पिछला भाग पढ़े:- मनाली में हनीमून सेक्स, मसाज और थ्रीसम-3
हिंदी सेक्स कहानी अब आगे-
ललिता की बातें सुन कर मेरे भीतर ईर्ष्या की कोई भावना नहीं जागी। बल्कि पलंग-तोड़ पान के असर और उस बर्फीले माहौल ने मेरे भीतर एक बिल्कुल अलग और तीव्र रोमांच पैदा कर दिया था। अपनी नवविवाहित पत्नी के मुंह से एक अन्य पुरुष के बड़े लंड की तारीफ सुनना मेरे लिए एक फैंटेसी उत्तेजना का कारण बन गया।
मैंने तुरंत ललिता का हाथ पकड़ा और हम वापस उसी स्पा पार्लर पहुंचे। वहां मैंने उस गठीले बदन के मेल मसाजर, जिसका नाम विक्रम था, से अकेले में बात की। मेरा प्रस्ताव सुन कर वह शुरुआत में थोड़ा हैरान हुआ। लेकिन फिर उसने मुस्कुराते हुए अपना पर्सनल नंबर मुझे दे दिया। मैंने उसे रात को हमारे होटल के सुइट में आने का न्योता दिया, जिसे उसने सहर्ष स्वीकार कर लिया।
होटल लौट कर हमने रात के उस विशेष अनुभव के लिए माहौल तैयार किया। कमरे की हीटिंग चालू थी, जिससे बाहर की कड़ाके की ठंड का असर अंदर बिल्कुल नहीं था। मैंने रूम सर्विस से वाइन की एक बोतल और तीन ग्लास मंगवाए। करीब साढ़े दस बजे कमरे के दरवाजे पर दस्तक हुई; विक्रम आ चुका था। वह साधारण शर्ट और जींस में था, लेकिन उसका कद्दावर शरीर साफ झलक रहा था।
शुरुआत में माहौल को थोड़ा सहज बनाने के लिए हम तीनों सोफे पर बैठ गए। मैंने रेड वाइन के ग्लास भरे और एक-एक ग्लास सब को थमाया। वाइन की चुस्कियों के साथ बात-चीत शुरू हुई। ललिता लाल गाउन में थी और वाइन के तीखे स्वाद व विक्रम की मौजूदगी के कारण उसके गालों पर पहले से ही एक नशीली लाली छा चुकी थी। धीरे-धीरे वाइन ने अपना असर दिखाना शुरू किया, हिचक की दीवारें गिरने लगी, और बात-चीत पूरी तरह से अंतरंग और अनौपचारिक हो गई।
जब वाइन की बोतल आधी हो चुकी थी, तो मैंने पहल की। मैंने विक्रम की तरफ देखा और फिर ललिता के गाउन की डोरी खोल दी। ललिता केवल अपने जालीदार ब्रा और पैंटी में थी। विक्रम ने आगे बढ़ कर ललिता को सोफे से उठाया और बड़े से किंग-साइज बेड पर ले गया। मैंने बेड के किनारे बैठ कर इस पूरे दृश्य को देखने और आनंद लेने का फैसला किया।
विक्रम ने बेड पर आते ही ललिता के होंठों को अपने नियंत्रण में ले लिया। दोनों के बीच एक लंबा और गहरा चुंबन शुरू हुआ। ललिता की सांसें तुरंत उखड़ने लगी और वह आहे भरने लगी। विक्रम की बड़ी और सख्त हथेलियां ललिता के सेक्सी बोबे हाथ में भींच लिए और कमर पर घूमने लगी।
कुछ ही मिनटों के फोरप्ले के बाद, विक्रम ने ललिता की पैंटी को अलग किया और खुद को पूरी तरह नंगा कर लिया। उसका लंड वास्तव में काफी बड़ा और तनाव में था। उसने ललिता को पीठ के बल लिटाया, उसके दोनों पैरों को फैलाया और पहली बार में ही पूरा लंड ठूस दिया।
