कहानी – पात्र परिचय:-
मैं – 23 साल की किरण बाला, 25 साल का कुलभूषण मेरा पति।
कुलभूषण के रिश्ते के मामा गोपाल, चैल (हिमाचल) के रहने वाले। उनकी पत्नी नाती। गोपाल मामा जी का चैल के मेन बाजार में कपड़ों का शोरूम है। बाकी के चार गोपाल मामा जी के दोस्त हैं।
अमर, अमर की पत्नी पुष्पा। इनका लिबर्टी शूज़ का शो रूम है।
हेमंत, हेमंत की पत्नी सीमा। इनकी बेकरी की बड़ी दूकान है। हेमंत का चैल से बाहर एक बड़ा होटल और रिसोर्ट है। उम्र मैन ये पति-पत्नी सब से बड़े हैं और सबसे अमीर भी।
सुनील, सुनील की पत्नी रेनू। इनका चैल मैं गर्म कपड़ों, ऊनी कपड़ों का शोरूम है।
केशव, केशव की पत्नी कैलाश। केशव की कैमिस्ट शॉप है।
सभी के शोरूम और दुकानें चैल के मेन बाजार में हैं। अब आगे बढ़ते हैं कहानी की तरफ। तो पाठको, मेरी ये नई कहानी अपने आप में बड़ी ही अनूठी है।
“मैं हूं 23 साल की किरण बाला – फरीदकोट पंजाब की रहने वाली। मैं B.A. कर चुकी हूं और अब पत्राचार – कॉरेस्पोंडेंस से MBA कर रही हूं। मेरी शादी हुई है 25 साल के कुलभूषण से जो अमृतसर का रहने वाला है। कुलभूषण के पिता मेहर चंद की पुराने अमृतसर शहर में एक तंग गली में – जिन्हें उत्तर भारत में कटरे भी कहा जाता है – कपड़ों की थोक की दूकान है। लेकिन ये काम कुलभूषण को पसंद नहीं।”
“वैसे कुलभूषण का परिवार पुश्तैनी अमीर हैं। अमृतसर के बाहर मजीठा रोड के पास कुलभूषण के पिता मेहर चंद का बहुत बड़ा फार्म हुआ करता था। जब मजीठा रोड पर रिहाइशी कालोनी बननी शुरू हुई तो मेहर चंद ने भी इस फार्म में प्लाट काटे और बेच कर बहुत पैसा बनाया। जब कुलभूषण ने अपने पापा को कहा कि वो अमृतसर के कटरों में काम नहीं करना चाहता तो उसके पिता ने भी उस पर ज्यादा दबाव नहीं डाला। उन्हें मालूम था कि आज कल की नई पीढ़ी इस तरह के काम पसंद नहीं कर रही।”
“कुलभूषण पढ़ाई में तेज था लिहाजा तो उसने चंडीगढ़ से इंजीनियरिंग की डिग्री कर ली और अब लुधियाना में एक बड़ी फैक्ट्री में इंजीनियर है। अच्छी तनख्वाह है – सब मिला कर दो लाख महावार। फैक्ट्री विदेशों में ऑटोमोबाइल पार्ट्स निर्यात करती है। फैक्ट्री में कोई 300 के आस-पास कामगर हैं।”
“जब कुलभूषण लुधियाना में सेट हो गया तो उसके पापा ने उसके नाम से लुधियाना में बन रही एक सोसाइटी में पांच कमरों का एक बड़ा फ्लैट बुक कर दिया।”
“कुलभूषण को फक्ट्री में शिफ्टों में जाना पड़ता है – सुबह नौं से शाम छह और शाम छह से रात दो बजे तक। लेकिन मुझे इसमें कोई समस्या नहीं। रात की पारी में कुलभूषण मुझे दिन में चोद देता है और दिन की पारी में तो आधी-आधी रात तक हमारी चुदाई चलती ही है।”
“कुलभूषण का लंड मस्त है, डेढ़ पौने दो इंच मोटा और छह इंच लम्बा – इतना ही चाहिए होता है लड़की को मस्त फुद्दी का मजा लेने के लिए।”
“मेरी और कुलभूषण की चुदाई तकरीबन रोज़ ही होती है। एक बार की चुदाई में दो-दो बार मेरी फुद्दी का पानी छुड़ा देता है कुलभूषण। और मुझे क्या चाहिए। माहवारी के दिनों में अगर कभी कुलभूषण का लंड का लंड खड़ा हो जाए तो मैं कुलभूषण का लंड मुंह में लेकर, चूस-चूस कर उसके लंड का पानी निकाल देती हूं।”
