदी अलग-अलग कपड़े देखने लगी और मैं उनके पीछे-पीछे चलता रहा।
थोड़ी देर बाद वो अंदर के सेक्शन में चली गई जहाँ ब्रा और पैंटी रखी हुई थी। उन्होंने कुछ देर तक अलग-अलग सेट देखे और फिर एक जोड़ी चुन ली। उसे हाथ में लेकर वो कुछ पल चुप खड़ी रही, फिर हल्की सी मुस्कान के साथ मेरी तरफ मुड़ी। उनके चेहरे पर हल्की लाली आ गई थी, जैसे वो थोड़ा शर्म महसूस कर रही हो।
धीरे से उन्होंने पूछा, “गोलू… ये मुझ पर कैसा लगेगा?”
मैंने उनकी तरफ देखा और हल्की मुस्कान के साथ कहा, “दीदी, ये आप पर बहुत अच्छा लगेगा… सच में, आपने सही चुना है।”
खरीदारी खत्म करने के बाद हम वापस कार में आकर बैठ गए। मैं गाड़ी स्टार्ट करके घर की तरफ चलने ही वाला था कि तभी काजल दीदी ने धीरे से कहा, “गोलू, पहले मुझे कहीं और जाना है।” मैंने बिना कुछ पूछे गाड़ी आगे बढ़ा दी। वो रास्ता बताती रहीं और मैं चुप-चाप उनके बताए रास्ते पर गाड़ी चलाता रहा।
करीब आधे घंटे बाद उन्होंने मुझे एक होटल के पार्किंग में गाड़ी रोकने को कहा। मैंने गाड़ी रोकी और हैरानी से उनकी तरफ देखते हुए पूछा, “दीदी, हम यहाँ क्यों आए हैं?”
उनकी आंखों में एक अजीब सी बेताबी थी। उन्होंने अपना चेहरा मेरे चेहरे के बहुत करीब ला दिया। उनकी गर्म सांसें मेरे गालों को छू रही थी। उन्होंने धीमी आवाज में कहा, “अगले हफ्ते मेरी शादी है… और उसके बाद ये सब सिर्फ एक याद बन कर रह जाएगा। मैं नहीं चाहती कि किसी और के मुझे छूने से पहले, मैं अपनी ये आखिरी ख्वाहिश पूरी ना कर पाऊं।”
मैंने बिना कुछ बोले कार का दरवाज़ा खोला और उनका हाथ पकड़ लिया। उनकी पकड़ काफी मज़बूत थी, जैसे उन्हें डर हो कि अगर उन्होंने मुझे छोड़ा तो मैं कहीं खो जाऊंगा। हम सीधे होटल के रिसेप्शन पर पहुंचे और जल्दी से एक कमरा ले लिया।
जैसे ही हम कमरे के अंदर गए और दरवाज़ा बंद किया, चारों तरफ एक गहरी खामोशी छा गई। कमरा काफी बड़ा था और उसमें एक शाही सा एहसास था। बीच में एक बड़ा सा बिस्तर रखा था, जिस पर दूध जैसी सफेद चादर बिछी हुई थी। कमरे की हल्की रोशनी उस चादर पर पड़ कर उसे और भी सुंदर बना रही थी।
काजल दीदी कमरे के बीच में जाकर रुक गई। उन्होंने अपना बैग बिस्तर के किनारे रख दिया और फिर मुड़ कर मेरी तरफ देखा। उनकी सांसें अब साफ सुनाई दे रही थी। उनकी नज़रें उस सफेद चादर वाले बड़े बिस्तर पर टिक गई, और फिर वो धीरे-धीरे मेरी तरफ बढ़ने लगी।
वह मेरे पास आई और मेरे होंठों को अपनी पूरी ताकत से चूमने लगी। उनकी जीभ मेरे मुंह के अंदर हलचल मचा रही थी। हम दोनों एक-दूसरे को इतनी शिद्दत से चूम रहे थे जैसे यह हमारी जिंदगी की आखिरी रात हो। वह बेताबी से मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी और मैंने भी उनके ब्लाउज के हुक पर अपने हाथ बढ़ा दिए। मैंने उनकी साड़ी का पल्लू एक झटके में खींच कर नीचे गिरा दिया और उनके ब्लाउज के सारे हुक खोल दिए। उनके कपड़े फर्श पर गिर गए और वह भी अपनी साड़ी की सारी परतें हटा कर पूरी तरह आजाद हो गई।
