मुकुल कुलश्रेष्ठ – आया जी आया लंड कूरियर से आया गया

भावना वापस जाने से पहले बता ही चुकी थी, कूरियर वाला इस लंड के प्रयोग करने का तरीका भी समझा कर जाएगा।

जब भी मुकुल इस बारे में सोचती उसकी चूत गीली हो जाती थी और गांड का छेद फड़कने लग जाता था।

तीन हफ्ते के लम्बे इंतज़ार के बाद आखिर कूरियर वाला पैकेट ले कर आया।

नीचे घंटी बजी और आवाज आयी “कूरियर है मैडम”।

“कूरियर है मैडम”, आवाज सुनते ही मुकुल की चूत ने एकदम पानी की पिचकारी छोड़ी। चलने में भी पता चल रहा था की पानी जांघों के गीला कर रहा थ। बस अब कूरियर वाला बढ़िया हो तो आज चूत और गांड दोनों की ईद हो जाएगी, और अगर कहीं कूरियर वाला आस पास का ही रहने वाला हुआ तो आगे का रास्ता भी खुल जाएगा।

मुकुल घर में साड़ी तो पहनती नहीं थी, वही ब्लाउज और पेटी कोट ही पहनती थी ।

चलते वक़्त पीछे मोटे चूतड़ भी ठुमक ठुमक करते थे और आगे ऊपर चूचियां भी।

मुकुल ने ऊपर दुपट्टा ओढ़ा और नीचे आंगन में झांक कर कहा,”आ जाओ भैया, ऊपर आ जाओ”।

पहली नजर में तो कूरियर वाला ठीक लगा था। लम्बा, पतला, हल्का सांवला रंग, सर पर कूरियर कम्पनी की कैप पहनी हुई थी – टांगों के साथ चिपकी जींस पहनी हुई थी, ऊपर टी शर्ट और कूरियर कम्पनी की जैकेट।

जैकेट के ऊपर नाम की प्लेट लगी हुई थी ।

कुल मिला कर मुकुल को मुम्बई वाला लग रहा था। लड़का ऊपर आ गया। पैकेट मुकुल के हाथ में दे कर बोला, “खोल कर देख लीजिये मैडम”।

मुकुल को तो पता ही थी क्या है। घर के पते पर तो कोइ कूरियर आता ही नहीं था। बनावटी हैरानी के साथ मुकुल ने बॉक्स को इधर उधर पलटा और ऊपर लिखे को पढ़ने का दिखावा करते हुए कूरियर वाले से पुछा, “क्या है इसमें”।

कूरियर वाला बोला “मैडम जो आपने मंगवाया है वही होगा। खोल कर देख लीजिये”।

मुकुल बॉक्स खोलने की कोशिश करने लगी। भावना जैसे तेज तो थी नहीं मुकुल। मजबूती के साथ बंद किया गत्ते का बॉक्स खुल नहीं रहा था।

कूरियर वाले लड़के ने कहा “लाईये मैडम मैं खोल देता हूं”। मुकुल ने लड़के की तरफ देखा, जैकेट पर नाम की प्लेट लगी हुई थी, गणेश नाइक – मतलब महाराष्ट्रियन ही था।

गणेश ने बॉक्स खोला और अंदर से प्लास्टिक का उत्तम क़्वालिटी का प्लास्टिक का एक और बॉक्स निकाल कर मुकुल के हाथ में पकड़ा दिया। “लीजिये मैडम अब खोल कर देखिये”।

मुकुल बड़े असमंजस में थी, शर्मा भी रही थी ।

मुंबई वाली देवरानी भावना होती तो अब तक लंड निकाल कर अपनी चूत में डाल भी चुकी होती।

मगर ये मुकुल तो हरियाणा के रोहतक की रहने वाली – केवल जुबान की ही तेज थी, वैसे सीधी ही थी।

गणेश ने ही प्लास्टिक का बॉक्स खोला और बड़ा सा रबड़ का लंड मुकुल के हाथ में पकड़ा दिया। मुकुल ने नजरें झुकाये ही देखा, बीच का हिस्सा तो असली लंड जैसा ही था, आठ इंच लम्बा और दो इंच मोटा। मगर उसके साथ कुछ और भी लगा हुआ था जो मुकुल को समझ नहीं आ रहा था।

गणेश बोला, “मैडम, बिलकुल नया मॉडल मंगवाया है आपने”।

मुकुल चुप रही।

गणेश बोला, “मैडम ऐसा कभी इस्तेमाल किया है” ?