बहुत तेज़ चीख निकली, रोने लग गई ललिता। फिर भी विक्रम को मैंने इशारा किया और उसने पूरी ताकत लगा दी। ललिता की चूत फाड़ कर रख दी। क्योंकि उसने स्पा में थोड़ा धीरे चोदा था। विक्रम ने तेज चोदते हुए गहरी लय के साथ पहला राउंड शुरू किया। कमरे में त्वचा के टकराने की आवाजें गूंजने लगीं। ललिता की हालत बुरी हो चुकी थी और जोर-जोर से चोदते हुए विक्रम बहुत देर में झड़ा और साइड में लेट गया।
थोड़ी देर बाद विक्रम के पहले राउंड के पूरा होते ही, ललिता पूरी तरह से उत्तेजना के चरम पर थी। अब मेरी बारी थी। विक्रम थोड़ा पीछे हटा और मैंने ललिता को अपनी बाहों में ले लिया। मैंने उसे बेड पर सीधा लेटने को कहा और खुद उसके ऊपर आ गया। मैंने ललिता के बूब्स को सहलाते हुए और उसके होठों को चूमते हुए अपनी स्पीड बढ़ाई।
ललिता ने अपनी टांगें मेरी कमर के चारों तरफ लपेट ली। पलंग-तोड़ पान और वाइन का मिला-जुला नशा मेरी रगों में दौड़ रहा था, जिससे मैंने पूरी ताकत के साथ लंड एक ही झटके में अंदर कर दिया। इससे ललिता को थोड़ा ही दर्द हुआ, क्योंकि वो पहले ही मेरे से बढ़ा लंड ले चुकी थी। मैंने तेज-तेज धक्के लगाने शुरू किए। यह मेरा पहला राउंड था, जिसमें ललिता लगातार सिसकारियां भरते हुए मेरा साथ दे रही थी। और थोड़ी देर बाद दोनों एक साथ झड़े और लेट गए एक-दूसरे के बगल में।
रात जैसे-जैसे परवान चढ़ रही थी, हमारा रोमांच और अधिक सेक्सी चुदाई वाला होता गया। अब हम कुछ ऐसा करने जा रहे थे जो हम दोनों के लिए बिल्कुल नया था। विक्रम ने ललिता को बेड पर घुटनों और कोहनियों के बल (डॉगी स्टाइल पोजीशन) आने को कहा। ललिता ने थके होने के बावजूद खुद को संभाला।
विक्रम ललिता के पीछे आया और उसने अपनी स्थिति संभाली, जबकि मैं ललिता के ठीक सामने बैठ गया। मैंने ललिता के चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसे अपना लंड चूसने (ब्लोजॉब) के लिए राजी किया। इसी दौरान, विक्रम ने पीछे से ललिता के चूत में लंड डाला । ललिता आगे से मेरे साथ और पीछे से विक्रम के साथ पूरी तरह व्यस्त थी।
कुछ देर इसी पोजीशन में रहने के बाद, उत्तेजना इतनी बढ़ गई कि ड्यूल पेनेट्रेशन यानि दोनों ने एक साथ चोदने का विचार बनाया। विक्रम ने अपने लंड पर अच्छी मात्रा में मसाज ऑयल लगाया और बेहद सावधानी व धीमे दबाव के साथ ललिता की गांड की तरफ बढ़ा। ललिता इस अचानक हुए हमले से चौंक उठी और उसने बेड की चादर को कस कर पकड़ लिया।
जैसे ही विक्रम ने पीछे से और मैंने आगे से चूत में एक साथ मिलन करके एक झटका दिया, ललिता के मुंह से एक लंबी, दर्द और तीव्र आनंद से भरी चीख निकली। पहली बार गांड मरवाने के कारण एक हल्का सा चीरा भी आया। गांड से ब्लड निकला, लेकिन उस चरम रोमांच के सामने वह दर्द भी जैसे पिघल गया। यह हमारा तीसरा और चौथा राउंड एक साथ चल रहा था।