दो मिनट के अंदर हम दोनों के शरीर पर एक धागा भी नहीं था। मैं उनके एक-दम सामने खड़ा था। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा था और उनकी नाभि के पास उनकी कोमल त्वचा को बार-बार रगड़ रहा था। वह मुझे देख रही थी और उनकी सांसें काफी तेज चल रही थी। उनकी छाती तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी और वह अपनी नजरें मेरे शरीर के हर हिस्से पर टिकाए हुए थी।
उन्होंने मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में कस लिया और हल्के से उसे सहलाने लगी। उनकी उंगलियों की गर्माहट और उनकी पकड़ ने मेरे अंदर एक लहर पैदा कर दी। उन्होंने धीरे-धीरे अपने पैर फैलाए और मुझे अपनी ओर खींच लिया। हम दोनों के शरीर अब पूरी तरह से एक-दूसरे से चिपक चुके थे। उन्होंने मुझे बिस्तर की तरफ धकेला और मैं पीछे की ओर उस नरम गद्दे पर गिर गया। वह तुरंत मेरे ऊपर आ गई और अपने घुटनों को मेरी जांघों के बीच रख लिया।
वह मेरे ऊपर बैठी थी और उनकी पकड़ मेरे लंड पर अभी भी मजबूत थी। उन्होंने अपने घुटनों को बिस्तर के किनारों पर टिकाया और अपना पिछवाड़ा थोड़ा ऊपर उठाया ताकि वह मेरे लंड को सीधे अपने नाजुक हिस्से पर सेट कर सकें।
पहली बार मेरा लंड उनके नाजुक हिस्से को छू रहा था। वह जगह बहुत गर्म और गीली थी। वह महसूस कर पा रही थी कि मेरा लंड कितना सख्त है और मैं उनकी गर्माहट महसूस कर पा रहा था। वह बस एक सेकंड के लिए रुकीं और अपनी नज़रों को मेरे चेहरे पर टिका दिया, जैसे वह इस पहले एहसास को पूरी तरह से महसूस करना चाहती थी।
उनकी सांसें काफी तेज़ थी और उन्होंने मेरी आँखों में देखते हुए धीरे से पूछा, “गोलू, क्या मैं यह कर सकती हूँ?”
मैंने उनकी आंखों में गहराई से देखा और जवाब दिया, “हाँ दीदी, करो।”
इतना सुनते ही उन्होंने अपना सारा भार नीचे की ओर डाल दिया। मेरा लंड धीरे-धीरे उनके भीतर जाने लगा। वह अपनी कमर को ऊपर-नीचे करने लगी। वह अपना पिछवाड़ा पूरी ताकत से ऊपर-नीचे कर रही थी और मेरा लंड अंदर-बाहर हो रहा था। वह हर बार नीचे आकर मेरे लंड को पूरी तरह अंदर ले रही थी।
जैसे-जैसे उनका पिछवाड़ा ऊपर-नीचे होता, उनका नाजुक हिस्सा मेरे लंड को पूरी तरह जकड़ लेता। वह हर झटके के साथ अपनी आवाज़ निकाल रही थी। वह अपने दोनों हाथों को मेरे कंधों पर टिका कर अपना पूरा जोर लगा रही थी। मैं भी अपनी कमर को थोड़ा ऊपर उठा कर उन्हें सहारा दे रहा था। जब वह नीचे आती, तो उनका पिछवाड़ा मेरी जांघों से टकराता और मैं उनके भीतर के खिंचाव को पूरी तरह महसूस कर पाता।
वह तेज़ी से अपना पिछवाड़ा ऊपर-नीचे करती रही। हर बार जब वह नीचे आती, तो मेरा लंड उनके नाजुक हिस्से में गहराई तक धंस जाता और मैं उसे पूरी तरह उनके भीतर महसूस करता। उन्होंने अपना पूरा शरीर मेरे शरीर पर टिका दिया था और उनकी हर एक हलचल से मेरा लंड उनके अंदर और बाहर हो रहा था।
वह रुक गई और अपनी सांसें संभालते हुए धीरे से बोली, “गोलू, क्या तुम पोजीशन बदलना चाहते हो?”