अब मुकुल ने दबी आवाज़ में कहा, “मेरे पास तो ऐसा वैसा कोइ भी नहीं है”।

अरे ? गणेश हैरानी से बोला, “ये पहला है “?

मुकुल ने सर हिला कर हां कहा। गणेश बोला, “फिर तो आपको शुरू शुरू में दिक्क्त आएगी इसका सही इस्तेमाल करने में”।

“मैडम आप अगर कहें तो मैं समझा दूं कैसे इस्तेमाल करते हैं “?

मुकुल बोली तो कुछ नहीं मगर गणेश की तरफ देख कर धीरे से हां में सर हिला दिया।

“आईये”, गणेश ने मुकुल के कमर में हाथ डाला और कमरे के अंदर की तरफ ले चला। मुकुल भी खिंचती चली गयी। गणेश ने कहा “मैडम ये पैटीकोट उतारिये”।

मुकुल सकुचा रही थी। बाहर के लड़कों से चुदाई जरूर करवाती थी लेकिन चुदक्क्ङ और बेशरम भी नहीं थी।

मुकुल ने जब फिर भी मुकुल ने ब्लाउज और पेटी कोट को हाथ नहीं लगाया तो गणेश ही पेटी कोट का नाड़ा खोलने लगा। मुकुल ने मना भी भी नहीं किया। नाड़ा खुलते ही पेटी कोट नीचे सरक गया।

गणेश ने सोचा, क्या मजेदार चूतड़ हैं – फूले हुए। क्या चूत है – उभरी हुई। फिर गणेश ने मुकुल को घुमा कर पीठ से ब्लाउज के हुक भी निकाल दिए I

मुकुल अब बिलकुल नंगी थी। चूत गीली हुई पड़ी थी। गणेश ने चूत को हल्के से छुआ और बोला “मैडम ये तो तैयार है”।

“आईये मैं समझाता हूं ये लंड कैसे इस्तेमाल करते हैं”।

गणेश बोला, “मैडम बहुत मेंहगे वाला और बड़ा लंड मंगवाया है आपने” I

मुकुल ने दबे स्वर में कहा, “ये वाला कितने का है”?

गणेश बोला “अट्ठारह हजार का”। मुकुल हैरान हुई, “अट्ठारह हज़ार का” ?

गणेश मुकुल के चेहरे की तरफ देख कर बोला, “क्या मैडम क्या ये आप ने नहीं मंगवाया ? लगता है किसी ने गिफ्ट किया है”I

“वैसे मैडम आज कल ढाई इंच मोटे और नौं इंच लम्बे लंडों की ज्यादा डिमांड है। मगर वो बड़े लंड गांड के लिए नहीं हैं – वो खाली चूत चोदने के लिए ही हैं। पच्चीस तीस साल की औरतें ये ज्यादा मंगवा रही हैं”।

फिर गणेश ने मुकुल को बताना शुरू किया। “देखिये मैडम, ये इस लंड का मुख्य भाग है, बिलकुल मर्द के लंड जैसा। ये तो आप समझ ही गयी होंगी की इसको चूत में डालना है”।

ये जो लंड के अंतिम छोर से नीचे की तरफ लटक रहा है अंग्रेज़ी के C शब्द जैसा – जिसके सिरे पर नीम्बू के आकार का गोल गोल लगा हुआ है। इसको नीचे पीछे करके गांड में डालना है। और ये जो छोटा उंगली की तरह का उंगली के ही बराबर है ऊपर की तरफ, ये अपने आप आपकी चूत के दाने पर लग जाएगा और जैसे मर्द दाना चूसते हैं, वैसे आपका दाना चूसेगा”।

मुकुल सोच रही थी ये तो कमाल है। उसने गणेश की तरफ देखा I

गणेश ने फिर लंड के आख़री सिरे को ऊपर किया जो चपटा सा था, और बोला, “मैडम, इस ढक्क्न को खोल कर ये जो दो सैल हैं ये इसके अंदर डाल देने हैं”। गणेश ने सैल लंड के अंदर डाल दिए और बात जारी रखी, “और फिर मैडम, इस बटन को ऑन करते ही लंड अपना काम करना चालू कर देगा “।

