पिछला भाग पढ़े:- ट्रेन में मिली 2 अंजान बहनों की चुदास-2
हिंदी सेक्स कहानी अब आगे-
अनिता दीदी अब पूरी तरह से कामुक हो कर अपनी गांड को अच्छे से ऊपर उठा के और हिला-हिला कर मेरे लंड के धक्के अपनी प्यासी चूत में ले रही थी। रिया ये नज़ारा नज़दीक से देख कर मजे लेती हुई गर्म हो गई थी। उसने मेरा एक हाथ जो कि उसकी जांघों पर रखा था उसको पकड़ कर अपनी टी-शर्ट के अंदर डाल दिया।
मैं समझ गया कि रिया पूरी तरह से कामुक हो गई थी। तो मैं अपने एक हाथ से उसकी दोनों चूचियों को मसलने लगा और साथ में ही अनिता दीदी को धक्के मार-मार के चोद रहा था।
अनिता दीदी बिल्कुल धीमी आवाज में आह आह आह कर रही थी। मैंने अनिता दीदी की 20 मिनट तक बहुत ही मस्त चूदाई की। इस चुदाई के बीच वो 2 बार झड़ चुकी थी और में फिर भी उनको चोदे जा रहा था।
कुछ ही और देर बाद अनिता दीदी जोर-जोर से आगे-पीछे होने लगी तो मैं समझ गया कि यह तीसरी बार झड़ने वाली थी। अब मैं भी ज्यादा देर तक नहीं रुक सकता था, मेरा भी निकलने वाला था, मैं भी और जोर-जोर से धक्के मारने लगा, साथ में रिया की चूचियों को भी और तेज़-तेज़ दबने लगा। (रिया भी सिसकियां लेने लगी थी आह आआआहह)
इतने में ही अनिता दीदी ने अपना गरम रस मेरे लंड पर छोड़ दिया और झड़ गयी।
उसके गरम रस में डूबते हुए मैंने आखिरी धक्का मारा और अपने गरम रस की पिचकारी अनिता दीदी की प्यासी चूत में मारते हुए झड़ गया।
अनिता दीदी अपना पूरा दबाव मेरे लंड पर डालते हुए मेरे पूरे लंड को अपनी चूत के अंदर तक ले गई। मैं 5 मिनट ऐसे ही अनिता दीदी की चूत में लंड दबा कर खड़ा रहा। अनिता दीदी की चूत मेरे लंड के पानी की एक-एक बुंद निगल रही थी। अब हम दोनों शांत हो गए थे।
मैंने रिया की टी-शर्ट से अपना हाथ निकाल लिया और मैं अनिता दीदी की गांड सहलाते हुए अपना लंड धीरे-धीरे उसकी चूत से बाहर निकालने लगा।
जैसे ही मेरा पूरा लंड बाहर आया तो रिया ने अपने एक हाथ से पकड़ लिया। मेरा लंड पूरा तरह से गीला था। जैसे ही मेरा पूरा लंड बाहर निकला, रिया ने अपना मुंह आगे कर दिया और मेरा पूरा लंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी ऊउउआऐई उम्म्म्म उउम्म्म।
मेरे बदन में तो बिजली सी दौड़ने लगी। मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था। मैंने अपने हाथ से रिया का सिर पकड़ कर उसके मुंह में लंड आगे-पीछे करने लगा।
रिया ने मेरे लंड को अच्छी तरह से चूसा, साफ किया और फिर मेरे लंड को मेरी पैंट में डालने लगी। तो मैंने अपने हाथ से उसके हाथ को पकड़ लिया। उसके हाथ का स्पर्श मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था।
उसने मेरा हाथ से अपना हाथ छुड़ाया और अपनी सीट पर सोने का नाटक करने लगी। और फिर अनिता दीदी भी अपने कपड़े ठीक कर रही थी। अनिता दीदी ने अपने कपड़े ठीक किए और मेरी तरफ मुंह किया। फिर आगे को आ कर मुझे गले से लगाते हुए अपने एक हाथ को पेंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर रख कर बोली-
अनिता दीदी: केतन तुम्हारे लंड ने तो मेरी चूत की पूरी प्यास पूछा दी। इस मजे के लिये थैंक्यू।
इतना बोलते हुए एक लिप किस्स किया उम्ह्हाअ उम्ह्हाअ उम्ह्हाअ उम्ह्हाअ।
और फिर आपकी जगह पर खड़ी हो गई।
कुछ देर बाद अनिता दीदी बोली: केतन, अब हमारा स्टॉप आ गया है।
फिर उसने रिया को आवाज दी: उठो रिया।अपना सामान ले लो। रिया भी उठ कर खड़ी हो गई।
उसके पास 3 बैग थे। और मेरे पास सिर्फ एक ही बैग था। तो मैंने रिया के हाथ से एक बैग ले लिया। अनिता दीदी ने भी एक बैग लिया और हम ट्रेन से उतरने लगें। अंधेरे और भीड़ की वजह से उतरने में थोड़ी मुश्किल हुई, पर जैसे-तैसे हम उतर गए।
उतरने के बाद हम रेलवे स्टेशन से बाहर आये और एक छोटे से रास्ते पर गांव की तरफ चलने लगे। अनिता दीदी मेरे लंड से चुदने के बाद ठीक से चल नहीं पा रही थी। ये देख कर मुझे थोड़ी हंसी आई पर मैंने कंट्रोल किया। रिया ने भी मजे लेने के लिए अनिता दीदी से पूछा-
रिया: क्या हुआ दीदी, ऐसे क्यों चल रही हो?
