मनाली में हनीमून सेक्स, मसाज और थ्रीसम-3

पिछला भाग पढ़े:- मनाली में हनीमून सेक्स, मसाज और थ्रीसम-2

हिंदी-चुदाई कहानी अब आगे-

मसाज पूरी होने के बाद जब मैं पूरी तरह तरो-ताजा और एक अजीब से रोमांच से भरा हुआ अपने कमरे से बाहर आया। तो मैंने देखा कि ललिता भी अपने कॉटेज का दरवाजा खोल कर ठीक उसी वक्त बाहर आ रही थी। कॉरिडोर की मद्धम रोशनी में भी उसका चेहरा साफ तौर पर बदला हुआ लग रहा था। उसके गोरे गालों पर गहरी लाली छाई हुई थी। बाल हल्के से बिखरे हुए थे और उसकी आंखों में एक अजीब सी घबराहट और संकोच साफ झलक रहा था। वह रह-रह कर अपने गाउन के कोनों को उंगलियों से मरोड़ रही थी।

पार्लर का बिल चुकाने के बाद जब हम बाहर निकले और होटल वापस लौटने के लिए टैक्सी में बैठे, तो सन्नाटा और गहरा हो गया। ललिता खिड़की से बाहर पहाड़ों की तरफ देख रही थी, लेकिन उसकी सांसों की रफ्तार तेज थी। मुझसे अब और रहा नहीं गया। मैंने उसका हाथ अपने हाथ में लिया, जो इस ठंडे मौसम में भी एक-दम गर्म और पसीने से गीला था, और उत्सुकता से पूछा, “ललिता, तुम्हारे कमरे में क्या-क्या हुआ? उस मेल मसाजर ने कैसे मालिश की? सब सच-सच बताओ।”