गणेश ने जैसे ही बटन ऑन किया लंड के आगे का सिरा, C के आगे लगा हुआ निम्बू की तरह का गोल भाग और उंगली की तरह के भाग का अंतिम छोर हल्की घररररर की आवाज के साथ वाइब्रेट करने लगे।

रबड़ का लंड अपना काम करने के लिए तैयार था।

गणेश बोला “मैडम आपको लग कहा होगा की ये जरा मुश्किल है, मगर मैडम ऐसा नहीं है। मैं आपको इसे आपको पूरी तरह इस्तेमाल करके दिखाता हूं”।

मुकुल गणेश के तरफ देखने लगी, आखों में लंड की प्यास साफ़ झलक रही थी।

गणेश ने मुकुल को बताया। “मैडम इसे आप कैसे भी इस्तेमाल कर सकती हैं। जितने भी तरीकों से आप चूत या गांड चुदवाती हैं, उतने ही तरीकों से आप इस लंड को चूत में या गांड में ले कर मजे ले सकती हैं”।

“मैं अब बताता हूं की इस लंड का कौन सा भाग कहां डालना है और कैसे” ।

गणेश ने पूछा, “कैसे चुदवानी है मैडम इस लंड से” ?

मुकुल का तो जैसे दिमाग ही काम नहीं कर रहा था वो बैठी ही रही।

गणेश बोला “चलिए मैं ही बताता हूं। वैसे तो, जैसा की मैंने बताया आप इसको कैसे भी इस्तेमाल कर सकती हैं, पर शुरू करने के लिए सब से आसान है आप बेड पर घुटनों और कुहनियों के बल उलटा लेट जाईये, जैसे पीछे से चूत चुदवाने चुदवाने के वक़्त करती हैं”।

मुकुल लेटने के लिए उठी की गणेश बोला “मैडम कोइ क्रीम भी ले आईये, ये नीम्बू जैसा गोल हिस्सा गांड में डाला जाता है”।

मुकुल उठी और साहिल वाली जैल ले आयी।

गणेश ने जैल की टीयूब पकड़ी और सोचा, “तो ये मैडम गांड भी चुदवाती है”।

मुकुल उकडू हो कर उलटा लेट गयी। चूत तो गीली ही थी। गणेश ने रबड़ का लंड चूत में जड़ तक बिठा दिया।

मुकुल ने एक सिसकारी ली आआआआह। फिर गणेश ने गांड के छेद पर जैल लगाए कर गोल हिस्सा गांड में धकेल दिया और बोला, “मैडम आप पहले लंड को चूत में डालें या इस गोल हिस्से को गांड में डाले ये आपकी मर्ज़ी है, जैसे भी आपको अच्छा और आसान लगे”। अब लंड का उंगली जैसा हिस्सा मुकुल के चूत के दाने के बिलकुल ऊपर था।

गणेश बोला, “लीजिये मैडम पूरी तैयारी हो गई है। एक हाथ पीछे करिये मैं बता दूं इसको चालू कैसे करते हैं और आपको बटन कहां है ये भी पता लग जाएगा”।

मुकुल ने एक हाथ नीचे से अपनी चूत से पीछे निकल लिया। गणेश एक उभरे गोल मुलायम बटन पर मुकुल की उंगली रखी।

गणेश ने समझाया मैडम इसको एक बार दबाओ तो वाईब्रेटर चालू हो जाता है और दुबारा दबाओ तो बंद हो जाता है।

चलिए मैडम दबाईय और चुदाई का मजा लीजिये।

मुकुल ने बटन दबाया और घरररररर के आवाज के साथ वाईब्रेटर के साथ लंड चालू हो गया।

लंड का हिस्सा जो चूत के अंदर था हल्का आगे पीछे होने लगा, मगर बड़ी तेजी के साथ I

गोल निम्बू जैसा हिस्सा जो गांड के अंदर था वो कम्पन करने लग। उंगली जैसा हिस्सा जो चूत के दाने ऊपर था वो थोड़ा सा खाली सा था जिसमें चूत का दाना फिट सा हो गया था। इस उंगली जैसे भाग का अगला हिंसा खुलने बंद होने लगा जैसे मर्द के होंठ चूत के दाने को चूसते हैं।

