पिछला भाग पढ़े:- पापा की परी प्रीती-10
हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-
मैं भूपिंदर को चोद रहा था। मेरी बेटी प्रीती, पास ही बैठी भूपिंदर – अपनी मम्मी, की चूत का दाना रगड़ रही थी। तभी मुझे भी मजा आ गया और मेरे लंड ने गरम पिचकारी छोड़ी और मैंने कहा, “ले भूपिंदर ले, निकला तेरी फुद्दी में ले, और मैंने और भी जोर के धक्के लगाते हुए कहा, “ले भूपिंदर और ले।”
भूपिंदर की फुद्दी दो बार पानी छोड़ने के बाद बाहर तक गीली हुई पड़ी थी। मेरे लंड के टट्टे जब भूपिंदर की चूत से टकराते तो एक मस्त आवाज आती “पट्ट पट्ट पट्ट।”
मेरा और भूपिंदर दोनों का मजा पूरा हो गया था। भूपिंदर ढीली हो चुकी थी। प्रीती ने अपनी मम्मी भूपिंदर की फुद्दी में से उंगली निकल ली और झुक कर भूपिंदर के होंठ चूसने लगी। मैंने लंड भूपिंदर की फुद्दी में से बाहर निकाला और जा कर सोफे पर बैठे गया।
भूपिंदर ने प्रीती के सर पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। तभी प्रीती उठी और अपनी फुद्दी भूपिंदर की फुद्दी पर रख कर झुकी और फिर से भूपिंदर के होंठ अपने होठों में ले लिए।
तभी प्रीती ने कमाल कर दिया। प्रीती ने भूपिंदर की टांगें थोड़ी और ऊपर उठाई और अपनी फुद्दी अपनी मम्मी भूपिंदर की फुद्दी पर लगा कर फुद्दी के साथ फुद्दी रगड़ने लगी।
प्रीति अपनी फुद्दी भूपिंदर की फुद्दी पर ऐसे रगड़ रही थी जैसे दो लेस्बियन – समलैंगिक लड़कियां ये सब करती हैं। भूपिंदर के मुंह से उन्हह उन्हह की आवाजें निकलने लगी। भूपिंदर ने प्रीती के सर से हाथ हटाया और प्रीती को बाहों में लेकर अपने चूतड़ हिला हिला कर अपने फुद्दी प्रीती की फुद्दी के साथ रगड़ने लगी।
प्रीती की इस हरकत से तो मैं हैरान ही हो गया। प्रीति एक पक्की लेस्बियम की तरह अपनी फुद्दी भूपिंदर की फुद्दी पर रगड़ रही थी। क्या प्रीती अपनी मामी भूपिंदर की चूत का पानी एक बार और छुड़ा देगी?
कमाल तो ये था कि भूपिंदर भी प्रीती को हटा नहीं रही थी। भूपिंदर भी एक लेस्बियन की तरह अपने चूतड़ हिला-हिला कर प्रीती की फुद्दी के साथ फुद्दी की रगड़ाई का साथ दे रही थी। प्रीती का तो मुझे पता नहीं, हो सकता है वो ये अब अपनी सहेलियों के साथ ऐसा करती हो। मगर भूपिंदर? भूपिंदर का प्रीती का फुद्दी के साथ फुद्दी रगड़ने में इस तरह साथ देना मेरे लिए ये बिल्कुल नई बात थी।
प्रीती का ये फुद्दी पर फुद्दी रगड़ने का खेल चलते पंद्रह मिनट तो हो ही गए थे। भूपिंदर ने प्रीती को कस कर पकड़ा हुया था और जोर-जोर से चूतड़ हिला घुमा रही थी। प्रीती ने भूपिंदर के होठों से अपने होंठ हटा लिए और जोर-जोर से फुद्दी रगड़ते हुई “आह मम्मी आह मम्मी मेरा मजा निकलने वाला है” बोलने लगी।
तभी भूपिंदर फिर एक बार जोर से बोली, “प्रीती बेटा ये क्या हुआ, फिर निकल गया मेरा और साथ ही प्रीती के मुंह से भी एक सिसकारी निकली आह मम्मी”, और दोनों मां बेटी ढीली हो गयी।
ये अजीब नजारा देख कर मेरा लंड फुंफकारे मार रहा था। प्रीती उठी और मेरे पास आ कर खड़ी हो गयी। तभी भूपिंदर भी उठी और उठ कर मेरे पास बैठ गयी।
मेरी और प्रीती के तरफ देखते हुए भूपिंदर बोली, “ये आज क्या किया आज तुम दोनों ने। इतना मजा?”
