वहां पहुंच कर मैं फ्रेश हुआ, और फिर उनके आने का इंतजार करने लगा। थोड़ी देर में मुझे साड़ू भाई का मैसेज आया कि वो अपने कमरे में पहुंच चुके थे। उसने ये भी लिखा कि वो लोग रात को सेक्स करेंगे, और तब तक मैं आराम करूं और खा-पी लूं।
अभी शाम के 6 बज चुके थे। फिर मैंने रिसेप्शन पर कॉल किया और डिनर का ऑर्डर दे दिया। आधे घंटे में खाना आ गया। मैंने पेट भर कर खाना खाया। खाना बहुत ही स्वादिष्ट था। वैसे भी फ्री का माल था, क्योंकि बिल तो साड़ू भाई को ही चुकाना था। उसके बाद मैं मोबाइल पर टाइम पास करने लगा। फिर 9 बजे मुझे उसका मैसेज आया कि वो सेक्स शुरू करने वाले थे। उसने कहा कि उसने दरवाजा खुला रखा था, और मैं आराम से बिना आवाज किए उनके कमरे में आ जाऊं।
मैं जल्दी से अपने कमरे से निकला, और उनके रूम के दरवाज़े के बाहर जा कर खड़ा हो गया। हमारे कमरे लाइन के आखिर में थे, इसलिए वहां पर कोई आने-जाने वाला नहीं था। बस वेटर आना था, वो भी बुलाने पर।
मैंने हल्के से उनके कमरे का दरवाज़ा खोला और अंदर झांकने लगा। अंदर राजीव (मेरा साड़ू) और विद्या (मेरी साली) बिस्तर पर रोमांस कर रहे थे। राजीव शॉर्ट्स में था, और विद्या ने लाल रंग की ब्रा और पैंटी पहनी थी। इन कपड़ों में वो बिल्कुल बॉलीवुड की किसी हीरोइन की तरह लग रही थी। वो इतनी सेक्सी लग रही थी, कि उसको देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया और मेरा लंड खड़ा हो गया। अब बस इंतजार था कब इस सेक्सी साली की चुदाई करूं।
राजीव विद्या के ऊपर था और उसके होंठ चूस रहा था। विद्या भी उसका पूरा साथ दे रही थी। वो इतनी मदहोश थी कि उसका ध्यान ही नहीं था दरवाज़े की तरफ, कि दरवाज़ा खुला था। लेकिन राजीव ने मुझे अंदर झांकते हुए देख लिया था।
कुछ देर की किसिंग के बाद राजीव ने विद्या की गर्दन चूमनी शुरू की। विद्या मदहोश हो कर आह ह्म्म कर रही थी। फिर राजीव उसकी क्लीवेज चूमने लगा और उसकी ब्रा खोल कर उसके जूसी बूब्स को नंगा कर दिया। अब राजीव एक-एक करके विद्या के दोनों चूचों को चूसने लग गया। वो एक चूचे को चूसता और दूसरे को दबाने लगता। विद्या आह आह कर रही थी। वो और गरम होती जा रही थी। और राजीव भी यहीं चाहता था।
कुछ देर चूचे अच्छे से चूसने के बाद राजीव बोला-
राजीव: एक बात बोलूं विद्या?
विद्या: क्या हुआ, हो गया क्या तुम्हारा फिर से?
राजीव: नहीं-नहीं, हुआ नहीं है। मैं सोच रहा था आज कुछ अलग करते है।
विद्या: क्या अलग करना है?
राजीव: आज ब्लाइंडफोल्ड सेक्स करें?
विद्या: तुमसे आँखें खोल कर तो किया नहीं जाता ढंग से। आँखें बंद करके तो तुम्हारा और जल्दी हो जाएगा।
राजीव: अरे नहीं, मैं आंखों पर पट्टी नहीं बांध रहा, तुम बांधोगी।
विद्या: अच्छा, तुम चाहते हो कि मैं आंखों पर पट्टी बांध लूं, और तुम मुझे चोदो।
राजीव: हां, बिल्कुल सही।
विद्या: चलो, ये भी करके देख लेते है।
फिर राजीव ने पट्टी निकाली और विद्या की आंखों पर बांध दी। उसके बाद उसने अच्छे से चेक किया कि कहीं विद्या को कुछ दिख तो नहीं रहा था। जब उसको यकीन हो गया था कि उसको अब कुछ नहीं दिख रहा था, तो उसने मुझे अंदर आने का इशारा किया। मैं जल्दी से दरवाज़ा खोल कर अंदर चला गया।
मैं बहुत जोश में था, और मैंने अंदर जाते ही अपने सारे कपड़े निकाल दिए। मेरा मोटा लंबा लंड पूरा तन कर लोहे की रॉड बना हुआ था। राजीव मेरे लंड को टकटकी लगा कर देख रहा था। फिर मैं विद्या के करीब गया, और राजीव पीछे हट गया। अब मेरी सेक्सी साली मेरे सामने सिर्फ पैंटी में बैठी थी, और उसकी आंखों पर पट्टी बंधी थी। ये एक सपने जैसा है किसी भी जीजा के लिए। और मेरा ये सपना हकीकत बन चुका था।
मैं विद्या के करीब गया और उसके कंधों पर हाथ रख कर उसको बिस्तर पर लिटाया। बूब्स चूसने का बहुत मन था, लेकिन राजीव वो पहले ही बहुत चूस चूका था। और कहीं विद्या को शक ना हो जाए, इसलिए मैंने दोबारा बूब्स से शुरू करना सही नहीं समझा। फिर मैंने उसके पेट पर हाथ रखा, और उसकी नाभि में उंगली घुमाने लगा। विद्या सिसकियां भरने लगी।
उसके बाद मैं उसके पेट को मसलने लगा। फिर मैं अपना हाथ पैंटी के ऊपर से उसकी चूत पर ले गया, और उसका सहलाने लगा। विद्या आह आह करने लगी। उसकी चूत गीली हुई पड़ी थी। मैंने पैंटी के ऊपर से उसकी चूत पर किस्स किया, तो विद्या उछल पड़ी और बोली-
विद्या: अरे ये क्या कर रहे हो?
तभी राजीव पास आके बोला: बस देखती जाओ आज क्या करता हूं मैं।
फिर मैंने विद्या की पैंटी नीचे की।
इसके आगे क्या हुआ, आपको अगले पार्ट में पता चलेगा। यहां तक कि कहानी कैसी लगी आप [email protected] पर बता सकते है।
(Xahani ki nayi video website par zaroor visit kare:- https://www.xahani.com/videos)