उसका नाम वीणा था। उसने मेरी मासिक सैलरी पर सहमति जताई, और मैंने बोला उसके खाने का स्वाद लेने के बाद कन्फर्म करूंगा। वो मान गई। वीणा देखने में अच्छी थी। थोड़ी सावली थी, लेकिन ऊंचाई अच्छी थी, लगभग 5’4”, और उसका शरीर बहुत सुडौल था।
फिगर अच्छा था उसका और उमर 25 थी।
सब कुछ सामान्य था। शुरू में मुझे उसके लिए कोई गलत ख्याल नहीं आया। वो सुबह 8 बजे आती थी। फिर मेरे लिए नाश्ता बनाती थी, और साथ में लंच भी बना के पैक कर देती थी। फिर शाम को 7 बजे डिनर बनाने आती थी। सुबह मैं अपने सुबह के कामों में व्यस्त रहता था। लेकिन शाम को आमतौर पर फ्री होता था। वो भी फ्री होती थी, क्योंकि मेरा घर उसका आखिरी काम का घर था।
कभी-कभी मैं उसकी गांड और टांगों को घूरता था, जब वो घर में घूमती थी। उसको भी संकेत मिल गया था। वो बस मुस्कुराती देती थी और अपना काम करती रहती थी। उसकी मुस्कान ने मेरा हौंसला बढ़ा दिया।
अब शाम को जब वो आती थी, मैं नहाने लगा, और जान-बूझ के बाथरूम का दरवाजा थोड़ा खुला छोड़ता था, जब वो किचन में काम कर रही होती थी। फिर मैं सिर्फ तौलिये में बाथरूम से बाहर आता था, और वो मेरे शरीर को घूरती थी।
फिर मैं रसोई में उसके पास जाता था, और उसके साथ काम कराने लगता था। मेरा काम मूल रूप से उसको टच करने पर ध्यान देना था। किचन बड़ा नहीं था, तो कभी-कभी मेरा लंड उसकी गांड को टच हो जाता था, और फिर बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता था। वीणा मेरी मंशा समझ के अपना पल्लू नीचे रखने लगी, और मुझे उसके सुडौल स्तन दिखने लगे। एक बार में ही इरेक्शन हो जाता था। ये कुछ दिन तक चलता रहा, फिर मैंने सोचा अब आगे बढ़ना है।
एक शाम मैं उसका इंतज़ार कर रहा था। जैसे ही वो आई, मैंने बोला, “आज खाना नहीं बनाना, मैं होटल से लाया हूं। हम दोनों खा लेंगे।” उसने पूछा, “तो क्या मैं जाऊं?” मैंने बोला, “नहीं, कॉलेज में फील्ड पे खेलते वक्त मांसपेशियों में दर्द हो गई है। अगर तुम मसाज देदो तो बहुत अच्छा होगा।”
वो जल्दी सहमत हो गई, और किचन में तेल गरम करने गई। तब तक मैंने कपड़े उतारे और सिर्फ लुंगी पहन ली, बिना अंडरवियर के। वीणा जल्दी आई, और मैंने बोला मेरी जांघों में खिंचाव है। मैं बिस्तर पर पीठ के बल लेट गया। उसने समझ लिया क्या होने वाला था, लेकिन वो मासूम बन के रही।
उसने मालिश शुरू की, पहले मेरे पैर की उंगलियों से, फिर धीरे-धीरे ऊपर बढ़ी और भीतरी जांघों पर मालिश करने लगी। उसके टच से मेरे लंड में जान आने लगी, और थोड़ी देर में वो फुल हार्ड हो गया और लुंगी में टेंट बन गया। वीणा ने टेंट देखा, लेकिन कुछ नहीं हुआ जैसे एक्ट करती रही और मसाज करती रही।
कभी-कभी वो मेरा लंड ब्रश कर देती थी। फिर मैंने आगे बढ़ने के लिए बोला, “फुटबॉल खेलते समय लंड पर भी चोट लगी थी, क्या उसको भी मसाज कर सकती हो?” उसने बिना समय बर्बाद किए मेरे लंड से खेलना शुरू कर दिया।
उसकी आँखों में वासना दिख रही थी जब उसने लुंगी हटाई और मेरा खड़ा लंड देखा। पहले उसने हाथ से मसाज किया, फिर चाटना शुरू कर दिया। मैंने धीरे से उसके ब्लाउज के ऊपर से स्तन मसाज करना शुरू किया। उसको मज़ा आने लगा और वो आहें भरने लगी। अब मुझे पता था वो मेरे कंट्रोल में थी।