“मुझे भी इसमें बड़ा मजा आता है।”
“अब आपसे क्या छुपाना – सच कहूं तो लंड चूसने में मुझे बड़ा मजा आता है। लंड से निकली गरम गाढ़ी मलाई चाटने का भी अपना ही मजा है। सभी लड़कियों को ये करना चाहिए।”
“कुलभूषण के रिश्ते के एक मामा हैं गोपाल वर्मा – सगे मामा नहीं हैं। गोपाल वर्मा हिमाचल प्रदेश के चैल शहर के रहने वाले।”
“ये वही चैल है जो महाराज पटियाला भूपिंदर सिंह जी ने बसाया था। चैल में महाराजा पटियाला का एक शानदार महल है। दुनिया का सब से ज्यादा ऊंचाई पर बना हुआ क्रिकेट ग्राउंड भी चैल में ही है।”
“चैल की भी अपनी ही विशेषताएं हैं जिनके कारण चैल आज एक आकर्षक पर्यटन स्थल है। चैल शिमला से कोइ 53 किलोमीटर दूर पर बसा हुआ बहुत ही खूबसूरत छोटा सा शहर है जिसकी आबादी होगी कोइ पंद्रह बीस हज़ार या इससे कुछ ज़्यादा।”
“चैल जाने के लिए हिमाचल के ही एक और छोटे शहर कंडाघाट से एक अलग सड़क जाती है। इस सड़क पर जाते हुई आस पास के नजारे मस्त करने वाले होते हैं। ज़िंदगी में हर किसी को एक बार चैल जाना ही चाहिए।”
“यहां में ये बता दूं कि कुलभूषण के मामा जी के दादा तुलसी दास वर्मा ने अपने जमाने में चैल में बहुत सारी जायदाद बना ली, जिसकी कीमत अब कई सौ करोड़ आंकी जाती है।”
“अब गोपाल मामा जी के दादा तुलसी दास तो अब जीवित नहीं हैं मगर उनके बेटे काहन चंद – गोपाल मामा जी के पिता जी को चैल के मकानों और दुकानों से अच्छा खासा किराया आता है और उनकी जिंदगी आराम से चल रही है।”
“गोपाल मामा जी की उम्र और कुलभूषण की उम्र में ज्यादा फर्क नहीं है। कुलभूषण 25 का है और गोपाल मामा जी 29 – 30 के हैं।”
“गोपाल मामा जी पढ़े लिखे हैं, स्मार्ट हैं हंसमुख हैं और बहुत ही मजाकिया स्वभाव के हैं, हर तरह के मजाक करते हैं। हर किसी से मजाक करने की उनकी आदत है – चाहे औरत हो चाहे मर्द हो।”
“जब मामा जी हमारे यहां लुधियाना आते हैं तो मामा जी कुलभूषण से तो मजाक करते ही हैं, मुझसे भी मजाक करते रहते है। लेकिन मुझे इसमें कोइ बुराई नहीं लगती। कुछ लोगों का स्वभाव ही मजाकिया होता है।”
“कुलभूषण ने एक बार मुझे बताया था कि मामा जी आशिक़ मिजाज भी हैं। अपनी इस छोटी उम्र में ही मामा जी बहुत गुल खिला चुके हैं। सच पूछो तो मामा जी लम्पट किस्म के इंसान हैं – अगर सीधी सादी भाषा में बोला जाए तो लंगोट के कच्चे हैं।”
“कुलभूषण ने ही मुझे बताया था कि लड़की फंसाना और फंसा कर चोदना मामा जी की हॉबी – शौक है। और तो और लड़की फंसाना उनके बायें हाथ का खेल भी है, या फिर उनमें कुछ ऐसा है कि लड़की उनके साथ फंस भी जल्दी जाती है, और फिर एक बार फंस गयी तो उनके पास से जल्दी जाती भी नहीं।”
“कुलभूषण ने मुझे ये भी बताया था कि मामा जी ने बीस के उम्र में ही एक अट्ठारह साल की लड़की शैली को फंसा कर चोद दिया और इस चुदाई से शैली प्रग्नेंट हो गयी, और उसके बेटा भी पैदा हो गया जिसे शैली के माता-पिता ने अपने पास रख लिया। शैली पढ़ाई में तेज थी लिहाजा B.A. करके B.ed. कर ली और अब हिमाचल में सरकारी स्कूल में टीचर है।”