उधर मेरा दिमाग काम ही नहीं कर रहा था। मेरा लंड फटने को था और नंगी सेक्सी मेरी बेटी मेरी सामने खड़ी थी। मैं उठा और प्रीती को बेड के तरफ ले जा कर प्रीती को बेड पर लिटा दिया। आनन-फानन में मैंने एक तकिया प्रीती के चूतड़ों के नीचे रखा और बिना एक पर भी गंवाए लंड प्रीती की फुद्दी में डाला और कस कर प्रीती को पकड़ कर चुदाई शुरू कर दी।
जवान प्रीती की टाइट फुद्दी को चोदने का मजा भी बहुत आ रहा था। जल्दी ही प्रीती मस्ती में आ गयी और अपने चूतड़ घुमाने हिलाने लगी। जिस तरह प्रीती चुदाई करवाते हुए चूतड़ ऊपर नीचे करती थी उससे लंड पर मस्त रगड़े लगते थे। मेरी आंखों के सामने बिशनी की चुदाई घूम गयी, जब बिशनी को तीन बार मजा आया था और अंत में मेरे लंड का पानी बिशनी की गांड में निकला था।
मैंने प्रीती को उसी तरह चोदना शुरू कर दिया जैसे मैंने बिशनी को चोदा था – कस कर पकड़ कर – जोर-जोर से, दबा-दबा कर। प्रीती ने भी अपनी टांगें मेरी कमर के पीछे कर दी और मस्त चूतड़ घुमाने लगी। तभी प्रीती ने जोर से चूतड़ घुमाये और एक सिसकारी ली, “आअह पापा निकला मेरी फुद्दी का पानी, मजा आ गया पापा, मजा आ गया आज तो।”
मैंने प्रीति की फुद्दी चोदनी बंद नहीं की – बिशनी की भी बंद चुदाई ऐसे ही बंद नहीं की थी। भूपिंदर के सामने प्रीती को चोदने का अजीब सा ही मजा आ रहा थ। जरा सा सर घुमा कर मैंने भूपिंदर की तरफ देखा। भूपिंदर अपनी चूत में उंगली कर रही थी।
प्रीती को एक मजा आ चुका था मगर प्रीती ने ना तो मेरी कमर से टांगें ही हटाई और ना ही मुझे चुदाई बस करने के लिए बोला। जवान प्रीती में चुदाई करवाने का अच्छा खासा दम-ख़म था। लग ही नहीं रहा था कि इतनी चुदाई के बाद भी प्रीती थकी हुई थी।
मेरे लंड के धक्के प्रीती की चूत में बदस्तूर चालू थे। जल्दी ही प्रीती को एक मजा और आ गया मगर मैं नहीं रुका। ऐसी टाइट फुद्दी की चुदाई करने का बहुत मजा आ रहा था। बिशनी भी जवान थी मगर बिशनी की फुद्दी भी इतनी टाइट नहीं थी जितनी प्रीती की थी।
भूपिंदर सोफे से उठ कर बेड पर आ गई और चुदाई करवा रही प्रीति के सर पर हाथ फेरने लगी। प्रीति ने जरा सी आंखें खोली और बड़ी ही धीमी आवाज में बोली, “मम्मी बड़ा मजा आ रहा है चुदाई का। बड़े ही रगड़े लग रहे हैं फुद्दी में, बड़ा ही मस्त लंड है पापा का।”
चुदाई चलती रही। भूपिंदर प्रीती के सर पर हाथ फेरती रही। तभी प्रीती को तीसरा मजा आने लगा और प्रीती बोली, “मम्मी ये देखो मुझे फिर मजा आ गया। आह पापा लगाओ तीन-चार जोर के, फाड़ो आज मेरी फुद्दी। आह मम्मी, आह पापा और जैसे ही प्रीती ने जोर के चूतड़ घुमाए मेरे लंड से भी गरम मलाई निकली और प्रीती की फुद्दी में जाने लगी।”
मेरे मुंह से भी निकला, “ले प्रीती मेरी जान ले निकला तेरी फुद्दी मैं। जकड़ ले बेटा मेरा लंड निचोड़ ले सारा पानी इसका आह प्रीती मजा ही आ गया आज तो। भूपिंदर आज की चुदाई तो बड़ी ही मस्त है। क्या मस्त फुद्दी वाली बेटी पैदा की है तूने, मस्त चुदाई करवाती है ये।”
मुझे खुद ही पता नहीं था कि मजे की मस्ती में मैं क्या बोल रहा हूं। भूपिंदर ने मेरे चूतड़ों पर हाथ फेरा – बड़े ही प्यार से और बोली, “अवतार तुम्हारे जैसे इतने बड़े लंड और ऐसी बढ़िया चुदाई करने वाला तुम जैसा हस्बैंड, तुम जैसा चोदने वाला पापा भला किसको मिलेगा?”