दो मिनट भी नहीं हुए होंगे की मुकुल को मजा आने लगा “आअह अअअअअह आआह आअह ये तो बहुत बढ़िया मजा देता है आआह आआह आआह”।

मुकुल जोर जोर से चूतड़ हिला रही थी। इस लंड के साथ तो मजे के लिए कुछ भी करने की जरूरत नहीं थी। न गांड में उंगली करने की। ना चूत के दाने को रगड़ने की। लंड पहले से ही चूत में था

मुकुल के सिसकारियां बढ़ गयी थी “ह्म्म्मम्म हहमम हम्म्म ह्ह्हम्म्म हह”। मुकुल को मजा आने वाला थ।

मुकुल के मुंह से एक सिसकारी निकली “हहह्म्म हहहम ह्ह्हह्हं” और वो झड़ गयी।

मुकुल को मजा आ चुका था। अब वो लंड का कम्पन बंद करना चाहती थी।

नीचे चूत की तरफ से हाथ डाल कर लंड का स्विच ढूढ़ रही थी जो मिल नहीं रहा था।

मुकुल जल्दी में बोली, “गणेश इसका स्विच नहीं मिल रहा, बंद करो इसको, नहीं तो मेरी चूत दुबारा गर्म हो जायगी”।

गणेश सोफे बैठा हुआ मुकुल को चूतड़ हिलाते और लंड का मजा लेते देख रहा था। उसने अपना लंड हाथ में लिया हुआ था और वो मस्ती में मुट्ठ मार रहा था।

गणेश उठा और मुकुल के पीछे चला गया।

मुकुल नीचे चूत से हाथ निकल कर अभी भी स्विच ही ढूंढ रही थी।

गणेश ने मुकुल की उंगली स्विच पर रक्खी और बोला “अब दबाईये”।

मुकुल ने स्विच दबाया और लंड औरऔर उसकी बाकी हिस्से वाइब्रेट करने बंद हो गए। मुकुल खुद से ही बोली, “हे भगवान, कितना मजा देता है ये”। कुछ मिनट ऐसे ही उलटा लेटने क बाद मुकुल ने पहले लंड अपनी चूत में से बाहर निकला और फिर नीम्बू जैसा गोल हिस्सा गांड में से निकाला और उठ कर सोफे पर बैठ गयी।

मुकुल गणेश से बोली, “गणेश कमाल की चीज़ है ये तो”।

“मैडम अठारह हजार भी तो देखिये। वैसे पचीस हजार तक की कीमत वाले भी हैं। गणेश बोला तो मैडम आप समझ गयीं इसको कैसे चलाना है ? शरू शुरू में कुछ दिक्क्त आएगी फिर स्विच वगैरह भी ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अपने आप हाथ वहीं पहुंच जाया करेगा”।

“तो मैडम चलूं मैं दो जगह और डिलीवरी देनी है”। मुकुल बोली “ऐसे ही हैं क्या”?

“नहीं मैडम वो हल्के वाला है चार हजार वाला। खाली लंड है। दूसरी तो किसी ने फुद्दी मंगवाई है चोदने के लिए”।

मुकुल चिल्लाई, “फुद्दी” ?

गणेश बोला “मैडम फुद्दी क्या गांड का छेद भी आता है। खाली गांड का छेद चाहिए या पूरे चूतड़। मुहं का छेद, वैसे ही होंठ जैसे असली के होती हैं। चूचियां – सब कुछ आता है चोदने के लिए”।

मुकुल केवल इतना ही बोली “कमाल है “!!

गणेश जाने के लिए खड़ा हुआ I

मुकुल बोली “थोड़ा रुक जाओ गणेश असली चुदाई का मजा नहीं लोगे “?

मुकुल ने अपनी गीली चूत पर हाथ फेरते हुए कहा “अब चोद कर ही जाओ गणेश इसे”।

गणेश बैठ गया और लंड हाथ में ले लिया।

गणेश बोला, “मैडम लंड चूसो थोड़ा, खड़ा करो”I

गणेश मुकुल के सामने खड़ा हो गया।

मुकुल ने गणेश का लंड चूस चूस कर खड़ा कर दिया – आठ इंच का था।

मुकुल बोली, “गणेश तुम्हारा लंड तो खासा लम्बा है, बोलो क्या चोदना है चूत या गांड”?