“बाद में गोपाल मामा जी ने शैली से शादी कर ली, मगर मामा जी शैली के साथ नहीं रहते – दो तीन महीने में एक बार शैली को चोदने जरूर चले जाते हैं।”
“जब मामा जी तेईस के हुए तो उन्होंने एक और लड़की पटा ली – अपने से चार साल छोटी उन्नीस साल की नाती डोगरा, जम्मू की रहने वाली – उसे भी मामा जी ने शादी से पहले ही खूब चोदा, शुक्र है कि वो प्रग्नेंट नहीं हुई।”
“मगर इस बार गोपाल मामा जी के पापा काहन चंद जी ने इतना बवाल मचाया कि गोपाल मामा जी को नाती डोगरा से शादी करनी पड़ी। लेकिन गोपाल मामा जी की इन आदतों का नतीजा ये हुआ कि गुस्से में काहन चंद जी ने गोपाल मामा जी को घर से निकाल दिया। इतना हुआ कि गोपाल मामा जी के पापा ने गोपाल मामा जी को अपनी जायदाद से बेदखल नहीं किया।”
“माना कि गोपाल मामा जी लम्पट थे, उनकी आदतें खराब थी, मगर थे तो अपने पिता काहन चंद के बेटे ही।”
“जब कुलभूषण के मामा – गोपाल मामा जी को उनके पापा ने घर से निकाला तो उन्हें चैल में ही एक दोमंजिला मकान और चैल के मेन बाजार एक दूकान दे दी।”
“दुकान तीन मंजिला है। नीचे बड़ा सा शोरूम है और ऊपर की दो मंजिलों में मामा जी की रिहाइश है।”
“इस तीन मंजिला दूकान में नीचे की मंजिल में पहले लकड़ी के सामान की दुकान हुआ करती थी। गोपाल मामा जी को लकड़ी के सामान की दुकान में मजा सा नहीं आया सो उन्होंने इसमें अपने गारमेंट का बड़ा सा शोरूम खोल लिया। चैल के आबादी बढ़ने के साथ-साथ मामा जी का काम भी बढ़ने लगा और मामा जी कि दुकान खूब चलने लगी। अब दुकान में आठ लोग काम करते हैं।”
“चैल के पूरे मेन बाजार में इसी तरह की तीन मंजिला इमारतें हैं। लोगों ने ऊपर की दो मज़िलों में ऑफिस वगैरह खोल लिए हैं और नीचे की मंजिल में शोरूम्स हैं। मगर मामा जी को ऊपर की मंजिल में रहना ज्यादा अच्छा लगता है।”
“मामा जी दुकान के लिए रेडीमेड कपड़े लुधियाना से लाते हैं। इसी सिलसिले में जब भी मामा जी लुधियाना आते हैं तो हमारे यहां रुकते हैं। पहले वो जब लुधियाना जाते थे तो होटल वगैरह में रुका करते थे, मगर अब क्यों कि कुलभूषण लुधियाना में हैं तो अब वो कुलभूषण यानी हमारे यहां ही रुकते हैं। हर महीने में तीन या चार दिन का उनका प्रोग्राम बनता है। अगर कोइ खास नई आइटम बनवानी हो तो एक-दो दिन फालतू लग जाते हैं।”
“मामा जी जब भी आते हैं, घर में एक तरह से रौनक आ जाती हैं। हंसी मजाक में वक़्त का पता ही नहीं चलता। मामा जी शराब के शौक़ीन हैं – कुलभूषण भी पीता है – पंजाब के सभी लोग पीते हैं। कुलभूषण अक्सर दो या तीन पेग से ज्यादा नहीं लेता, मगर जब मामा जी हमारी यहां होते हैं तो कुलभूषण पेग नहीं गिनता और दोनों जब तक टल्ली नहीं हो जाते पीते रहते हैं।”