लंड की मलाई निकलने के बाद मेरा लंड ढीला होने लगा था। मैं पल्टा और पल्प की आवाज़ के साथ लंड प्रीती की फुद्दी में से निकाल कर प्रीती के पास ही लेट गया।
प्रीती की आंखें अभी भी बंद ही थी। लगता था अभी भी मजा आ रहा था प्रीती को। भूपिंदर ने प्रीति के सर पर हाथ फेरते हुए प्रीती के होंठ अपने होठों में लिए और चूसने लगी। प्रीती ने भी भूपिंदर के सर को अपने मुंह पर दबा दिया।
तभी कुछ ऐसा हुआ जो अजीब था। तकिया अभी भी प्रीती के चूतड़ों के नीचे ही था। भूपिंदर ने एक पल्टी ली और प्रीती के ऊपर आ गयी। प्रीती की टांगें तो अभी भी फ़ैली ही हुई थी। अब भूपिंदर लड़कों की तरह प्रीती के ऊपर थी। भूपिंदर की फुद्दी प्रीती की फुद्दी के ऊपर थी। अब फुद्दी पर फुद्दी रगड़ने की धक्के लगाने की बारी भूपिंदर की थी। मेरे लंड का पानी भूपिंदर की फुद्दी से बाहर तक आ रहा था और अब प्रीती की फुद्दी से भी सफ़ेद पानी रिस रहा था।
दोनों मां बेटी की फुद्दियां चुदाई के बाद बाहर तक गीली और चिकनी हुई पड़ी थी। अब तक ना तो उन्होंने पेशाब ही नहीं किया था और ना ही फुद्दियों की धुलाई ही की थी।
मैं उठ कर सोफे पर बैठे गया सोफे पर बैठा सोच रहा था कि आज मां बेटी की चुदाई का पहला दिन है और ये हाल है – आगे आगे क्या होगा, ऊपर वाला ही जानता है।
मैंने व्हिस्की का गिलास हाथ में ले लिया और मां बेटी की लेस्बियन वाली चुदाई के मजे लेने लगा। मां बेटी का ऐसा सेक्सी सीन देख कर भी मेरा लंड हरकत नहीं कर रहा था। अब मेरे लंड को खड़ा होने के लिए कम से कम बारह घंटे का टाइम, बढ़िया मीट और बढ़िया शराब चाहिए थी।
जो भी था, मैं सोफे पर बैठा दारू के घूंट भर रहा था। भूपिंदर और प्रीती – मां और बेटी – की फुद्दी के ऊपर फुद्दी के रगड़ाई का ये सीन भी मस्त था। दुनिया से बेखबर दोनों मां बेटी इस फुद्दी से फुद्दी की चुदाई का मजा ले रही थी।
जल्दी ही दोनों के मुंह से सिसकारियां निकलने लगी – “आह मम्मी, आह प्रीती।” दोनों मां बेटी ने एक-दूसरे को जकड़ा हुआ था और दोनों एक-दूसरे के ऊपर-नीचे चूतड़ घुमा रही थी।
तभी भूपिंदर ने एक सिसकारी ली, “प्रीती बेटा निकल गया मेरा।”
नीचे से प्रीती का भी लग रहा था मजा अटका ही हुआ है। प्रीति बोली, “मम्मी थोड़ा और रुक जाओ, मझे भी आने ही वाला है।
अभी भूपिंदर ने चार पांच ही धक्के लगाए होंगे और तभी प्रीती बोल पड़ी, लो मम्मी आ ही गया – निकल गया मेरा भी। ओह भगवान इतना मजा? ऐसी चुदाई? क्या मस्त लंड है पापा का। क्या मस्त चोदते हैं पापा। आज की चुदाई? मम्मी चुदाई का इतना मजा तो मझे सुखचैन से चुदाई करवाने में भी कभी नहीं आया।”