मैंने उसके साथ थोड़ा खेलने का सोचा। मैंने धीरे से उसका ब्लाउज खोला। अन्दर लाल ब्रा दिखी। मुझे हमेशा लाल ब्रा का क्रेज था, और ये लड़की वहीं पहनी थी। उसके बड़े स्तन मेरे हाथो का इंतजार कर रहे थे। मैंने हुक खोला, और ब्रा हटा दी। सामने उसके रसीले स्तन।
मैंने थोड़ा गरम तेल लिया, और उसके स्तन पर डाल दिया। उसने एक तेज़ चीख मारी। फिर मैंने धीरे-धीरे उसके निपल्स और साइड से मसाज शुरू की। मुझे लगा उसके स्तन सूज गए थे, और वो उत्तेजित हो गई थी। मैं निपल्स को खड़ा कर रहा था, और फिर जीभ से उनका काम किया।
वीणा मजा लेके ऐंठने लगी, जब मैं निपल्स कुतर रहा था। दूसरे हाथ से मैं उसकी जांघों को सहलाने लगा। फिर उसकी जाँघें अलग किया, और गरम तेल उसके पेट पे डाला, जो नीचे जाँघों के बीच चला गया। वो मज़े में आहें भरने लगी। मैंने जांघों की मालिश की, और वो छटपटाई और कराहने लगी।
अब मैं उसकी चूत पर फोकस किया, और उंगलियों से उसकी गहराई की जांच करने लगा। वो सांप जैसा सिज़ल करने लगी। मैंने उसकी कमर पकड़ के टाइट पकड़ बनाई, और उसका क्लिटोरिस ढूंढा। मैंने अंगूठे से क्लिटोरिस के मोटे मांस को अनहुड करना शुरू किया। जब मैंने हुड पर प्रेशर से नीचे खींचा, तो वो मज़े में कराहने लगी।
फिर मैंने धीमी गति से गोलाकार गति से चूत को चारों ओर और ऊपर से थपथपाया। वो और बर्दाश्त नहीं कर पाई, “नहीं-नहीं प्लीज़-प्लीज़ उन्ह्न्न आह।” मैंने नीचे झुक के जीभ क्लिटोरिस पे लगायी। वीणा का चूत का दाना गुलाबी कली बन गया था, और मैं उसको चूसने लगा। उत्तेजना उसके लिए ज्यादा हो गया। जल्दी ही उसका पहला ऑर्गेज्म आया। मैंने तुरंत उसकी योनी चाटी और अंदर-बाहर तेज़ी से करने लगा।
ये 3 मिनट तक किया, और उसको दोबारा झड़वाया। उसने फिर कहा कि उसे टॉर्चर ना करुं। मैं खड़ा हुआ और उसको बिस्तर के किनारे पे लिटाया। फिर कमर से पकड़ के अपने बड़े वर्जिन लंड के पास खींचा। आह, अब आख़िरकार मैं एक औरत को चोदने वाला था। मैंने उसकी योनि को अपने बड़े लंड से छेड़ना शुरू किया।
वो कराह रही थी, और मेरी पकड़ से छूटने की कोशिश कर रही थी। लेकिन मैंने टाइट पकड़ा था। मैंने झुक के उसके दोनों स्तन पकड़े, और ज़ोर-ज़ोर से मसाज करने लगा। फ़िर कूल्हों के धीमी शक्तिशाली गति से अपना डिक उसकी चूत में जोर से मारा, “आह उन्न्न ऊ ऊऊउछ,” और अंदर घुस गया।
उसकी कराह से उत्तेजित होके मैं और गहराई तक गया, जब तक पूरा प्रवेश नहीं हो गया। मैंने उसकी जांघें पकड़ीं, थोड़ी हवा में उठाईं, और ज़ोर-ज़ोर से अंदर-बाहर करने लगा। साथ में मैं उसके स्तन मसाज करता रहा। वो पूरा परमानंद में थी। ये थोड़ी देर तक चलता रहा, जब तक हम दोनों थक नहीं गए।
उसकी जीभ मेरे सारे माल को चाटती रही। फिर हमने एक अच्छा सा नहा लिया, और वीणा ने बोला कि उसको घर जाना था। मैंने वीणा को थोड़ा कैश दिया। वीणा ख़ुश थी। अब वीणा मुझे बाथरूम में नंगा आके नहलाती थी, और आख़िर में हम दोनों सेक्स करते थे।
ये सब मेरी इंजीनियरिंग के अंत तक चलता रहा। फिर मैंने वो जगह छोड़ दी, और उसको बहुत सारा पैसा दिया। मैं वीणा को कभी नहीं भूलूंगा, क्योंकि अब मैं एक दूसरी जगह चला गया हूं। लेकिन उसकी प्यारी यादें मेरे साथ हैं। वीणा, मेरी सुन्दर नौकरानी।