अनिता दीदी (थोड़ा घबराते हुए बोली): ट्रेन से उतरते वक्त पैर में थोड़ी चोट लग गई।
रिया (हंसी रोकते हुई बोली): अच्छा ठीक है।
थोड़ी देर बाद मैंने अनिता दीदी से पूछा: इधर से कितनी दूर है गांव?
अनिता दीदी: गांव तो यहीं से शुरू हो गया पर तुमको जिस शादी में जाना है वो गांव के दूसरी तरफ है, यहां से 8-9 km दूर है।तुम एक काम करो, आज रात हमारे साथ चलो। हमारे मामा जी के यहां रुक जाओ। सुबह चले जाना। हमारे मामा जी का घर यहां से बस 5-6 मिनट की दूरी पर ही है।
मैं बोला: नहीं अनिता दीदी, मेरी वजह से आप लोगों को तकलीफ होगी, और मैं एक अंजान इंसान हूं। आपके मामा और बाकी घर वाले क्या सोचेंगे? आप रहने दीजिये, मैं कुछ कर लूंगा।
अनिता दीदी: क्या कर लोगे? इतनी रात हो गई है, कहां जाओगे? और तुम चिंता मत करो। मेरे मामा से मैं बात कर लूंगी और मुझे पता है वो भी तुमको यहीं रुकने को बोलेंगे।
इतनी बात सुन कर रिया ने अँधेरे में मेरा हाथ पकड़ के जोर से दबाते हुए कहा-
रिया: मान भी जाओ केतन। इतनी रात को हम तुम्हें ऐसे कैसे छोड़ सकते हैं?
मैंने भी ‘हां’ बोल दिया और इस तरह हम बात करते रिया के मामा के घर पहुंच गए।अंधेरा बहुत था, पर उनके घर पर लगी बड़ी-बड़ी लाइट्स में सब दिख रहा था। 2 मंजिल का बड़ा घर था। आजू-बाजू सब खेत थे। चारों ओर हरा-भरा सा लग रहा था।
अनिता दीदी में दरवाजे पर दस्तक दी। कुछ ही देर में दरवाजा खुल गया। वो सब रिया और अनिता दीदी के आने का ही इंतजार कर रहे थे। फिर अनिता दीदी ने अपने मामा से मेरे बारे में बताया और ऐसा वोला कि मैंने ट्रेन में उनकी बहुत मदद की है। यह सुन कर मुझे थोड़ी हंसी आई पर मैंने कंट्रोल किया।
अनिता दीदी ने मामा से बोला: इनको गांव के दूसरी तरफ एक शादी में जाना है। रात ज्यादा हो गई थी तो मैं इनको जहाँ ले आई।
मामा: अच्छा किया तुमने। आखिर यह हमारे गांव में एक शादी में आए है। यह इस गांव के मेहमान हुए।
इतना बोलते हुए उन्होंने मेरी तरफ देखा और बोले-
मामा: तुम आज आराम करो। कल मैं तुमको कहा जाना है वहां छुड़वा दूँगा।
मैं: जी ठीक है, थैंक्यू।
और फिर हम घर के अंदर आए मामा ने देखा कि अनिता दीदी ठीक से चल नहीं पा रही थी। तो उन्होंने पूछा-
मामा: अनिता, तुम ठीक से चल क्यूं नहीं पा रही हो, क्या हुआ?
यह सुन कर अनिता दीदी तिरछी नज़र से मेरी तरफ देखते हुए मामा से बोली-
अनिता दीदी: वो ट्रेन से उतरते वक्त थोड़ी पैर में चोट लग गई थी, इसलिए।
मामा: अच्छा ठीक है, चोट पर कुछ लगा लेना।
अनिता दीदी ने बोला “ठीक है।”
फिर मामा बोले: तुम सब फ्रेश होकर खाना खा लो। बहुत लंबे सफ़र से आये हो।
ठीक है अनिता?
अनिता दीदी: ठीक है मामा जी।
हम अंदर गए। मामा जी ने मुझे गेस्ट रूम दिखाया। सब सामान मामा जी ने कमरों में रखवा दिया। रिया भी अपने बेडरूम में चली गई फ्रेश होने के लिये।
मैं अनिता दीदी की तरफ देख कर बोला: अनिता दीदी आपकी सलवार देखो। नीचे पूरी गिली हो गई है। जल्दी बदल लो। अगर किसी ने देख लिया तो।
उसने नीचे देखा और फिर शर्माते हुए मेरी तरफ देख कर बोली-
अनिता दीदी: थैक्यू केतन। मेरा तो ध्यान ही नहीं गया।
इतना बोलते हुए वो बेडरूम की तरफ भाग के चली गई। मुझे जो रूम मामा जी ने दिया था, उसने वॉशरूम नहीं था, तो उन्होंने हॉल का वॉशरूम इस्तेमाल करने को कहा था।
मैं रूम में गया और मैंने अपने बैग में से दूसरे कपड़े निकाले और हॉल के वॉशरूम में फ्रेश होने चला गया। मैंने अपने कपड़े बदलें के लिये। जो कपड़े पहने हुए थे वो उतार दिये। मेरी चड्ढी भी गिली हो गई थी, इसलिये मैंने वो भी उतार दी। पर मैं अपने बैग में से दूसरी चड्डी लाना भूल गया था। मैंने लोअर पहना (लोअर के अंदर ने पूरा नंगा था) और ऊपर एक टी-शर्ट पहन कर मैं बाहर आया।
इसके आगे क्या हुआ, अगले पार्ट में पढ़िएगा। फीडबैक [email protected] par दीजियेगा।