मैंने उनकी आँखों में देखते हुए कहा, “अगर तुम चाहो, तो बदल सकते हैं।”
वह मेरे ऊपर से नीचे उतरी और बिस्तर पर लेट गई। मैं उनके ऊपर आया और उनके पैरों के बीच अपनी जगह बनाई। मैंने अपने घुटनों को उनके पैरों के बाहर टिकाया और अपना वजन अपने हाथों पर संभाला। अब मैं उनके ऊपर था, आमने-सामने। मैंने अपने लंड को उनके नाजुक हिस्से पर सेट किया।
उन्होंने अपने पैर मेरे कमर के चारों ओर लपेट लिए और धीरे से कहा, “गोलू, अब मुझे अपनी तरह से प्यार करो।”
उनकी बात सुनते ही, मैंने धीरे से अपना शरीर आगे की ओर बढ़ाया और मेरा लंड उनके अंदर जाने लगा। मैं धीरे-धीरे तब तक आगे बढ़ता रहा जब तक मैं उनके पूरी तरह से भीतर नहीं हो गया। अब मैं अपनी लय में था, और उन्हें धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। उनकी आँखें बंद थी और वह हर झटके के साथ अपनी आवाज़ निकाल रही थी।
उनकी आँखें कस कर बंद थी और मेरे हर ज़ोरदार धक्के के साथ उनके गले से दबी हुई आहें निकल रही थी। मैं बहुत तेज़-तेज़ कर रहा था, और वो मजे और दर्द के बीच बुरी तरह तड़प रही थी। उनकी आवाज़ें पूरे कमरे में गूँज रही थी, जिसे सुन कर मैं बस एक पल के लिए थमा। मैंने बिस्तर के पास रखा उनका बैग अपनी ओर खींचा और ज़िप खोल कर वही ब्रा और पैंटी निकाल ली जो वो अपने हनीमून के लिए लेकर आई थी।
मैंने उन कपड़ों को उनके चेहरे के पास किया और कहा, “दीदी, इसे अपने मुँह में पकड़ लो।” उन्होंने बिना एक पल गंवाए, उसे अपने मुँह में ठूँस लिया। अब उनकी हर चीख और आह उन कपड़ों के अंदर दब गई थी, और बस उनके गले से निकलती दबी हुई फुसफुसाहट और तेज़ सांसें सुनाई दे रही थी।
मैं वापस उनके पैरों के बीच आ गया। मैंने अपना पूरा वज़न आगे की ओर डाला, अपना लंड उनकी गीली जगह पर सेट किया और एक ही झटके में पूरा अंदर धकेल दिया। अब मैं पूरी ताकत से, बिना किसी रुकावट के उन्हें ज़ोर-ज़ोर से धक्का देने लगा। हर धक्के के साथ मैं उन्हें अंदर तक महसूस कर सकता था। उनका पूरा शरीर बिस्तर पर उछल रहा था और मुँह में कपड़े होने की वजह से वो चाह कर भी आवाज़ नहीं निकाल पा रही थी, बस उनके मुँह से अजीब सी दबी हुई आवाज़ें आ रही थी जो उस पल को और भी ज़्यादा इंटेंस बना रही थी।
मैंने अपनी रफ़्तार और तेज़ कर दी और उनकी कमर को मजबूती से पकड़ कर उन्हें ज़ोर-ज़ोर से धक्के देने लगा। उनका शरीर मेरे हर झटके के साथ बिस्तर पर बुरी तरह कांप रहा था। मुँह में कपड़े होने की वजह से उनकी आवाज़ बिल्कुल दबी हुई थी, लेकिन उनकी आँखों की चमक साफ़ बता रही थी कि वो मजे और तड़प के उस चरम पर हैं जहाँ से वापस आना मुश्किल है।
मैं उन्हें और भी गहराई से अंदर-बाहर करने लगा। उनके अंदर का कसाव मेरे लंड को इतनी कस कर जकड़े हुए था कि मुझे हर धक्के में बहुत मज़ा आ रहा था। उन्होंने अपने हाथों से चादर को इतनी जोर से पकड़ा हुआ था कि उनकी उंगलियां सफेद पड़ गई थी। मैं बिना रुके, पूरी ताकत के साथ उन्हें धकेले जा रहा था, और वो हर बार मेरे शरीर के साथ ऊपर-नीचे हो रही थी। वो मुझे अपनी आँखों से और भी तेज़ करने का इशारा कर रही थी, जैसे वो चाहती थी कि मैं आज सब कुछ भूल कर उन्हें पूरी तरह से भर दूँ।
उस पल की गर्मी देख कर मुझे महसूस हुआ कि मेरा शरीर अब और नहीं रुक पाएगा। मैंने हांफते हुए उनसे कहा, “दीदी, मैं आने वाला हूँ।”
मेरी बात सुनते ही उन्होंने अपने हाथ ऊपर किए और अपने मुँह से वो कपड़े खींच कर हटा दिए। उनका चेहरा पसीने से भीगा हुआ था और उनकी आँखें मुझे प्यार और हवस से देख रही थी। उन्होंने धीरे से कहा, “गोलू, तुम अंदर कर सकते हो, मुझे कोई दिक्कत नहीं है।”