उन दोनों की दारूबाजी के दौरान मैं अक्सर उनके पास ही बैठे रहती हूं। मुझे मामा जी की बातों में बड़ा मजा आता है। दोनों में खूब मजाक चलते है – गंदे मजाक भी होते हैं, लेकिन मुझे अब इन मजाकों से कोई फरक नहीं पड़ता। मुझे अब मामा जी के इस तरह के मजाकों की आदत हो चुकी है – और सच पूछो तो मजा भी आता है।
एक बार कुलभूषण ने मामा जी आये हुए थे और दोनों – मामा जी और कुलभूषण बैठे ड्रिंक कर रहे थे – मैं भी वहीं बैठी हुई थी। आपस में मजाक-बाजी हो रही थी।”
“कुलभूषण ने मामा जी से पूछा, “मामा जी एक बात बताओ, एक बार मैं पापा के साथ किसी रिश्तेदार की शादी में चंडीगढ़ गया। पापा उस रिश्तेदार से काफी घुल-मिल कर बातें कर रहे थे। मैं पहली बार उस रिश्तेदार के घर गया था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि उस रिश्तेदार के मेरे साथ क्या रिश्ता बनता है? मैंने पापा से पूछा, “पापा ये अंकल के साथ मेरा क्या रिश्ता है, ये मेरे क्या लगते हैं, क्या कह कर बुलाऊं इन्हें?”
“पापा ने ऐसे ही जवाब दे दिया, “अंकल बोल दे। तेरा इनके साथ क्या रिश्ता बनता है, मुझे भी नहीं पता।”
“फिर कुलभूषण ने मामा जी जी से पूछा, “मामा जी आपके ख्याल में ऐसे मौके पर क्या करना चाहिए?”
“मामा जी ने जो जवाब दिया वो गज़ब का जवाब था।”
“मामा जी बोले, “करना क्या है कुलभूषण। जहां ये समझ ना आय कि सामने वाले का तेरे साथ क्या रिश्ता बनता है, उसे मामा बोल दे – अपनी बहन को तेरे बाप से चुदवायेगा तभी तो तेरा मामा बनेगा – जैसे मैं अपनी बहन तेरे बाप से चुदवा कर तेरा मामा बना हूं।”
“मामा जी की बात पर कुलभूषण और खुद मामा जी भी हंसने लगे। मुझे मामा जी की इस बात पर शर्म सी आ गयी, और मैं दूसरी तरफ देखने लागी।”
कुलभूषण अक्सर मामा जी की लड़की फसाऊ आदतों के बारे में बातें किया करता था। उसे मामा जी से “ये” बातें करने में मजा आता था।
“धीरे-धीरे मामा जी के साथ मैं भी खुलने लगी थी और मामा जी के सेक्सी चुटकलों और मामा जी कि इन लड़की फसाऊ आदतों के बारे में मैं भी बातें और मजाक करने लगी।”
“पीने के दौरान कुलभूषण अक्सर मामा जी की पहली बीवी शैली के बारे में मजाक करना नहीं भूलता – जैसे, “मामा जी वैसे एक बात तो है, बड़ी छोटी उम्र में पटा लिया आपने शैली मामी को, और सब कुछ कर भी लिया उनके साथ? ऐसा कैसे, मामा जी बताओ तो सही?”
“मैंने सोचा “सब कुछ” सब कुछ कर भी लिया, मतलब चोद दिया शैली को?”
“मामा जी को इन सब बातों से फर्क नहीं पड़ता था। वो भी हंसते हुए कहते, “कुलभूषण यार, मुझे नहीं जरूरत पड़ती लड़कियां पटाने-वटाने की। मेरे साथ तो एक पटी तो समझो इसके बाद लाइन लग जाती है। जल्दी ही वो अपनी सहेलियों को, अपनी भाभी को या अपनी ननद को भी मेरे पास ले आएगी।”
“ये बोल कर मामा जो हो-हो करके हंसने लगे।”
“मैँ सोच रही थी आखिर ऐसा भी क्या था मामा जी में जो मामा जी कह रहे हैं कि लड़कियां अपने आप से चली आती हैं इनके पास और साथ ही अपनी सहेलियों भाभी या ननद को भी ले आती है?”
“कुलभूषण हंसते हुए पूछता, “मगर मामा जी एक बात बताओ आपके पास ही क्यों आती थी, और भी तो होंगे?”
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