उस दिन की चुदाई खत्म हो चुकी थी। अब पेट पूजा का टाइम था। सब लोग – मतलब हम तीनों उठे। बाथरूम गए। दोनों ने अपनी फुद्दीयां साफ़ की, ढीले वाले कपड़े पहन लिए।
मैंने अपना लंड आगे-पीछे करके धोया और आधी बाजू का कुर्ता और ढीला पायजामा पहन कर डाइनिंग हॉल में आ गया। सब ने कपड़े पहन लिए थे, इसका मतलब था उस दिन के चुदाई की दौर खत्म हो चुका था।
चने की दाल और साथ में अंडा करी बनी थी। मैंने अपना गिलास भी साथ ही ले आया और डाइनिंग टेबल पर बैठ कर हल्के-हल्के घूंट भरने लगा। प्रीती और भूपिंदर ने सामान डाइनिंग टेबल पर रख दिया और सब लोग बैठ कर डिनर करने लगे।
डिनर खत्म करके हम तीनों लाऊंज में आ गए। हमारे गिलास हमारे हाथों में ही थे। सब चुप से बैठे थे। बात प्रीती ने ही शुरू की। प्रीती ने भूपिंदर से पूछा, “मम्मी, सच बताना, आज की चुदाई का मजा आया या नहीं?”
भूपिंदर ने जो जवाब दिया उससे हम सब की हंसी ही छूट गयी। भूपिंदर बोली, “मजा? प्रीती चार-चार बार तो मेरी चूत पानी छोड़ गयी और तू पूछ रही है मजा आया या नहीं?”
प्रीति ने हंसते हुए ही पूछा, “चलो मम्मी एक बात बताओ, आपने मेरे ऊपर लेट कर मेरी मस्त फुद्दी चोदी – ये आपने कहां से सीखा, क्या कालेज में?”
भूपिंदर भी मूड में आ चुकी थी। भूपिंदर बोली, “पहले तो तू बता, पहले तो तूने मेरी फुद्दी चोदी थी जब तेरे पापा मेरी चुदाई करके हटे थे। तूने ही पहले मेरी टांगें चौड़ी करके अपनी फुद्दी मेरी फुद्दी पर रगड़ी थी।”
प्रीती भी हंसते हुए बोली, “मम्मी हम तो कालेज में कई कुछ करती रही हैं। ये चंडीगढ़ है मम्मी चंडीगढ़, यहां कालेजों में क्या क्या होता है आपको भी तो पता ही होगा। आप भी तो कालेज की पढ़ी हुई हैं, वो भी चंडीगढ़ के कालेज की।”
भूपिंदर बोली, “हां गई हूं कालेज, मगर ये मैंने ये कहीं किसी कालेज में नहीं, यहीं सीखा है। पहली बार मैंने इसी घर में किया है, इसी कमरे में, इसी बिस्तर पर।”
अब हैरान होनी की बारी, मेरी और प्रीती की थी। हम दोनों पापा बेटी के मुंह से इकट्ठे आवाज निकली, “इसी घर में? इसी कमरे में? इसी बिस्तर पर? किसके साथ भूपिंदर – किसके साथ मम्मी?”
भूपिंदर हंसती बोली, “अरे सबर करो, बताती हूं।” फिर वैसे ही हंसते हुए बोली, “शकुंतला के साथ।”
हैरानी पर हैरानी। पहले “इसी घर, इसी कमरे में” फुद्दी के साथ फुद्दी की चुदाई और फिर वो भी शकुंतला के साथ?”
मेरी हैरानी खत्म ही नहीं ना हो रही थी। मैंने उसी हैरान के साथ पूछा, “शकुंतला? अपने जुगनू की मम्मी – कांता की सास?”
भूपिंदर उसी मस्ती में बोली, “हां अपने जुगनू की मम्मी शकुंतला, कांता की सास।”
प्रीती पूछा, “कमाल है। मगर मम्मी शकुंतला के साथ? ये सब कैसे शुरू हुआ?”
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