मैंने थोड़ा हिचकिचाते हुए पूछा, “लेकिन दीदी, मैंने कुछ भी नहीं पहना है।”
उन्होंने मेरी आँखों में देखते हुए बिना किसी झिझक के कहा, “कोई बात नहीं गोलू, तुम कर सकते हो।”
उनकी यह बात सुनते ही मेरा सारा डर गायब हो गया और मैं पूरी तरह बेकाबू हो गया। मैंने और भी ज़्यादा जोश के साथ उन्हें धकेलना शुरू कर दिया। अब कोई रोक-टोक नहीं थी, मैंने पूरी ताकत से उन्हें धक्के देना जारी रखा और उनकी कमर को और कसकर पकड़ लिया। वो भी अपना पूरा शरीर मुझे सौंप चुकी थी और अब उनकी आहें कमरे में साफ गूँज रही थी।
मुझे महसूस हुआ कि मेरा शरीर अब मेरी बात नहीं सुन रहा है, हवस का एक सैलाब मेरे अंदर उमड़ रहा था। मैंने उन्हें कस कर अपनी बाँहों में भर लिया और उनके अंदर की गहराई को महसूस करते हुए एक आखिरी, सबसे ज़ोरदार धक्का दिया।
जैसे ही मैंने वो धक्का दिया, मेरे बदन में एक बिजली सी दौड़ी और मैंने सारा का सारा सफ़ेद पानी उनके अंदर छोड़ दिया। मुझे साफ़ महसूस हो रहा था कि मेरा लंड उनके अंदर कितना गर्म था और कैसे मैं धीरे-धीरे अपना सारा माल उनके अंदर तक भर रहा था। वह भी उस वक्त अपनी कमर ऊपर उठा कर मुझे और गहराई में ले रही थी, जैसे वो भी चाहती हो कि एक भी बूंद बाहर न गिरे।
जब मेरा शरीर थोड़ा ढीला पड़ा, तो मैंने धीरे से अपना लंड उनके नाजुक हिस्से से बाहर निकाला। जैसे ही वह बाहर आया, मेरे लंड के सिरे पर और उनके नाजुक हिस्से के मुँह पर वह गाढ़ा सफ़ेद पानी साफ़ दिखाई दे रहा था।
मैं उनके ऊपर से हट कर उनके पास ही बिस्तर पर बैठ गया। मेरी सांसें अभी भी तेज़ चल रही थी, लेकिन मेरी नज़रें वहीं टिकी थी। उनका नाजुक हिस्सा पूरी तरह से भीगा हुआ था और धीरे-धीरे वह सफ़ेद पानी उनकी जांघों की तरफ रिसने लगा था—दो-तीन बूँदें उनकी मखमली त्वचा पर लुढ़कती हुई नीचे की ओर जाने लगी। वह नज़ारा बहुत ही जबरदस्त था। वह अभी भी थकी हुई सी आँखें बंद करके लेटी हुई थी, और मैं बस उन्हें और उस रिसते हुए पानी को देख रहा था, जिसे मैंने ही उनके अंदर भरा था।
वक़्त बीतता गया और एक हफ़्ते बाद ही काजल दीदी की शादी किसी और के साथ हो गई। उन्होंने अपनी नई ज़िंदगी की शुरुआत कर ली थी। शादी के बाद हमने सब कुछ हमेशा के लिए खत्म कर दिया, क्योंकि हमें पता था कि अगर किसी को भी हमारे बारे में ज़रा भी भनक लगी, तो हम दोनों की ज़िंदगी पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। माँ को उस दिन से मुझ पर बहुत गुस्सा था जो कुछ भी मैंने काजल दीदी के साथ किया था, लेकिन सच कहूँ तो मुझे उस चीज़ का रत्ती भर भी पछतावा नहीं था।
मैं अपनी पूरी ज़िंदगी में कभी नहीं भूल पाऊँगा कि काजल दीदी कितनी खूबसूरत थी। उनके वो मुलायम बूब्स, उनके होंठों का अहसास जो मेरे लंड पर था, और सबसे ज़रूरी, उनका वो नाजुक हिस्सा।
उस दिन जब मैंने उन्हें पहली और आखिरी बार पूरी तरह से अपना बनाया था, तो वो इतना ज्यादा टाइट और गर्म था कि आज भी याद करके मेरा बदन सिहर उठता है।
मुझे नहीं लगता कि मैंने कभी दोबारा वैसी तड़प या वैसा अहसास किसी और के साथ महसूस किया है। शायद इसलिए क्योंकि वो मेरी सौतेली बहन थी, और शायद इसीलिए इस दुनिया की कोई भी दूसरी लड़की मुझे वैसी खुशी नहीं दे सकती जो मुझे काजल दीदी के साथ मिली थी। वो यादें मेरे दिल में एक ऐसे राज की तरह दफन हैं, जिसे मैं चाह कर भी कभी मिटा नहीं पाऊँगा।