मुकुल उठी, तभी गणेश बोला, “मैडम आपके चूतड़ बड़े सेक्सी हैं, चूसने का मन कर रहा है “।

मुकुल बोली, “ऐसा है ? तो आओ फिर, चूसो मेरे चूतड़”I

मुकुल गांड चुदवाने वाले पोज़िशन में गांड पीछे करके लेट गयी और चूतड़ खोल दिए। गांड का छेद गणेश के सामने था। गणेश छेद चाटने लगा। दस मिनट छेद चाटने के बाद गणेश बोला, “चलिए मैडम लेटिए “।

मुकुल बोली, “गणेश गांड ही चोद दे। अगली चुदाई चूत की कर लेंगे। अभी गांड चुदवाने का मन हो गया है “।

गणेश ने कहा, “ठीक है मैडम, गणेश ने मुकुल की चूत मे से अपनी उंगलियों से चिकनाहट वाला पानी निकला और गांड के छेद पर लगाया। थोड़ा अपना थूक छेद पर दाल कर छेद को चिकना किया और आठ इंच का लंड अंदर तक धकेल दिया। मुकुल दर्द से कसमसाई और आगे की तरफ जाने लगी।

मगर गणेश ने मुकुल के चूतड़ कस कर पकड़ लिए और जरा सा भी नहीं हिलने दिया और चुदाई चालू कर दी।

आधे घंटे की चुदाई में मुकुल एक बार चूत में पानी छोड़ चुकी थी। अब गणेश के तगड़े धक्कों ने उसे एक बार और छुड़ा दिया। मगर इस बार आअह की ऊंची आवाज के साथ गणेश भी मुकुल की गांड में पानी छोड़ गया।

आधा घंटा आराम करने के बाद मुकुल गणेश का लंड फिर चूसने लगी। लंड फिर तन गया।

इस बार मुकुल ने वैसे ही चुदवाया जैसे गणेश ने कहा था। सीधा लेट कर। नीचे तकिया रख के चूत उठा कर।

गणेश ने जब पूरा लंड अंदर डाला तो मुकुल बोल उठी, “गणेश मजा आ गया। सच में ही कहीं अंदर किसी चीज़ को दबा रहा है। चोद गणेश चोद अब”।

मुकुल ने गणेश के होंठ अपने होठों में पकड़ लिए और चूसने लगी।

ये चुदाई मस्त थी। लम्बी चली इस चुदाई ने मुकुल को जन्नत दिखा दी। गणेश बोला, “झड़ने वाला हूं मैं “।

इतना सुनना था की मुकुल ने गणेश को कस कर पकड़ लिया और नीचे से जोर जोर से चूतड़ घुमाने लगी।

जल्दी ही गणेश झड़ गया। साथ ही मुकुल भी झड़ गयी।

थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहने के बाद गणेश ने ढीला हुआ लंड मुकुल की चूत में से निकाला और बाथ रूम की तरफ चला गया। वापस आकर कपड़े पहनते हुए बोला, “मैडम आप बहुत बढ़िया चुदवाती हो, मजा आ गया। मैं अपना नबर दे देता हूं जब मर्जी बुलाओ मुझे”।

कपड़े पहन कर जाने लगा तो बोला, “मैडम कभी पूरी रात का प्रोग्राम बनाओ मजा आ जाएगा चुदाई का “।

गणेश ने अपना नंबर मुकुल को दे दिया।

मुकुल बोली, “ठीक है गणेश। देखती हूं। और हां गणेश, कभी मौक़ा मिले तो वो दस इंच लम्बा और ढाई इंच मोटा वाला ले कर आना। ले कर तो देखें कैसा लगता है चूत में लेने पर – गांड में तो तुम बोल रहे हो उसे डालते नहीं हैं”।

गणेश बोला, “जरूर मैडम ” Iऔर गणेश चला गया।

मुकुल सोचने लगी, कहां तो खस्सी रामजी के कारण चुदाई को तरसती थी और कहां अब जनक, अशोक, साहिल और ये गणेश – चार चार चोदने वाले हैं। और हाथ में पकड़े रबड़ के लंड को देख मन ही मन बोली, “ये भी कौन सा कम है”।

“बस अब एक बार विपिन इस बार की छुट्टियों में आ जाए और चोद दे तो सारी कमी पूरी हो जायेगी”।
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