गांड और चूत में जोर-जोर से चुदाई चल रही थी। ललिता की गांड फट चुकी थी और उसकी हालत बिल्कुल खराब थी और छोड़ने की रिक्वेस्ट कर रही थी। फिर उत्तेजना में आहें भी भर रही थी। उसके बाद हम झड़े एक साथ और थोड़ी देर सो गए।
रात के दो बज चुके थे, और कमरे में उत्तेजना और पसीने की भीनी खुशबू तैर रही थी। वाइन का असर पूरी तरह हावी था। हमने थोड़ी देर का रेस्ट लिया, पानी पिया और फिर से सिलसिले को आगे बढ़ाया।
पांचवे राउंड में विक्रम ने ललिता को बेड के किनारे पर लेटाया, जहां उसके पैर नीचे लटके थे, और खड़े होकर तेज गति से स्ट्रोक्स लगाए। छठे राउंड में मैंने ललिता को ‘मिशनरी पोजीशन’ में लिया, लेकिन इस बार मैंने उसके दोनों पैरों को पूरी तरह ऊपर उठा कर उसके सिर के पास टिका दिया, जिससे प्रवेश और गहरा हो गया। ललिता लगातार ‘ओह गॉड, अंशुल…’ की आवाजें निकाल रही थी।
सातवें राउंड में ललिता को ऊपर आने को कहा गया। वह विक्रम के ऊपर बैठ गई (काउगर्ल पोजीशन) और अपनी मर्जी से गति को नियंत्रित करने लगी, जबकि मैं पीछे से उसकी पीठ और कूल्हों को सहला रहा था।
आठवें राउंड: ललिता मेरे ऊपर आई और इसी पोजीशन को दोहराया, जिससे मुझे एक बार फिर चरम आनंद की प्राप्ति हुई।
सुबह के चार बजने को थे। हम तीनों पूरी तरह शारीरिक रूप से थक चुके थे, लेकिन मानसिक उत्तेजना अभी भी शांत नहीं हुई थी। विक्रम और मैंने मिल कर आखिरी के दो राउंड पूरे करने का फैसला किया।
नौवें राउंड में विक्रम ने ललिता को साइड-लाइंग (करवट लेकर लेटने वाली) पोजीशन में लिया और बेहद थका देने वाले गहरे स्ट्रोक्स दिए।
दसवें और अंतिम राउंड में मैंने ललिता को अपनी बाहों में भर कर आखिरी बार पूरी ऊर्जा के साथ संभोग किया, जब तक कि हम दोनों पूरी तरह निढाल नहीं हो गए।
पूरी रात में कुल 10 बार (5 बार मेरे द्वारा और 5 बार विक्रम द्वारा) हुए इस सेक्सी चुदाई निरंतर और भारी शारीरिक श्रम वाले सिलसिले का असर ललिता के शरीर पर साफ दिखने लगा था। जब सुबह की पहली किरण कमरे की खिड़की से अंदर आई, तो ललिता पूरी तरह बेसुध होकर बेड पर पड़ी थी। जब मैंने उसके माथे को छुआ, तो वह एक-दम गर्म था—पूरी रात की अत्यधिक उत्तेजना, थकान, वाइन के असर और उस तीखे शारीरिक खिंचाव के कारण उसे हल्का बुखार आ चुका था।
मैंने तुरंत उसके ऊपर कंबल ओढ़ा दिया और उसे पानी पिलाया। विक्रम ने हमसे हाथ मिलाया, अपना सामान समेटा और कमरे से बाहर चला गया। ललिता के चेहरे पर बुखार की तपन के बावजूद एक अजीब सी तृप्ति और संतुष्टि की मुस्कान थी। यह रात वास्तव में हमारी मनाली यात्रा की सबसे यादगार और कभी ना भूलने वाली रात बन चुकी है।