ललिता ने चौंक कर मेरी तरफ देखा, बेहद शर्माते हुए अपनी नज़रें चुराईं और फिर बेहद धीमी, कांपती हुई आवाज़ में अपनी आपबीती सुनानी शुरू की।
उसने बताया, “अंशुल, जैसे ही मैं उस बंद कमरे में गई, दिल बहुत तेजी से धड़क रहा था। कमरे में सिर्फ एक बड़ा सा बेड था और चारों तरफ मोमबत्तियों की मद्धम रोशनी थी। कुछ ही देर में वह लंबा-चौड़ा, गठीले बदन का मेल मसाजर कमरे के अंदर आया। उसने बेहद पेशेवर अंदाज में मुझसे कहा कि मैम, आप बेड पर लेट जाइए। जब मैं बेड पर लेटी, तो उसने सबसे पहले मेरे गाउन की डोरी को बेहद धीमे से खींचा और गाउन को मेरे कंधों से नीचे सरका दिया।”
ललिता ने एक गहरी सांस ली, जैसे वह उस पल को दोबारा महसूस कर रही हो, और आगे कहा, “अब मैं सिर्फ अपनी लाल जालीदार ब्रा और पैंटी में थी। उसने अपने हाथों में गुनगुना तेल लिया और सबसे पहले मेरी नंगी पीठ पर लगाया। जब उसकी सख्त और गर्म हथेलियां मेरी पीठ पर पड़ीं, तो मेरे मुंह से एक हल्की सी ‘आह’ निकल गई। उसने पीठ से शुरुआत करते हुए धीरे-धीरे अपनी उंगलियों का दबाव बढ़ाया।
वह कंधों से लेकर मेरी कमर के निचले हिस्से तक मालिश कर रहा था। उसके हाथों का प्रेशर इतना गजब का था कि मेरी पूरी थकान गायब होने लगी, लेकिन साथ ही उस पलंग-तोड़ पान के असर की वजह से मेरे भीतर एक अजीब सी बेकरारी बढ़ने लगी।”
ललिता ने अपनी उंगलियों को आपस में फंसाते हुए आगे का वाकया सुनाया, “कमरे में पूरी तरह सन्नाटा था, सिर्फ तेल की सरसराहट और मेरी भारी होती सांसों की आवाजें थी। पीठ की मालिश करने के बाद उसने मुझसे सीधे होने को कहा। जब मैं सीधी लेटी, तो उसकी नजरें मेरी दूदू के उभारों पर टिक गईं जो जालीदार ब्रा के पार साफ दिख रहे थे।
उसने बेहद कामुक तरीके से, बिना मुझसे पूछे, मेरी ब्रा के हुक को पीछे से खोल दिया और उसे अलग कर दिया। मेरे बोबे पूरी तरह उसके सामने नंगे थे। उसने तेल की कुछ बूंदें वहां गिराईं और अपनी हथेलियों से उन्हें गोल-गोल घुमाते हुए सहलाना शुरू किया। मैं उत्तेजना से कांप रही थी और मेरी आंखें खुद-ब-खुद बंद हो गई थीं।”
ललिता की आवाज अब और धीमी और मदहोश करने वाली हो गई थी, “इसके बाद उसने मेरी लाल पैंटी के इलास्टिक को पकड़ा और धीरे से उसे भी पैरों के रास्ते बाहर निकाल दिया। अब मैं उस बेड पर पूरी तरह नंगी लेटी थी। मेरी चूत से हल्का हल्का पानी बह रहा और एक-दम क्लीन सेव चूत थी मेरी उसने अपने हाथों में और तेल लिया और मेरी जांघों के अंदरूनी हिस्सों की मालिश करने लगा।
मालिश करते-करते उसकी उंगलियां जान-बूझ कर मेरी चूत के बेहद करीब से गुजर रही थी, जिससे मेरी चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी। तभी उसने मालिश रोक दी और अपना लोअर नीचे सरका दिया। उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हुआ था, जो बेहद लंबा और मोटा था।”
ललिता ने शरमाते हुए मेरे कंधे पर सिर टिकाया और फुसफुसाते हुए कहा, “उसने मुझे बेड के किनारे पर किया और खुद नीचे घुटनों के बल बैठ गया। उसने मेरी दोनों टांगों को फैलाया और अपना चेहरा सीधे मेरी जांघों के बीच ले गया। जब उसने पहली बार मेरी चूत पर अपनी गर्म जीभ फिराई, तो मैं बेड की चादर को हाथों से भींचते हुए जोर से चिल्ला उठी—’ओहह… अम्मा…’।
उसने रुकने के बजाय मेरी चूत को पूरी तरह चाटना और चूसना शुरू कर दिया। इस ओरल प्ले ने मुझे पूरी तरह पागल कर दिया था, मैं अपनी कमर ऊपर उठा-उठा कर आहें भर रही थी। इसके बाद उसने मुझे अपने लंड को चूसने का इशारा किया। मैंने भी उत्तेजना में आकर उसके उस बड़े से लंड को अपने मुंह में ले लिया और कुछ देर तक ब्लोजॉब दिया।”
कहानी के आखिरी हिस्से पर आते ही ललिता की सांसें पूरी तरह उखड़ चुकी थी। उसने मेरे कान के पास अपना मुंह लाया और बिल्कुल धीरे से कहा, “इसके बाद वह बेड पर आया और मेरे दोनों पैरों को उठा कर अपने कंधों पर रख लिया। उसने अपने लंड के टोक पर थोड़ा तेल लगाया और उसे मेरी चूत के मुहाने पर टिका दिया।
जैसे ही उसने एक गहरा झटका दिया, उसका मोटा लंड मेरी तंग चूत को फाड़ता हुआ पूरा अंदर धंस गया। उस गहरे प्रवेश से मेरे मुंह से एक तीखी चीख और लंबी ‘आह…’ निकल गई। शुरुआत में बहुत तेज खिंचाव महसूस हुआ, लेकिन फिर उसने बेहद सधे हुए और तेज स्ट्रोक्स लगाने शुरू किए।
कमरे में सिर्फ हमारे शरीरों के टकराने की और तेल की छप-छप की आवाजें गूंज रही थीं। मैं लगातार आहे भरती रही और करीब दस मिनट के उस भयानक चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ चरम आनंद पर पहुंच गए और में झड़ गई और वो भी उसका पानी कॉन्डोम में था।”
टैक्सी होटल के गेट पर रुक चुकी थी। उतरने से पहले ललिता ने मेरी आंखों में देखा, उसके चेहरे पर अब घबराहट की जगह एक अलग ही नशा था, और उसने धीरे से मेरे कान में दोबारा कहा, “सच कहूं अंशुल, उसका लंड आपसे काफी ज्यादा बड़ा और मोटा था, जिसने मुझे अंदर तक हिला कर रख दिया।”
इसके आगे की कहानी अगले पार्ट में।